केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि सदियों पुराने रहस्यों और अतुलनीय धन का एक जीता-जागता प्रतीक है। यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला, गहरी आस्था और विशेष रूप से अपने सात रहस्यमय कक्षों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। “7 दरवाज़े, 6 खुले, 1 बंद” – यह वाक्यांश इस मंदिर के सबसे बड़े रहस्य को उजागर करता है, और आज हम इसी रहस्य की गहराई में उतरेंगे।
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर – परिचय
भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर द्रविड़ शैली की वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी उत्पत्ति 8वीं शताब्दी से पहले की मानी जाती है और इसका इतिहास त्रावणकोर शाही परिवार से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने इसे सदियों तक संरक्षण दिया। मंदिर का मुख्य देवता, भगवान पद्मनाभ (विष्णु का एक रूप) एक विशाल अनंतशयन मुद्रा में विराजमान हैं, जहाँ वे शेषनाग पर लेटे हुए हैं। यह दृश्य स्वयं में अत्यंत शांतिपूर्ण और विस्मयकारी है।
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर – 7 रहस्यमय तहखाने
मंदिर के नीचे सात गुप्त तहखाने या ‘वालट्स’ हैं, जिन्हें A से G तक नामित किया गया है। 2011 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर, इन तहखानों को खोलने और उनमें रखे खजाने का आकलन करने का निर्णय लिया गया। जब छह तहखाने (A, C, D, E, F और G) खोले गए, तो दुनिया चकित रह गई। सोने के सिक्के, हीरे, पन्ने, माणिक, प्राचीन आभूषण, सोने की मूर्तियां और अनगिनत बहुमूल्य वस्तुएं – यह सब इतनी बड़ी मात्रा में था कि इसका मूल्य खरबों रुपये में आंका गया, जिसने इसे दुनिया के सबसे धनी मंदिरों में से एक बना दिया।
यह धन, सदियों से भक्तों द्वारा दान और शाही परिवार द्वारा संचित किया गया था। इन तहखानों में से कुछ का उपयोग मंदिर के दैनिक अनुष्ठानों और रखरखाव के लिए किया जाता था, जबकि अन्य पूरी तरह से अछूते थे।
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, रहस्यमय सातवां दरवाज़ा – वाल्ट ‘B’
परंतु, इन सभी में सबसे रहस्यमय और चर्चा का विषय बना वाल्ट ‘B’ या सातवां दरवाज़ा। अन्य तहखानों के विपरीत, वाल्ट ‘B’ को अभी तक नहीं खोला गया है। इसके पीछे कई कारण और मान्यताएं हैं:
- अशुभ की आशंका – स्थानीय मान्यताओं और कुछ ज्योतिषियों के अनुसार, इस दरवाजे को खोलना मंदिर और पूरे राज्य के लिए अशुभ हो सकता है। माना जाता है कि इसे खोलने से दुर्भाग्य और आपदाएं आ सकती हैं।
- नाग बंधम या सर्प पाश – कहा जाता है कि इस दरवाजे को “नाग बंधम” या “सर्प पाश” नामक एक रहस्यमय वैदिक मंत्रों द्वारा सील किया गया है। यह भी माना जाता है कि इसे केवल एक विशेष ‘सिद्ध पुरुष’ ही एक विशिष्ट ‘गरुड़ मंत्र’ के जाप से खोल सकता है, और अगर इसे गलत तरीके से खोला गया, तो यह भयंकर परिणाम दे सकता है।
- अनदेखी शक्तियां – कुछ लोगों का मानना है कि इस दरवाजे के पीछे अदृश्य शक्तियां या दिव्य संरक्षक हैं जो मंदिर के धन की रक्षा करते हैं।
- जलमग्न होने का दावा – एक अन्य सिद्धांत यह भी है कि वाल्ट ‘B’ का सीधा संबंध समुद्र या किसी भूमिगत जल स्रोत से है। इसे खोलने से मंदिर में पानी भर सकता है या अन्य प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं।
- यह दावा किया जाता है कि दरवाजे पर कोई बोल्ट, कुंडी या अन्य साधारण ताला नहीं है, बल्कि यह एक अदृश्य, मंत्र-सील सुरक्षा तंत्र द्वारा बंद है।
क्या वाल्ट ‘B’ कभी खुलेगा?
यह प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है। सर्वोच्च न्यायालय ने पहले इसे खोलने का आदेश दिया था, लेकिन बाद में इसकी पवित्रता और सुरक्षा को देखते हुए इस पर रोक लगा दी। मंदिर प्रशासन और कुछ स्थानीय समुदाय इसके न खोले जाने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ लोग पारदर्शिता और खजाने के उचित प्रबंधन के लिए इसे खोलने की वकालत करते हैं।
इस दरवाजे के पीछे क्या है, यह अभी भी एक रहस्य है – शायद अतुलनीय खजाना, शायद प्राचीन ज्ञान, या शायद कुछ ऐसा जो मानव कल्पना से परे है।
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