जीवन की भागदौड़ और मानसिक तनाव के बीच कई बार हम ऐसे मोड़ पर खड़े होते हैं जहाँ हर रास्ता बंद नजर आता है। कभी करियर की चिंता, कभी रिश्तों की उलझन तो कभी आर्थिक तंगी – इंसान बस एक ही चीज ‘ढूँढता’ है, और वह है ‘समाधान’।
काशी के अधिपति ढुण्ढिराज गणेश का नाम ही उनकी महिमा बताता है। ‘ढुण्ढि’ का अर्थ है खोजने वाला। इस चतुर्थी (5 फरवरी 2026) पर यदि आप भी अपनी समस्याओं का हल खोज रहे हैं, तो ढुण्ढिराज गणेश के ये 3 अचूक उपाय आपके जीवन की दिशा बदल सकते हैं।
क्यों खास है ढुण्ढिराज स्वरूप?
शास्त्रों के अनुसार, जब कोई मार्ग नहीं मिलता, तब भगवान गणेश ‘ढुण्ढिराज’ बनकर भक्त की उंगली थामते हैं। काशी खंड में वर्णित है कि स्वयं महादेव ने उन्हें यह शक्ति दी है कि वे भक्त के जीवन की सबसे जटिल ‘गाँठ’ को भी खोल सकें। इस चतुर्थी पर किया गया छोटा सा प्रयास भी बड़े परिणाम दे सकता है।
‘दूर्वा की 21 गाँठ’ और बंद रास्तों की चाबी
यदि आप लंबे समय से किसी काम के अटकने या सही अवसर न मिलने से परेशान हैं, तो यह उपाय आपके लिए है।
- विधि – चतुर्थी के दिन सुबह स्नान के बाद गणेश जी के सामने घी का दीपक जलाएं। अब 21 दूर्वा (घास) लें और उन्हें मोली (कलावा) की मदद से आपस में बांध लें।
- क्रिया – इस दूर्वा की माला को ढुण्ढिराज गणेश के चरणों में अर्पित करें और “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जाप करें।
- लाभ – दूर्वा गणेश जी को शीतलता प्रदान करती है। यह उपाय आपके ‘क्रोध’ और ‘भ्रम’ को शांत कर आपको सही निर्णय लेने की शक्ति देता है, जिससे बंद रास्ते खुलने लगते हैं।
‘गुड़ और तिल का गुप्त अर्पण’ (आर्थिक संकट निवारण)
आर्थिक तंगी या कर्ज के बोझ से दबे लोगों के लिए चतुर्थी की संध्या को किया गया यह उपाय रामबाण माना जाता है।
- विधि – शाम के समय चंद्रोदय से पहले एक कांसे या तांबे की थाली में सफेद तिल और गुड़ को मिलाकर छोटे-छोटे लड्डू बना लें।
- क्रिया – इन लड्डुओं को ढुण्ढिराज स्वरूप का ध्यान करते हुए गणेश जी को अर्पित करें। इनमें से एक हिस्सा गाय को खिलाएं और बाकी परिवार में बांट दें।
- महत्व – तिल को ‘अक्षय’ माना जाता है और गुड़ को ‘सौभाग्य’ का प्रतीक। यह मिश्रण आपकी दरिद्रता को ‘खोजकर’ उसे समाप्त करने की शक्ति रखता है।
‘मौन संकल्प’ (मानसिक शांति और दिशा हेतु)
यह उपाय उन लोगों के लिए है जो डिप्रेशन, घबराहट या जीवन में ‘Empty’ महसूस कर रहे हैं।
- विधि – चतुर्थी की रात चंद्रोदय के समय जब आप अर्घ्य दें, तो उसके बाद कम से कम 11 मिनट का मौन रखें।
- क्रिया – अपनी आँखें बंद करें और मानसिक रूप से भगवान ढुण्ढिराज से कहें – “हे देव, मैं जीवन में दिशा खो चुका हूँ, कृपया मेरा हाथ थामें और मुझे सही मार्ग दिखाएं।”
- रहस्य – ढुण्ढिराज गणेश ‘खोज’ के देवता हैं। जब आप शांत होते हैं, तो वे आपके अवचेतन मन (Subconscious mind) में समाधान की किरण डालते हैं। अगले 3 दिनों के भीतर आपको कोई न कोई संकेत या विचार अवश्य मिलेगा जो आपकी समस्या सुलझा देगा।
पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य 3 मुख्य बातें
- तुलसी से परहेज – गणेश जी की पूजा में कभी भी तुलसी पत्र का प्रयोग न करें, अन्यथा पूजा का फल निष्फल हो सकता है।
- पीला रंग – इस दिन पीले वस्त्र पहनना और पीले फूलों का प्रयोग करना आपके बृहस्पति (Jupiter) को भी मजबूत करता है, जो भाग्य का कारक है।
- श्रद्धा ही आधार है – उपाय करते समय मन में ‘संदेह’ न रखें। यह विश्वास रखें कि ढुण्ढिराज गणेश आपके लिए वह सब ढूँढ लेंगे जो आपसे खो गया है।
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