यमुना छठ (यमुना जयंती) व्रत कथा PDF हिन्दी
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यमुना छठ (यमुना जयंती) व्रत कथा हिन्दी Lyrics
यमुना छठ, जिसे यमुना जयंती के रूप में भी जाना जाता है, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन देवी यमुना के पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक है। यहाँ यमुना छठ की पौराणिक कथा विस्तार से दी गई है:
|| यमुना छठ (यमुना जयंती) व्रत कथा ||
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी यमुना भगवान सूर्य देव की पुत्री और मृत्यु के देवता यमराज की बहन हैं। उनकी माता का नाम संज्ञा है।
कहा जाता है कि यमुना जी का स्वभाव अत्यंत चंचल और हृदय अत्यंत कोमल था। वे गोलोक वासी थीं, लेकिन पृथ्वी लोक के कल्याण और भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं में सहभागी होने के लिए उन्होंने चैत्र शुक्ल षष्ठी को पृथ्वी पर अवतार लिया। इसी कारण इस दिन को यमुना जयंती या यमुना छठ के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
यमुना अपने भाई यमराज से बहुत स्नेह करती थीं। एक बार यमुना जी ने अपने भाई यमराज को अपने घर भोजन पर आमंत्रित किया। यमराज अपने कार्यों में व्यस्त होने के कारण बार-बार निमंत्रण टालते रहे। अंततः, यमुना जी के प्रेम वश वे उनके घर पहुंचे। यमुना ने उन्हें स्वादिष्ट भोजन कराया और उनका आदर-सत्कार किया।
इससे प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा। यमुना जी ने वर मांगा कि – जो भी व्यक्ति आज के दिन (यमुना छठ या यम द्वितीया) यमुना नदी में स्नान करेगा, उसे यमलोक की यातनाएं नहीं सहनी पड़ेंगी और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी।” यमराज ने ‘तथास्तु’ कहकर यह वरदान स्वीकार कर लिया।
एक अन्य कथा के अनुसार, यमुना जी ने भगवान श्री कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उन्हें अपनी पटरानी स्वीकार किया। यही कारण है कि ब्रज संस्कृति में यमुना को केवल एक नदी नहीं, बल्कि साक्षात् देवी और श्री कृष्ण की प्रिया माना जाता है।
|| पूजन विधि और महत्व ||
- इस दिन सूर्योदय से पूर्व यमुना नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। यदि यमुना जाना संभव न हो, तो घर पर ही जल में थोड़ा सा यमुना जल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
- यमुना जी की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्वच्छ कर, उन्हें फल, फूल, धूप, दीप और विशेष रूप से मालपुआ का भोग लगाया जाता है।
- पूजा के अंत में यमुना जी की आरती की जाती है।
- इस दिन ब्राह्मणों और निर्धनों को दान देने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
मान्यता है कि जो व्यक्ति यमुना छठ के दिन श्रद्धापूर्वक यमुना जी का पूजन और कथा श्रवण करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मानसिक शांति व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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