पवनपुत्र हनुमान (Pavanputra Hanuman)

पवनपुत्र हनुमान (Pavanputra Hanuman)

पवनपुत्र हनुमान ग्रंथ भगवान हनुमान की अद्भुत शक्तियों, उनकी भक्ति, और उनके जीवन की प्रेरक कथाओं को समर्पित है। इस पुस्तक के लेखक स्वतन्त्र जैन ने भगवान हनुमान के चरित्र और उनके अलौकिक गुणों को इस प्रकार प्रस्तुत किया है कि यह हर पाठक के मन में भक्ति और श्रद्धा का संचार करता है। इस…

यंत्रोद्धारक हनुमान स्तोत्र (Yantrodharaka Hanuman Stotra)

यंत्रोद्धारक हनुमान स्तोत्र (Yantrodharaka Hanuman Stotra)

यंत्रोद्धारक हनुमान स्तोत्र भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन करने वाला एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है, जिसकी रचना श्री व्यासराज तीर्थ ने की थी। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन भक्तों के लिए लाभकारी माना जाता है जो अपने जीवन में आने वाली बाधाओं, रोगों और कष्टों से मुक्ति पाना चाहते हैं। इस स्तोत्र का नियमित…

श्री राम जहाँ होंगे हनुमान वहां होंगे – भजन

|| श्री राम जहाँ होंगे हनुमान वहां होंगे – भजन || तर्ज – जब हम जवां होंगे श्री राम जहाँ होंगे, हनुमान वहां होंगे, दोनों जहाँ होंगे,वहां कल्याण करेंगे, हर काम बनेंगे,श्री राम जहाँ होंगे || || श्री राम का जो भी,ध्यान लगाएगा, बालाजी के दर्शन,वो ही पाएगा, प्रभु राम की भक्ति से,तुम्हे हनुमान मिलेंगे,…

श्री हनुमान सहस्रनामावली

श्री हनुमान सहस्रनामावली में भगवान हनुमान के 1000 दिव्य और शक्तिशाली नामों का संग्रह है। यह सहस्रनामावली भगवान हनुमान की महिमा, शक्ति और उनके अद्भुत गुणों का वर्णन करती है। भगवान हनुमान को अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता, संकटमोचक, और भक्ति, शक्ति और ज्ञान के प्रतीक माना जाता है। इस सहस्रनामावली के माध्यम…

श्री पंचमुखी हनुमान कवच स्तोत्रम्

|| श्री पंचमुखी हनुमान कवच स्तोत्रम् || | श्री गणेशाय नमः। ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवच मन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:। गायत्री छंद:। पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता। ह्रीं बीजम्। श्रीं शक्ति:। क्रौं कीलकं। क्रूं कवचं। क्रैं अस्त्राय फट्। इति दिग्बन्ध:। || श्री गरुड़ उवाच || अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि शृणु सर्वांगसुंदर, यत्कृतं देवदेवेन ध्यानं हनुमतः प्रियम्॥ पञ्चवक्त्रं महाभीमं त्रिपञ्चनयनैर्युतम्, बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकामार्थसिद्धिदम्।।…

श्री सप्तमुखी हनुमत्कवच

|| श्री सप्तमुखी हनुमत्कवचम् || ॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥ ॐ अस्य श्रीसप्तमुखीवीरहनुमत्कवच स्तोत्रमन्त्रस्य, नारदऋषिः ,अनुष्टुप्छन्दः ,श्रीसप्तमुखीकपिः परमात्मादेवता ,ह्रां बीजम् ,ह्रीं शक्तिः ,ह्रूं कीलकम्, मम सर्वाभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । ॐ ह्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः । ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः । ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः । ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः । ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।…

हनुमान जी आरती

|| हनुमान जी आरती (Hanuman Aarti PDF) || आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥ अंजनि पुत्र महा बलदाई। सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥ आरती कीजै हनुमान लला की। दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥ लंका सो कोट…

हनुमानजी का शाबर मंत्र

|| हनुमानजी का शाबर मंत्र (Hanuman ji Shabar Mantra PDF) || आत्म सुरक्षा हेतु श्री हनुमानजी का शाबर मंत्र ॐ नमः वज्र का कोठा । जिसमे पिण्ड हमारो पेठा । ईश्वर कुंजी । ब्रह्मा का ताला । मेरे आठो धाम का यति हनुमंत रखवाला ॥ शत्रु दमन हेतु श्री हनुमानजी का शाबर मंत्र हनुमान पहलवान…

हनुमान चालीसा हिंदी अर्थ सहित

|| हनुमान चालीसा हिंदी अर्थ सहित || || दोहा || श्री गुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुवर बिमल जसु जो दायकु फल चारि। अर्थ- श्री गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूं, जो चारों…

पंचमुखी हनुमान कवच स्तोत्रम् अर्थ सहित

|| श्री पंचमुखहनुमत्कवच स्तोत्र एवं अर्थ || श्री गणेशाय नमः। ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:। गायत्री छंद:। पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता। ह्रीं बीजम्। श्रीं शक्ति:। क्रौं कीलकं। क्रूं कवचं। क्रैं अस्त्राय फट्। इति दिग्बन्ध:। अर्थ: इस पंचमुख हनुमत कवच स्तोत्र के ऋषि ब्रह्मा हैं, छंद गायत्री है, देवता पंचमुख विराट हनुमान जी हैं, ह्रीं बीज मंत्र…

श्री पवनसुत हनुमान आरती

॥ श्री पवनसुत हनुमान आरती (Pawansuta Hanuman Aarti PDf) ॥ जयति मंगलागार, संसार, भारापहर, वानराकार विग्रह पुरारी। राम-रोषानल, ज्वालमाला मिषध्वान्तचर-सलभ-संहारकारी॥ जयति मरुदन्जनामोद-मन्दिर, नतग्रीवसुग्रीव-दुःखैकबन्धो। यातुधानोद्धत-क्रुद्ध-कालाग्निहर, सिद्ध-सुर-सज्जनानन्दसिन्धो॥ जयति मंगलागार, संसार… जयति रुद्राग्रणी, विश्ववन्द्याग्रणी, विश्वविख्यात-भट-चक्रवर्ती। सामगाताग्रणी, कामजेताग्रणी, रामहित, रामभक्तानुवर्ती॥ जयति मंगलागार, संसार… जयति संग्रामजय, रामसन्देशहर, कौशला-कुशल-कल्याणभाषी। राम-विरहार्क-संतप्त-भरतादि नर-नारि-शीतलकरणकल्पशाषी॥ जयति मंगलागार, संसार… जयति सिंहासनासीन सीतारमण, निरखि निर्भर हरष नृत्यकारी।…

श्री हनुमान अष्टक

|| हनुमान अष्टक (Hanuman Ashtak PDF) || बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों । ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो । देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो । को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ बालि…

হনুমান চালিসা অর্থ সহ

|| হনুমান চালিসা অর্থ সহ || দোহা শ্রী গুরু চরণ সরোজ রজ নিজমন মুকুর সুধারি | বরণৌ রঘুবর বিমলযশ জো দাযক ফলচারি || বুদ্ধিহীন তনুজানিকৈ সুমিরৌ পবন কুমার | বল বুদ্ধি বিদ্যা দেহু মোহি হরহু কলেশ বিকার্ || বাংলা অনুবাদ : শ্রী গুরু চরণ রূপ কমলের পরাগের দ্বারা নিজের মন রূপ দর্পণ পরিষ্কার করে রঘুবর…

শ্রী হানুমান চালিশা

|| শ্রী হানুমান চালিশা (Hanuman Chalisa Bengali PDF) || || দোহা || শ্রী গুরু চরণ সরোজ রজ নিজমন মুকুর সুধারি, বরণৌ রঘুবর বিমলয়শ জো দায়ক ফলচারি || বুদ্ধিহীন তনুজানিকৈ সুমিরৌ পবন কুমার, বল বুদ্ধি বিদ্য়া দেহু মোহি হরহু কলেশ বিকার || || চৌপাঈ || জয় হনুমান জ্ঞান গুণ সাগর | জয় কপীশ তিহু লোক উজাগর ||…

ஹனுமான் சாலிசா

|| ஹனுமான் சாலீஸா (Hanuman Chalisa Tamil PDF) || தோஹா ஶ்ரீ குரு சரண ஸரோஜ ரஜ னிஜமன முகுர ஸுதாரி | வரணௌ ரகுவர விமலயஶ ஜோ தாயக பலசாரி || புத்திஹீன தனுஜானிகை ஸுமிரௌ பவன குமார | பல புத்தி வித்யா தேஹு மோஹி ஹரஹு கலேஶ விகார் || சௌபாஈ ஜய ஹனுமான ஜ்ஞான குண ஸாகர | ஜய கபீஶ திஹு லோக உஜாகர || ராமதூத அதுலித…

હનુમાનજીની આરતી

|| હનુમાનજીની આરતી (Hanuman Chalisa Gujarati PDF) || આરતી કીજે હનુમાન લાલા કી, દુષ્ટ દલન રઘુનાથ કલા કી; જાકે બલ સે ગિરિવર કાપે, રોગ દોષ જાકે નિકટ ન ઝાપે; અંજની પુત્ર મહા બલદાઈ, સંતન કે પ્રભુ સદા સહાઈ; દે બીરા રઘુનાથ પઠાએ, લંકા જારી, સિયા સુધિ લાયે; લંકા સો કોટિ સમુદ્ર સી ખાયી, જાત પવંસુત બાર…

हनुमान चालीसा

|| हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa Maithili PDF) || दोहाः श्रीगुरुचरणक धूल सँ कय मन दर्पण साफ। गाउ रामके गीत-गुण पाउ चारुफल आप॥ बिनु बुद्धी आ बिनु बले सुमिरी पवनकुमार। बल बुद्धि विद्या दिअ प्रभु हरू कलेस विकार॥ चौपाईः जय हनुमान ज्ञान गुण सागर जय कपीस तिहु लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बलधाम अंजनिपुत्र पवनसुत नाम॥ महावीर…

શ્રી હનુમાન ચાલીસા ગુજરાતી

‖ શ્રી હનુમાન ચાલીસા ગુજરાતી (Hanuman Chalisa Gujarati PDF) ‖ દોહા શ્રી ગુરુ ચરણ સરોજ રજ નિજમન મુકુર સુધારિ | વરણૌ રઘુવર વિમલયશ જો દાયક ફલચારિ ‖ બુદ્ધિહીન તનુજાનિકૈ સુમિરૌ પવન કુમાર | બલ બુદ્ધિ વિદ્યા દેહુ મોહિ હરહુ કલેશ વિકાર્ ‖ ચૌપાઈ જય હનુમાન જ્ઞાન ગુણ સાગર | જય કપીશ તિહુ લોક ઉજાગર ‖ 1…

ହନୁମାନ ଚଲିସା

|| ହନୁମାନ ଚଲିସା (Hanuman Chalisa Odia PDF) || ଦୋହା ଶ୍ରୀଗୁରୁ ଚରନ ସରୋଜ ରଜ ନିଜ ମନୁ ମୁକୁରୁ ସୁଧାରି । ବରନ.ଉଁ ରଘୁବର ବିମଲ ଜସୁ ଜୋ ଦାୟକୁ ଫଲ ଚାରି || ବୁଦ୍ଧିହୀନ ତନୁଜାନିକୈ ସୁମିରୌ ପବନକୁମାର । ବଲ ବୁଦ୍ଧି ବିଦ୍ୟା ଦେହୁ ମୋହି ହରହୁ କଲେସ ବିକାର || ଚୌପାଈ ଜୟ ହନୁମାନ ଜ୍ଞାନ ଗୁନ ସାଗର । ଜୟ କପୀସ ତିହୁଁ ଲୋକ ଉଜାଗର ।। ରାମ ଦୂତ…

হনুমান চালীসা

|| হনুমান চালীসা (Hanuman Chalisa Assamese PDF) || দোহা শ্ৰীগুৰু চৰন সৰোজ ৰজ নিজ মনু মুকুৰু সুধাৰি । বৰনঊঁ ৰঘুবৰ বিমল জসু জো দায়কু ফল চাৰি ॥ বুদ্ধিহীন তনু জানিকে সুমিৰৌং পৱনকুমাৰ । বল বুদ্ধি বিদ্যা দেহু মোহিং হৰহু কলেস বিকাৰ ॥ চৌপাঈ জয় হনুমান জ্ঞান গুন সাগৰ । জয় কপীস তিহুঁ লোক উজাগৰ ॥…

ਹਨੁਮਾਨ ਚਾਲੀਸਾ

|| ਹਨੁਮਾਨ ਚਾਲੀਸਾ (Hanuman Chalisa Punjabi PDF) || ਦੋਹਾ ਸ਼੍ਰੀਗੁਰੁ ਚਰਨ ਸਰੋਜ ਰਜ ਨਿਜ ਮਨੁ ਮੁਕੁਰੁ ਸੁਧਾਰਿ । ਬਰਨਊਂ ਰਘੁਬਰ ਬਿਮਲ ਜਸੁ ਜੋ ਦਾਯਕੁ ਫਲ ਚਾਰਿ ॥ ਬੁੱਧਿਹੀਨ ਤਨੁ ਜਾਨਿਕੇ ਸੁਮਿਰੌਂ ਪਵਨਕੁਮਾਰ । ਬਲ ਬੁੱਧਿ ਬਿਦ੍ਯਾ ਦੇਹੁ ਮੋਹਿੰ ਹਰਹੁ ਕਲੇਸ ਬਿਕਾਰ ॥ ਚੌਪਾਈ ਜਯ ਹਨੁਮਾਨ ਜ੍ਞਾਨ ਗੁਨ ਸਾਗਰ । ਜਯ ਕਪੀਸ ਤਿਹੁੰ ਲੋਕ ਉਜਾਗਰ ॥ ਰਾਮ…

ہنومان چالیسہ

|| ہَنُمَانَ چَالِیسَا (Hanuman Chalisa Urdu PDF) || دوہَا شْرِیگُرُ چَرَنَ سَروجَ رَجَ نِجَ مَنُ مُکُرُ سُدھَارِ ۔ بَرَنَؤُں رَگھُبَرَ بِمَلَ جَسُ جو دَایَکُ پھَلَ چَارِ ۔۔ بُدھِّہِینَ تَنُ جَانِکے سُمِرَوں پَوَنَکُمَارَ ۔ بَلَ بُدھِّ بِدْیَا دیہُ موہِں ہَرَہُ کَلیسَ بِکَارَ ۔۔ چَوپَائِی جَیَ ہَنُمَانَ جْنَانَ گُنَ سَاگَرَ ۔ جَیَ کَپِیسَ تِہُں لوکَ اُجَاگَرَ ۔۔ رَامَ…

ഹനുമാൻ ചാലിസ

|| ഹനുമാൻ ചാലിസ (Hanuman Chalisa Malayalam PDF) || || ദോഹാ || ശ്രീ ഗുരു ചരണ സരോജ രജ നിജമന മുകുര സുധാരി | വരണൗ രഘുവര വിമലയശ ജോ ദായക ഫലചാരി || ബുദ്ധിഹീന തനുജാനികൈ സുമിരൗ പവന കുമാര | ബല ബുദ്ധി വിദ്യാ ദേഹു മോഹി ഹരഹു കലേശ വികാര് || ജയ ഹനുമാന ജ്ഞാന ഗുണ സാഗര | ജയ കപീശ തിഹു ലോക ഉജാഗര || 1…

सप्तमुखीहनुमत्कवचम्

|| सप्तमुखीहनुमत्कवचम् || श्रीगणेशाय नमः । ॐ अस्य श्रीसप्तमुखीवीरहनुमत्कवचस्तोत्रमन्त्रस्य, नारदऋषिः, अनुष्टुप्छन्दः,श्रीसप्तमुखीकपिः परमात्मादेवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिः, ह्रूं कीलकम्,मम सर्वाभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥ करन्यासः – ॐ ह्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः । ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः । ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः । ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः । ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः । ॐ ह्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ अङ्गन्यासः…

श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् १

|| श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् १ || (श्रीपद्मोत्तरखण्डतः) नारद उवाच । सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञ सर्वदेवनमस्कृत । यत्त्वया कथितं पूर्वं रामचन्द्रेण धीमता ॥ १॥ स्तोत्रं समस्तपापघ्नं श्रुत्वा धन्योऽस्मि पद्मज । इदानीं श्रोतुमिच्छामि लोकानां हितकाम्यया ॥ २॥ वायोरंशावतरणमाहात्म्यं सर्वकामदम् । वद मे विस्तराद्ब्रह्मन् देवगुह्यमनुत्तमम् ॥ ३॥ इति पृष्टो नारदेन ब्रह्मा लोकपितामहः । नमस्कृत्य जगन्नाथं लक्ष्मीकान्तं परात्परम् ॥ ४॥ प्रोवाच वायोर्माहात्म्यं नारदाय महात्मने…

श्रीहनुमद्वडवानलस्तोत्रम्

|| श्रीहनुमद्वडवानलस्तोत्रम् || श्रीगणेशाय नमः । विनियोगः (सङ्कल्पः) ॐ अस्य श्रीहनुमद्वडवानलस्तोत्रमन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः, श्रीवडवानलहनुमान् देवता, (श्रीहनुमान् वडवानल देवता) ह्रां बीजं, ह्रीं शक्तिः, सौं कीलकं, मम समस्तविघ्नदोषनिवारणार्थं, सर्वशत्रुक्षयार्थं, सकलराजकुलसंमोहनार्थं, मम समस्तरोगप्रशमनार्थं, आयुरारोग्यैश्वर्याभिवृद्ध्यर्थं, समस्तपापक्षयार्थं, श्रीसीतारामचन्द्रप्रीत्यर्थं च हनुमद्वडवानलस्तोत्रजपमहं करिष्ये ॥ अथ ध्यानम् । मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥ ॐ ह्रां ह्रीं…

श्रीहनुमद्रक्षास्तोत्रम्

|| श्रीहनुमद्रक्षास्तोत्रम् || प्रणम्य श्रीगणेशं च श्रीरामं मारुतिं तथा । रक्षामिमां पठेत्प्राज्ञः श्रद्धाभक्ति समन्वितः ॥ १॥ शिरो मे हनुमान् पातु भालं पवननन्दनः । आञ्जनेयो दृशौ पातु रामचन्द्रप्रियश्रुती ॥ २॥ घ्राणं पातु महावीरो मुखं लक्ष्मणप्राणदः । जिह्वां मनोजवः पातु कण्ठं पातु जितेन्द्रियः ॥ ३॥ स्कन्धौ महाबली पातु भुजौ सङ्कटमोचनः । करौ विश्वम्भरः पातु हृदयं सर्वशक्तिमान् ॥…

श्रीहनूमत्स्तोत्रम् ३

|| श्रीहनूमत्स्तोत्रम् ३ || श‍ृणु देवि प्रवक्ष्यामि स्तोत्रं सर्वसुखावहम् । सर्वकामप्रदं नॄणां हनुमत्स्तोत्रमुत्तमम् ॥ १॥ तप्तहाटकसङ्काशं नानापुष्पविराजितम् । उद्यद्बालार्कवदनं त्रिनेत्रं कुण्डलोज्ज्वलम् ॥ २॥ मौञ्जीकौपीनकं हेममययज्ञोपवीतिनम् । पिङ्गलाक्षं महाकायं टङ्कशैलेन्द्रधारिणम् ॥ ३॥ मूर्तित्रयात्मकं वीरं महाशौर्यं महाहनुम् । हनूमन्तं वायुसूनुं नमामि ब्रह्मचारिणम् ॥ ४॥ त्रिवर्णाक्षरमन्त्रस्थं जपाकुसुमसन्निभम् । नानाभूषणसंयुक्तमाञ्जनेयं नमाम्यहम् ॥ ५॥ पञ्चाक्षरस्थितं देवं नीलनीरदसन्निभम् । पूजितं सर्वदेवैस्तु…

श्रीहनूमत्स्तोत्रम् २

|| श्रीहनूमत्स्तोत्रम् २ || आपन्नाखिललोकार्तिहारिणे श्रीहनूमते । अकस्मादागतोत्पातनाशनाय नमो नमः ॥ १॥ वामे करे वैरिभिदं वहन्तं शैलं परे श‍ृङ्खलहारटङ्कम् । दधानमच्छाच्छसुवर्णवर्णं भजे ज्वलत्कुण्डलमाञ्जनेयम् ॥ २॥ विभीषण उवाच सीतावियुक्ते श्रीरामे शोकदुःखभयापह । तापत्रयाग्निसंहारिन्नाञ्जनेय नमोऽस्तुते ॥ ३॥ आधिव्याधिमहामारिग्रहपीडापहारिणे । प्राणापहर्त्रे दैत्यानां रामप्रियहितात्मने ॥ ४॥ संसारसागरावर्तगतनिश्रान्तचेतसाम् । शरणागतसञ्जीवी सौमित्रिप्राणरक्षकः ॥ ५॥ सुचरित्रः सदानन्दः सर्वदा भक्तवत्सलः । सुरद्विषां सुसंहारी…

श्रीहनूमत्स्तोत्रम् १

|| श्रीहनूमत्स्तोत्रम् १ || अक्षादिराक्षसहरं दशकण्ठदर्प निर्मूलनं रघुवराङ्घ्रिसरोजभक्तम् । सीताऽविषह्यघनदुःखनिवारकं तं वायोः सुतं गिलितभानुमहं नमामि ॥ १॥ मां पश्य पश्य दयया निजदृष्टिपातैः मां रक्ष रक्ष परितो रिपुदुःखपुञ्जात् । वश्यं कुरु त्रिजगतां वसुधाधिपानां मे देहि देहि महतीं वसुधां श्रियं च ॥ २॥ आपद्भ्यो रक्ष सर्वत्र आञ्जनेय नमोऽस्तु ते । बन्धनं छेदयाभुक्तं कपिवर्य नमोऽस्तु ते ॥ ३॥…

श्रीहनूमत्स्तुती

|| श्रीहनूमत्स्तुती || हनुमानञ्जनासूनुर्वायुपुत्रो महाबलः । रामेष्टः फाल्गुनसखः पिङ्गाक्षोऽमितविक्रमः ॥ १॥ उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशनः । लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा ॥ २॥ एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मनः । स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च यः पठेत् ॥ ३॥ तस्य सर्व भयं नास्ति रणे च विजयी भवेत् । राजद्वारे गह्वरे च भयं नास्ति कदाचन ॥ ४॥ ॥ ॐ तत्सत्…

हनूमद्भुजङ्गस्तोत्रम्

|| हनूमद्भुजङ्गस्तोत्रम् || उदरान्तरङ्गं सदारामभक्तं समुद्दण्डवृत्तिं द्विषद्दण्डलोलम् । अमोघानुभावं तमोघातदक्षं तनूकृत्प्रतापं हनूमन्तमीडे ॥ १॥ करोद्भासिटङ्कं किरीटिध्वजाङ्कं हृताशेषपङ्कं रणेनिर्विशङ्कम् । त्रिलोकीमृगाङ्कं क्षणाद्भस्मलङ्कं भजे निष्कलङ्कं हनूमन्तमिडे ॥ २॥ प्रसन्नानुरागं प्रभाकाञ्चनाङ्गं (प्रपन्नानुरागं) जगत्क्षेमशौर्यं तुषारादिदैत्यम् । (जगद्भीतशौर्यं तुषाराद्रिधैर्यम्) तृणीभूतहेतिं रणोद्यद्विभूतिं भजे वायुपुत्रं हनूमन्तमीडे ॥ ३॥ रणे भीषणे मेघनादे सनाथे सरोषं समारोप्य सौमित्रिमान्ये । घनानां घनानां सुराणाञ्चमार्गे नटन्तं चलन्तं हनूमन्तमीडे…

लांगुलास्त्र शत्रुजन्य हनुमत स्तोत्र

|| लांगुलास्त्र शत्रुजन्य हनुमत स्तोत्र || हनुमन्नञ्जनीसूनो महाबलपराक्रम। लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। मर्कटाधिप मार्तण्ड मण्डल-ग्रास-कारक। लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। अक्षक्षपणपिङ्गाक्षक्षितिजाशुग्क्षयङ्र। लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। रुद्रावतार संसार-दुःख-भारापहारक। लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। श्रीराम-चरणाम्भोज-मधुपायितमानस। लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। बालिप्रथमक्रान्त सुग्रीवोन्मोचनप्रभो। लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। सीता-विरह-वारीश-मग्न-सीतेश-तारक। लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। रक्षोराज-तापाग्नि-दह्यमान-जगद्वन। लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। ग्रस्ताऽशैजगत्-स्वास्थ्य-राक्षसाम्भोधिमन्दर। लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय…

श्री हनुमत पञ्चरत्नं स्तोत्र

॥ श्री हनुमत पञ्चरत्नं स्तोत्र ॥ वीताखिल-विषयेच्छं जातानन्दाश्र पुलकमत्यच्छम् । सीतापति दूताद्यं वातात्मजमद्य भावये हृद्यम् ॥ तरुणारुण मुख-कमलं करुणा-रसपूर-पूरितापाङ्गम् । सञ्जीवनमाशासे मञ्जुल- महिमानमञ्जना-भाग्यम ॥ शम्बरवैरि-शरातिगमम्बुजदल- विपुल-लोचनोदारम् । कम्बुगलमनिलदिष्टम् बिम्ब- ज्वलितोष्ठमेकमवलम्बे ॥ दूरीकृत-सीतार्तिः प्रकटीकृत- रामवैभव-स्फूर्ति । दारित-दशमुख-कीर्तिः पुरतो मम भातु हनुमतो मूर्तिः ॥ वानर-निकराध्यक्षं दानवकुल- कुमुद-रविकर-सदृशम् । दीन-जनावन-दीक्षं पवन तपः पाकपुञ्जमद्राक्षम् ॥ एतत्-पवन-सुतस्य स्तोत्रं यः पठति…

श्री पंचमुख हनुमत्कवचम्

॥ श्री पंचमुख हनुमत्कवचम् ॥ ॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥ ॥ श्रीउमामहेश्वराभ्यां नमः ॥ श्रीसीतारामचन्द्राभ्यां नमः ॥ श्रीपञ्चवदनायाञ्जनेयाय नमः ॥ ॥ श्री पार्वत्युवाच ॥ सदाशिव वरस्वामिञ्ज्ञानद प्रियकारकः । कवचादि मया सर्वं देवानां संश्रुतं प्रिय ॥ १॥ इदानीं श्रोतुमिच्छामि कवचं करुणानिधे । वायुसूनोर्वरं येन नान्यदन्वेषितं भवेत् । साधकानां च सर्वस्वं हनुमत्प्रीति वर्द्धनम् ॥ २॥ ॥…

श्री एक मुखी हनुमत्कवचम्

॥ श्री एक मुखी हनुमत्कवचम् ॥ ॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥ मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥ श्रीरामदूतं शिरसा नमामि ॥ ॥ श्रीहनुमते नमः ॥ एकदा सुखमासीनं शङ्करं लोकशङ्करम् । पप्रच्छ गिरिजाकान्तं कर्पूरधवलं शिवम् ॥ ॥ पार्वत्युवाच ॥ भगवन्देवदेवेश लोकनाथ जगद्गुरो । शोकाकुलानां लोकानां केन रक्षा भवेद्ध्रुवम् ॥…

तिरुपति बालाजी मंदिर की बड़ी घोषणा – जानें नए नियम और रूम बुकिंग की नई नीति

hanuman jii

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD), जो प्रसिद्ध तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर का प्रबंधन करता है, ने तीर्थयात्रियों के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं, जिनका ध्यान यात्रा की योजना बना रहे भक्तों को अवश्य रखना चाहिए। भगवान वेंकटेश्वर, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, को समर्पित यह मंदिर दुनिया के सबसे अधिक देखे जाने वाले…

आज मंगलवार है – भजन

|| आज मंगलवार है – भजन || आज मंगलवार है महावीर का वार है ये सच्चा दरबार है सच्चे मन से जो कोई ध्यावे उसका बेड़ा पार है चैत्र सुदी पूनम मंगल का जनम वीर ने पाया है-2 लाल लंगोट गदा हाथ में सिर पर मुकुट सजाया है-2 शंकर का अवतार है महावीर का वार…

Mangalwar Vrat Aarti

|| Mangalwar Vrat Aarti || Aarti keejai Hanuman Lala ki, Dusht dalan Raghunath kala ki. Jake bal se girivar kaampe, Rog-dosh jaake nikat na jaampe. Anjani putra Maha baldayi, Santan ke prabhu sada sahayi. De bhira Raghunath pathaye, Lanka jaari Siya sudhi laye. Lanka so kot samundra si khaaye, Jaat pavansut baar na laye. Lanka…

मंगल मूरति राम दुलारे – भजन

|| मंगल मूरति राम दुलारे – भजन || मंगल मूरति राम दुलारे, आन पड़ा अब तेरे द्वारे, हे बजरंगबली हनुमान, हे महावीर करो कल्याण, हे महावीर करो कल्याण ॥ तीनों लोक तेरा उजियारा, दुखियों का तूने काज सवारा, हे जगवंदन केसरी नंदन, कष्ट हरो हे कृपा निधान ॥ मंगल मुरति राम दुलारे, आन पड़ा अब…

वीर हनुमाना अति बलवाना – भजन

|| वीर हनुमाना अति बलवाना – भजन || वीर हनुमाना अति बलवाना, राम नाम रसियो रे, प्रभु मन बसियो रे । वीर हनुमाना अति बलवाना, राम नाम रसियो रे, प्रभु मन बसियो रे । जो कोई आवे, अरज लगावे, सबकी सुनियो रे, प्रभु मन बसियो रे । जो कोई आवे, अरज लगावे, सबकी सुनियो रे,…

శ్రీ హనుమాన్ రక్షా స్తోత్రం

|| Hanuman Raksha Stotram Telugu || ॥ శ్రీహనుమద్రక్షాస్తోత్రమ్ || వామే కరే వైరిభిదం వహన్తం శైలం పరే శృఙ్ఞలహారటఙ్కమ్ । దదానమచ్ఛాచ్ఛసువర్ణవర్ణం భజే జ్వలత్కుణ్డలమార్ఖనేయమ్ ॥ ౧॥ పద్మరాగమణికుణ్డలత్విషా పాటలీకృతకపోలమస్తకమ్ |. దివ్యహేమకదలీవనాన్తరే భావయామి పవమాననన్దనమ్ ॥ ౨॥ ఉద్యదాదిత్యసఙ్కాశముదారభుజవిక్రమమ్ | కన్దర కోటిలావణ్యం సర్వవిద్యావిశారదమ్ ॥ ౩॥ శ్రీరామహృదయానన్దం భక్తకల్పమహీరుహమ్ | అభయం వరదం దోర్భ్యాం కలయే మారుతాత్మజమ్ || ౪॥ వామహస్తే మహాకృచదశాస్యకరమర్దనమ్ | ఉద్యద్వీక్షణకోదణ్డం హనూమన్తం విచిన్తయేత్ ॥ ౫||…

हनुमान रक्षा स्तोत्र

|| Hanuman Raksha Stotram || वामे करे वैरिभिदं वहन्तं शैलं परे श‍ृङ्खलहारटङ्कम् । ददानमच्छाच्छसुवर्णवर्णं भजे ज्वलत्कुण्डलमाञ्जनेयम् ॥ १॥ पद्मरागमणिकुण्डलत्विषा पाटलीकृतकपोलमस्तकम् । दिव्यहेमकदलीवनान्तरे भावयामि पवमाननन्दनम् ॥ २॥ उद्यदादित्यसङ्काशमुदारभुजविक्रमम् । कन्दर्पकोटिलावण्यं सर्वविद्याविशारदम् ॥ ३॥ श्रीरामहृदयानन्दं भक्तकल्पमहीरुहम् । अभयं वरदं दोर्भ्यां कलये मारुतात्मजम् ॥ ४॥ वामहस्ते महाकृッチ्रदशास्यकरमर्दनम् । उद्यद्वीक्षणकोदण्डं हनूमन्तं विचिन्तयेत् ॥ ५॥ स्फटिकाभं स्वर्णकान्तिं द्विभुजं च कृताञ्जलिम्…

श्री हनुमान साठिका

|| श्री हनुमान साठिका || जय जय जय हनुमान अडंगी । महावीर विक्रम बजरंगी ॥ जय कपीश जय पवन कुमारा । जय जगबन्दन सील अगारा ॥ जय आदित्य अमर अबिकारी । अरि मरदन जय-जय गिरधारी ॥ अंजनि उदर जन्म तुम लीन्हा । जय-जयकार देवतन कीन्हा ॥ बाजे दुन्दुभि गगन गम्भीरा । सुर मन हर्ष असुर…

जय बजरंगबली जय हनुमान

|| जय बजरंगबली जय हनुमान || जय बजरंगी जय हनुमाना, रुद्र रूप जय जय बलवाना, पवनसुत जय राम दुलारे, संकट मोचन सिय मातु के प्यारे ॥ जय वज्रकाय जय राम केरू दासा, हृदय करतु सियाराम निवासा, न जानहु नाथ तोहे कस गोहराई, राम भक्त तोहे राम दुहाई ॥ विनती सुनहु लाज रखहु हमारी, काज कौन…

राम ना मिलेंगे हनुमान के बिना

|| राम ना मिलेंगे हनुमान के बिना || पार ना लगोगे श्री राम के बिना, राम ना मिलेगे हनुमान के बिना। राम ना मिलेगे हनुमान के बिना, श्री राम ना मिलेंगे हनुमान के बिना। वेदो ने पुराणो ने कह डाला, राम जी का साथी बजरंग बाला। जीये हनुमान नही राम के बिना, राम भी रहे…

श्री हनुमदष्टकम्

|| श्री हनुमदष्टकम् || वैशाखमास कृष्णायां दशमी मन्दवासरे । पूर्वभाद्रासु जाताय मङ्गलं श्री हनूमते ॥ गुरुगौरवपूर्णाय फलापूपप्रियाय च । नानामाणिक्यहस्ताय मङ्गलं श्री हनूमते ॥ सुवर्चलाकलत्राय चतुर्भुजधराय च उष्ट्रारूढाय वीराय मङ्गलं श्री हनूमते ॥ दिव्यमङ्गलदेहाय पीताम्बरधराय च । तप्तकाञ्चनवर्णाय मङ्गलं श्री हनूमते ॥ भक्तरक्षणशीलाय जानकीशोकहारिणे । ज्वलत्पावकनेत्राय मङ्गलं श्री हनूमते ॥ पम्पातीरविहाराय सौमित्रीप्राणदायिने । सृष्टिकारणभूताय मङ्गलं…

हनुमान तुम्हारा क्या कहना

|| हनुमान तुम्हारा क्या कहना || कलियुग में सिद्ध हो देव तुम्हीं, हनुमान तुम्हारा क्या कहना । तेरी शक्ति का क्या कहना, तेरी भक्ति का क्या कहना ॥ सीता की खोज करी तुमने, तुम सात समुन्दर पार गये । लंका को किया शमशान प्रभु, बलवान तुम्हारा क्या कहना ॥ तेरी शक्ति का क्या कहना, तेरी…

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