सिद्धिदात्री माता – नवरात्रि नवमी पर प्राप्त होती हैं अष्ट सिद्धियाँ, जानें पूजा विधि और मंत्र

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सिद्धिदात्री का अर्थ है – “सिद्धि” का अर्थ है पूर्णता जबकि “दात्री” का अर्थ है “देने वाली”। इसीलिए उन्हें माता सिद्धिदात्री के रूप में पहचाना जाता है। आश्विन नवरात्रि 22 सितम्बर 2025 से शुरू होगी और 02 अक्टूबर 2025 तक मनाई जाएगी। आश्विन नवरात्रि की अष्टमी (सिद्धिदात्री माता की पूजा) को सबसे महत्वपूर्ण दिन माना…

सिद्धिदात्री माता व्रत कथा पूजा विधि

सिद्धिदात्री माता नवदुर्गा का नवम और अंतिम स्वरूप हैं, जो भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करती हैं। माता के दाएं हाथ में चक्र और गदा, बाएं हाथ में शंख और कमल सुशोभित होते हैं। वे कमल पुष्प पर विराजमान रहती हैं और चार भुजाओं से सभी साधकों को आशीर्वाद देती हैं। सिद्धिदात्री माता…

Kushmanda Mata Aarti

Kushmanda Mata is revered as the fourth manifestation of Goddess Durga, worshipped on the fourth day of Navratri. Her name, a combination of Sanskrit words, translates to the “creator of the little cosmic egg” (the universe). According to mythology, before creation, when darkness prevailed, it was her divine, radiant smile that produced the cosmic egg,…

Katyayani Mata Aarti

Katyayani Mata is the sixth form of Goddess Durga, revered especially during the Navaratri festival. She is known as a fierce warrior goddess, created from the combined energies of the gods to destroy the tyrannical buffalo demon Mahishasura. This formidable feat earned her the title “Mahishasuramardini.” She is often depicted riding a lion, with four…

श्री स्कंदमाता आरती

श्री स्कंदमाता माँ दुर्गा का पाँचवाँ स्वरूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के पाँचवें दिन की जाती है। भगवान कार्तिकेय (स्कंद कुमार) की माता होने के कारण इन्हें यह नाम मिला है। इनका स्वरूप अत्यंत ममतामय और शुभ्र है। वे सिंह पर सवार होती हैं और इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है क्योंकि ये कमल के…

स्कंदमाता व्रत कथा और पूजा विधि

स्कंदमाता, नवदुर्गा का पाँचवां स्वरूप हैं जिन्हें भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता कहा जाता है। कथा के अनुसार, देवासुर संग्राम में जब असुर अत्यधिक बलवान हो गए, तब सभी देवताओं ने माँ पार्वती से प्रार्थना की। माता ने स्कंद कुमार को जन्म दिया जो देवताओं के सेनापति बने और असुरों का वध कर धर्म की…

ब्रह्मचारिणी माता व्रत कथा पूजा विधि

ब्रह्मचारिणी माता नवदुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं, जो तप, संयम और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। कथा के अनुसार जब महादेव को पति रूप में प्राप्त करने की इच्छा पार्वती जी ने की, तब उन्होंने ब्रह्माचारिणी का रूप धारण कर कठोर तप किया। उन्होंने वर्षों तक केवल फल-फूल और अंत में केवल हवा…

ब्रह्मचारिणी माता आरती

नवरात्रि के दूसरे दिन पूजी जाने वाली माँ ब्रह्मचारिणी (Maa Brahmacharini) माँ दुर्गा का दूसरा दिव्य स्वरूप हैं। ‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ है आचरण करने वाली। यह देवी पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत शांत हैं। उनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल है। कठोर तप और…

महागौरी माता व्रत कथा पूजा विधि

महागौरी माता नवदुर्गा का आठवां स्वरूप हैं, जिनकी उपासना से भक्त के जीवन से अज्ञान और पाप नष्ट हो जाते हैं। कथा के अनुसार, भगवान शिव को पाने के लिए पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। वर्षों तक तप कर उनका शरीर काला पड़ गया, लेकिन शिव कृपा से गंगा जल से स्नान करने पर…

हिमालयराजकृत शैलपुत्रीस्तुतिः

शैलपुत्री माता नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं, जिनकी आराधना से साधक का जीवन पवित्र और ऊर्जावान बनता है। शैलपुत्री स्तुति में भक्त मां का स्मरण करते हुए उन्हें हिमालय की कन्या, समस्त शक्ति का आधार और सच्चे भक्ति मार्ग की प्रेरणा के रूप में वंदन करते हैं। माता के चरणों में पुष्प अर्पण कर, धूप-दीप…

महागौरी माता आरती

माँ महागौरी, नवदुर्गा का आठवाँ स्वरूप हैं। इनका वर्ण (रंग) पूर्णतः गौर (श्वेत) है, जिसकी उपमा शंख, चंद्रमा और कुंद के फूल से की जाती है। कठोर तपस्या के बाद इन्हें यह अत्यंत तेजोमय और शांत स्वरूप प्राप्त हुआ। ये श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और इनका वाहन वृषभ (बैल) है। इनकी चार भुजाएँ हैं,…

ऋषिकृता कात्यायनीस्तुतिः

कात्यायनी स्तुति देवी दुर्गा के छठे स्वरूप की स्तुति है, जिसे श्रद्धा और भक्ति से गाया जाता है। इस स्तुति का पाठ करने से साधक को विवाह, संतान सुख और जीवन में हर प्रकार की सफलता की प्राप्ति होती है। कात्यायनी माता की स्तुति करने से मनोवांछित फल मिलता है और नारी जाति को विशेष…

कात्यायनी माता आरती

माँ कात्यायनी माँ दुर्गा का छठा स्वरूप हैं। इनका नाम ऋषि कात्यायन के यहाँ जन्म लेने के कारण पड़ा। ये अत्यंत तेजस्वी और क्रोधित रूप में प्रकट हुईं थीं, जिन्होंने महिषासुर का वध करके देवताओं को भयमुक्त किया। माँ कात्यायनी सिंह पर सवार हैं और इन्हें चार भुजाओं वाली देवी के रूप में पूजा जाता…

कात्यायनी माता व्रत कथा पूजा विधि

कात्यायनी माता नवदुर्गा का छठा स्वरूप मानी जाती हैं और विवाह, सौभाग्य एवं संतान सुख की प्राप्ति हेतु विशेष रूप से पूजी जाती हैं। कात्यायनी माता व्रत की पूजा विधि में प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और माता की मूर्ति या चित्र को गंगाजल से शुद्ध कर पुष्प, रोली, अक्षत व धूप-दीप अर्पित…

कन्या पूजन में वर्जित वस्तुएं- अष्टमी,नवमी पर कन्याओं को ये 5 चीजें देने से बचें, मानी जाती हैं अशुभ

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नवरात्रि के पावन अवसर पर नौ दिनों तक मां दुर्गा के व्रत रखे जाते हैं, जिनका समापन अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन के साथ किया जाता है। इस दिन श्रद्धालु नौ कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर भोजन करवाते हैं और उन्हें उपहार भेंट करते हैं। हालांकि कई बार लोग अनजाने में कुछ…

त्रिपुरसुन्दरी की आराधना कैसे बदल सकती है आपका जीवन? त्रिपुरसुन्दरी कौन हैं? जानिए लाभ, विधि और महत्व

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क्या आप अपने जीवन में एक सकारात्मक बदलाव (positive change) लाना चाहते हैं? क्या आप आंतरिक शांति, बाहरी समृद्धि और असीम शक्ति की तलाश में हैं? यदि हाँ, तो त्रिपुरसुन्दरी की आराधना आपके लिए एक दिव्य मार्ग हो सकती है। देवी त्रिपुरसुन्दरी, जिन्हें ललिता या राजराजेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है, दस महाविद्याओं…

मनसा देवी मंदिर का रहस्य – नागों की देवी क्यों कहलाती हैं माता मनसा? जानें मान्यताएँ, चमत्कार और इतिहास

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भारत अपनी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहां हर मंदिर की अपनी एक अनोखी कहानी और रहस्य है। ऐसा ही एक रहस्यमयी और चमत्कारी मंदिर है, माता मनसा देवी का। यह मंदिर भारत के कई हिस्सों में स्थित है, लेकिन हरिद्वार और पंचकूला के मनसा देवी मंदिर सबसे प्रसिद्ध हैं।…

ज्वाला देवी मंदिर का रहस्य – जहाँ बिना तेल और बाती के सदियों से जलती है अखंड ज्योति

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भारत की देवभूमि, हिमाचल प्रदेश की शांत और हरी-भरी कांगड़ा घाटी में एक ऐसा रहस्य छिपा है, जो विज्ञान को भी चुनौती देता है। यहाँ स्थित है ज्वाला देवी मंदिर, जिसे ज्वालामुखी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है इसकी अखंड ज्योति (Eternal Flame), जो बिना किसी…

नैना देवी मंदिर का रहस्य – क्या सचमुच यहां मां शक्ति के नयन गिरे थे? जानें शक्ति पीठ का इतिहास और महत्व

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भारत अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां हर कदम पर आपको एक ऐसी कहानी या रहस्य मिलेगा जो आपको हैरान कर देगा। हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बसा नैना देवी मंदिर (Naina Devi Temple) एक ऐसा ही पवित्र स्थल है, जिसके रहस्य और इतिहास की चर्चा दूर-दूर तक…

कात्यायनी माता – नवदुर्गा की छठी शक्ति, जानें पूजन विधि, मंत्र और अद्भुत महत्व

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नवरात्रि (Navratri) का छठा दिन एक विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह दिन समर्पित है नवदुर्गा (Navdurga) की छठी शक्ति, देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) को। मां कात्यायनी, ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण इस नाम से विख्यात हुईं। इन्हें प्रेम, विवाह और शक्ति की देवी माना जाता है। इनकी पूजा उन अविवाहित लड़कियों के…

नवदुर्गा की नवमी – माँ सिद्धिदात्री की कृपा से मिलती हैं 8 सिद्धियाँ, जानिए पूजन विधि, मंत्र और चमत्कारी लाभ

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नवरात्रि का नौवां दिन, जिसे नवमी कहा जाता है, आध्यात्मिक साधना का शिखर (peak) है। यह दिन माँ दुर्गा के नौवें और अंतिम स्वरूप माँ सिद्धिदात्री को समर्पित है। ‘सिद्धिदात्री’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘सिद्धि’ जिसका अर्थ है अलौकिक शक्ति और ‘दात्री’ जिसका अर्थ है देने वाली। इस तरह, माँ सिद्धिदात्री वह…

महागौरी माँ की पूजा विधि और रहस्य – कैसे पाएं अष्टमी पर उनका विशेष आशीर्वाद?

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नवरात्रि का आठवां दिन, जिसे महाष्टमी (Mahashtami) के नाम से भी जाना जाता है, माँ दुर्गा के नौ रूपों में से एक, देवी महागौरी (Maa Mahagauri) को समर्पित है। यह दिन न केवल पूजा-अर्चना का है, बल्कि अपने भीतर की बुराईयों को खत्म कर शुद्धता और पवित्रता को स्थापित करने का भी है। इस ब्लॉग…

नवरात्रि के पांचवें दिन पूजित देवी – कैसे करें मां स्कंदमाता को प्रसन्न, जानें संपूर्ण व्रत विधि और लाभ

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नवरात्रि का पावन पर्व, जो मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का उत्सव है, अपने पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है। आज का दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है। देवी दुर्गा का यह स्वरूप मातृत्व, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक है। मां स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय (Skanda) की माता के रूप में पूजा…

नवरात्रि के चौथे दिन की उपासना – माँ कूष्मांडा की पूजा विधि, मंत्र और चमत्कारी लाभ, सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

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नवरात्रि का पावन पर्व, जो नौ रातों तक चलता है, हर दिन एक नई ऊर्जा और देवी शक्ति का अनुभव कराता है। इस उत्सव के चौथे दिन हम माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप, माँ कूष्मांडा की पूजा करते हैं। कूष्मांडा, यानी ‘वह देवी जिनके उदर में ब्रह्मांड समाया हुआ है’, अपने तेज से दिशाओं को…

नवरात्रि के तीसरे दिन – मां चंद्रघंटा की पूजा, मंत्र और दिव्य स्वरूप का महत्व (Navratri Third Day – Maa Chandraghanta Puja)

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नवरात्रि का पावन पर्व, जो नौ रातों तक चलता है, हर दिन अपने साथ एक नए देवी स्वरूप का आशीर्वाद लेकर आता है। आज, नवरात्रि के तीसरे दिन, हम देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप, मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं। उनका नाम “चंद्रघंटा” दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘चंद्र’ (चाँद) और ‘घंटा’ (घंटी),…

नवरात्रि के दूसरे दिन पूजी जाने वाली ब्रह्मचारिणी माता कौन हैं? जानें पूजा विधि और महत्व (Navratri Day 2 – Maa Brahmacharini? Learn the Puja Vidhi and Significance)

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नवरात्रि, नौ दिनों का एक पवित्र पर्व (holy festival) है जो माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के लिए समर्पित है। इन नौ दिनों में से प्रत्येक दिन एक विशिष्ट देवी को समर्पित होता है, और दूसरा दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा का दिन है। यह दिन न केवल आध्यात्मिक महत्व (spiritual significance) रखता…

शैलपुत्री पूजा विधि – नवरात्रि के पहले दिन मां पार्वती के अवतार की आराधना कैसे करें? (Navratri Day 1 Shailputri Puja Vidhi)

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नवरात्रि का पर्व, जो नौ दिनों तक चलने वाला उत्सव है, मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना का प्रतीक है। यह पर्व आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दोनों रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इन नौ दिनों की शुरुआत होती है देवी शैलपुत्री की पूजा से। “शैल” का अर्थ है पर्वत और “पुत्री” का अर्थ है…

नवरात्रि व्रत और पूजा विधि – कौन-सी देवी कब पूजी जाती हैं और क्यों है हर दिन खास?

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नवरात्रि, (Navratri) यानी नौ रातों का त्योहार, भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है। यह पर्व माँ दुर्गा के नौ दिव्य रूपों की आराधना का समय है, जो हमें शक्ति, भक्ति और आध्यात्मिक जागृति का संदेश देता है। यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और ऋतु परिवर्तन के साथ मानव मन के…

श्री सम्मेद शिखर चालीसा

श्री सम्मेद शिखर चालीसा भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है। इस चालीसा में 20 तीर्थंकरों की महिमा का वर्णन है, जिन्होंने सम्मेद शिखरजी से मोक्ष प्राप्त किया था। श्री सम्मेद शिखर चालीसा का पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। || श्री सम्मेद शिखर चालीसा (Sammed Shikhar Chalisa PDF)…

विन्ध्येश्वरी चालीसा

विन्ध्येश्वरी चालीसा, माँ विंध्यवासिनी को समर्पित एक शक्तिशाली स्तुति है। यह चालीसा भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है। इसके नियमित पाठ से भक्त सभी प्रकार के भय, रोग और कष्टों से मुक्त हो जाते हैं। माँ विंध्यवासिनी की कृपा से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली…

श्री चंडी चालीसा

श्री चंडी चालीसा देवी दुर्गा को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र स्तोत्र है। इस चालीसा में 40 छंद हैं जो माता रानी की महिमा, उनके विभिन्न रूपों और उनके द्वारा किए गए चमत्कारों का गुणगान करते हैं। इसका पाठ करने से भक्तों को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे भय, रोग और बाधाओं…

ज्वाला देवी चालीसा

ज्वाला देवी चालीसा देवी ज्वाला जी को समर्पित एक भक्तिमय स्तोत्र है। यह चालीस चौपाइयों का संग्रह है, जिसमें देवी के गुणों, शक्ति और चमत्कारों का वर्णन किया गया है। चालीसा का पाठ करने से भक्तों को देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति आती है। यह चालीसा भक्तों को साहस, शक्ति…

श्री नैना देवी चालीसा

श्री नैना देवी, शक्ति की अद्वितीय प्रतिमूर्ति और मां दुर्गा के शक्तिपीठों में से एक हैं। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित श्री नैना देवी मंदिर में देवी के नेत्र स्थापित हैं, जिन्हें श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं। श्री नैना देवी चालीसा का पाठ भक्तों के जीवन से भय, दुख और नकारात्मक…

श्री तारा देवी चालीसा

श्री तारा देवी को समर्पित यह चालीसा उनके भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह चालीसा 40 छंदों का एक भक्तिमय स्तोत्र है जो देवी की महिमा और शक्ति का गुणगान करता है। नियमित रूप से इसका पाठ करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति, शक्ति और सुरक्षा मिलती है। यह चालीसा भक्तों को मां तारा…

क्या है अकाल बोधन? नवरात्र से पहले दुर्गा पूजन का आध्यात्मिक कारण

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भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में त्योहारों का एक अनूठा स्थान है। ये सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि गहरे अर्थों और सदियों पुरानी परंपराओं को संजोए हुए हैं। इन्हीं में से एक है दुर्गा पूजा, जो शक्ति की देवी दुर्गा को समर्पित है। आमतौर पर दुर्गा पूजा शारदीय नवरात्र के दौरान मनाई जाती है, लेकिन…

लोलो लागला अंबेचा​ आरती

|| लोलो लागला अंबेचा​ आरती PDF Marathi || लोलो लागला अंबेचा, भेदाभेद कैचा आला कंटाळा विषयाचा, धंदा मुळ मायेचा ।। ध्रु.।। प्रपंच खोटा हा, मृगपाणी घोरे फिरतो प्राणी। कन्या-सुत-दारा-धन माझे मिथ्या वदतो वाणी। अंती नेतील हे यमदुत। न ये संगे कोणी। निर्गुण रेणुका कुळदेवी जपतो मी निर्वाणी।। लोलो।।१।। लोलो लागला अंबेचा, भेदाभेद कैचा आला कंटाळा…

आम्ही चुकलो जरी तरी काही​ आरती

|| आम्ही चुकलो जरी तरी काही​ आरती PDF || आम्ही चुकलो जरी तरी काही। तूं चुकू नको अंबाबाई ।।धृ । तुझे नांव आनंदी साजे| तुझा महिमा त्रिभुवनी गाजे| तुझे सगुणरूप विराजे| तुला वंदिती सन्मुनि, राजे। गुण गाती वेदशास्त्रेही ।।१ ।। आम्ही चुकलो जरी तरी काही। तूं चुकू नको अंबाबाई ।।धृ । आम्ही अनाथ, दीन भिकारी।…

कापराची ज्योत अंबे ओवाळु तुजला

|| कापराची ज्योत अंबे ओवाळु तुजला ||​ कापराची ज्योत अंबे ओवाळु तुजला| भवानी ओवाळु तुजला ( देहंभावे अहंकार ) .. ( २ ) चरणी वाहीला || सप्तशतीच्या पाठे अंबे कृपा मज केली रेणुके कृपा मज केली ( भक्तावर द्या या ) -२ अंबा प्रसन्न झाली || १ || दया क्षमा शांती अंबे उजळल्या ज्योती। रेणुके…

अश्विन शुद्धपक्षी अंबा बैसली सिंहासनी हो आरती

|| अश्विन शुद्धपक्षी अंबा बैसली सिंहासनी हो आरती PDF ||​ अश्विन शुद्धपक्षी अंबा बैसली सिंहासनी हो प्रतिपदेपासून घटस्थापना ती करुनी हो मूलमंत्र – जप करुनी भोवत रक्षक ठेवुनी हो ब्रह्म विष्णू रुद्र आईचे पूजन करिती हो || १ || द्वितीयेचे दिवशी मिळती चौषष्ठ योगिनी हो सकळामध्ये श्रेष्ठ परशुरामाची जननी हो कस्तुरी मळवट भांगी शेंदूर भरुनी…

ଭଵାନୀ ଅଷ୍ଟକମ୍

|| ଭଵାନୀ ଅଷ୍ଟକମ୍ (Bhavani Ashtakam Odia PDF) || ନ ତାତୋ ନ ମାତା ନ ବଂଧୁର୍ନ ଦାତା ନ ପୁତ୍ରୋ ନ ପୁତ୍ରୀ ନ ଭୃତ୍ୟୋ ନ ଭର୍ତା ନ ଜାୟା ନ ଵିଦ୍ୟା ନ ଵୃତ୍ତିର୍ମମୈଵ ଗତିସ୍ତ୍ଵଂ ଗତିସ୍ତ୍ଵଂ ତ୍ଵମେକା ଭଵାନି ॥ ଭଵାବ୍ଧାଵପାରେ ମହାଦୁଃଖଭୀରୁ ପପାତ ପ୍ରକାମୀ ପ୍ରଲୋଭୀ ପ୍ରମତ୍ତଃ କୁସଂସାରପାଶପ୍ରବଦ୍ଧଃ ସଦାହଂ ଗତିସ୍ତ୍ଵଂ ଗତିସ୍ତ୍ଵଂ ତ୍ଵମେକା ଭଵାନି ॥ ନ ଜାନାମି ଦାନଂ ନ ଚ ଧ୍ୟାନୟୋଗଂ ନ ଜାନାମି…

ભવાની અષ્ટકમ્

|| ભવાની અષ્ટકમ્ (Bhavani Ashtakam Gujarati PDF) || ન તાતો ન માતા ન બંધુર્ન દાતા ન પુત્રો ન પુત્રી ન ભૃત્યો ન ભર્તા ન જાયા ન વિદ્યા ન વૃત્તિર્મમૈવ ગતિસ્ત્વં ગતિસ્ત્વં ત્વમેકા ભવાનિ ॥ ભવાબ્ધાવપારે મહાદુઃખભીરુ પપાત પ્રકામી પ્રલોભી પ્રમત્તઃ કુસંસારપાશપ્રબદ્ધઃ સદાહં ગતિસ્ત્વં ગતિસ્ત્વં ત્વમેકા ભવાનિ ॥ ન જાનામિ દાનં ન ચ ધ્યાનયોગં ન જાનામિ…

ਭਵਾਨੀ ਅਸ਼੍ਟਕਮ੍

|| ਭਵਾਨੀ ਅਸ਼੍ਟਕਮ੍ (Bhavani Ashtakam Punjabi PDF) || ਨ ਤਾਤੋ ਨ ਮਾਤਾ ਨ ਬਂਧੁਰ੍ਨ ਦਾਤਾ ਨ ਪੁਤ੍ਰੋ ਨ ਪੁਤ੍ਰੀ ਨ ਭ੍ਰੁਰੁਇਤ੍ਯੋ ਨ ਭਰ੍ਤਾ ਨ ਜਾਯਾ ਨ ਵਿਦ੍ਯਾ ਨ ਵ੍ਰੁਰੁਇਤ੍ਤਿਰ੍ਮਮੈਵ ਗਤਿਸ੍ਤ੍ਵਂ ਗਤਿਸ੍ਤ੍ਵਂ ਤ੍ਵਮੇਕਾ ਭਵਾਨਿ ॥ ਭਵਾਬ੍ਧਾਵਪਾਰੇ ਮਹਾਦੁਃਖਭੀਰੁ ਪਪਾਤ ਪ੍ਰਕਾਮੀ ਪ੍ਰਲੋਭੀ ਪ੍ਰਮਤ੍ਤਃ ਕੁਸਂਸਾਰਪਾਸ਼ਪ੍ਰਬਦ੍ਧਃ ਸਦਾਹਂ ਗਤਿਸ੍ਤ੍ਵਂ ਗਤਿਸ੍ਤ੍ਵਂ ਤ੍ਵਮੇਕਾ ਭਵਾਨਿ ॥ ਨ ਜਾਨਾਮਿ ਦਾਨਂ ਨ ਚ ਧ੍ਯਾਨਯੋਗਂ ਨ ਜਾਨਾਮਿ…

ಭವಾನೀ ಅಷ್ಟಕಂ

|| ಭವಾನೀ ಅಷ್ಟಕಂ (Bhavani Ashtakam Kannada PDF) || ನ ತಾತೋ ನ ಮಾತಾ ನ ಬಂಧುರ್ನ ದಾತಾ ನ ಪುತ್ರೋ ನ ಪುತ್ರೀ ನ ಭೃತ್ಯೋ ನ ಭರ್ತಾ ನ ಜಾಯಾ ನ ವಿದ್ಯಾ ನ ವೃತ್ತಿರ್ಮಮೈವ ಗತಿಸ್ತ್ವಂ ಗತಿಸ್ತ್ವಂ ತ್ವಮೇಕಾ ಭವಾನಿ ॥ ಭವಾಬ್ಧಾವಪಾರೇ ಮಹಾದುಃಖಭೀರು ಪಪಾತ ಪ್ರಕಾಮೀ ಪ್ರಲೋಭೀ ಪ್ರಮತ್ತಃ ಕುಸಂಸಾರಪಾಶಪ್ರಬದ್ಧಃ ಸದಾಹಂ ಗತಿಸ್ತ್ವಂ ಗತಿಸ್ತ್ವಂ ತ್ವಮೇಕಾ ಭವಾನಿ ॥ ನ ಜಾನಾಮಿ ದಾನಂ ನ ಚ ಧ್ಯಾನಯೋಗಂ ನ ಜಾನಾಮಿ…

देवी अपराध क्षमापन स्तोत्र हिन्दी अर्थ सहित

|| देवी अपराध क्षमापन स्तोत्र PDF || न मत्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः। न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम् ॥१॥ माँ! मैं न तो कोई मंत्र जानता हूँ, न यंत्र और न ही मुझे स्तुति का ज्ञान है….

श्री भवानी सहस्त्रनाम स्तवराजम (Shri Bhavani Sahastranam Stavarajam)

श्री भवानी सहस्त्रनाम स्तवराजम (Shri Bhavani Sahastranam Stavarajam)

श्री भवानी सहस्त्रनाम स्तवराजम PDF book देवी भवानी (मां दुर्गा) की महिमा का एक विशिष्ट ग्रंथ है, जिसे लेखक दुर्गा लाल शर्मा जी ने लिखा है। यह पुस्तक देवी के हजार नामों (सहस्त्रनाम) का संग्रह है, जो उनकी विभिन्न शक्तियों, गुणों और स्वरूपों को प्रकट करते हैं। यह ग्रंथ मां दुर्गा के भक्तों के लिए…

Saundarya Lahari PDf (सौंदर्य लहरी)

Saundarya Lahari (सौंदर्य लहरी)

सौंदर्य लहरी एक प्राचीन संस्कृत ग्रंथ है, जिसे आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है। यह ग्रंथ माँ पार्वती (शक्ति) की स्तुति में लिखा गया है और इसमें देवी के सौंदर्य, शक्ति, और कृपा का वर्णन किया गया है। “सौंदर्य लहरी” का शाब्दिक अर्थ है “सौंदर्य की लहरें,” और यह ग्रंथ वास्तव में देवी के…

श्री शांतादुर्गेची आरती

|| श्री शांतादुर्गेची आरती (Shanta Durga Aarti Marathi PDF) || भूकैलासा ऐसी ही कवला नगरी| शांतादुर्गा तेथे भक्तभवहारी| असुराते मर्दुनिया सुरवरकैवारी| स्मरती विधीहरीशंकर सुरगण अंतरी||१|| जय देवी जय देवी जय शांते जननी| दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी||धृ|| प्रबोध तुझा नव्हे विश्वाभीतरी| नेति नेति शब्दे गर्जती पै चारी| साही शास्त्रे मथिता न कळीसी निर्धारी| अष्टादश गर्जती…

ಶ್ರೀ ದೇವ್ಯಥರ್ವಶೀರ್ಷಂ

|| ಶ್ರೀ ದೇವ್ಯಥರ್ವಶೀರ್ಷಂ (Devi Atharvashirsha Kannada PDF) || ಓಂ ಸರ್ವೇ ವೈ ದೇವಾ ದೇವೀಮುಪತಸ್ಥುಃ ಕಾಸಿ ತ್ವಂ ಮಹಾದೇವೀತಿ || ೧ || ಸಾಽಬ್ರವೀದಹಂ ಬ್ರಹ್ಮಸ್ವರೂಪಿಣೀ | ಮತ್ತಃ ಪ್ರಕೃತಿಪುರುಷಾತ್ಮಕಂ ಜಗತ್ | ಶೂನ್ಯಂ ಚಾಶೂನ್ಯಂ ಚ || ೨ || ಅಹಮಾನನ್ದಾನಾನನ್ದೌ | ಅಹಂ ವಿಜ್ಞಾನಾವಿಜ್ಞಾನೇ | ಅಹಂ ಬ್ರಹ್ಮಾಬ್ರಹ್ಮಣಿ ವೇದಿತವ್ಯೇ | ಅಹಂ ಪಂಚಭೂತಾನ್ಯಪಂಚಭೂತಾನಿ | ಅಹಮಖಿಲಂ ಜಗತ್ || ೩ || ವೇದೋಽಹಮವೇದೋಽಹಮ್ | ವಿದ್ಯಾಽಹಮವಿದ್ಯಾಽಹಮ್ | ಅಜಾಽಹಮನಜಾಽಹಮ್ |…

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