सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का अपना एक विशेष महत्व है, लेकिन जब बात ‘माघ पूर्णिमा’ की आती है, तो यह महत्व कई गुना बढ़ जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ के महीने में स्वर्ग से देवता पृथ्वी पर आते हैं और प्रयागराज के संगम में वास करते हैं।
वर्ष 2026 में माघ पूर्णिमा एक विशेष योग लेकर आ रही है, जो न केवल आध्यात्मिक शांति बल्कि भौतिक सुख-समृद्धि के द्वार भी खोलेगी। आइए जानते हैं, क्यों खास है 1 फरवरी 2026 की यह पूर्णिमा और आप इसका लाभ कैसे उठा सकते हैं।
माघ पूर्णिमा 2026 – तिथि और शुभ मुहूर्त (Magh Purnima 2026 Date)
साल 2026 में माघ पूर्णिमा 1 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी।
- पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ – 31 जनवरी 2026 को रात के समय।
- पूर्णिमा तिथि की समाप्ति – 1 फरवरी 2026 की देर शाम तक।
- उदयातिथि – 1 फरवरी को होने के कारण मुख्य स्नान-दान और व्रत रविवार को ही किया जाएगा। रविवार का दिन होने के कारण इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना और सूर्य देव को अर्घ्य देना विशेष फलदायी होगा।
माघ पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व
इसे ‘मोक्ष की पूर्णिमा’ क्यों कहा जाता है? इसके पीछे गहरा विज्ञान और आध्यात्म है। माघ मास की कड़ाके की ठंड में जब भक्त पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, तो यह उनके भीतर के आलस्य और तामसिक प्रवृत्तियों का नाश करता है।
- देवताओं का संगम – माना जाता है कि इस दिन स्वयं भगवान विष्णु और सभी देवी-देवता प्रयागराज में गंगा स्नान के लिए अदृश्य रूप में उपस्थित रहते हैं।
- कल्पवास की पूर्णता – माघ पूर्णिमा के दिन ही संगम तट पर एक महीने से चल रहे ‘कल्पवास’ की पूर्णाहुति होती है।
- चंद्र दोष से मुक्ति – यह दिन चंद्रमा की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ है, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है और सुख-शांति आती है।
माघ पूर्णिमा के विशेष उपाय
यदि आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं या जीवन में स्थिरता चाहते हैं, तो इस दिन निम्नलिखित उपाय जरूर करें:
- लक्ष्मी-नारायण पूजन – पूर्णिमा की सुबह सत्यनारायण भगवान की कथा का श्रवण करें। संध्या के समय माँ लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं। इसमें थोडा सा केसर मिलाएं, यह उपाय घर में ऐश्वर्य बढ़ाता है।
- पीपल के वृक्ष की पूजा – माघ पूर्णिमा पर पीपल के पेड़ में जल अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं। पीपल में भगवान विष्णु का वास माना जाता है, जिससे पितृ दोष भी शांत होता है।
- गंगाजल का छिड़काव – अगर आप पवित्र नदी में स्नान नहीं कर सकते, तो घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद पूरे घर में गंगाजल छिड़कें, इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होगी।
माघ पूर्णिमा संपूर्ण व्रत विधान (Pooja Vidhi)
माघ पूर्णिमा के व्रत को रखने की विधि बहुत सरल और प्रभावशाली है:
- सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान का संकल्प लें।
- अपने पूर्वजों (पितरों) की शांति के लिए काले तिल हाथ में लेकर तर्पण करें।
- इस दिन तिल, गुड़, कंबल, घी और अन्न का दान करना महादान कहलाता है। 2026 में रविवार होने के कारण तांबे के बर्तन का दान करना भी शुभ होगा।
- पूर्णिमा की रात को जागरण करना और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करना मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है।
क्या करें और क्या न करें?
- सात्विक भोजन ग्रहण करें। घर में कलह या वाद-विवाद न करें।
- मौन व्रत का पालन करने का प्रयास करें। तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस) से बचें।
- जरूरतमंदों को सफेद वस्तुएं दान करें। देर तक न सोएं, सूर्योदय से पूर्व उठें।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
माघ पूर्णिमा के समय चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ पृथ्वी के सबसे निकट होता है, जिसका सीधा प्रभाव मनुष्य के मन और शरीर पर पड़ता है। इस दिन पवित्र जल में स्नान करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ती है और मन की चंचलता समाप्त होती है।
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