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नवरात्रि 2026 – माँ दुर्गा के 9 स्वरूपों की उपासना से कैसे खोलें अपने करियर का भाग्य द्वार?

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नवरात्रि, हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण और पावन पर्व, माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का समय है। इस दौरान भक्तजन अपनी श्रद्धा और भक्ति से माँ को प्रसन्न करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, और सफलता का वरदान मांगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन नौ स्वरूपों की उपासना आपके करियर के लिए भी एक शक्तिशाली माध्यम बन सकती है? जी हाँ, माँ दुर्गा के हर स्वरूप की अपनी एक विशिष्ट शक्ति और ऊर्जा है, जो आपके करियर की राह में आने वाली बाधाओं को दूर कर सकती है।

माँ दुर्गा और करियर की सफलता का संबंध

करियर की सफलता केवल मेहनत और लगन से नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए सही दिशा, अवसर और सकारात्मक ऊर्जा का भी होना आवश्यक है। माँ दुर्गा, शक्ति और ऊर्जा की देवी हैं। उनकी उपासना से हमें वह आंतरिक शक्ति मिलती है, जो हमें चुनौतियों का सामना करने और लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करती है।

नवरात्रि 2026 के 9 दिन और 9 स्वरूप

शैलपुत्री (नौकरी में स्थिरता)

  • पूजा विधि – पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा करें। उन्हें सफेद फूल और गाय का घी अर्पित करें।
  • मंत्र – ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
  • लाभ – यह स्वरूप स्थिरता और दृढ़ता का प्रतीक है। इनकी उपासना से नौकरी में स्थिरता आती है और कार्यक्षेत्र में सम्मान बढ़ता है।

ब्रह्मचारिणी (ज्ञान और एकाग्रता)

  • पूजा विधि – दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करें। उन्हें सफेद चंदन, कमल का फूल और शहद अर्पित करें।
  • मंत्र – ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
  • लाभ – यह स्वरूप ज्ञान, तपस्या और एकाग्रता का प्रतीक है। इनकी उपासना से छात्रों को पढ़ाई में सफलता मिलती है और करियर के लिए सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

चंद्रघंटा (साहस और आत्मविश्वास)

  • पूजा विधि – तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा करें। उन्हें लाल फूल और मिठाई अर्पित करें।
  • मंत्र – ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः॥
  • लाभ – यह स्वरूप साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है। इनकी उपासना से करियर में आने वाली बाधाओं से लड़ने की शक्ति मिलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

कूष्मांडा (सृजनात्मकता और ऊर्जा)

  • पूजा विधि – चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा करें। उन्हें पीले फूल और हरी इलायची अर्पित करें।
  • मंत्र – ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
  • लाभ – यह स्वरूप सृजनात्मकता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इनकी उपासना से नए विचारों और परियोजनाओं को शुरू करने की प्रेरणा मिलती है।

स्कंदमाता (नेतृत्व क्षमता और सम्मान)

  • पूजा विधि – पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा करें। उन्हें केले और लाल गुड़हल के फूल अर्पित करें।
  • मंत्र – ॐ देवी स्कन्दमात्र्यै नमः॥
  • लाभ – यह स्वरूप नेतृत्व क्षमता और सम्मान का प्रतीक है। इनकी उपासना से कार्यक्षेत्र में नेतृत्व का अवसर मिलता है और सम्मान बढ़ता है।

कात्यायनी (लक्ष्य प्राप्ति और मनोकामना पूर्ति)

  • पूजा विधि – छठवें दिन माँ कात्यायनी की पूजा करें। उन्हें लाल वस्त्र और लाल चंदन अर्पित करें।
  • मंत्र – ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
  • लाभ – यह स्वरूप लक्ष्य प्राप्ति और मनोकामना पूर्ति का प्रतीक है। इनकी उपासना से करियर के लक्ष्य जल्द से जल्द पूरे होते हैं।

कालरात्रि (नकारात्मकता का नाश)

  • पूजा विधि – सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा करें। उन्हें काले तिल और नींबू अर्पित करें।
  • मंत्र – ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
  • लाभ – यह स्वरूप नकारात्मकता और बुरी शक्तियों का नाश करता है। इनकी उपासना से करियर में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा और ईर्ष्या का नाश होता है।

महागौरी (सुख-समृद्धि और सफलता)

  • पूजा विधि – आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा करें। उन्हें सफेद कमल और घी अर्पित करें।
  • मंत्र – ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
  • लाभ – यह स्वरूप सुख-समृद्धि और सफलता का प्रतीक है। इनकी उपासना से करियर में धन-लाभ और समृद्धि आती है।

सिद्धिदात्री (अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति)

  • पूजा विधि – नवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा करें। उन्हें विभिन्न प्रकार के फल और मीठा अर्पित करें।
  • मंत्र – ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
  • लाभ – यह स्वरूप अष्ट सिद्धियों और मोक्ष का प्रतीक है। इनकी उपासना से करियर में सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और असीमित सफलता मिलती है।

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