कल्पना कीजिए… कड़ाके की ठंड, भोर का धुंधलका, और गंगा-यमुना-सरस्वती के पवित्र संगम तट पर गूँजते ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष। यह केवल एक धार्मिक दृश्य नहीं है, बल्कि करोड़ों भारतीयों की अटूट आस्था का जीवंत महाकुंभ है। माघ पूर्णिमा – जिसे माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है हिन्दू कैलेंडर के सबसे पवित्र दिनों में से एक है।
यह दिन प्रयागराज में एक महीने से चल रहे कठिन ‘कल्पवास’ की पूर्णाहुति का साक्षी बनता है। आखिर क्यों इस दिन संगम पर पैर रखने की जगह नहीं बचती? क्या है इस ‘महासंयोग’ के पीछे का विज्ञान और अध्यात्म? आइए विस्तार से जानते हैं।
माघ पूर्णिमा – देवताओं के धरती पर आगमन का दिन
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन स्वयं भगवान विष्णु गंगा जल में निवास करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर स्वर्ग लोक से देवतागण रूप बदलकर संगम की रेती पर स्नान करने आते हैं।
- पुण्य का योग – ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, जब चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ उदित होता है और सूर्य मकर राशि से कुंभ राशि की ओर अग्रसर होता है, तब जल में विशेष ऊर्जा का संचार होता है।
- अमृत की बूंदें – माना जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत की बूंदें प्रयाग में गिरी थीं, उनकी सक्रियता माघ पूर्णिमा के दिन अपने चरम पर होती है।
कल्पवास की पूर्णाहुति – आत्मा के शुद्धिकरण का संकल्प
प्रयागराज के माघ मेले में लाखों श्रद्धालु एक महीने तक रेतीले तट पर झोपड़ियों में रहकर ‘कल्पवास’ करते हैं। यह एक प्रकार की आध्यात्मिक ‘डिटॉक्स’ (Detox) प्रक्रिया है।
- सादगी का जीवन – कल्पवासी दिन में एक बार भोजन करते हैं, जमीन पर सोते हैं और त्रिकाल स्नान (तीन बार स्नान) करते हैं।
- पूर्णाहुति का महत्व – माघ पूर्णिमा कल्पवास का आखिरी दिन होता है। एक महीने के कठिन संयम के बाद जब कल्पवासी अपना व्रत पूर्ण करते हैं, तो माना जाता है कि उनके जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और वे एक नई ऊर्जा के साथ समाज में लौटते हैं।
संगम पर क्यों उमड़ती है भारी भीड़? (The Magnetism of Sangam)
प्रयागराज संगम पर माघ पूर्णिमा के दिन दिखने वाला जनसैलाब दुनिया के आश्चर्यों में से एक है। इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण हैं:
- पूर्वजों का तर्पण – इस दिन पितरों (Ancestors) के निमित्त किया गया तर्पण सीधे उन्हें तृप्ति प्रदान करता है। लोग अपने वंश की सुख-शांति के लिए संगम तट पर पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं।
- दान का अमोघ फल – शास्त्रों में कहा गया है कि माघ पूर्णिमा पर किया गया दान ‘अक्षय’ होता है (जिसका पुण्य कभी खत्म नहीं होता)। इस दिन तिल, गुड़, घी, कंबल और विशेष रूप से ‘स्वर्ण’ के दान का अत्यधिक महत्व है।
- ग्रहों का महासंयोग – 2026 में माघ पूर्णिमा पर बन रहे विशेष योग (जैसे गजकेसरी या लक्ष्मी योग) उन लोगों के लिए वरदान हैं जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है या जो मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।
माघ पूर्णिमा पूजन विधि और शुभ मुहूर्त
यदि आप संगम तट पर नहीं जा सकते, तो घर पर भी इस पुण्य को प्राप्त कर सकते हैं:
- स्नान के जल में थोड़ा सा गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें।
- इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की कथा सुनना या पढ़ना विशेष फलदायी है।
- रात के समय चंद्रमा को दूध और जल का अर्घ्य दें। इससे मानसिक शांति और आर्थिक समृद्धि मिलती है।
- शाम के समय किसी पवित्र नदी या मंदिर में दीपदान अवश्य करें।
- माघ पूर्णिमा पर क्या करें और क्या न करें?
क्या करें (Do’s)
- पवित्र नदी में स्नान या गंगाजल युक्त जल से स्नान।
- ब्राह्मणों और गरीबों को अन्न व वस्त्र दान।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप।
- तुलसी के पौधे में दीपक जलाना।
क्या न करें (Don’ts)
- तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस) का सेवन।
- किसी का अपमान या वाद-विवाद।
- देर तक सोना (सूर्योदय के बाद तक)।
- पेड़-पौधों को काटना या क्षति पहुँचाना।
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