काक चेष्टा, बको ध्यानं – श्लोक अर्थ सहित

|| काक चेष्टा, बको ध्यानं – श्लोक || काक चेष्टा, बको ध्यानं, स्वान निद्रा तथैव च। अल्पहारी, गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं।। हिंदी अर्थ: आइये जानें यह संस्कृत श्लोक अर्थ सहित: विद्या के लिए प्रतिबद्ध विद्यार्थी (छात्र) मे यह पांच लक्षण होने चाहिए – कौवे की तरह जानने की चेष्टा, बगुले की तरह ध्यान, कुत्ते की…

संसारकटुवृक्षस्य – श्लोक अर्थ सहित

|| संसारकटुवृक्षस्य – श्लोक || संसारकटुवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे । सुभाषितरसास्वादः सङ्गतिः सुजने जने ॥ हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: संसार के कड़वे पेड़ के दो फल होते हैं जो अमृत के समान होते हैं। एक है मधुर शब्दों का स्वाद और दूसरा सज्जन व्यक्तियों की संगति। Sansaara-katu-vrksasya dve…

श्लोकार्धेन प्रवक्ष्यामि – श्लोक अर्थ सहित

|| श्लोकार्धेन प्रवक्ष्यामि – श्लोक || श्लोकार्धेन प्रवक्ष्यामि यदुक्तं ग्रन्थकोटिभिः । परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम् ॥ हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: जो करोडो ग्रंथों में कहा है, वह मैं आधे श्लोक में कहता हूँ; दूसरों की हित करना पुण्यकारी है, दूसरों को पीड़ित करना पापकारी है। Shlokardhena pravakshyami yaduktam…

ଵାରାହୀ ସହସ୍ର ନାମାଵଳି

|| ଵାରାହୀ ସହସ୍ର ନାମାଵଳି (Varahi Sahasranamavali Odia PDF) || ଓଂ ଵାରାହ୍ୟୈ ନମଃ । ଓଂ ଵାମନ୍ୟୈ ନମଃ । ଓଂ ଵାମାୟୈ ନମଃ । ଓଂ ବଗଳାୟୈ ନମଃ । ଓଂ ଵାସଵ୍ୟୈ ନମଃ । ଓଂ ଵସଵେ ନମଃ । ଓଂ ଵୈଦେହ୍ୟୈ ନମଃ । ଓଂ ଵୀରସୁଵେ ନମଃ । ଓଂ ବାଲାୟୈ ନମଃ । ଓଂ ଵରଦାୟୈ ନମଃ । ଓଂ ଵିଷ୍ଣୁଵଲ୍ଲଭାୟୈ ନମଃ । ଓଂ ଵଂଦିତାୟୈ…

विद्या मित्रं प्रवासेषु – श्लोक अर्थ सहित

|| विद्या मित्रं प्रवासेषु – श्लोक || विद्या मित्रं प्रवासेषु, भार्या मित्रं गृहेषु च । व्याधितस्यौषधं मित्रं, धर्मो मित्रं मृतस्य च ॥ हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: ज्ञान यात्राओं में मित्र होता है, पत्नी घर में मित्र होती है। बीमार के समय औषधि मित्र होती है, और मरते समय…

Shri Garud Dev Aarti

|| Shri Garud Dev Aarti PDF || Om Jai Garuda Deva, Prabhu Jai Garuda Deva. Vishnu Vahan Sukhkari, Nij Bhaktan Seva. Om Jai Garuda Deva… Pankh Vishal Tihare, Veg Atishay Bhari. Sur-Asur Sab Kampat, Dekh Gati Tumhari. Om Jai Garuda Deva… Amrit Kumbh Laye, Devon Ko Sukh Deenha. Nagon Ka Mad Utara, Patal Mein Keenha….

श्री गरुड़ देव आरती

|| श्री गरुड़ देव आरती PDF || ॐ जय गरुड़ देवा, प्रभु जय गरुड़ देवा। विष्णु वाहन सुखकारी, निज भक्तन सेवा॥ ॐ जय गरुड़ देवा… पंख विशाल तिहारे, वेग अतिशय भारी। सुर-असुर सब कांपत, देख गति तुम्हारी॥ ॐ जय गरुड़ देवा… अमृत कुंभ लाये, देवों को सुख दीन्हा। नागों का मद उतारा, पाताल में कीन्हा॥…

काकचण्डीश्वरकल्पतंत्रम (Kaka Chandiswara Kalpatantram)

काकचण्डीश्वरकल्पतंत्रम (Kaka Chandiswara Kalpatantram)

काकचण्डीश्वरकल्पतंत्रम् Book श्री कैलाशपति पांडेय द्वारा रचित एक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है, जो तांत्रिक साधना, उपासना और तंत्र शास्त्र के गहन रहस्यों को उजागर करता है। यह पुस्तक तांत्रिक परंपरा के जटिल लेकिन प्रभावशाली पहलुओं को समझने का एक उत्कृष्ट माध्यम है। काकचण्डीश्वरकल्पतंत्रम् PDF Book की मुख्य विशेषताएँ इस ग्रंथ में काकचण्डीश्वर तंत्र की विशिष्ट परंपराओं,…

श्री बृहदारण्यकोपनिषत् (Shri Brihadaranyakoponishat)

श्री बृहदारण्यकोपनिषत् (Shri Brihadaranyakoponishat)

‘श्री बृहदारण्यकोपनिषत्’ भारतीय उपनिषद साहित्य का एक प्रमुख ग्रंथ है, जो वेदांत दर्शन के गूढ़ तत्वों और आत्मा-ब्रह्म के अद्वैत सिद्धांत को उजागर करता है। इसका हिंदी भाष्य पंडित पितांबर शास्त्री जी ने किया है, जो उपनिषद के गहन रहस्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत करने वाले एक अद्वितीय विद्वान थे। पंडित पितांबर शास्त्री भारतीय…

आरती ओवाळूं श्रीगुरु दत्तराज स्वामी

|| आरती ओवाळूं श्रीगुरु दत्तराज स्वामी PDF ||​ आरती ओवाळूं श्रीगुरु दत्तराज स्वामी ।। शरण आलो तुला देवा भक्तीने हा मी ॥ धृ. ॥ तारीं तारीं स्वामी आतं बुडतो भवडोहीं ।। अहंभाव जाळुनि माते कृपेने पाही ॥ १ ॥ शुद्धभाव देऊनि मज लावीं तव भजनीं ।। प्रपंची त्रासलो यांतुनि काढावे क्षणीं ॥ २ ॥ तवगुणलीळा…

श्री गुरु दत्तराज मूर्ती ओवाळीतो प्रेमे आरती

|| श्री गुरु दत्तराज मूर्ती ओवाळीतो प्रेमे आरती​ PDF || श्री गुरु दत्तराज मूर्ती ओवाळीतो प्रेमे आरती ॥धृ॥ ब्रम्हा विष्णू शंकराचा, असे अवतार श्री गुरुचा| कराया उद्धार जगाचा, जाहला बाळ अत्रीऋषीचा| धरीला वेष असे यतीचा, मस्तकी मुगुट शोभे जटेचा| कंठी रुद्राक्ष माळ धरुनी,हातामधे अयुधे बहुत वरूनी ,| तेणे भक्तांचे क्लेश हरूनी,त्यासी करूनी नमन| अघशमन होईल…

श्री कृष्णाची आरती (वन्दे गोपालं वन्दे गोपालं)

|| श्री कृष्णाची आरती (वन्दे गोपालं वन्दे गोपालं) || वन्दे गोपालं वन्दे गोपालं मृगमद शोभितभालं करुणा कल्लोलं।। जय देव, जय देव।। निर्गुण सगुणाकारं संह्रतभूभारं। मुरहर नंदकुमारं मुनिजन सुखकारं।। वृंदावन संचारं कौस्तुभ मणिहारं। करुणापारा वारं गोवर्धन धारं।। कुंचित कुन्तलनीलं शरदिन्दु भवदनं। मणिगण मण्डित कुण्डल शोभित श्रुतियुगलं।। विकसित पंकजनयनं विलसित भ्रूयुगलं। बिम्बाधर मतिसुंदर नासामणिलोलं। कम्बुग्रीवं कौस्तुभ मणिकंठाभरणं।…

श्री नानामहाराज आरती

|| श्री नानामहाराज आरती (Nana Maharaj Aarti Marathi) || आरती करो,नाना की करो । गुरुवर की शांती सागर की । आरती करो नाना की ।।धृ ।। ब्रम्हज्ञान का मुकुट बिराजे। अनहद बाजे सदा ही बाजे । प्रभूमाया की लीला देख के । बिगडेना शांती मन की । आरती करो,नाना की करो । गुरुवर की शांती…

श्री नृसिंह सरस्वती आरती (कृष्णा पंचगंगा संगम निजस्थान)

|| श्री नृसिंह सरस्वती आरती (कृष्णा पंचगंगा संगम निजस्थान) || कृष्णा पंचगंगा संगम निजस्थान ।। चरित्र दाउनि केले गाणगापुरि गमन ।। तेथें भक्तश्रेष्ठ त्रिविक्रमयति जाण ।। विश्वरूपें तया दिधलें दर्शन ॥ १ ॥ जय देव जय देव जय सद्‌गुरु दत्ता ।। नृसिंह सरस्वति जय विश्वंभरिता ॥ धृ. ॥ वंध्या साठी वर्षे पुत्रनीधान ।। मृत ब्राह्मण…

श्री नृसिंह आरती

|| श्री नृसिंह आरती (Nrusinha Aarti Marathi Kadkadila Stambh PDF) || कडकडिले स्तंभ गडगडिलें गगन। अवनी होत आहे कंपायमान। तडतडलीं नक्षत्रे पडताती जाण। उग्ररूपें प्रगटे तो सिंहवदन।। 1 ।। जय देव जय देव जय नरहरिराया। आरती ओवाळू महाराजवर्या । जय देव जय देव ।। एकविस स्वर्गमाळा डळमळली कैसी। ब्रह्मयाच्या वाटे अभिनव चित्तासी। चंद्रसूर्य दोनी लोपति…

श्री संत तुकाराम महाराज आरती

|| श्री संत तुकाराम महाराज आरती (प्रपंञ्चरचना सर्वहि भोगूनि त्यागिली)​ || प्रपंञ्चरचना सर्वहि भोगूनि त्यागिली । अनुतापाचे ज्वाळी देहबुद्धि हरविली ।। वैराग्याची निष्ठा प्रगटुनि दाखविली । अहंममता दवड्डुनि निजशान्ती वरिली ।। १ ।। जय जयाजी सद्गुरु तुकया दातारा तारक तू सकळांचा जिवलग सोयरा ।। धृ ।। हरिभक्तीचा महिमा विशेष वाढविला । विरक्त ज्ञानाचा ठेवा उघडुनि…

श्री सत्यनारायण महाराज आरती (काशी क्षेत्री प्रगटुनी, देसी द्विजराया)

|| श्री सत्यनारायण महाराज आरती (काशी क्षेत्री प्रगटुनी, देसी द्विजराया) || काशी क्षेत्री प्रगटुनी, देसी द्विजराया । वाजी हस्तिक आणिख, रथधन सुजताया ॥ प्रल्हादापरी त्यावरी, केली बहुमाया । अंती दिली त्यासी, धननिक निजकाया ॥१॥ जयजयदेव, सत्यनारायण देवा कलीयुगी तत्क्षणी पावुन, होसी निजसेवा ॥धृ.॥ नलगे ज्योतिष शुध्दी, शास्त्रादिक शुद्धी । व्हावी एकच बुद्धी, त्यादिन मनीवृद्धी ॥…

श्री गुरुचरित्राची आरती

|| श्री गुरुचरित्राची आरती (Shri Guru Charitra Aarti Marathi PDF) || मूर्तित्रयगुणसारं निर्गुणविस्तारं ।। षड्गुणपारावारं दुर्जनसंहारं ।। भक्तिप्रियदातारं कल्पितपरिपारं ।। मुनिजनमानसहारं निगमागमसारं ॥ १ ॥। जय देव जय देव वंदे गुरुचरितं ।। कृपया मानसदुरितं मामुद्धर त्वरितं ।। जय देव जय देव ॥ धृ. ॥ श्रीपाद श्रीवल्लभ यतिवर कृतकृत्यं ।। नरहरि भारति लीला ब्रह्मादिस्तुत्यं ।। कलिमलदाहक…

जय जय वासूदेवा जय दत्तात्रेया (श्री टेंबे स्वामी आरती)

|| जय जय वासूदेवा जय दत्तात्रेया (श्री टेंबे स्वामी आरती) PDF Marathi ||​ जय जय वासूदेवा जय दत्तात्रेया |। माणगावी जन्मुनी करिसी बहुलीला || ध्रु || टेंब्येकुळी जन्मूनी होसी बहूगुणी। अत्रीगोत्री होउनी, होसी निर्गुणी। ज्योतिर्ज्ञानी होउनी कीर्ती पसरीसी। सार्थ वेदा जाणुनी शिष्य पढवीसी || १ || जय जय वासूदेवा जय दत्तात्रेया |। माणगावी जन्मुनी करिसी…

श्री ललितापंचमीची कहाणी

|| श्री ललितापंचमीची कहाणी (Lalitapanchami Katha Marathi PDF) || आटपाट नगर होतं. तिथे एक ब्राह्मण राहायचा, त्याला दोन जुळे मुलगे होते. दुर्दैवाने, त्यांच्या लहानपणीच त्यांचे आईवडील वारले. त्यांच्या नातेवाईकांनी त्यांची सर्व संपत्ती बळकावली आणि त्या मुलांना बेघर केलं. भटकत भटकत ती मुलं एका नगरीत येऊन पोहोचली. दुपारची वेळ होती, चालून चालून ते दोघे दमले होते…

Shri Ramayan Ji Aarti

|| Shri Ramayan Ji Aarti PDF || Aarti Shri Ramayan Ji Ki । Kirti Kalit Lalit Siya Pi Ki ॥ Gavat Brahmadik Muni Narad । Valmiki Vigyan Visharad ॥ Shuk Sanakadi Shesh Aru Sarad । Barni Pavansut Kirti Niki ॥ ॥ Aarti Shri Ramayan Ji Ki..॥ Gavat Ved Puran Ashtdash । Chhahon Shastra Sab Granthan…

Shri Navagraha Kavacham

|| Shri Navagraha Kavacham PDF || । Brahmovaacha । Shiro me paatu maartaando Kapaalam rohiniipatih Mukhamangarakah paatu Kanthashcha shashinandanah Buddhim jiivah sadaa paatu Hridayam bhrgunandanah Jatharashcha shanih paatu Jihvam me ditinandanah Paadau ketuh sadaa paatu Vaaraah sarvaangameva cha Tithayo’shtau dishah paantu Nakshatraani vapuh sadaa Amshau raashih sadaa paatu Yogaashcha sthairyameva cha Guhyam lingam sadaa paantu…

सत्यं ब्रूयात प्रियं ब्रूयात् – श्लोक अर्थ सहित

|| सत्यं ब्रूयात प्रियं ब्रूयात् – श्लोक || सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम् प्रियं च नानृतम् ब्रूयात् एष धर्मः सनातन: हिंदी अर्थ: आइये जानें यह संस्कृत श्लोक अर्थ सहित: सत्य बोलें, प्रिय बातें बोलें, पर अप्रिय सत्य नहीं बोलें। प्रिय असत्य भी न बोलें, यही सनातन धर्म है। यह श्लोक मानवीय संवाद…

आलस्यं हि मनुष्याणां – श्लोक अर्थ सहित

|| आलस्यं हि मनुष्याणां – श्लोक || आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।। हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: मनुष्यों के लिए आलस्य उनके शरीर में बसा महान शत्रु है। उद्यमी व्यक्ति के लिए परिश्रम जैसा कोई मित्र नहीं होता, क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी…

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय – श्लोक अर्थ सहित

|| वासांसि जीर्णानि यथा विहाय – श्लोक || वासांसि जीर्णानि यथा विहाय, नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णा – न्यन्यानि संयाति नवानि देही।। हिंदी अर्थ: यह श्लोक संसारिक अनुभवों को व्यक्त करने के लिए है और इसका मतलब है कि: जैसे कोई व्यक्ति पुराने और प्रयुक्त वस्त्रों को छोड़कर नए वस्त्र पहनता है, उसी…

येषां न विद्या – श्लोक अर्थ सहित

|| येषां न विद्या – श्लोक || येषां न विद्या न तपो न दानं ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः | ते मर्त्यलोके भुवि भारभूता मनुष्यरूपेण मृगश्चरन्ति || हिंदी अर्थ: आइये जानें यह संस्कृत श्लोक अर्थ सहित: जिनके पास न विद्या है, न तप, न दान, न ज्ञान, न शील, न गुण, और न…

मूर्खशिष्योपदेशेन – श्लोक अर्थ सहित

|| मूर्ख शिष्योपदेशेन – श्लोक || मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च। दुःखितैः सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति॥ हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: मूर्ख शिष्य के उपदेश देने से और दुष्ट स्त्री के साथ रहने से, संकटपूर्ण परिस्थितियों के कारण पंडित भी दुःखित हो जाता है। Murkha-sishyopadesena dushtastribharanena cha, duhkhitah samprayogena pandito pyavasidati. English Meaning:…

दारिद्रय रोग दुःखानि – श्लोक अर्थ सहित

|| दारिद्रय रोग दुःखानि – श्लोक || दारिद्रय रोग दुःखानि बंधन व्यसनानि च। आत्मापराध वृक्षस्य फलान्येतानि देहिनाम्।। हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: दारिद्र्य, रोग, दुख, बंधन और व्यसन व्यक्ति द्वारा किये गए पाप रूपी वृक्ष के फल अर्थात परिणाम होते हैं। इन फलों का उपभोग मनुष्य को करना ही…

धर्मज्ञो धर्मकर्ता च – श्लोक अर्थ सहित

|| धर्मज्ञो धर्मकर्ता च – श्लोक || धर्मज्ञो धर्मकर्ता च सदा धर्मपरायणः। तत्त्वेभ्यः सर्व शास्त्रार्थादेशको गुरुरुच्यते॥ हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: जो धर्म को जानने वाला है, उसे धर्म का पालन करने वाला, और सदैव धर्मपरायण है। जो सभी शास्त्रों के अर्थ को समझकर उनका उपदेश करता है, वह…

कर्मफल-यदाचरित – श्लोक अर्थ सहित

|| कर्मफल-यदाचरित – श्लोक || कर्मफल-यदाचरित कल्याणि ! शुभं वा यदि वाऽशुभम् । तदेव लभते भद्रे! कर्त्ता कर्मजमात्मनः ॥ हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: मनुष्य जैसा भी कर्म करता है, वह चाहे अच्छा या बुरा हो, उसे वैसा ही फल मिलता है । कर्त्ता को अपने कर्म का फल…

श्री चित्रगुप्त स्तुति

॥ चित्रगुप्त स्तुति PDF ॥ जय चित्रगुप्त यमेश तव, शरणागतम् शरणागतम् । जय पूज्यपद पद्मेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥ जय देव देव दयानिधे, जय दीनबन्धु कृपानिधे । कर्मेश जय धर्मेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥ जय चित्र अवतारी प्रभो, जय लेखनीधारी विभो । जय श्यामतम, चित्रेश तव, शरणागतम् शरणागतम् ॥ पुर्वज व भगवत अंश जय, कास्यथ…

श्रीमीनाक्षी पञ्चदशी स्तोत्रम्

|| मीनाक्षी पञ्चदशी स्तोत्रम् PDF || ॐ क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं स क ल ह्रीं श्रीं । कस्मात्पर्वतराजराजतनये त्वत्पादपद्मे न तं दीनं मां समुपेक्षसे मम दृशोः भानं कुतो लुप्यते । को वा त्वत्च्चरणारविन्दभजनं कुर्वन् कृती भूतले दारिद्र्यं लभते कथं च जननी दृष्ट्या विहीनो भवेत् ॥ एवं पाण्ड्यनृपात्मजेति भुवने…

कावेरी स्तोत्रम्

|| कावेरी स्तोत्रम् PDF || श्रीपराशरभट्टाचार्यकृते श्रीरङ्गराजस्तोत्रे कावेरीमाहात्म्यसम्बन्धे स्पष्टीकृतानि कानिचित् श्लोकानि ॥ दुग्धाब्धिर्जनको जनन्यहमियं श्रीरेव पुत्री वरः श्रीरङ्गेश्वर एतदर्हमिह किं कुर्यामितीवाकुला । चञ्चच्चामरचन्द्रचन्दन= महामाणिक्यमुक्तोत्करान् कावेरीलहरीकरैर्विदधती पर्येति सा सेव्यताम् ॥ अगणितगुणावद्यं सर्वं स्थिररत्नसमप्रतिक्रिया- मपि पयःपुरैराप्याययन्त्यनु जाग्रति । प्रवहति जगद्धात्री भूत्वैव रङ्ग्पतेर्दया शिशिर मधुरागाधा सा नः पुनातु मरुद्वृधा ॥ तरलतनुतरङ्गैर्मन्दमान्दोलिमान- स्वतटविटपिराजी मञ्जरी सुप्तभृङ्गा । क्षिपतु कनकनाम्नी निम्नगा…

श्रीसरयू अष्टकम्

|| श्रीसरयू अष्टकम् PDF || चक्रवर्तीदशरथ उवाच । नमस्ते सरयू देवि वसिष्ठ तनये शुभे । ब्रह्मादि सकलैर्देवैरृषिभिर्नारदादिभिः ॥ सदा त्वं सेविता देवि तथा सुकृतिभिर्नरैः । मानसाच्च समायाते जगतां पाप हारिणि ॥ स्मरतां पश्यतां देवि पापनाशे पटीयसि । ये पिबन्ति जलं देवि त्वदीयं गतमत्सराः ॥ स्तनपानं न ते मातुः करिष्यन्ति कदाचन । मनु प्रभृतिभिर्मान्यैमानितासि सदा शुभे…

ఋణవిమోచన అంగారక స్తోత్రం

|| ఋణవిమోచన అంగారక స్తోత్రం (Runa Vimochana Angaraka Stotram Telugu PDF) || స్కంద ఉవాచః ఋణగ్రస్తనరాణాం తు ఋణముక్తిః కథం భవేత్ బ్రహ్మోవాచః వక్ష్యే హం సర్వ లోకానాం – హితార్థం హితకామదం శ్రీ మదంగారక స్తోత్రమహామంత్రస్య – గౌతమ ఋషిః – అనుష్ఠుప్ ఛందః అంగారకో దేవతా మమ ఋణవిమోచనార్థే జపే వినియోగః ధ్యానం రక్తమాల్యాంబరధరః – శూలశక్తిగదాధరః చతుర్భుజో మేషగతో – వరదశ్చ ధరాసుతః మంగళో భూమిపుత్రశ్చ – ఋణహర్తా ధనప్రదః…

వారాహి స్తుతి

|| వారాహి స్తుతి (Varahi Stuti Telugu PDF) || ధ్యానం: కృష్ణ వర్ణాం తు వారాహీం మహిషస్తాం మహోదరీమ్ వరదాం దండినీం ఖడ్గం బిభ్రతీమ్ దక్షిణే కరే ఖేట పాత్రా2భయాన వామే సూకరాస్యాం భజామ్యహం స్తుతి: నమోస్తు దేవి వారాహి జయైకార స్వరూపిణి జపిత్వా భూమిరూపేణ నమో భగవతః ప్రియే || జయక్రోడాస్తు వారాహి దేవిత్వాంచ నామామ్యహం జయవారాహి విశ్వేశి ముఖ్య వారాహితే నమః || ముఖ్య వారాహి వందేత్వాం అంధే అంధినితే నమః సర్వ…

ತೋತ್ಕಾಷ್ಟಕಮ್

|| ತೋಟಕಾಷ್ಟಕಂ (Totakashtakam Kannada PDF) || ವಿದಿತಾಖಿಲಶಾಸ್ತ್ರಸುಧಾಜಲಧೇ ಮಹಿತೋಪನಿಷತ್ ಕಥಿತಾರ್ಥನಿಧೇ | ಹೃದಯೇ ಕಲಯೇ ವಿಮಲಂ ಚರಣಂ ಭವ ಶಂಕರ ದೇಶಿಕ ಮೇ ಶರಣಮ್ || ಕರುಣಾವರುಣಾಲಯ ಪಾಲಯ ಮಾಂ ಭವಸಾಗರದುಃಖವಿದೂನಹೃದಮ್ | ರಚಯಾಖಿಲದರ್ಶನತತ್ತ್ವವಿದಂ ಭವ ಶಂಕರ ದೇಶಿಕ ಮೇ ಶರಣಮ್ || ಭವತಾ ಜನತಾ ಸುಹಿತಾ ಭವಿತಾ ನಿಜಬೋಧವಿಚಾರಣ ಚಾರುಮತೇ | ಕಲಯೇಶ್ವರಜೀವವಿವೇಕವಿದಂ ಭವ ಶಂಕರ ದೇಶಿಕ ಮೇ ಶರಣಮ್ || ಭವ ಏವ ಭವಾನಿತಿ ಮೇ ನಿತರಾಂ ಸಮಜಾಯತ ಚೇತಸಿ ಕೌತುಕಿತಾ |…

ષણ્મુખ પંચરત્ન સ્તુતિ

|| ષણ્મુખ પંચરત્ન સ્તુતિ (Shanmukha Pancharatna Stuti Gujarati PDF) || સ્ફુરદ્વિદ્યુદ્વલ્લીવલયિતમગોત્સંગવસતિં ભવાપ્પિત્તપ્લુષ્ટાનમિતકરુણાજીવનવશાત્ । અવંતં ભક્તાનામુદયકરમંભોધર ઇતિ પ્રમોદાદાવાસં વ્યતનુત મયૂરોઽસ્ય સવિધે ॥ સુબ્રહ્મણ્યો યો ભવેજ્જ્ઞાનશક્ત્યા સિદ્ધં તસ્મિંદેવસેનાપતિત્વમ્ । ઇત્થં શક્તિં દેવસેનાપતિત્વં સુબ્રહ્મણ્યો બિભ્રદેષ વ્યનક્તિ ॥ પક્ષોઽનિર્વચનીયો દક્ષિણ ઇતિ ધિયમશેષજનતાયાઃ । જનયતિ બર્હી દક્ષિણનિર્વચનાયોગ્યપક્ષયુક્તોઽયમ્ ॥ યઃ પક્ષમનિર્વચનં યાતિ સમવલંબ્ય દૃશ્યતે તેન । બ્રહ્મ પરાત્પરમમલં સુબ્રહ્મણ્યાભિધં પરં જ્યોતિઃ…

श्रीसभापतिस्तोत्रम्

|| श्री सभापति स्तोत्रम् PDF || ॐ श्रीगणेशाय नमः । यत्कारुण्यकटाक्षवीक्षणमहो जन्मादिदुःखापहं यत्पादाम्बुजसेवनं तनुभृतां स्वात्मावबोधाङ्कुरं यन्नामस्मरणं कृतान्तपरिहृत् संसारिणां तारकं तं वन्दे गिरिजासहायममलं श्रीचित्सभानायकम् ॥ १॥ लोकानाहूय सर्वान् डमरुकनिनदैर्घोरसंसारमग्नान् दत्त्वाभीतिं दयालुः प्रणतभयहरं कुञ्चितं पादपद्मम् । उद्धृत्येदं विमुक्तेरयनमिति कराद् दर्शयन् प्रत्ययार्थं बिभ्रद् वह्निं समायां कलयति नटनं यः स पायाच्छिवो नः ॥ २॥ न परं पुरमस्ति पौण्डरीकाच्छिव- गङ्गासदृशी…

জগন্নাথ অষ্টকম

|| জগন্নাথ অষ্টকম (Jagannatha Ashtakam Bengali PDF) || কদাচিত্ কালিংদী তটবিপিন সংগীতকরবো মুদাভীরী নারীবদন কমলাস্বাদমধুপঃ রমা শংভু ব্রহ্মামরপতি গণেশার্চিত পদো জগন্নাথঃ স্বামী নযনপথগামী ভবতু মে ॥ ভুজে সব্যে বেণুং শিরসি শিখিপিংছং কটিতটে দুকূলং নেত্রাংতে সহচরকটাক্ষং বিদধতে সদা শ্রীমদ্বৃংদাবনবসতি লীলাপরিচযো জগন্নাথঃ স্বামী নযন পথগামী ভবতু নে ॥ মহাংভোধেস্তীরে কনকরুচিরে নীলশিখরে বসন্ প্রাসাদাংতস্সহজ বলভদ্রেণ বলিনা সুভদ্রা মধ্যস্থস্সকলসুর…

పంచాయుధ స్తోత్రం

|| శ్రీ పంచాయుధ స్తోత్రం (Panchayudha Stotram Telugu PDF) || స్ఫురత్సహస్రారశిఖాతితీవ్రం సుదర్శనం భాస్కరకోటితుల్యమ్ । సురద్విషాం ప్రాణవినాశి విష్ణోః చక్రం సదాఽహం శరణం ప్రపద్యే ॥ విష్ణోర్ముఖోత్థానిలపూరితస్య యస్య ధ్వనిర్దానవదర్పహంతా । తం పాంచజన్యం శశికోటిశుభ్రం శంఖం సదాఽహం శరణం ప్రపద్యే ॥ హిరణ్మయీం మేరుసమానసారాం కౌమోదకీం దైత్యకులైకహంత్రీమ్ । వైకుంఠవామాగ్రకరాగ్రమృష్టాం గదాం సదాఽహం శరణం ప్రపద్యే ॥ యజ్జ్యానినాదశ్రవణాత్సురాణాం చేతాంసి నిర్ముక్తభయాని సద్యః । భవంతి దైత్యాశనిబాణవర్షైః శారంగం సదాఽహం శరణం ప్రపద్యే…

વારાહી સહસ્ર નામાવળિ

|| વારાહી સહસ્ર નામાવળિ (Varahi Sahasra Namavali Gujarati PDF) || ॥ ઓં ઐં ગ્લૌં ઐમ્ ॥ ઓં વારાહ્યૈ નમઃ । ઓં વામન્યૈ નમઃ । ઓં વામાયૈ નમઃ । ઓં બગળાયૈ નમઃ । ઓં વાસવ્યૈ નમઃ । ઓં વસવે નમઃ । ઓં વૈદેહ્યૈ નમઃ । ઓં વીરસુવે નમઃ । ઓં બાલાયૈ નમઃ । ઓં વરદાયૈ નમઃ…

ఇస్తా కామేశ్వరి స్తోత్రం

|| ఇస్తా కామేశ్వరి స్తోత్రం (Ista Kameswari Stotram Telugu PDF) || శ్రీమాత్రే నమఃశ్రీమత్కామేశ్వర ప్రేమభూషణం శుభ పోషణాం శ్రీమత్రీం భాగ్య సౌభాగ్య దాత్రీం కామేశ్వరీం భజే హరిద్రా కుంకుమ శ్రీ మద్వస్త్రాలంకార శోభితాం జననీం జగతాం దేవీం శుభ కామేశ్వరీం భజే ఉద్యద్భానుతనూ శోభాం అరుణాంబర భాసురాం రత్న సింహాసనాసీనాం భాగ్య కామేశ్వరీం భజే పాశాంకుశధరాం ఇక్షుశరాస శరధారిణీం దౌర్భాగ్య నాశినీం భోగభాగ్య కామేశ్వరీం భజే జగత్కుటుంబినీం ధన్యాం కారుణ్యాన్యామృత వర్షిణీం దరస్మేరాసనాం నిత్యం…

షష్టి దేవి స్తోత్రం

|| షష్టి దేవి స్తోత్ర (Sashti Devi Stotram Telugu PDF) || ధ్యానం : శ్రీమన్మాతరం అంబికాం విధి మనోజాతాం సదాభీష్టదాం స్కందేష్టాం చ జగత్ప్రసూం విజయాదాం సత్పుత్ర సౌభాగ్యదాం సద్రత్నా భరణాన్వితాం సకరుణాం శుభ్రాం శుభాం సుప్రభాం షస్టాంశాం ప్రకృతేః పరం భగవతీం శ్రీ దేవసేనాం భజే షస్టాంశాం ప్రకృతేః శుద్ధాం సుప్రతిష్టాం చ సువ్రతాం సుపుత్రదాం చ శుభదాం దయారూపాం జగత్ప్రసూం శ్వేత చంపక వర్ణాభాం రక్తభూషణ భూషితాం పవిత్రరూపాం పరమం దేవసేనాం…

श्री गायत्री कवच

|| गायत्री कवचम्‌ PDF || विनियोग अस्य श्री गायत्रीकवचस्तोत्रमन्त्रस्य ब्रह्म-विष्णु-महेश्वरा ऋषय;, ऋग,-यजुः-सामा-ऽथर्वाणि छन्दांसि, परब्रह्मस्व-रूपिणी गायत्री देवता तद्बीजम्‌, भर्गः शक्तिः, धियः कीलकम्‌, मोक्षार्थे जपे विनियोगः । न्यास ॐ तत्सवितुर्ब्रह्मात्मने हृदयाय नमः, ॐ वरेण्यं विष्णवात्मने शिरसे स्वाहा, ॐ भर्गोदेवस्य रुद्रात्मने शिखायै वषट्, ॐ धीमहि ईश्वरात्मने कवचाय हुम्‌ ॐ धियो यो नः सदाशिवात्मने नेत्रत्रयाय वौषट्, ॐ प्रचोदयात्‌ परब्रह्मतत्त्वात्मने…

गायत्री अष्टॊत्तर शतनामावली

|| गायत्री अष्टॊत्तर शतनामावली PDF || ૐ श्री गायत्र्यै नमः ॥ ૐ जगन्मात्र्यै नमः ॥ ૐ परब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः ॥ ૐ परमार्थप्रदायै नमः ॥ ૐ जप्यायै नमः ॥ ૐ ब्रह्मतॆजॊविवर्धिन्यै नमः ॥ ૐ ब्रह्मास्त्ररूपिण्यै नमः ॥ ૐ भव्यायै नमः ॥ ૐ त्रिकालध्यॆयरूपिण्यै नमः ॥ ૐ त्रिमूर्तिरूपायै नमः ॥ १० ॥ ૐ सर्वज्ञायै नमः ॥ ૐ वॆदमात्रॆ…

ஶ்ரீ ஸுதர்ஶன அஷ்டகம்

|| ஶ்ரீ ஸுதர்ஶன அஷ்டகம் (Sudarshana Ashtakam Tamil PDF) || ப்ரதிப⁴டஶ்ரேணிபீ⁴ஷண வரகு³ணஸ்தோமபூ⁴ஷண ஜநிப⁴யஸ்தா²நதாரண ஜக³த³வஸ்தா²நகாரண । நிகி²லது³ஷ்கர்மகர்ஶந நிக³மஸத்³த⁴ர்மத³ர்ஶந ஜய ஜய ஶ்ரீஸுத³ர்ஶந ஜய ஜய ஶ்ரீஸுத³ர்ஶந ॥ 1 ॥ ஶுப⁴ஜக³த்³ரூபமண்ட³ந ஸுரஜநத்ராஸக²ண்ட³ந ஶதமக²ப்³ரஹ்மவந்தி³த ஶதபத²ப்³ரஹ்மநந்தி³த । ப்ரதி²தவித்³வத்ஸபக்ஷித ப⁴ஜத³ஹிர்பு³த்⁴ந்யலக்ஷித ஜய ஜய ஶ்ரீஸுத³ர்ஶந ஜய ஜய ஶ்ரீஸுத³ர்ஶந ॥ 2 ॥ நிஜபத³ப்ரீதஸத்³க³ண நிருபதி²ஸ்பீ²தஷட்³கு³ண நிக³மநிர்வ்யூட⁴வைப⁴வ நிஜபரவ்யூஹவைப⁴வ । ஹரிஹயத்³வேஷிதா³ரண ஹரபுரப்லோஷகாரண ஜய ஜய ஶ்ரீஸுத³ர்ஶந ஜய ஜய ஶ்ரீஸுத³ர்ஶந ॥…

శాంతి స్తోత్రం

|| శాంతి స్తోత్రం (Shanti Stotram Telugu PDF) || నశ్యంతు ప్రేతకూష్మాండా నశ్యంతు దూషకా నరాః . సాధకానాం శివాః సంతు స్వామ్నాయపరిపాలనం .. నందంతు మాతరః సర్వా జయంతు యోగినీగణాః . జయంతు సిద్ధా డాకిన్యో జయంతు గురూశక్తయః .. నందంతు హ్యణిమాద్యాశ్చ నందంతు గుహ్యకాదయః . నందంతు భైరవాః సర్వే సిద్ధవిద్యాధరాదయః .. యే చామ్నాయవిశుద్ధాశ్చ మంత్రిణః శుద్ధబుద్ధయః . సర్వదా నందయానందం నందంతు కులపాలకాః .. ఇంద్రాద్యాస్తర్పితాః సంతు తృప్యంతు వాస్తుదేవతాః…

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