जीवन में कई बार हम ऐसी परिस्थितियों से घिर जाते हैं जिनका कोई प्रत्यक्ष कारण समझ नहीं आता। कभी ‘नृशत्रु’ (मनुष्यों द्वारा पैदा की गई बाधाएं या ईर्ष्या) हमें आगे बढ़ने से रोकती है, तो कभी एक ‘अज्ञात भय’ हमारे आत्मविश्वास को लील जाता है। यदि आप भी शत्रुओं के षड्यंत्र, मानसिक अशांति या भविष्य के डर से परेशान हैं, तो नृसिंह द्वादशी का अवसर आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
भगवान नृसिंह, जो शक्ति और सुरक्षा के साक्षात पुंज हैं, उनका प्राकट्य ही अधर्म के नाश और भक्त की रक्षा के लिए हुआ था। आइए जानते हैं इस पावन तिथि पर किए जाने वाले वो 3 अचूक उपाय, जो आपके जीवन से हर नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेंगे।
रक्षा कवच का निर्माण – ‘नृसिंह गायत्री’ और पीली सरसों का उपाय
यदि आपको लगता है कि आपके कार्यक्षेत्र या परिवार में लोग आपके विरुद्ध गुप्त योजनाएं बना रहे हैं, तो यह उपाय ‘शत्रु स्तम्भन’ का कार्य करता है।
- विधि – नृसिंह द्वादशी के दिन शाम के समय एक तांबे के पात्र में पीली सरसों रखें। भगवान नृसिंह के चित्र के सम्मुख दीपक जलाएं और इस मंत्र का 108 बार जाप करें: ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि तन्नो नृसिंह: प्रचोदयात्
- प्रयोग – जाप के बाद इस सरसों को अभिमंत्रित मानकर अपने घर के चारों कोनों में और मुख्य द्वार पर छिड़क दें। यह एक अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार करता है जिसे ‘नृशत्रु’ भेद नहीं पाते।
अज्ञात भय से मुक्ति – काले तिल और दुग्धाभिषेक
अकारण डर लगना, रात को चौंक कर उठ जाना या घबराहट होना ये कमजोर चंद्रमा और राहु के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। नृसिंह द्वादशी पर किया गया यह उपाय मानसिक दृढ़ता देता है।
- विधि – इस दिन दक्षिणमुखी हनुमान जी या नृसिंह देव के मंदिर में जाकर कच्चे दूध में काले तिल मिलाकर अभिषेक करें।
- भाव – अभिषेक करते समय मन में यह संकल्प करें कि आपके भीतर का डर दूध की धारा के साथ बह रहा है। नृसिंह देव का ‘उग्र’ रूप आपके भीतर के डर को भस्म कर ‘अभय’ का दान देता है।
आर्थिक और सामाजिक बाधा निवारण – ‘ऋणमोचन नृसिंह स्तोत्र’
कभी-कभी शत्रु सीधे वार न करके हमारी आर्थिक स्थिति को निशाना बनाते हैं। यदि आपके पैसे फंसे हुए हैं या कर्ज का बोझ बढ़ रहा है, तो इस विशेष पाठ का सहारा लें।
- विशेष – नृसिंह द्वादशी की रात को ‘ऋणमोचन नृसिंह स्तोत्र’ का पाठ करें। पाठ के बाद भगवान को ठंडी चीजों (जैसे दही, शक्कर या मौसमी फल) का भोग लगाएं क्योंकि भगवान नृसिंह का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और गर्म माना जाता है, उन्हें शीतल चीजें अर्पित करने से साधक को शांति प्राप्त होती है।
क्यों प्रभावी है नृसिंह द्वादशी?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नृसिंह अवतार न तो पूर्ण मानव थे और न ही पूर्ण पशु। वे संधि काल (शाम) में प्रकट हुए थे। इसलिए, जीवन के ‘संधि काल’ यानी जब आप न इधर के रहें न उधर के, तब उनकी भक्ति सबसे तीव्र फल देती है। यह दिन नकारात्मकता के ‘हिरण्यकश्यप’ को चीरकर आपके भीतर के ‘प्रह्लाद’ (भक्ति और विश्वास) को जीवित करने का उत्सव है।
सावधानी – नृसिंह साधना में स्वच्छता और सात्विकता का विशेष महत्व है। इन उपायों को करते समय मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें, बल्कि अपनी सुरक्षा की प्रार्थना करें।
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