श्री नर्मदा चालीसा मां नर्मदा की स्तुति और महिमा का एक अत्यंत पावन संग्रह है। हिंदू धर्म में मां नर्मदा को पुण्य सलिला और मोक्षदायिनी माना गया है, जिनकी भक्ति मात्र से जीवन के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। चालीसा का नियमित पाठ करने से मन को शांति, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भक्तगण विशेषकर नर्मदा जयंती और अन्य मांगलिक अवसरों पर इसका पाठ पूर्ण श्रद्धा के साथ करते हैं।
यदि आप भी मां नर्मदा की असीम कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और इस पवित्र चालीसा को अपने पास सहेज कर रखना चाहते हैं, तो आप Narmada Chalisa PDF हमारी वेबसाइट से डाउनलोड करें। यह पीडीएफ फाइल आपको पाठ करने में सुगमता प्रदान करेगी, जिसे आप कहीं भी और कभी भी पढ़ सकते हैं। माँ नर्मदा आपकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करें। नर्मदा चालीसा का पाठ बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है। यहाँ आपके लिए नर्मदा चालीसा की सामग्री, पाठ की विधि और लाभ दिए गए हैं। इसका नियमित पाठ करने से माँ नर्मदा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
|| श्री नर्मदा चालीसा (Narmada Chalisa PDF) ||
॥ दोहा॥
देवि पूजित, नर्मदा, महिमा बड़ी अपार ।
चालीसा वर्णन करत, कवि अरु भक्त उदार॥
इनकी सेवा से सदा, मिटते पाप महान ।
तट पर कर जप दान नर, पाते हैं नित ज्ञान ॥
॥ चौपाई ॥
जय-जय-जय नर्मदा भवानी,
तुम्हरी महिमा सब जग जानी ।
अमरकण्ठ से निकली माता,
सर्व सिद्धि नव निधि की दाता ।
कन्या रूप सकल गुण खानी,
जब प्रकटीं नर्मदा भवानी ।
सप्तमी सुर्य मकर रविवारा,
अश्वनि माघ मास अवतारा ॥
वाहन मकर आपको साजैं,
कमल पुष्प पर आप विराजैं ।
ब्रह्मा हरि हर तुमको ध्यावैं,
तब ही मनवांछित फल पावैं ।
दर्शन करत पाप कटि जाते,
कोटि भक्त गण नित्य नहाते ।
जो नर तुमको नित ही ध्यावै,
वह नर रुद्र लोक को जावैं ॥
मगरमच्छा तुम में सुख पावैं,
अंतिम समय परमपद पावैं ।
मस्तक मुकुट सदा ही साजैं,
पांव पैंजनी नित ही राजैं ।
कल-कल ध्वनि करती हो माता,
पाप ताप हरती हो माता ।
पूरब से पश्चिम की ओरा,
बहतीं माता नाचत मोरा ॥
शौनक ऋषि तुम्हरौ गुण गावैं,
सूत आदि तुम्हरौं यश गावैं ।
शिव गणेश भी तेरे गुण गवैं,
सकल देव गण तुमको ध्यावैं ।
कोटि तीर्थ नर्मदा किनारे,
ये सब कहलाते दु:ख हारे ।
मनोकमना पूरण करती,
सर्व दु:ख माँ नित ही हरतीं ॥
कनखल में गंगा की महिमा,
कुरुक्षेत्र में सरस्वती महिमा ।
पर नर्मदा ग्राम जंगल में,
नित रहती माता मंगल में ।
एक बार कर के स्नाना,
तरत पिढ़ी है नर नारा ।
मेकल कन्या तुम ही रेवा,
तुम्हरी भजन करें नित देवा ॥
जटा शंकरी नाम तुम्हारा,
तुमने कोटि जनों को है तारा ।
समोद्भवा नर्मदा तुम हो,
पाप मोचनी रेवा तुम हो ।
तुम्हरी महिमा कहि नहीं जाई,
करत न बनती मातु बड़ाई ।
जल प्रताप तुममें अति माता,
जो रमणीय तथा सुख दाता ॥
चाल सर्पिणी सम है तुम्हारी,
महिमा अति अपार है तुम्हारी ।
तुम में पड़ी अस्थि भी भारी,
छुवत पाषाण होत वर वारि ।
यमुना मे जो मनुज नहाता,
सात दिनों में वह फल पाता ।
सरस्वती तीन दीनों में देती,
गंगा तुरत बाद हीं देती ॥
पर रेवा का दर्शन करके
मानव फल पाता मन भर के ।
तुम्हरी महिमा है अति भारी,
जिसको गाते हैं नर-नारी ।
जो नर तुम में नित्य नहाता,
रुद्र लोक मे पूजा जाता ।
जड़ी बूटियां तट पर राजें,
मोहक दृश्य सदा हीं साजें ॥
वायु सुगंधित चलती तीरा,
जो हरती नर तन की पीरा ।
घाट-घाट की महिमा भारी,
कवि भी गा नहिं सकते सारी ।
नहिं जानूँ मैं तुम्हरी पूजा,
और सहारा नहीं मम दूजा ।
हो प्रसन्न ऊपर मम माता,
तुम ही मातु मोक्ष की दाता ॥
जो मानव यह नित है पढ़ता,
उसका मान सदा ही बढ़ता ।
जो शत बार इसे है गाता,
वह विद्या धन दौलत पाता ।
अगणित बार पढ़ै जो कोई,
पूरण मनोकामना होई ।
सबके उर में बसत नर्मदा,
यहां वहां सर्वत्र नर्मदा ॥
॥ दोहा ॥
भक्ति भाव उर आनि के, जो करता है जाप ।
माता जी की कृपा से, दूर होत संताप॥
|| श्री नर्मदा चालीसा पाठ की विधि ||
नर्मदा चालीसा का पाठ करने के लिए कुछ सामान्य नियम हैं, जिनका पालन करने से पाठ का पूरा फल मिलता है:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा के लिए एक शांत और पवित्र स्थान चुनें।
- माँ नर्मदा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। यदि यह उपलब्ध न हो, तो आप माँ को अपने मन में भी स्थापित कर सकते हैं।
- सामग्री – पूजा के लिए जल, फूल, धूप, दीप और प्रसाद तैयार करें।
- सबसे पहले माँ नर्मदा का ध्यान करें और मन में उनका स्मरण करें।
- पाठ शुरू करने से पहले अपनी मनोकामना बोलें।
- श्रद्धा और भक्ति के साथ नर्मदा चालीसा का पाठ करें।
- पाठ के बाद आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं।
|| नर्मदा चालीसा का पाठ करने के लाभ ||
नर्मदा चालीसा के पाठ के कई लाभ हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- ऐसा माना जाता है कि नर्मदा चालीसा का पाठ करने से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है।
- नियमित पाठ से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
- माँ नर्मदा के आशीर्वाद से सभी प्रकार के भय, चिंताएं और रोग दूर होते हैं।
- सच्चे मन से चालीसा का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- यह पाठ आध्यात्मिक जागृति और आत्म-ज्ञान की प्राप्ति में सहायक होता है।
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