माँ नर्मदा की आरती (Narmada Aarti PDF) का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। माँ नर्मदा, जिन्हें “रेवा” के नाम से भी जाना जाता है, भारत की पवित्रतम नदियों में से एक हैं। उनकी आरती का गान करने से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है। शाम के समय घाटों पर होने वाली आरती का दृश्य अत्यंत मनमोहक और भक्तिपूर्ण होता है।
यदि आप माँ नर्मदा की स्तुति नियमित रूप से करना चाहते हैं, तो आरती का लिखित रूप होना बहुत सहायक होता है। Narmada Aarti PDF हमारी वेबसाइट से डाउनलोड करें और माँ की भक्ति में लीन हो जाएँ। यह पीडीएफ आपको शुद्ध और स्पष्ट शब्दों में आरती उपलब्ध कराएगी, जिससे आप कहीं भी और कभी भी पूजा संपन्न कर सकते हैं। माँ नर्मदा की कृपा आप पर सदा बनी रहे।
|| श्री नर्मदा आरती (Narmada Aarti PDF) ||
ॐ जय जगदानन्दी,
मैया जय आनंद कन्दी ।
ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा
शिव हरि शंकर, रुद्रौ पालन्ती ॥
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥
देवी नारद सारद तुम वरदायक,
अभिनव पदण्डी ।
सुर नर मुनि जन सेवत,
सुर नर मुनि…
शारद पदवाचन्ती ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥
देवी धूमक वाहन राजत,
वीणा वाद्यन्ती।
झुमकत-झुमकत-झुमकत,
झननन झमकत रमती राजन्ती ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥
देवी बाजत ताल मृदंगा,
सुर मण्डल रमती ।
तोड़ीतान-तोड़ीतान-तोड़ीतान,
तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥
देवी सकल भुवन पर आप विराजत,
निशदिन आनन्दी ।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवा
शंकर तुम भट मेटन्ती ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी…॥
मैयाजी को कंचन थार विराजत,
अगर कपूर बाती ।
अमर कंठ में विराजत,
घाटन घाट बिराजत,
कोटि रतन ज्योति ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥
मैयाजी की आरती,
निशदिन पढ़ गावरि,
हो रेवा जुग-जुग नरगावे,
भजत शिवानन्द स्वामी
जपत हरि नंद स्वामी मनवांछित पावे।
ॐ जय जगदानन्दी,
मैया जय आनंद कन्दी ।
ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा
शिव हरि शंकर, रुद्रौ पालन्ती ॥
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