Misc

बृहस्पति कवच पाठ

Brihaspati Kavacham Sanskrit Lyrics

MiscKavach (कवच संग्रह)संस्कृत
Share This

Join HinduNidhi WhatsApp Channel

Stay updated with the latest Hindu Text, updates, and exclusive content. Join our WhatsApp channel now!

Join Now

बृहस्पति कवच पाठ (Brihaspati Kavach Path) देवगुरु बृहस्पति को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और कल्याणकारी स्तोत्र है। इस पाठ का मुख्य उद्देश्य बृहस्पति ग्रह के शुभ प्रभावों को बढ़ाना और उनके नकारात्मक असर को कम करना है।

जो व्यक्ति नियमित रूप से, विशेषकर गुरुवार के दिन, इस कवच का पाठ करता है, उसे ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा, धन और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यह कवच व्यक्ति को रोगों, बाधाओं और शत्रुओं से रक्षा प्रदान करता है। माना जाता है कि गुरु के मजबूत होने से विवाह और संतान संबंधी परेशानियाँ दूर होती हैं। यह आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति के लिए भी एक उत्तम साधन है।

|| बृहस्पति कवच पाठ करने के लाभ ||

  • बृहस्पति कवच का पाठ करने से जातक को बृहस्पति की महादशा तथा अन्तर्दशा में लाभ होता है।
  • इस कवच के नियमित पाठ से विवाह सम्बन्धी समस्याओं का निवारण होता है।
  • बृहस्पति कवच का दैनिक पाठ करने से घर में धन – धान्य की पूर्ति होती है।
  • यदि आपकी कुण्डली में बृहस्पति दुर्बल है, तो इसका पाठ करने से लाभ होता है।
  • बृहस्पति कवच के प्रभाव से हाथ में गुरु पर्वत प्रबल होता है।

|| बृहस्पति कवच स्तोत्र लिरिक्स (Brihaspati Kavacham PDF) ||

श्रीगणेशाय नमः ।

अस्य श्रीबृहस्पतिकवचस्तोत्रमन्त्रस्य ईश्वर ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, गुरुर्देवता, गं बीजं, श्रीशक्तिः,
क्लीं कीलकं, गुरुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ।

अभीष्टफलदं देवं सर्वज्ञं सुरपूजितम् ।
अक्षमालाधरं शान्तं प्रणमामि बृहस्पतिम् ॥ १॥

बृहस्पतिः शिरः पातु ललाटं पातु मे गुरुः ।
कर्णौ सुरगुरुः पातु नेत्रे मेऽभीष्टदायकः ॥ २॥

जिह्वां पातु सुराचार्यो नासां मे वेदपारगः ।
मुखं मे पातु सर्वज्ञो कण्ठं मे देवतागुरुः ॥ ३॥

भुजावाङ्गिरसः पातु करौ पातु शुभप्रदः ।
स्तनौ मे पातु वागीशः कुक्षिं मे शुभलक्षणः ॥ ४॥

नाभिं देवगुरुः पातु मध्यं पातु सुखप्रदः ।
कटिं पातु जगद्वन्द्य ऊरू मे पातु वाक्पतिः ॥ ५॥

जानुजङ्घे सुराचार्यो पादौ विश्वात्मकस्तथा ।
अन्यानि यानि चाङ्गानि रक्षेन्मे सर्वतो गुरुः ॥ ६॥

इत्येतत्कवचं दिव्यं त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः ।
सर्वान्कामानवाप्नोति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ ७॥

॥ इति श्रीब्रह्मयामलोक्तं बृहस्पतिकवचं सम्पूर्णम् ॥

Found a Mistake or Error? Report it Now

बृहस्पति कवच पाठ PDF

Download बृहस्पति कवच पाठ PDF

बृहस्पति कवच पाठ PDF

Leave a Comment

Join WhatsApp Channel Download App