ललिता कवच

|| ललिता कवच (Lalita Kavacham PDF) || सनत्कुमार उवाच – अथ ते कवचं देव्या वक्ष्ये नवरतात्मकम्। येन देवासुरनरजयी स्यात्साधकः सदा। सर्वतः सर्वदाऽऽत्मानं ललिता पातु सर्वगा। कामेशी पुरतः पातु भगमाली त्वनन्तरम्। दिशं पातु तथा दक्षपार्श्वं मे पातु सर्वदा। नित्यक्लिन्नाथ भेरुण्डा दिशं मे पातु कौणपीम्। तथैव पश्चिमं भागं रक्षताद्वह्निवासिनी। महावज्रेश्वरी नित्या वायव्ये मां सदावत। वामपार्श्वं सदा पातु…

ललिता पुष्पांजलि स्तोत्र

|| ललिता पुष्पांजलि स्तोत्र (Lalita Pushpanjali Stotram PDF) || समस्तमुनियक्ष- किंपुरुषसिद्ध- विद्याधर- ग्रहासुरसुराप्सरो- गणमुखैर्गणैः सेविते। निवृत्तितिलकाम्बरा- प्रकृतिशान्तिविद्याकला- कलापमधुराकृते कलित एष पुष्पाञ्जलिः। त्रिवेदकृतविग्रहे त्रिविधकृत्यसन्धायिनि त्रिरूपसमवायिनि त्रिपुरमार्गसञ्चारिणि। त्रिलोचनकुटुम्बिनि त्रिगुणसंविदुद्युत्पदे त्रयि त्रिपुरसुन्दरि त्रिजगदीशि पुष्पाञ्जल पुरन्दरजलाधिपान्तक- कुबेररक्षोहर- प्रभञ्जनधनञ्जय- प्रभृतिवन्दनानन्दिते। प्रवालपदपीठीका- निकटनित्यवर्तिस्वभू- विरिञ्चिविहितस्तुते विहित एष पुष्पाञ्जलिः। यदा नतिबलादहङ्कृतिरुदेति विद्यावय- स्तपोद्रविणरूप- सौरभकवित्वसंविन्मयि। जरामरणजन्मजं भयमुपैति तस्यै समा- खिलसमीहित- प्रसवभूमि तुभ्यं नमः। निरावरणसंविदुद्भ्रम-…

ललिता अष्टक स्तोत्र

|| ललिता अष्टक स्तोत्र (Lalitha Ashtaka Stotram PDF) || राधामुकुन्दपद- सम्भवघर्मबिन्दु निर्मञ्छनोपकरणी- कृतदेहलक्षाम्। उत्तुङ्गसौहृद- विशेषवशात् प्रगल्भां देवीं गुणैः सुललितां ललितां नमामि। राकासुधाकिरण- मण्डलकान्तिदण्डि- वक्त्रश्रियं चकितचारु- चमूरुनेत्राम्। राधाप्रसाधनविधान- कलाप्रसिद्धां देवीं गुणैः सुललितां ललितां नमामि। लास्योल्लसद्भुजग- शत्रुपतत्रचित्र- पट्टांशुकाभरण- कञ्चुलिकाञ्चिताङ्गीम्। गोरोचनारुचि- विगर्हणगौरिमाणं देवीं गुणैः सुललितां ललितां नमामि। धूर्ते व्रजेन्द्रतनये तनुसुष्ठुवाम्यं मा दक्षिणा भव कलङ्किनि लाघवाय। राधे गिरं श‍ृणु…

श्री ललिता हृदय स्तोत्रम्

|| श्रीललिताहृदयस्तोत्रम् (Lalita Hridaya Stotram PDF) || श्रीललिताम्बिकायै नमः । देव्युवाच । देवदेव महादेव सच्चिदानन्दविग्रहा । सुन्दर्याहृदयं स्तोत्रं परं कौतूहलं विभो ॥ ईश्वरौवाच । साधु साधुत्वया प्राज्ञे लोकानुग्रहकारकम् । रहस्यमपिवक्ष्यामि सावधानमनाःश‍ृणु ॥ श्रीविद्यां जगतां धात्रीं सर्ग्गस्थितिलयेश्वरीम् । नमामिललितां नित्यां भक्तानामिष्टदायिनीम् ॥ बिन्दुत्रिकोणसम्युक्तं वसुकोणसमन्वितम् । दशकोणद्वयोपेतं चतुर्द्दश समन्वितम् ॥ दलाष्टकेसरोपेतं दलषोडशकान्वितम् । वृत्तत्रययान्वितम्भूमिसदनत्रयभूषितम् ॥ नमामि ललिताचक्रं…

श्री ललिता सहस्रनामावली

श्री ललिता सहस्रनामावली देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी की स्तुति में रचित 1000 पवित्र नामों का संग्रह है। यह ग्रंथ ब्रह्मांड पुराण का एक अंश है और अद्वैत वेदांत में इसकी विशेष महिमा है। देवी ललिता को सर्वोच्च शक्ति और सृष्टि की माँ माना जाता है। वे सृष्टि, स्थिति और संहार की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनकी उपासना…

श्री ललिता पुष्पाञ्जलि स्तोत्रम्

|| श्रीललितापुष्पाञ्जलिस्तोत्रम् (Lalita Pushpanjali-Stotram PDF) || ॐ समस्तमुनियक्षकिम्पुरुषसिद्धविद्याधर- ग्रहासुरसुराप्सरोगणमुखैर्गणैः सेविते! । निवृत्तितिलकाम्बराप्रकृतिशान्तिविद्याकला- कलापमधुराकृते कलित एष पुष्पाञ्जलिः ॥ त्रिवेदकृतविग्रहे, त्रिविधकृत्यसन्धायिनि, त्रिरूपसमवायिनि त्रिपुरमार्गसञ्चारिणि! । त्रिलोचनकुटुम्बिनि त्रिगुणसंविदुद्युत्पदे त्रयि, त्रिपुरसुन्दरि, त्रिजगदीशि! पुष्पाञ्जलिः ॥ पुरन्दरजलाधिपान्तककुबेररक्षोहर- प्रभञ्जनधनञ्जयप्रभृतिवन्दनानन्दिते! । प्रवालपदपीठीकानिकटनित्यवर्तिस्वभू- विरिञ्चिविहितस्तुते! विहित एष पुष्पाञ्जलिः ॥ यदानतिबलादहङ्कृतिरुदेति विद्यावय- स्तपोद्रविणरूपसौरभकवित्वसंविन्मयि! । जरामरणजन्मजं भयमुपैति तस्यै समा- खिलसमीहितप्रसवभूमि! तुभ्यं नमः ॥ निरावरणसंविदुद्भ्रमपरास्तभेदोल्लसत्- परात्परचिदेकतावरशरीरिणि, स्वैरिणि! । रसायनतरङ्गिणीरुचितरङ्गसञ्चारिणि!,…

ललिता सप्तमी व्रत कथा

ललिता सप्तमी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन राधा रानी की प्रिय सखी देवी ललिता की पूजा की जाती है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र व अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। इसे संतान सप्तमी के नाम…

Ganesh Chaturthi Special – गणेश की कृपा से करियर की बाधाएं दूर करें

ganesh chaturthi

जीवन एक यात्रा है, और इस यात्रा में करियर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। हर कोई चाहता है कि उसका करियर प्रगति करे, सफलता की ऊंचाइयों को छुए। लेकिन अक्सर, राह में कई बाधाएं आती हैं – असफलताएं, निराशाएं, अवसरों की कमी, और कड़ी मेहनत के बावजूद अपेक्षित परिणाम न मिलना। ऐसे समय में, जब सारे…

श्री गणेश सहस्त्रनाम (Shri Ganesh Sahastranam PDF Book)

श्री गणेश सहस्त्रनाम (Shri Ganesh Sahastranam)

श्री गणेश सहस्त्रनाम भगवान गणेश के हजार नामों का अद्भुत संकलन है, जिसे पंडित गोविंद दत्त शर्मा जी ने लिखा है। यह पुस्तक भगवान गणेश के उन अनगिनत स्वरूपों और गुणों का वर्णन करती है, जो उनकी दिव्यता और शक्ति को प्रकट करते हैं। सहस्त्रनाम का पाठ भगवान गणेश की कृपा पाने और जीवन में…

श्री गणेश सहस्त्रनामावली (Shri Ganesh Sahasranamavali PDF)

श्री गणेश सहस्त्रनामावली (Shri Ganesh Sahasranamavali)

श्री गणेश सहस्त्रनामावली भगवान गणेश की महिमा की अद्भुत पुस्तक है, जिसे पंडित खेमा राज कृष्णदास जी ने लिखा है। यह पुस्तक भगवान गणेश के हजार नामों (सहस्त्रनाम) का संग्रह है, जो उनकी अनंत शक्तियों, गुणों और दिव्यता को प्रकट करते हैं। यह ग्रंथ भगवान गणेश के भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और प्रेरणादायक है।…

श्रीमहा-गणपति वरिवस्या (Shri Mahaganpati Varivasya)

श्रीमहा-गणपति वरिवस्या (Shri Mahaganpati Varivasya)

श्रीमहागणपति वरिवस्या भारतीय तांत्रिक और वैदिक परंपरा का एक अद्भुत ग्रंथ है, जिसकी रचना दत्तात्रेय जी ने की है। यह पुस्तक भगवान श्रीमहागणपति (गणेश जी) की उपासना और साधना की गूढ़ विधियों को उजागर करती है। इसमें भगवान गणपति के तांत्रिक स्वरूप और उनकी विशेष उपासना पद्धतियों का विस्तार से वर्णन है, जो साधकों को…

गणेश पुराण (Ganesh Puran)

गणेश पुराण (Ganesh Puran)

गणेश पुराण हिंदू धर्म के 18 प्रमुख पुराणों में से एक है, जिसमें भगवान गणेश की महिमा, उनके जीवन की कथाएँ, और उनकी उपासना से संबंधित गूढ़ ज्ञान का वर्णन किया गया है। यह पुराण दो खंडों में विभाजित है: उपासना खंड और क्रीड़ा खंड। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, शुभकर्ता और ज्ञान का प्रतीक माना…

गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi Book PDF)

गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi)

गणेश चतुर्थी नामक पुस्तक भगवान श्री गणेश की पूजा, व्रत विधि, कथा और उनके प्रति भक्तिभाव को समर्पित है। इस पुस्तक में गणेश चतुर्थी से संबंधित सभी प्रमुख जानकारियाँ दी गई हैं, जैसे व्रत का महत्व, पूजा विधि, गणेश चतुर्थी की कथाएँ और हर साल की गणेश चतुर्थी तिथियों की सूची। यह पुस्तक श्रद्धालुओं के…

श्री गणेश अष्टोत्तर शतनामावली

|| गणेश अष्टोत्तर शतनामावली (Ganesha Ashtottara Shatanamavali PDF) || ॐ गजाननाय नमः ॐ गणाध्यक्षाय नमः ॐ विघ्नाराजाय नमः ॐ विनायकाय नमः ॐ द्त्वॆमातुराय नमः ॐ द्विमुखाय नमः ॐ प्रमुखाय नमः ॐ सुमुखाय नमः ॐ कृतिने नमः ॐ सुप्रदीपाय नमः (10) ॐ सुखनिधये नमः ॐ सुराध्यक्षाय नमः ॐ सुरारिघ्नाय नमः ॐ महागणपतये नमः ॐ मान्याय नमः…

ऋषि पंचमी आरती

|| ऋषि पंचमी आरती (Rishi Panchami Aarti Hindi PDF) || श्री हरि हर गुरु गणपति, सबहु धरि ध्यान। मुनि मंडल श्रृंगार युक्त, श्री गौतम करहुँ बखान।। ॐ जय गौतम त्राता, स्वामी जी गौतम त्राता । ऋषिवर पूज्य हमारे, मुद मंगल दाता।। ॐ जय गौतम त्राता…. द्विज कुल कमल दिवाकर, परम् न्याय कारी। जग कल्याण करन…

श्री गणपति आरती

|| श्री गणपति आरती (Ganpati Aarti PDF) || गणपति की सेवा मंगल मेवा, सेवा से सब विघ्न टरैं। तीन लोक के सकल देवता, द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा…। रिद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विराजें, अरु आनन्द सों चमर करैं। धूप-दीप अरू लिए आरती भक्त खड़े जयकार करैं॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा…। गुड़…

श्री गणपति अथर्वशीर्ष स्तोत्रम हिन्दी पाठ अर्थ सहित (विधि – लाभ)

|| गणपति अथर्वशीर्ष पाठ विधि – लाभ || गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ हमेशा आसन पर बैठ पूर्व, उत्तर या ईशान कोण की दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। अथर्वशीर्ष स्तोत्र के पाठ से मनुष्य के जीवन में सर्वांगीण उन्नति होती है। इसके पाठ से सभी प्रकार के विघ्न-बाधाएं दूर होती है। व्यापार या नौकरी…

विनायक चतुर्थी व्रत कथा

|| विनायक चतुर्थी व्रत कथा (Vinayak Chaturthi Vrat Katha PDF) || विनायक चतुर्थी की व्रत कथा का वर्णन अनेक पुराणों में मिलता है, विशेषतः यह कथा भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी से जुड़ी हुई है। शिव-पार्वती का चौपड़ खेल और बालक का निर्णय एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नर्मदा नदी के…

गजबदन विनायक आरती

|| गजबदन विनायक आरती (Gajaban Vinayak Aarti PDF) || आरती गजबदन विनायककी। सुर-मुनि-पूजित गणनायककी॥ आरती गजबदन विनायककी॥ एकदन्त शशिभाल गजानन, विघ्नविनाशक शुभगुण कानन। शिवसुत वन्द्यमान-चतुरानन, दुःखविनाशक सुखदायक की॥ आरती गजबदन विनायककी॥ ऋद्धि-सिद्धि-स्वामी समर्थ अति, विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति। अघ-वन-दहन अमल अबिगत गति, विद्या-विनय-विभव-दायककी॥ आरती गजबदन विनायककी॥ पिङ्गलनयन, विशाल शुण्डधर, धूम्रवर्ण शुचि वज्रांकुश-कर। लम्बोदर बाधा-विपत्ति-हर, सुर-वन्दित…

सिद्धि विनायक स्तोत्र

|| सिद्धि विनायक स्तोत्र (Siddhi Vinayak Stotram PDF) || विघ्नेश विघ्नचयखण्डननामधेय श्रीशङ्करात्मज सुराधिपवन्द्यपाद। दुर्गामहाव्रतफलाखिलमङ्गलात्मन् विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम्। सत्पद्मरागमणिवर्णशरीरकान्तिः श्रीसिद्धिबुद्धिपरिचर्चितकुङ्कुमश्रीः। दक्षस्तने वलियितातिमनोज्ञशुण्डो विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम्। पाशाङ्कुशाब्जपरशूंश्च दधच्चतुर्भि- र्दोर्भिश्च शोणकुसुमस्रगुमाङ्गजातः। सिन्दूरशोभितललाटविधुप्रकाशो विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम्। कार्येषु विघ्नचयभीतविरिञ्चिमुख्यैः संपूजितः सुरवरैरपि मोहकाद्यैः। सर्वेषु च प्रथममेव सुरेषु पूज्यो विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम्। शीघ्राञ्चनस्खलनतुङ्गरवोर्ध्वकण्ठ- स्थूलेन्दुरुद्रगणहासितदेवसङ्घः। शूर्पश्रुतिश्च पृथुवर्त्तुलतुङ्गतुन्दो विघ्नं ममापहर…

श्री सिद्धिविनायक आरती: जय देव जय देव

|| श्री सिद्धिविनायक आरती -जय देव जय देव (Siddhivinayak Aarti PDF) || सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची । नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची । सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची । कंठी झलके माल मुकताफळांची । जय देव जय देव.. जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति । दर्शनमात्रे मनः, कामना पूर्ति जय देव जय देव…

गुप्त नवरात्र का रहस्य – साधकों के लिए खुलते हैं अदृश्य सिद्धियों के द्वार

navdurga

नवरात्रि, मां दुर्गा की उपासना का महापर्व, साल में दो बार धूमधाम से मनाया जाता है – चैत्र और शारदीय नवरात्रि। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दो प्रसिद्ध नवरात्रियों के अलावा भी दो और नवरात्रि होती हैं, जिन्हें ‘गुप्त नवरात्रि’ कहा जाता है? इन नवरात्रियों का महत्व (significance) कम नहीं, बल्कि कई मायनों…

अम्बे गौरी की आरती

अम्बे गौरी, जिन्हें दुर्गा और पार्वती के रूप में भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक प्रमुख देवी हैं। वह शक्ति और मातृ शक्ति का प्रतीक हैं। अम्बे गौरी को अक्सर शेर पर सवार, अष्टभुजाओं वाली और विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए दर्शाया जाता है। उन्हें ब्रह्मांड की रक्षक, बुराई का नाश…

तुलसी माता की आरती

हिंदू धर्म में तुलसी माता को अत्यधिक पूजनीय माना जाता है। इन्हें भगवान विष्णु की पत्नी देवी वृंदा का ही रूप माना जाता है। तुलसी का पौधा हर हिंदू घर में पाया जाता है और इसकी नियमित पूजा की जाती है। माना जाता है कि तुलसी की पूजा करने से घर में सुख, शांति और…

श्री विश्वकर्मा आरती

श्री विश्वकर्मा’ सृष्टि के महान वास्तुकार, देवता और शिल्पकार हैं। हिंदू धर्म में उन्हें सभी यंत्रों, कलाओं और विज्ञान के जनक के रूप में पूजा जाता है। यह माना जाता है कि उन्होंने ब्रह्मा के कहने पर सृष्टि के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। देवताओं के लिए महलों, अस्त्रों और रथों का निर्माण करने…

पिठोरी अमावस्या व्रत 2025 – जानिए पोलाला अमावस्या व्रत का महत्व, नियम और पूजा विधान

Polala-Amavasya

साल 2025 में पिठोरी अमावस्या 22 अगस्त, शुक्रवार को पड़ रही है। भाद्रपद मास की इस अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन देवी दुर्गा की पूजा करने से संतान से जुड़ी सभी मनोकामनाएं…

प्रदक्षिणा का महत्व – मंदिरों में परिक्रमा क्यों होती है जरूरी? जानिए किस देवता की कितनी परिक्रमा है आवश्यक

mandir parikarma

हिंदू धर्म में पूजा-अर्चना के साथ-साथ परिक्रमा का भी विशेष महत्व है। इसे प्रदक्षिणा भी कहा जाता है। मंदिर या देव प्रतिमा के चारों ओर घूमकर पूजा-अर्चना करने की प्रक्रिया को परिक्रमा कहते हैं। परिक्रमा को आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करने और जीवन के चक्र को समझने का एक माध्यम माना गया है। भारतीय संस्कृति…

श्री शान्तिनाथ चालीसा

भगवान शांतिनाथ जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर हैं। उनकी पूजा और चालीसा का पाठ भक्तों के जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि लाता है। श्री शान्तिनाथ चालीसा का पाठ करने से मन शांत होता है, नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस चालीसा में भगवान शांतिनाथ के गुणों,…

श्री महावीर चालीसा

प्रभु महावीर का जीवन और उपदेश आज भी हमारे लिए प्रेरणा स्रोत हैं। श्री महावीर चालीसा के माध्यम से हम उनकी महिमा का गुणगान करते हैं और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। यह चालीसा हमें त्याग, तपस्या, अहिंसा और सत्य के महत्व को समझाती है। इसे पढ़कर मन में शांति, धैर्य…

श्री जगन्नाथ चालीसा

श्री जगन्नाथ चालीसा भगवान जगन्नाथ को समर्पित एक भक्तिमय स्तोत्र है। इसमें 40 छंद हैं जो भगवान की महिमा, लीलाओं और अद्भुत शक्तियों का वर्णन करते हैं। चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह चालीसा भगवान जगन्नाथ के भक्तों के लिए एक शक्तिशाली माध्यम है, जिसके…

श्री गोपाल चालीसा

यह चालीसा भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप, गोपाल जी को समर्पित है। इसका पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है। यह चालीसा भक्तों को भगवान गोपाल की कृपा का अनुभव कराती है, जिससे उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। || श्री…

श्री शारदा चालीसा

सरस्वती माता को समर्पित श्री शारदा चालीसा, एक शक्तिशाली और भक्तिपूर्ण प्रार्थना है। यह चालीसा माता शारदा की महिमा और कृपा का गुणगान करती है। इसका पाठ करने से भक्तों को विद्या, बुद्धि, कला और ज्ञान की प्राप्ति होती है। यह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और उत्कृष्टता प्राप्त करने में सहायता करती है।…

श्री बालाजी चालीसा – मेहंदीपुर

मेहंदीपुर बालाजी, जिन्हें भगवान हनुमान का एक शक्तिशाली अवतार माना जाता है, राजस्थान के दौसा जिले में स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यह स्थान अपनी चमत्कारी शक्तियों के लिए जाना जाता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो नकारात्मक शक्तियों या बुरी आत्माओं से पीड़ित हैं। श्री बालाजी चालीसा का पाठ करने से भक्तगण भगवान…

पितर चालीसा

पितर चालीसा का पाठ पितरों की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन माना जाता है। हमारे पूर्वजों का आशीर्वाद जीवन में सुख, समृद्धि और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। जो साधक श्रद्धा और भक्ति से पितर चालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन से पितृदोष दूर होता है और परिवार में शांति स्थापित होती…

श्री नवग्रह चालीसा

श्री नवग्रह चालीसा नौ ग्रहों को समर्पित एक शक्तिशाली भक्ति गीत है। इसमें सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु की स्तुति की गई है। यह चालीसा हर ग्रह के गुणों और महत्व का वर्णन करती है और उनसे आशीर्वाद और कृपा की प्रार्थना करती है। || श्री नवग्रह चालीसा (Navagrah Chalisa…

श्री कुन्थनाथ चालीसा

श्री कुन्थनाथ चालीसा भगवान कुन्थनाथ, जैन धर्म के 17वें तीर्थंकर, को समर्पित एक भक्तिमय पाठ है। इसका पाठ करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति, मानसिक स्थिरता और जीवन में सकारात्मकता की प्राप्ति होती है। यह चालीसा भगवान कुन्थनाथ के गुणों और शिक्षाओं का स्मरण कराती है, जिससे व्यक्ति के भीतर धर्म और सदाचार के प्रति…

श्री प्रेतराज चालीसा

जय जय प्रेतराज बलवंता, जन-कल्याण हेतु संता। यह पंक्ति श्री प्रेतराज चालीसा का सार है, जो भगवान श्री प्रेतराज की महिमा का गुणगान करती है। यह चालीसा उन लोगों के लिए एक शक्तिशाली और प्रभावी भक्तिपूर्ण पाठ है जो भूत-प्रेत बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक कष्टों से पीड़ित हैं। श्री प्रेतराज चालीसा का नियमित पाठ…

श्री यमुना चालीसा

यमुना चालीसा का पाठ करने से माँ यमुना की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह चालीसा पापों का नाश करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है। || श्री यमुना चालीसा (Yamuna Chalisa PDF) || ॥ दोहा ॥ प्रियसंग क्रीड़ा करत नित, सुखनिधि वेद को सार। दरस परस…

श्री रविदास चालीसा

श्री रविदास चालीसा को संत रविदास की महिमा, शिक्षाओं और जीवन को याद करने का एक सशक्त माध्यम माना जाता है। यह चालीस चौपाइयों का एक संग्रह है, जो उनके आध्यात्मिक ज्ञान, सामाजिक समरसता और भक्ति भाव को दर्शाता है। संत रविदास, जिन्हें गुरु रविदास के नाम से भी जाना जाता है, ने अपने दोहों…

श्री गिरिराज चालीसा

गोवर्धन पर्वत, जिन्हें गिरिराज महाराज भी कहा जाता है, भगवान श्रीकृष्ण के लीलाधाम हैं। गिरिराज चालीसा उनके महिमा और गुणों का वर्णन करती है। यह चालीस चौपाइयों का एक भक्तिमय स्तोत्र है, जिसके पाठ से गोवर्धन पर्वत की कृपा प्राप्त होती है। चालीसा का पाठ भक्तों को जीवन की बाधाओं से मुक्ति दिलाता है और…

श्री पार्शवनाथ चालीसा

श्री पार्शवनाथ चालीसा एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है जो जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर, भगवान पार्शवनाथ को समर्पित है। यह चालीस चौपाइयों का संग्रह है जो भगवान की महिमा, गुणों और शिक्षाओं का वर्णन करता है। चालीसा का पाठ करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति, मानसिक स्थिरता और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती…

श्री नमिनाथ चालीसा

नमिनाथ चालीसा का पाठ भक्तों के लिए शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। जैन धर्म के २१वें तीर्थंकर, भगवान नमिनाथ, अहिंसा और तपस्या के प्रतीक हैं। इस चालीसा का पाठ करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मन को एकाग्रता मिलती है। यह चालीसा भगवान नमिनाथ के गुणों का…

श्री वासुपूज्य चालीसा

श्री वासुपूज्य चालीसा के पाठ की एक विशेष विधि है, जिसका पालन करने से साधक को अधिकतम लाभ प्राप्त होता है। यहां हम आपको इसकी सही विधि और इसके पाठ से होने वाले लाभों के बारे में बता रहे हैं। || श्री वासुपूज्य चालीसा (Vasupujy Chalisa PDF) || ।। दोहा ।। वासु पूज्य महाराज का…

श्री विमलनाथ चालीसा

श्री विमलनाथ चालीसा जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर भगवान विमलनाथ को समर्पित एक भक्तिमय पाठ है। यह चालीसा 40 छंदों का एक संग्रह है, जो भगवान विमलनाथ के जीवन, उनके गुणों और उनकी शिक्षाओं का वर्णन करता है। इस चालीसा का पाठ करने से मन को शांति, शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। || श्री…

श्री अजितनाथ चालीसा

श्री अजितनाथ चालीसा, जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर, भगवान अजितनाथ को समर्पित एक शक्तिशाली पाठ है। इसमें 40 छंद हैं, जो भगवान के जीवन, उपदेशों और महिमा का वर्णन करते हैं। चालीसा का पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह दुख, भय और संकटों को दूर करता है। यह एक…

श्री सुमतिनाथ चालीसा

श्री सुमतिनाथ चालीसा का पाठ करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है। यह चालीसा जैन धर्म के पांचवें तीर्थंकर, भगवान सुमतिनाथ को समर्पित है। इसका नियमित पाठ करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और आत्म-विश्वास में वृद्धि होती है। यह चालीसा विशेष रूप से…

श्री शीतलनाथ चालीसा

श्री शीतलनाथ चालीसा के पाठ से जीवन में शीतलता, शांति और स्थिरता आती है। भगवान शीतलनाथ जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर हैं, जिनका नाम ही शीतलता का प्रतीक है। उनकी चालीसा का पाठ करने से मन शांत होता है, क्रोध और अहंकार दूर होता है। यह चालीसा भक्तों को मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाकर जीवन…

श्री बड़े बाबा कुण्डलपुर चालीसा

बड़े बाबा के नाम से प्रसिद्ध, भगवान आदिनाथ दिगम्बर जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। उनका जन्म अयोध्या में इक्ष्वाकु वंश में हुआ था और वे राजा नाभिराज और रानी मरुदेवी के पुत्र थे। जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में उनका स्थान सबसे प्रमुख है। || श्री बड़े बाबा कुण्डलपुर चालीसा (Bade Baba Kundalpur Chalisa…

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