सनातन धर्म में एकादशी व्रत का महत्व सर्वोपरि माना गया है, लेकिन जब बात जया एकादशी की आती है, तो इसका आध्यात्मिक वजन और भी बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में आने वाली जया एकादशी कई दुर्लभ ज्योतिषीय संयोगों के कारण बेहद खास होने वाली है।
कहा जाता है कि इस व्रत को करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि व्यक्ति को ‘पिशाच योनि’ जैसी नीच योनियों से भी मुक्ति मिल जाती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि 2026 की जया एकादशी क्यों महत्वपूर्ण है और आपको अपनी राशि के अनुसार क्या करना चाहिए।
2026 जया एकादशी – तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है।
- एकादशी तिथि – 29 जनवरी 2026
- पारण (व्रत तोड़ने) का समय – 30 जनवरी 2026 की सुबह (हरि वासर समाप्त होने के बाद)।
विशेष संयोग – साल 2026 में इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार, इन योगों में की गई पूजा और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में 100 गुना अधिक प्राप्त होता है।
इस बार क्यों खास है जया एकादशी?
1. 2026 के ग्रहों की स्थिति के अनुसार, यह एकादशी राहु-केतु के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए उत्तम है।
2. चंद्रमा की स्थिति मजबूत होने के कारण, यह उन लोगों के लिए वरदान है जो मानसिक तनाव या अनिद्रा से जूझ रहे हैं।
3. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने इसी दिन माल्यवान और पुष्पवती को पिशाच योनि से मुक्त किया था।
जया एकादशी, राशि अनुसार दान – चमकाएं अपनी किस्मत
एकादशी पर अपनी राशि के अनुसार दान करने से ग्रहों के दोष शांत होते हैं। 2026 की जया एकादशी पर आप ये उपाय कर सकते हैं:
- मेष – (गुड़ और लाल मसूर की दाल दान करें) साहस और ऊर्जा में वृद्धि
- वृषभ – (मिश्री और सफेद कपड़े दान करें) पारिवारिक सुख-शांति
- मिथुन – (हरी मूंग की दाल और चारा दान करें) व्यापार में उन्नति
- कर्क – (दूध, चावल या चांदी का सिक्का दान करें) मानसिक तनाव से मुक्ति
- सिंह – (गेहूं और तांबे का बर्तन दान करें) मान-सम्मान और पद प्रतिष्ठा
- कन्या – (हरे फल और कांसे के बर्तन दान करें) बुद्धि और कौशल विकास
- तुला – (घी और सफेद मिठाई दान करें) आर्थिक समृद्धि
- वृश्चिक – (लाल चंदन और केसर दान करें) शत्रुओं पर विजय
- धनु – (पीली दाल और हल्दी दान करें) ज्ञान और सौभाग्य
- मकर – (काले तिल और कंबल दान करें) कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होंगी
- कुंभ – (तेल और लोहे की वस्तु दान करें) शनि दोष से राहत
- मीन – (शहद और पीले वस्त्र दान करें) आध्यात्मिक प्रगति
जया एकादशी पूजा की सरल विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं। उन्हें पीले फूल, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें। जया एकादशी की व्रत कथा का पाठ अवश्य करें या सुनें।
- संभव हो तो रात में भगवान के भजनों का कीर्तन करें।
- एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित है। साथ ही, इस दिन पूर्ण सात्विकता बनाए रखें और किसी की निंदा न करें।
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