Misc

कूर्म द्वादशी का रहस्य – श्रीहरि विष्णु का कच्छप अवतार क्यों है इतना खास? महत्व और पूजन के नियम

MiscHindu Gyan (हिन्दू ज्ञान)हिन्दी
Share This

Join HinduNidhi WhatsApp Channel

Stay updated with the latest Hindu Text, updates, and exclusive content. Join our WhatsApp channel now!

Join Now

हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के दस अवतारों (दशावतार) का विशेष महत्व है, और इन्हीं में से एक है उनका दूसरा अवतार – कूर्म अवतार (Kurma Avatar)। कूर्म, जिसका अर्थ संस्कृत में ‘कछुआ’ होता है, इस बात का प्रतीक है कि सृष्टि के संतुलन को बनाए रखने के लिए स्वयं श्रीहरि विष्णु ने कितना विराट और निर्णायक रूप धारण किया था। कूर्म द्वादशी, पौष मास (Paush Month) के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है, जो पूरी तरह से भगवान विष्णु के इसी अद्भुत स्वरूप को समर्पित है।

आइए, कूर्म द्वादशी के उस रहस्य को उजागर करते हैं कि क्यों यह कछुआ अवतार इतना खास है और इसके पूजन के क्या नियम हैं!

कूर्म द्वादशी का अद्भुत रहस्य – अवतार क्यों लिया?

कूर्म द्वादशी की महत्ता उस पौराणिक घटना से जुड़ी है जिसे ‘समुद्र मंथन’ (Samudra Manthan) के नाम से जाना जाता है।

  • पृष्ठभूमि – एक बार, जब देवराज इंद्र ने महर्षि दुर्वासा द्वारा दी गई दिव्य पारिजात माला का अपमान किया, तो क्रोधित ऋषि ने सभी देवताओं को ‘श्रीहीन’ (शक्तिहीन) होने का शाप दे दिया। शक्ति क्षीण होने पर, असुरों ने तीनों लोकों पर कब्ज़ा कर लिया।

कूर्म अवतार की भूमिका (The Role of Kurma Avatar):

  • देवताओं की प्रार्थना पर, भगवान विष्णु ने उन्हें समुद्र मंथन करके ‘अमृत’ (Nectar of Immortality) प्राप्त करने का सुझाव दिया।
  • मंथन के लिए मंदराचल पर्वत को मथनी और नागराज वासुकी को रस्सी बनाया गया।
  • जैसे ही मंथन शुरू हुआ, विशाल मंदराचल पर्वत अथाह सागर में डूबने लगा। सृष्टि पर एक और बड़ा संकट आ गया।
  • ठीक इसी निर्णायक क्षण में, जगत के पालक श्रीहरि विष्णु ने एक विशाल कछुए (Tortoise) का रूप धारण किया। उन्होंने अपनी पीठ पर मंदराचल पर्वत को सहारा दिया, जिससे मंथन निर्बाध रूप से जारी रह सका।

निष्कर्ष – कूर्म अवतार स्थिरता (Stability), धैर्य (Patience) और असीम शक्ति का प्रतीक है। यह अवतार हमें सिखाता है कि बड़े से बड़े संकट को पार करने के लिए आधारभूत स्थिरता और दृढ़ता आवश्यक है।

कूर्म द्वादशी का धार्मिक महत्व (Religious Significance)

कूर्म द्वादशी का व्रत और पूजन कई मायनों में बहुत फलदायी माना जाता है:

महत्व के बिंदु (Key Points of Significance) विवरण (Description)

  • मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने और व्रत रखने से साधक के सभी संचित पापों का नाश हो जाता है और उसे मोक्ष (Salvation) की प्राप्ति का मार्ग मिलता है।
  • कूर्म भगवान स्थिरता प्रदान करते हैं। इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं (Obstacles) दूर होती हैं और कार्यों में स्थाई सफलता मिलती है।
  • कछुआ (कूर्म) मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है। कूर्म द्वादशी के दिन पूजा करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है और आर्थिक संकट दूर होते हैं।
  • कूर्म अवतार दूरदर्शिता (Foresight) का भी प्रतीक है। यह हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए गहराई और दूर की सोच रखने की प्रेरणा देता है।

कूर्म द्वादशी पूजन के नियम और विधि (Rituals and Methods of Worship)

कूर्म द्वादशी का व्रत आमतौर पर तीन दिन (दशमी, एकादशी और द्वादशी) तक चलता है, लेकिन द्वादशी का पूजन मुख्य होता है।

  • द्वादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प (Vow) लें।
  • घर के पूजा स्थल की सफाई कर एक चौकी स्थापित करें। इस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की प्रतिमा या तस्वीर (या भगवान विष्णु की सामान्य प्रतिमा) स्थापित करें।
  • षोडशोपचार पूजा – घी का दीपक जलाएं। सिंदूर, रोली, चंदन, अक्षत, पीले फूल, फल, धूप और दीप अर्पित करें।
  • भगवान विष्णु के भोग में तुलसी दल (Tulsi Leaves) अवश्य शामिल करें।
  • इस दिन ‘ॐ नमो नारायणाय’ या भगवान विष्णु के किसी भी मंत्र का जाप 108 बार करें। विष्णु सहस्त्रनाम और नारायण स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ होता है।
  • अंत में भगवान कूर्म की आरती करें और उनसे सुख-शांति की प्रार्थना करें। अपनी क्षमतानुसार अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

शुभ कार्य और उपाय (Auspicious Deeds and Remedies):

  • कूर्म द्वादशी के दिन चांदी या अष्टधातु (Eight Metals) से बना कछुआ घर या कार्यस्थल पर लाना बहुत शुभ माना जाता है। इसे रखने से सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार होता है।
  • इस दिन पीले वस्त्र पहनना और पीली वस्तुओं का दान करना (जैसे चना दाल, हल्दी) शुभ माना जाता है, क्योंकि पीला रंग भगवान विष्णु को प्रिय है।

Found a Mistake or Error? Report it Now

Join WhatsApp Channel Download App