नैना देवी मंदिर का रहस्य – क्या सचमुच यहां मां शक्ति के नयन गिरे थे? जानें शक्ति पीठ का इतिहास और महत्व

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भारत अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां हर कदम पर आपको एक ऐसी कहानी या रहस्य मिलेगा जो आपको हैरान कर देगा। हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बसा नैना देवी मंदिर (Naina Devi Temple) एक ऐसा ही पवित्र स्थल है, जिसके रहस्य और इतिहास की चर्चा दूर-दूर तक…

कमला जयंती का आध्यात्मिक महत्व – माँ कमला के 10 गुप्त रहस्य और पूजा की सम्पूर्ण विधि

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नमस्ते और जय माता दी! आज हम बात करेंगे उस देवी के बारे में जो धन, समृद्धि और वैभव की देवी लक्ष्मी का ही एक रूप मानी जाती हैं – माँ कमला। कमला जयंती का यह पावन पर्व न केवल एक धार्मिक (religious) उत्सव है, बल्कि यह हमें आंतरिक शांति (inner peace) और आध्यात्मिक उन्नति…

अटला तड्डी व्रत कथा

अटला तड्डी व्रत, जिसे अहोई अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, एक पारंपरिक हिंदू व्रत है जो मुख्य रूप से उत्तरी भारत में मनाया जाता है। यह व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पड़ता है। इस दिन माताएं अपनी संतानों की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा…

कब है इंदिरा एकादशी 2025 व्रत – तिथि मुहूर्त, पूजा विधि, अनुष्ठान और महत्व

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हिंदू धर्म में इंदिरा एकादशी को सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। यह एकादशी पितृ पक्ष के महीने में मनाई जाती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह एकादशी सितंबर में आती है। इसी तरह इंदिरा एकादशी 2025 (17 सितंबर) यानी बुधवार को होगी। इस एकादशी की तिथि 17 सितंबर को 12:21 AM…

इंदिरा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि

इंदिरा एकादशी हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। इस व्रत को करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत…

भगवान श्री विश्वकर्मा जी के 108 नाम

|| श्री विश्वकर्मा जी के 108 नाम (Vishwakarma 108 naam PDF) || ॐ विश्वकर्मणे नमः ॐ विश्वात्मने नमः ॐ विश्वस्माय नमः ॐ विश्वधाराय नमः ॐ विश्वधर्माय नमः ॐ विरजे नमः ॐ विश्वेक्ष्वराय नमः ॐ विष्णवे नमः ॐ विश्वधराय नमः ॐ विश्वकराय नमः । ॐ वास्तोष्पतये नमः ॐ विश्वभंराय नमः ॐ वर्मिणे नमः ॐ वरदाय नमः…

भगवान श्री विश्वकर्मा की कथा

प्राचीन काल में देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने अपनी अद्भुत कला और वास्तुकला से देवताओं के लिए अनेक भवनों, महलों और अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है स्वर्ग लोक। उन्होंने लंका के सोने के किले का भी निर्माण किया, जिसे बाद में रावण ने छीन लिया था। इसके अलावा,…

अष्टमी रोहिणी पर कैसे करें व्रत और पूजन? जानें नियम, लाभ और श्रीकृष्ण कृपा पाने के उपाय

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सनातन धर्म में व्रतों और त्योहारों का विशेष महत्व है, और इन्हीं में से एक अत्यंत पावन पर्व है अष्टमी रोहिणी। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है और माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से भक्तों को अतुलनीय पुण्य और प्रभु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यदि आप भी…

जीवित्पुत्रिका व्रत कथा एवं पूजा विधि

जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जितिया व्रत भी कहते हैं, संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए माताओं द्वारा रखा जाने वाला एक प्रमुख हिंदू पर्व है। यह व्रत अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत में माताएं 24 घंटे से अधिक समय तक निर्जला (बिना पानी और…

त्रिपिण्डीश्राद्धपद्धति (Tripindi Shraddh Paddhati)

त्रिपिण्डीश्राद्धपद्धति (Tripindi Shraddh Paddhati)

त्रिपिण्डीश्राद्धपद्धति गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित एक अद्वितीय और उपयोगी ग्रंथ है, जो हिंदू धर्म में श्राद्ध कर्म और पितृ-तर्पण की विधियों को समझाने के लिए लिखा गया है। यह पुस्तक विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो पितृ तर्पण, त्रिपिंडी श्राद्ध और पूर्वजों के निमित्त किए जाने वाले कर्मकांडों का शास्त्रीय और…

यम पितृ परिचय (Yama Pitru Parichay)

यम पितृ परिचय (Yama Pitru Parichay)

यम पितृ परिचय एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक पुस्तक है, जिसे प्रसिद्ध विद्वान पं. प्रियरत्न जी ने लिखा है। यह पुस्तक भारतीय धर्मग्रंथों और परंपराओं में यमराज और पितरों के महत्त्व पर केंद्रित है। इसमें यमराज के न्याय, पितृ दोष, और पितरों की पूजा से संबंधित विषयों को विस्तारपूर्वक समझाया गया है। यह पुस्तक उन…

श्राद्ध में गाय, कुश और जल का महत्व – वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण

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क्या आपने कभी सोचा है कि श्राद्ध जैसे पवित्र कर्मकांड में गाय, कुश (दूर्वा) और जल का इतना महत्व क्यों है? यह सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य छिपा है। आइए, इन तीनों के महत्व को विस्तार से समझते हैं, एक नए और अनूठे दृष्टिकोण से। श्राद्ध में गाय, कुश…

श्राद्ध पक्ष में क्या करें और क्या न करें? जानें 16 दिन के नियम और परंपराएं

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सनातन धर्म में श्राद्ध पक्ष का विशेष महत्व है। यह 16 दिवसीय अवधि हमारे पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उन्हें सम्मान देने का समय है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा से अश्विन मास की अमावस्या तक चलने वाले इन 16 दिनों में, परिवार के दिवंगत सदस्यों की आत्मा की शांति और उनके मोक्ष के…

(विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी) आश्विन संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा

आश्विन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को ‘विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी’ के नाम से जाना जाता है। यह पावन दिन भगवान गणेश को समर्पित है, जो विघ्नहर्ता और बुद्धि के दाता माने जाते हैं। 2025 में यह व्रत भक्तों के लिए विशेष फलदायी होगा। इस दिन भक्त सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखते हैं और भगवान…

कात्यायनी माता – नवदुर्गा की छठी शक्ति, जानें पूजन विधि, मंत्र और अद्भुत महत्व

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नवरात्रि (Navratri) का छठा दिन एक विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह दिन समर्पित है नवदुर्गा (Navdurga) की छठी शक्ति, देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) को। मां कात्यायनी, ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण इस नाम से विख्यात हुईं। इन्हें प्रेम, विवाह और शक्ति की देवी माना जाता है। इनकी पूजा उन अविवाहित लड़कियों के…

नवदुर्गा की नवमी – माँ सिद्धिदात्री की कृपा से मिलती हैं 8 सिद्धियाँ, जानिए पूजन विधि, मंत्र और चमत्कारी लाभ

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नवरात्रि का नौवां दिन, जिसे नवमी कहा जाता है, आध्यात्मिक साधना का शिखर (peak) है। यह दिन माँ दुर्गा के नौवें और अंतिम स्वरूप माँ सिद्धिदात्री को समर्पित है। ‘सिद्धिदात्री’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘सिद्धि’ जिसका अर्थ है अलौकिक शक्ति और ‘दात्री’ जिसका अर्थ है देने वाली। इस तरह, माँ सिद्धिदात्री वह…

महागौरी माँ की पूजा विधि और रहस्य – कैसे पाएं अष्टमी पर उनका विशेष आशीर्वाद?

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नवरात्रि का आठवां दिन, जिसे महाष्टमी (Mahashtami) के नाम से भी जाना जाता है, माँ दुर्गा के नौ रूपों में से एक, देवी महागौरी (Maa Mahagauri) को समर्पित है। यह दिन न केवल पूजा-अर्चना का है, बल्कि अपने भीतर की बुराईयों को खत्म कर शुद्धता और पवित्रता को स्थापित करने का भी है। इस ब्लॉग…

नवरात्रि के सातवें दिन कालरात्रि की पूजा क्यों है विशेष? जानें पूरी विधि और लाभ

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नवरात्रि, यानी नौ रातों का त्योहार, देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का एक भव्य उत्सव है। हर दिन देवी के एक विशेष स्वरूप की आराधना की जाती है, और इनमें से सातवां दिन देवी कालरात्रि को समर्पित है। यह दिन न केवल अपनी धार्मिक महत्ता के लिए जाना जाता है, बल्कि इस दिन…

नवरात्रि के पांचवें दिन पूजित देवी – कैसे करें मां स्कंदमाता को प्रसन्न, जानें संपूर्ण व्रत विधि और लाभ

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नवरात्रि का पावन पर्व, जो मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का उत्सव है, अपने पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है। आज का दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है। देवी दुर्गा का यह स्वरूप मातृत्व, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक है। मां स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय (Skanda) की माता के रूप में पूजा…

नवरात्रि के चौथे दिन की उपासना – माँ कूष्मांडा की पूजा विधि, मंत्र और चमत्कारी लाभ, सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

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नवरात्रि का पावन पर्व, जो नौ रातों तक चलता है, हर दिन एक नई ऊर्जा और देवी शक्ति का अनुभव कराता है। इस उत्सव के चौथे दिन हम माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप, माँ कूष्मांडा की पूजा करते हैं। कूष्मांडा, यानी ‘वह देवी जिनके उदर में ब्रह्मांड समाया हुआ है’, अपने तेज से दिशाओं को…

नवरात्रि के तीसरे दिन – मां चंद्रघंटा की पूजा, मंत्र और दिव्य स्वरूप का महत्व (Navratri Third Day – Maa Chandraghanta Puja)

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नवरात्रि का पावन पर्व, जो नौ रातों तक चलता है, हर दिन अपने साथ एक नए देवी स्वरूप का आशीर्वाद लेकर आता है। आज, नवरात्रि के तीसरे दिन, हम देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप, मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं। उनका नाम “चंद्रघंटा” दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘चंद्र’ (चाँद) और ‘घंटा’ (घंटी),…

नवरात्रि के दूसरे दिन पूजी जाने वाली ब्रह्मचारिणी माता कौन हैं? जानें पूजा विधि और महत्व (Navratri Day 2 – Maa Brahmacharini? Learn the Puja Vidhi and Significance)

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नवरात्रि, नौ दिनों का एक पवित्र पर्व (holy festival) है जो माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के लिए समर्पित है। इन नौ दिनों में से प्रत्येक दिन एक विशिष्ट देवी को समर्पित होता है, और दूसरा दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा का दिन है। यह दिन न केवल आध्यात्मिक महत्व (spiritual significance) रखता…

धन्वन्तरि सहस्रनामावली

श्री धन्वन्तरि भगवान को आयुर्वेद के जनक और स्वास्थ्य के देवता माना जाता है। उनका प्रकट होना समुद्र मंथन के समय अमृत कलश के साथ हुआ था। वे सभी रोगों के निवारणकर्ता और आरोग्य के संरक्षक माने जाते हैं। श्री धन्वन्तरि सहस्रनामावली में उनके एक हजार दिव्य नामों का संग्रह है, जो उनकी शक्ति, करुणा…

Pradosh Vrat – प्रदोष व्रत सम्पूर्ण जानकारी – कब, क्यों और कैसे करें?

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प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो हर महीने के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है और माना जाता है कि इसे करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। प्रदोष व्रत भगवान शिव…

शैलपुत्री पूजा विधि – नवरात्रि के पहले दिन मां पार्वती के अवतार की आराधना कैसे करें? (Navratri Day 1 Shailputri Puja Vidhi)

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नवरात्रि का पर्व, जो नौ दिनों तक चलने वाला उत्सव है, मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना का प्रतीक है। यह पर्व आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दोनों रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इन नौ दिनों की शुरुआत होती है देवी शैलपुत्री की पूजा से। “शैल” का अर्थ है पर्वत और “पुत्री” का अर्थ है…

नवरात्रि व्रत और पूजा विधि – कौन-सी देवी कब पूजी जाती हैं और क्यों है हर दिन खास?

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नवरात्रि, (Navratri) यानी नौ रातों का त्योहार, भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है। यह पर्व माँ दुर्गा के नौ दिव्य रूपों की आराधना का समय है, जो हमें शक्ति, भक्ति और आध्यात्मिक जागृति का संदेश देता है। यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और ऋतु परिवर्तन के साथ मानव मन के…

सर्वपितृ अमावस्या पौराणिक कथा

|| सर्वपितृ अमावस्या पौराणिक कथा (Sarvapitri Amavasya Katha PDF) || श्राद्ध पक्ष में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व है। इसे पितरों को विदा करने की अंतिम तिथि माना जाता है। यदि किसी कारणवश व्यक्ति श्राद्ध की निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाया हो या उसे तिथि ज्ञात न हो, तो सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध…

पितृ दोष हो तो करियर रुकता है – जानें श्राद्ध पक्ष में क्या करें

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अक्सर लोग अपनी असफलताओं के लिए किस्मत को दोष देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे कोई और वजह भी हो सकती है? हमारे ज्योतिषशास्त्र में ऐसी ही एक स्थिति का वर्णन किया गया है, जिसे पितृ दोष कहते हैं। यह कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों से जुड़े कर्मों और…

क्या है पितृदोष और कैसे दूर करें इसे श्राद्ध कर्म से? जानिए सम्पूर्ण उपाय

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क्या आपके जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हैं? क्या घर में कलह, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या संतान प्राप्ति में कठिनाई का सामना कर रहे हैं? हो सकता है इसके पीछे पितृदोष (Pitru Dosh) हो। यह एक ऐसी ज्योतिषीय स्थिति है जिसे हमारे पूर्वजों के असंतुष्ट होने या उनके प्रति हमारी कुछ जिम्मेदारियों के पूरा…

Pitru Paksha Ekadashi Fast – पितृपक्ष में एकादशी का व्रत करना चाहिए या नहीं?

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एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि एकादशी के दिन श्राद्ध करना सही है या नहीं? शास्त्रों में साफ तौर पर कहा गया है कि एकादशी के दिन श्राद्ध नहीं करना चाहिए। भगवान शंकर ने खुद पार्वती जी को बताया कि अगर कोई व्यक्ति एकादशी के दिन श्राद्ध करता है, तो श्राद्ध…

पितृ गायत्री मंत्र

|| पितृ गायत्री मंत्र (Pitra Gayatri Mantra PDF) || ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च । नमः स्वाहायै स्वाधायै नित्यमेव नमो नमः ॥ ॐ पितृभ्यो नमः ॥

Pitru Paksha 2025 – क्यों किया जाता है श्राद्ध? पितृ पक्ष की तिथियां, नियम, महत्व और मान्यताएं

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पितृपक्ष 08 सितंबर से शुरू हो रहा है। पितृपक्ष के समय लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक कार्य करते हैं। इस दौरान, लोग अपने पितरों की तृप्ति के लिए भोजन और जल अर्पित करते हैं। साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराना, उन्हें दान-दक्षिणा देना और पितरों की…

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा और पूजा विधि

|| अनंत चतुर्दशी पूजा विधि || इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें। इसके बाद कलश पर भगवान विष्णु की तस्वीर भी लगाएं। एक धागे को कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर अनंत सूत्र बनाएं, इसमें 14 गांठें लगी होनी चाहिए। इस सूत्रो भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने रखें।…

अनंत चतुर्दशी 2025 – जानिए व्रत की कहानी, पूजा विधि और महत्व, कैसे करें व्रत उद्यापन

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अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। इस बार अनन्त चतुर्दशी शनिवार, सितम्बर 06, 2025 को  है। यह भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी के दिन मनाया जाता है। इस दिन अनंत रूपी भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस व्रत के माध्यम से भक्त अपने जीवन…

ओणम क्यों मनाया जाता है? ओणम का इतिहास, महत्व और ओणम की अद्भुत कथा

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ओणम, केरल का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्योहार है, जो हर साल मलयालम कैलेंडर के अनुसार चिंगम महीने में आता है. यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत, समृद्धि और खुशियों का प्रतीक है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह अद्भुत पर्व क्यों मनाया जाता है? इसका गहरा इतिहास क्या है और…

कल्कि द्वादशी – क्या निकट है भगवान कल्कि का आगमन? जानें धर्मग्रंथों की दृष्टि से

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सनातन धर्म में अनेक अवतारों का वर्णन मिलता है, जिनमें भगवान विष्णु के दशावतारों की चर्चा प्रमुख है। इन दशावतारों में, भगवान कल्कि को अंतिम और भविष्य का अवतार माना गया है। कल्कि द्वादशी का पावन पर्व, जो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता है, भगवान कल्कि के आगमन की आशा…

परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि

|| परिवर्तिनी एकादशी पूजा विधि || सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें। भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। भगवान की आरती करें। अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें। भगवान को भोग लगाएं। इस…

Parivartini Ekadashi 2025 – परिवर्तिनी एकादशी मुहूर्त, व्रत कथा और पूजा विधि

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परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है। इसे भारत के कई क्षेत्रों में पार्श्व एकादशी के रूप में भी जाना जाता है। इस एकादशी पर श्री हरि शयन करते हुए करवट लेते हैं इसलिए इसे एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इसे पद्मा एकादशी के नाम से…

श्री वामन आरती

|| श्री वामन आरती (Vaman Aarti PDF) || ॐ जय वामन देवा, हरि जय वामन देवा बलि राजा के द्वारे, बलि राजा के द्वारे सन्त करे सेवा, || ॐ जय वामन देवा…||  वामन रूप अनुपम छत्र दंड शोभा, हरि छत्र दंड शोभा तिलक भाल की मनोहर भक्तन मन मोहा || ॐ जय वामन देवा…||  आगम…

वामन अवतार कथा तथा पूजा विधि

|| वामन जयंती पूजा विधि || इस दिन भगवान विष्णु को उनके वामन रूप में पूजा जाता है। इस दिन उपासक को सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। नित्यक्रिया के बाद स्नान और भगावन विष्णु का ध्यान कर दिन की शुरुआत करनी चाहिए। इसके बाद दिन की शुरुआत में आप वामन देव की सोने या फिर…

श्री राधा स्तुति

|| श्री राधा स्तुति (Radha Stuti PDF) || नमस्ते परमेशानि रासमण्डलवासिनी। रासेश्वरि नमस्तेऽस्तु कृष्ण प्राणाधिकप्रिये।। नमस्त्रैलोक्यजननि प्रसीद करुणार्णवे। ब्रह्मविष्ण्वादिभिर्देवैर्वन्द्यमान पदाम्बुजे।। नम: सरस्वतीरूपे नम: सावित्रि शंकरि। गंगापद्मावनीरूपे षष्ठि मंगलचण्डिके।। नमस्ते तुलसीरूपे नमो लक्ष्मीस्वरुपिणी। नमो दुर्गे भगवति नमस्ते सर्वरूपिणी।। मूलप्रकृतिरूपां त्वां भजाम: करुणार्णवाम्। संसारसागरादस्मदुद्धराम्ब दयां कुरु।। || इति सम्पूर्ण श्री राधा स्तुति ||

श्री राधा आरती

श्री राधा रानी की आरती उनके भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह आरती राधा जी के दिव्य स्वरूप, उनकी कृपा और प्रेम को समर्पित है। “श्री राधा आरती PDF” के माध्यम से भक्तगण कभी भी, कहीं भी इस पावन आरती का पाठ कर सकते हैं, जिससे उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतोष प्राप्त होता…

श्री राधा चालीसा

श्री राधा चालीसा हिंदू धर्म में एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है, जिसमें 40 छंद होते हैं। यह देवी राधा को समर्पित है, जिन्हें भगवान कृष्ण की शाश्वत संगिनी और प्रेम की देवी माना जाता है। इस चालीसा का पाठ करने से भक्त राधा रानी की कृपा प्राप्त करते हैं, जिससे उनके जीवन में प्रेम, शांति और…

श्री राधा कवचम्

|| श्री राधा कवचम् (Radha Kavacham PDF) || श्रीगणेशाय नमः । पार्वत्युवाच कैलासिअवासिन् भगवन् भक्तानुग्रहकारक । राधिकाकवचं पुण्यं कथयस्व मम प्रभो ॥ १॥ यद्यस्ति करुणा नाथ त्राहि मां दुःखतो भयात् । त्वमेव शरणं नाथ शूलपाणे पिनाकधृक् ॥ २॥ शिव उवाच शृणुष्व गिरिजे तुभ्यं कवचं पूर्वसूचितम् । सर्वरक्षाकरं पुण्यं सर्वहत्याहरं परम् ॥ ३॥ हरिभक्तिप्रदं साक्षाद्भुक्तिमुक्तिप्रसाधनम् ।…

देवी राधा सहस्रनामावली

देवी राधा सहस्रनामावली राधा रानी के 1000 दिव्य और मधुर नामों का संग्रह है। यह सहस्रनामावलि उनके प्रेम, भक्ति, करुणा और आध्यात्मिक स्वरूप को समर्पित है। राधा रानी भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रेयसी और भक्ति के उच्चतम आदर्श का प्रतीक मानी जाती हैं। इस सहस्रनामावलि का पाठ करने से साधक राधा-कृष्ण की अलौकिक प्रेमलीला और…

दूर्वा अष्टमी व्रत कथा

दूर्वा अष्टमी का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान सुख, सौभाग्य और परिवार की वृद्धि के लिए किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश और दूर्वा घास का विशेष पूजन होता है। || दूर्वा अष्टमी व्रत कथा (Durva Ashtami Vrat Katha PDF)…

ललितांबा स्तुति

|| ललितांबा स्तुति (Lalitamba Stuti PDF) || का त्वं शुभकरे सुखदुःखहस्ते त्वाघूर्णितं भवजलं प्रबलोर्मिभङ्गैः। शान्तिं विधातुमिह किं बहुधा विभग्नां मतः प्रयत्नपरमासि सदैव विश्वे। सम्पादयत्यविरतं त्वविरामवृत्ता या वै स्थिता कृतफलं त्वकृतस्य नेत्री। सा मे भवत्वनुदिनं वरदा भवानी जानाम्यहं ध्रुवमिदं धृतकर्मपाशा। को वा धर्मः किमकृतं क्व कपाललेखः किं वादृष्टं फलमिहास्ति हि यां विना भोः। इच्छापाशैर्नियमिता नियमाः स्वतन्त्रैः…

ललितांबा स्तोत्र

|| ललितांबा स्तोत्र (Lalitamba Stotram PDF) || सहस्रनामसन्तुष्टां देविकां त्रिशतीप्रियाम्। शतनामस्तुतिप्रीतां ललिताम्बां नमाम्यहम्। चतुर्भुजां चिदाकारां चतुःषष्टिकलात्मिकाम्। भक्तार्तिनाशिनीं नम्यां ललिताम्बां नमाम्यहम्। कञ्जपत्रायताक्षीं तां कल्याणगुणशालिनीम्। कारुण्यसागरां कान्तां ललिताम्बां नमाम्यहम्। आदिरूपां महामायां शुद्धजाम्बूनदप्रभाम्। सर्वेशनायिकां शुद्धां ललिताम्बां नमाम्यहम्। भक्तकाम्यप्रदां भव्यां भण्डासुरवधोद्यताम्। बन्धत्रयविमुक्तां च ललिताम्बां नमाम्यहम्। भूतिप्रदां भुवन्यस्थां ब्राह्मणाद्यैर्नमस्कृताम्। ब्रह्मादिभिः सर्जिताण्डां ललिताम्बां नमाम्यहम्। रूप्यनिर्मितवक्षोज- भूषणामुन्नतस्तनाम्। कृशकट्यन्वितां रम्यां ललिताम्बां नमाम्यहम्। माहेश्वरीं…

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