ईश्वर और उसकी अनुभूति (Ishwar Aur Uski Anubhuti)

ईश्वर और उसकी अनुभूति (Ishwar Aur Uski Anubhuti)

पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित “ईश्वर और उसकी अनुभूति” एक ऐसा प्रेरणादायक ग्रंथ है, जो अध्यात्म की गहराइयों में उतरने और ईश्वर के साथ आत्मिक संबंध स्थापित करने का मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह पुस्तक उन जिज्ञासुओं और साधकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जो ईश्वर की अनुभूति को अपने जीवन का…

Sandhyaa Rahasya (संध्या रहस्य)

Sandhyaa Rahasya (संध्या रहस्य)

संध्या रहस्य एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक ग्रंथ है, जिसमें संध्या वंदन की विधियों और इसके गूढ़ रहस्यों का वर्णन किया गया है। संध्या वंदन एक प्राचीन वैदिक अनुष्ठान है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और आवश्यक माना गया है। यह पुस्तक संध्या वंदन के महत्व, इसके विभिन्न चरणों, और इसके पीछे छिपे आध्यात्मिक अर्थों का…

Ved Saurabh (वेद सौरभ)

Ved Saurabh (वेद सौरभ)

वेद सौरभ एक महत्वपूर्ण धार्मिक और दार्शनिक ग्रंथ है, जिसमें वेदों के सार को सरल और संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह ग्रंथ उन लोगों के लिए एक मार्गदर्शक है जो वेदों के ज्ञान को समझने और उनका पालन करने की इच्छा रखते हैं। वेद सौरभ वेदों के गूढ़ ज्ञान को सरल भाषा…

षष्ठी देवी स्तोत्रम्

॥ श्री षष्ठी देवि स्तोत्रम् का महत्व ॥ जिन दंपत्तियों को संतान सुख प्राप्त करने में बाधा होती है, उन्हें नवरात्रि के दौरान दोनों समय (सुबह और शाम) माता षष्ठी के स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। नवरात्रि के पहले दिन संतान प्राप्ति की कामना से शालिग्राम शिला, कलश, वटवृक्ष के मूल या दीवार पर लाल…

नागा सन्यासियों का इतिहास (Naga Sanyasiyon Ka Itihas)

नागा सन्यासियों का इतिहास (Naga Sanyasiyon Ka Itihas)

‘नागा सन्यासियों का इतिहास’ अशोक त्रिपाठी द्वारा लिखित एक अद्भुत और गहन शोधपूर्ण पुस्तक है, जो भारत के नागा सन्यासियों के अद्वितीय इतिहास, परंपराओं और धार्मिक योगदानों पर प्रकाश डालती है। यह पुस्तक भारतीय सनातन धर्म और इसकी तपस्वी परंपरा के महत्वपूर्ण पक्ष को समझने का एक अनमोल माध्यम है। नागा सन्यासियों का इतिहास पुस्तक…

प्रथम दीक्षा (Pratham Diksha)

प्रथम दीक्षा (Pratham Diksha)

‘प्रथम दीक्षा’ सतीसर फाउंडेशन द्वारा रचित एक प्रेरणादायक पुस्तक है, जो आत्मज्ञान, जीवन की आंतरिक यात्रा और आध्यात्मिकता के मूल सिद्धांतों पर आधारित है। यह पुस्तक विशेष रूप से उन लोगों के लिए है, जो आध्यात्मिक मार्ग पर पहला कदम रखना चाहते हैं और जीवन के गहरे रहस्यों को समझने की इच्छा रखते हैं। प्रथम…

Vedant Darshan (वेदांत दर्शन)

Vedant Darshan (वेदांत दर्शन)

वेदांत दर्शन पुस्तक भारतीय दार्शनिक परंपरा के महत्वपूर्ण पहलू वेदांत के सिद्धांतों और शिक्षाओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। वेदांत दर्शन भारतीय दर्शन का एक प्रमुख अंग है, जो वेदों के अंतिम भाग, उपनिषदों, पर आधारित है। यह पुस्तक उन सभी के लिए एक मार्गदर्शिका है जो वेदांत के गूढ़ सिद्धांतों को समझना चाहते…

Chanakya Sutrani (चाणक्य सूत्राणी)

Chanakya Sutrani (चाणक्य सूत्राणी)

चाणक्य सूत्राणी महान विद्वान और राजनीतिज्ञ चाणक्य द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य के गुरु और सलाहकार थे। उनकी रचनाएँ, विशेष रूप से चाणक्य सूत्राणी और अर्थशास्त्र, राजनीति, अर्थव्यवस्था और राज्य प्रशासन के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण…

नित्य पारायण स्तोत्रम्

॥ नित्य पारायण स्तोत्रम् ॥ प्रभात श्लोकः कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । करमूले स्थिता गौरी प्रभाते करदर्​शनम् ॥ करमूले तु गोविंदः प्रभाते करदर्​शनम् ॥ प्रभात भूमि श्लोकः समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडले । विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं, पादस्पर्​शं क्षमस्वमे ॥ सूर्योदय श्लोकः ब्रह्मस्वरूप मुदये मध्याह्नेतु महेश्वरम् । साहं ध्यायेत्सदा विष्णुं त्रिमूर्तिं च दिवाकरम् ॥ स्नान…

श्री रामचन्द्राष्टकम्

॥ श्री रामचन्द्राष्टकम् ॥ चिदाकारो धातापरमसुखदः पावन- तनुर्मुनीन्द्रैर्यो-गीन्द्रैर्यतिपतिसुरेन्द्रैर्हनुमता। सदा सेव्यः पूर्णोजनकतनयाङ्गः सुरगुरू रमानाथो रामो रमतुमम चित्ते तु सततम्॥ मुकुन्दो गोविन्दोजनकतनयालालितपदः पदं प्राप्तायस्याधमकुलभवा चापि शबरी। गिरातीतोऽगम्योविमलधिषणैर्वेदवचसा रमानाथो रामो रमतुमम चित्ते तु सततम्॥ धराधीशोऽधीशःसुरनरवराणां रघुपतिः किरीटी केयूरीकनककपिशः शोभितवपुः। समासीनः पीठेरविशतनिभे शान्तमनसो रमानाथो रामो रमतुमम चित्ते तु सततम्॥ वरेण्यः शारण्यःकपिपतिसखश्चान्तविधुरो ललाटे काश्मीरोरुचिरगतिभङ्गः शशिमुखः। नराकारो रामोयतिपतिनुतः संसृतिहरो रमानाथो रामो…

श्री राम प्रेमाष्टकम्

॥ श्री रामप्रेमाष्टकम् ॥ श्यामाम्बुदाभमरविन्दविशालनेत्रं बन्धूकपुष्पसदृशाधरपाणिपादम्। सीतासहायमुदितं धृतचापबाणं रामं नमामि शिरसा रमणीयवेषम्॥ पटुजलधरधीरध्वानमादाय चापं पवनदमनमेकं बाणमाकृष्य तूणात्। अभयवचनदायी सानुजः सर्वतो मे रणहतदनुजेन्द्रो रामचन्द्रः सहायः॥ दशरथकुलदीपोऽमेयबाहुप्रतापो दशवदनसकोपः क्षालिताशेषपापः। कृतसुररिपुतापो नन्दितानेकभूपो विगततिमिरपङ्को रामचन्द्रः सहायः॥ कुवलयदलनीलः कामितार्थप्रदो मे कृतमुनिजनरक्ष रक्षसामे कहन्ता। अपहृतदुरितोऽसौ नाममात्रेण पुंसामखिल- सुरनृपेन्द्रो रामचन्द्रः सहायः॥ असुरकुलकृशानुर्मानसाम्भोजभानुः सुरनरनिकराणामग्रणीर्मे रघूणाम्। अगणितगुणसीमा नीलमेघौघधामा शमदमितमुनीन्द्रो रामचन्द्रः सहायः॥ कुशिकतनययागं रक्षिता लक्ष्मणाढ्यः…

श्री रामाष्टकम्

॥ श्री रामाष्टकम् ॥ कृतार्तदेववन्दनंदिनेशवंशनन्दनम्। सुशोभिभालचन्दनंनमामि राममीश्वरम्॥ मुनीन्द्रयज्ञकारकंशिलाविपत्तिहारकम्। महाधनुर्विदारकंनमामि राममीश्वरम्॥ स्वतातवाक्यकारिणंतपोवने विहारिणम्। करे सुचापधारिणंनमामि राममीश्वरम्॥ कुरङ्गमुक्तसायकंजटायुमोक्षदायकम्। प्रविद्धकीशनायकंनमामि राममीश्वरम्॥ प्लवङ्गसङ्गसम्मतिंनिबद्धनिम्नगापतिम्। दशास्यवंशसङ्क्षतिंनमामि राममीश्वरम्॥ विदीनदेवहर्षणंकपीप्सितार्थवर्षणम्। स्वबन्धुशोककर्षणंनमामि राममीश्वरम्॥ गतारिराज्यरक्षणंप्रजाजनार्तिभक्षणम्। कृतास्तमोहलक्षणंनमामि राममीश्वरम्॥ हृताखिलाचलाभरंस्वधामनीतनागरम्। जगत्तमोदिवाकरंनमामि राममीश्वरम्॥ इदं समाहितात्मनानरो रघूत्तमाष्टकम्। पठन्निरन्तरं भयंभवोद्भवं न विन्दते॥ ॥ इति श्री रामाष्टकं सम्पूर्णम् ॥

श्री सीताराम आरती

॥ श्री सीताराम आरती ॥ आसपास सखियाँ सुख दैनी, सजि नव साज सिन्गार सुनैनी, बीन सितार लिएँ पिकबैनी, गाइ सुराग सुनाओ॥ गाओ गाओ री, प्रियाप्रीतम की आरती गाओ। अनुपम छबि धरि दन्पति राजत, नील पीत पट भूषन भ्राजत, निरखत अगनित रति छबि लाजत, नैनन को फल पाओ॥ गाओ गाओ री, प्रियाप्रीतम की आरती गाओ। नीरज…

मंत्र शक्ति के अद्भुत चमत्कार (Mantra Shakti Ke Adbhut Chamatkar)

मंत्र शक्ति के अद्भुत चमत्कार (Mantra Shakti Ke Adbhut Chamatkar)

‘मंत्र शक्ति के अद्भुत चमत्कार’ एक प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक पुस्तक है, जिसे प्रख्यात लेखक डॉ. चमनलाल गौतम ने लिखा है। यह पुस्तक मंत्रों की शक्ति, उनकी उपयोगिता और उनके चमत्कारिक प्रभावों के बारे में विस्तार से चर्चा करती है। यह ग्रंथ उन पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जो आध्यात्मिक साधना, मंत्र विज्ञान…

मध्यसिद्धान्तकौमुदी (Madhyasiddhantakaumudi)

मध्यसिद्धान्तकौमुदी (Madhyasiddhantakaumudi)

‘मध्यसिद्धान्तकौमुदी’ संस्कृत व्याकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसे प्रख्यात विद्वान श्री विष्णुनाथ ने रचा है। यह ग्रंथ संस्कृत भाषा के व्याकरणिक सिद्धांतों को सहज और सरल रूप में प्रस्तुत करता है। यह पाणिनि के अष्टाध्यायी और भट्टोजि दीक्षित की सिद्धान्तकौमुदी के बीच एक सेतु का कार्य करता है, जिससे जटिल व्याकरणिक नियमों…

रहस्य लीलाएं (Rahasya Leelaa)

रहस्य लीलाएं (Rahasya Leelaa)

‘रहस्य लीलाएं’ पुस्तक, लेखिका राजेश्वरी शंकर द्वारा रचित एक अद्भुत और रहस्यमयी कृति है। यह पुस्तक मानव जीवन के गूढ़ पहलुओं और ब्रह्मांडीय रहस्यों पर प्रकाश डालती है। इसमें रहस्यमय घटनाओं, अदृश्य शक्तियों और अद्भुत अनुभवों को रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है, जो पाठकों को गहराई तक प्रभावित करती है। रहस्य लीलाएं पुस्तक…

मंत्र प्रयोग (Mantra Prayog)

मंत्र प्रयोग (Mantra Prayog)

“मंत्र प्रयोग” पुस्तक मंत्र विद्या के रहस्यों और उसके प्रभावी उपयोग पर केंद्रित एक गहन और उपयोगी ग्रंथ है। सिद्ध बाबा औघड़नाथ द्वारा लिखित यह पुस्तक प्राचीन भारतीय तंत्र-मंत्र शास्त्र की अमूल्य धरोहरों को सरल और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए एक मार्गदर्शिका है जो मंत्र शक्ति का…

सरयु के तट (Sarayu Ke Tat)

सरयु के तट (Sarayu Ke Tat)

‘सरयु के तट’ भारतीय संस्कृति और साहित्य का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो अयोध्या और सरयु नदी की महत्ता, इतिहास, और सांस्कृतिक परंपराओं को खूबसूरती से चित्रित करता है। इस पुस्तक के माध्यम से लेखक राजेंद्र पाण्डेय और हरिनाथ प्रसाद वर्मा ने न केवल अयोध्या की धार्मिक और ऐतिहासिक गाथाओं को प्रस्तुत किया है, बल्कि…

आत्म रामायण (Aatma Ramayan)

आत्म रामायण (Aatma Ramayan)

आत्म रामायण श्री रामहर्षण दास जी द्वारा रचित एक अनुपम और आध्यात्मिक ग्रंथ है। यह पुस्तक भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों, और उनके चरित्र की गहन व्याख्या प्रस्तुत करती है। यह रामायण का एक विशेष संस्करण है, जिसमें भगवान राम को न केवल मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में बल्कि आत्मा के परम सत्य और…

श्री यमुनाष्टकम्

॥ श्री यमुनाष्टकम् ॥ नमामि यमुनामहं सकल सिद्धि हेतुं मुदा मुरारि पद पंकज स्फ़ुरदमन्द रेणुत्कटाम । तटस्थ नव कानन प्रकटमोद पुष्पाम्बुना सुरासुरसुपूजित स्मरपितुः श्रियं बिभ्रतीम ॥ कलिन्द गिरि मस्तके पतदमन्दपूरोज्ज्वला विलासगमनोल्लसत्प्रकटगण्ड्शैलोन्न्ता । सघोषगति दन्तुरा समधिरूढदोलोत्तमा मुकुन्दरतिवर्द्धिनी जयति पद्मबन्धोः सुता ॥ भुवं भुवनपावनीमधिगतामनेकस्वनैः प्रियाभिरिव सेवितां शुकमयूरहंसादिभिः । तरंगभुजकंकण प्रकटमुक्तिकावाकुका- नितन्बतटसुन्दरीं नमत कृष्ण्तुर्यप्रियाम ॥ अनन्तगुण भूषिते शिवविरंचिदेवस्तुते…

मदन मोहन अष्टकम

॥ मदन मोहन अष्टकम ॥ जय शङ्खगदाधर नीलकलेवर पीतपटाम्बर देहि पदम् । जय चन्दनचर्चित कुण्डलमण्डित कौस्तुभशोभित देहि पदम् ॥ जय पङ्कजलोचन मारविमोहन पापविखण्डन देहि पदम् । जय वेणुनिनादक रासविहारक वङ्किम सुन्दर देहि पदम् ॥ जय धीरधुरन्धर अद्भुतसुन्दर दैवतसेवित देहि पदम् । जय विश्वविमोहन मानसमोहन संस्थितिकारण देहि पदम् ॥ जय भक्तजनाश्रय नित्यसुखालय अन्तिमबान्धव देहि पदम् ।…

श्री दक्षिणामूर्ति अष्टकम

॥ श्री दक्षिणामूर्ति अष्टकम ॥ विश्वं दर्पणदृश्यमाननगरीतुल्यं निजान्तर्गतं पश्यन्नात्मनि मायया बहिरिवोद्भूतं यथा निद्रया । यः साक्षात्कुरुते प्रबोधसमये स्वात्मानमेवाद्वयं तस्मै श्रीगुरुमूर्तये नम इदं श्रीदक्षिणामूर्तये ॥ बीजस्यान्तरिवाङ्कुरो जगदिदं प्राङ्निर्विकल्पं पुन- र्मायाकल्पितदेशकाल कलनावैचित्र्यचित्रीकृतम् । मायावीव विजृम्भयत्यपि महायोगीव यः स्वेच्छया तस्मै श्रीगुरुमूर्तये नम इदं श्रीदक्षिणामूर्तये ॥ यस्यैव स्फुरणं सदात्मकमसत्कल्पार्थगं भासते साक्षात्तत्त्वमसीति वेदवचसा यो बोधयत्याश्रितान् । यत्साक्षात्करणाद्भवेन्न पुनरावृत्तिर्भवाम्भोनिधौ तस्मै श्रीगुरुमूर्तये…

श्री रुद्राष्टकम्

॥ श्रीरुद्राष्टकम् ॥ नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् । करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् । स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्…

मधुराष्टकम्

॥ मधुराष्टकम् ॥ अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं । हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥ वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरं । चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥ वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ । नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥ गीतं मधुरं पीतं मधुरं…

श्री युगलाष्टकम्

॥ युगलाष्टकम् ॥ कृष्णप्रेममयी राधा राधाप्रेम मयो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम् ॥ कृष्णस्य द्रविणं राधा राधायाः द्रविणं हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम् ॥ कृष्णप्राणमयी राधा राधाप्राणमयो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम् ॥ कृष्णद्रवामयी राधा राधाद्रवामयो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम् ॥ कृष्ण गेहे स्थिता राधा राधा गेहे स्थितो हरिः ।…

श्री कृष्णाष्टकम्

॥ श्री कृष्णाष्टकम् ॥ भजे व्रजैक मण्डनम्, समस्त पाप खण्डनम्, स्वभक्त चित्त रञ्जनम्, सदैव नन्द नन्दनम्, सुपिन्छ गुच्छ मस्तकम् , सुनाद वेणु हस्तकम् , अनङ्ग रङ्ग सागरम्, नमामि कृष्ण नागरम् ॥ मनोज गर्व मोचनम् विशाल लोल लोचनम्, विधूत गोप शोचनम् नमामि पद्म लोचनम्, करारविन्द भूधरम् स्मितावलोक सुन्दरम्, महेन्द्र मान दारणम्, नमामि कृष्ण वारणम् ॥ कदम्ब…

आदि – धर्म सनातन – धर्म (Adi-Dharma Sanatan-Dharma)

आदि - धर्म सनातन - धर्म (Adi-Dharma Sanatan-Dharma)

“आदि – धर्म सनातन – धर्म” स्वामी सनातन श्री द्वारा लिखित एक अद्वितीय पुस्तक है, जो सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों, परंपराओं और आदर्शों पर आधारित है। यह ग्रंथ उन आध्यात्मिक और दार्शनिक सिद्धांतों का विश्लेषण करता है, जो भारतीय संस्कृति और धर्म के आधारभूत स्तंभ हैं। स्वामी सनातन श्री ने इस पुस्तक में सनातन…

चतुर्वेद मन्त्र अनुक्रम सोचि (Chaturveda Mantra Anukram Soochi)

चतुर्वेद मन्त्र अनुक्रम सोचि (Chaturveda Mantra Anukram Soochi)

चतुर्वेद मन्त्र अनुक्रम सोचि – अर्जुन देव द्वारा रचित एक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है, जो चारों वेदों के मंत्रों के अनुक्रम और उनके सार को समझाने का कार्य करता है। यह पुस्तक वेदों के अद्भुत मंत्रों का क्रमबद्ध संग्रह है और वेदों के अध्ययन में रुचि रखने वाले साधकों एवं विद्वानों के लिए एक अमूल्य साधन…

श्री कालभैरवाष्टक स्तोत्रम् अर्थ सहित

॥ कालभैरवाष्टकम् स्तोत्र पाठ विधि ॥ प्रात: काल सबसे पहले स्नान आदि करके शिवलिंग का दूध और जल से अभिषेक करें। इसके बाद भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा समाप्त होने के बाद कालभैरवाष्टकम् स्तोत्र का जाप करें। ॥ कालभैरवाष्टकम् पाठ से लाभ ॥ प्रतिदिन कालभैरवाष्टकम् का जाप करने से जीवन का ज्ञान मिलता…

सामवेद सुभाषितावली (Samved Subhashitavali)

सामवेद सुभाषितावली (Samved Subhashitavali)

सामवेद सुभाषितावली डॉ. कपिलदेव द्विवेदी द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो हिन्दू धर्म के प्राचीन ग्रंथ सामवेद के गूढ़ अर्थों, संदेशों और शिक्षाओं का संकलन है। इस ग्रंथ में सामवेद के विभिन्न मंत्रों का संक्षिप्त, सरल और सहज व्याख्या की गई है। यह पुस्तक वेदों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत मूल्यवान…

ज्ञानमाला (Gyanmala)

ज्ञानमाला (Gyanmala)

ज्ञानमाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक पुस्तक है, जिसे खेेमराज श्रीकृष्णदास ने लिखा है। यह ग्रंथ हिन्दू धर्म के आध्यात्मिक सिद्धांतों, जीवन की गूढ़ रहस्यों, और आत्मज्ञान के मार्गदर्शन पर आधारित है। इस पुस्तक में संपूर्ण जीवन के उद्देश्यों, आध्यात्मिक प्रगति, और आत्म-साक्षात्कार के विभिन्न पहलुओं का विवरण मिलता है। ज्ञानमाला पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ…

लल्लु प्रकाश (Lallu Prakash)

लल्लु प्रकाश (Lallu Prakash)

पंडित प्रेम नाथ शास्त्री द्वारा रचित “लल्लु प्रकाश” एक गहन धार्मिक और आध्यात्मिक ग्रंथ है जो भारतीय धर्म, संस्कृति, और विशेष रूप से कश्मीर के संतों और उनके द्वारा स्थापित सिद्धांतों पर केंद्रित है। इस पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को संत-महात्माओं के विचारों और उपदेशों के माध्यम से आध्यात्मिक जागृति प्रदान करना है। लल्लु प्रकाश…

श्री वैष्णो देवी की सम्पूर्ण कहानी (Shri Vaishno Devi Ki Kahani)

श्री वैष्णो देवी की सम्पूर्ण कहानी (Shri Vaishno Devi Ki Kahani)

‘श्री वैष्णो देवी की सम्पूर्ण कहानी’ ज्वाला प्रसाद चतुर्वेदी द्वारा लिखित एक अद्वितीय पुस्तक है, जो मां वैष्णो देवी के दिव्य प्रकट होने की पौराणिक कथा, उनके चमत्कारी रूप और उनके उपासना स्थल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान करती है। यह पुस्तक भक्तों के लिए वैष्णो देवी की महिमा को…

वैदिक गणपति (Vedic Ganapati)

वैदिक गणपति (Vedic Ganapati)

मदन रहेजा द्वारा लिखित “वैदिक गणपति” एक अद्भुत पुस्तक है जो भगवान गणपति के वैदिक स्वरूप, उनकी महिमा, उपासना विधियों और उनसे जुड़ी वैदिक कथाओं पर केंद्रित है। यह पुस्तक उन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है जो गणपति की उपासना के माध्यम से अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त करना चाहते…

सुवर्णद्वीपीय रामकथा (Suvarnadwipiya Ramkatha)

सुवर्णद्वीपीय रामकथा (Suvarnadwipiya Ramkatha)

‘सुवर्णद्वीपीय रामकथा’ राजेंद्र मिश्रा द्वारा रचित एक अनोखी पुस्तक है, जो श्रीराम के जीवन पर आधारित कहानियों का एक विशिष्ट संग्रह प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें श्रीराम की कथा को दक्षिण-पूर्व एशिया के सुवर्णद्वीप, यानी आधुनिक इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड और आस-पास के क्षेत्रों में प्रचलित कथाओं और…

पितर हमारे अदृश्य सहायक (Pitar Hamare Adrushya Sahayak)

पितर हमारे अदृश्य सहायक (Pitar Hamare Adrushya Sahayak)

पितर हमारे अदृश्य सहायक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा लिखी गई एक अद्भुत पुस्तक है, जिसमें हमारे पूर्वजों या पितरों की भूमिका और उनके महत्व पर प्रकाश डाला गया है। यह पुस्तक समझाती है कि पितर केवल हमारे अतीत का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे हमारे जीवन में अदृश्य सहायक की भूमिका निभाते हैं। इस…

बिल्वाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्

|| बिल्वाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् || त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम् । त्रिजन्म पापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ १ ॥ त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च अच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः । तव पूजां करिष्यामि एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ २ ॥ सर्वत्रैलोक्यकर्तारं सर्वत्रैलोक्यपालनम् । सर्वत्रैलोक्यहर्तारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ३ ॥ नागाधिराजवलयं नागहारेण भूषितम् । नागकुण्डलसम्युक्तं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ४ ॥ अक्षमालाधरं रुद्रं पार्वतीप्रियवल्लभम् । चन्द्रशेखरमीशानं…

श्री काशी विश्वनाथ मंगल स्तोत्रम्

।। काशी विश्वनाथ मंगल स्तोत्र ।। ।। अथ श्रीविश्वनाथमङ्गलस्तोत्रम् ।। गङ्गाधरं शशिकिशोरधरं त्रिलोकी- रक्षाधरं निटिलचन्द्रधरं त्रिधारम् । भस्मावधूलनधरं गिरिराजकन्या- दिव्यावलोकनधरं वरदं प्रपद्ये ॥ अर्थ :- गंगा एवं बाल चन्द्र को धारण करने वाले, त्रिलोक की रक्षा करने वाले,मस्तक पर चन्द्रमा एवं त्रिधार (गंगा) -को धारण करने वाले, भस्म का उद्धूलन करने वाले तथा पार्वती को…

अथार्गलास्तोत्रम्

॥ अथार्गला स्तोत्रम् ॥ ॐ अस्य श्रीअर्गलास्तोत्रमन्त्रस्य विष्णुर्ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहालक्ष्मीर्देवता, श्रीजगदम्बाप्रीतये सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः॥ ॐ नमश्‍चण्डिकायै॥ मार्कण्डेय उवाच ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥ भावार्थ : ॐ चंडिका देवी को नमस्कार है। मार्कण्डेय जी कहते हैं – जयन्ती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री,…

गुरुपादुका स्तोत्रम् अर्थ सहित

।। गुरुपादुका स्तोत्रम् ।। अनंत-संसार समुद्र-तार नौकायिताभ्यां गुरुभक्तिदाभ्याम्। वैराग्य साम्राज्यद पूजनाभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ।। जिसका कहीं अंत नहीं है, ऐसे इस संसार सागर से जो तारने वाली नौका के समान हैं, जो गुरु की भक्ति प्रदान करती हैं, जिनके पूजन से वैराग्य रूपी आधिपत्य प्राप्त होता है, [मेरे] उन श्री गुरुदेव की पादुकाओं को…

रामो राजमणि – श्लोक अर्थ सहित

॥ रामो राजमणि – श्लोक ॥ रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता निशाचरचमूः रामाय तस्मै नमः । रामान्नास्ति परायणंपरतरं रामस्य दासोस्म्यहं रामे चित्तलयस्सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥ हिंदी अर्थ: राम (श्रीराम) सभी राजाओं में श्रेष्ठ रत्न हैं, और वे सदैव विजय प्राप्त करते हैं। मैं उन लक्ष्मीपति राम का भजन करता हूँ,…

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु – श्लोक अर्थ सहित

।। गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु – श्लोक अर्थ सहित ।। गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुर्साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः।। हिंदी अर्थ: यह श्लोक गुरु की महानता और उनके अद्वितीय स्थान को दर्शाता है। इस श्लोक का अर्थ इस प्रकार है: “गुरु अर्थात् शिक्षक ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही देव महेश्वर अर्थात् शिव हैं।…

कराग्रे वसते लक्ष्मी श्लोक – अर्थ सहित

।। कराग्रे वसते लक्ष्मी – श्लोक ।। कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दं प्रभाते करदर्शनम्।। हिंदी अर्थ: हमारे हाथों की अंगुलियों के अग्रभाग में माता लक्ष्मी का वास होता है, हाथों के बीच में माता सरस्वती का निवास है, और हाथों की जड़ में भगवान गोविन्द का स्थान है। इसलिए, सुबह के समय…

त्वमेव माता च पिता त्वमेव – श्लोक अर्थ सहित

।। त्वमेव माता च पिता त्वमेव – श्लोक ।। त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव !! हिंदी अर्थ: “आप ही मेरे माता हैं, आप ही मेरे पिता हैं, आप ही मेरे बंधु हैं और आप ही मेरे सखा हैं। आप ही मेरी विद्या हैं,…

सत्यमेव जयते नानृतम् – श्लोक अर्थ सहित

॥ सत्यमेव जयते नानृतम् – श्लोक ॥ सत्यमेव जयते नानृतम् सत्येन पन्था विततो देवयानः । येनाक्रमत् मनुष्यो ह्यात्मकामो यत्र तत् सत्यस्य परं निधानं ॥ हिंदी अर्थ: सत्य ही सदा विजय प्राप्त करता है, असत्य नहीं। सत्य के मार्ग पर ही देवयान की यात्रा की जाती है, जो परमात्मा तक पहुँचने का मार्ग है। जिस पथ पर…

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि – श्लोक अर्थ सहित

॥ नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि – श्लोक ॥ नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥ हिंदी अर्थ: यह श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता से लिया गया है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि आत्मा को न तो कोई शस्त्र काट सकता है, न ही अग्नि जला सकती है। इसे पानी गीला नहीं कर…

कार्तिक संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा

|| कार्तिक संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा || पार्वती जी ने पूछा, “हे लम्बोदर! जो सबसे भाग्यशाली हैं, और भाषण करने में श्रेष्ठ हैं! मुझे बताओ कि कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के दिन किस नाम वाले गणेश जी की पूजा करनी चाहिए और किस विधि से?” श्रीकृष्ण जी ने कहा, “गणेश जी ने अपनी माता के…

श्री चित्रगुप्त आरती

॥ आरती ॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामीजय चित्रगुप्त हरे । भक्तजनों के इच्छित, फलको पूर्ण करे॥ विघ्न विनाशक मंगलकर्ता, सन्तनसुखदायी । भक्तों के प्रतिपालक, त्रिभुवनयश छायी ॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥ रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरत, पीताम्बरराजै । मातु इरावती, दक्षिणा, वामअंग साजै ॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥ कष्ट निवारक, दुष्ट संहारक, प्रभुअंतर्यामी । सृष्टि…

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