श्री गणेश चालीसा

गणेश चालीसा भगवान श्री गणेश जी की स्तुति में रचित एक भक्ति मूलक चालीसा है, जिसमें 40 चौपाइयों के माध्यम से उनके दिव्य स्वरूप, कार्य, लीलाओं और गुणों का वर्णन किया गया है। यह चालीसा संकटों से मुक्ति, सफलता की प्राप्ति, और कार्यों में विघ्न दूर करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। श्री…

श्री दुर्गा चालीसा

दुर्गा चालीसा एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तुति है जो देवी दुर्गा को समर्पित होती है। इसमें 40 चौपाइयों के माध्यम से माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों, शक्तियों और उनकी लीलाओं का वर्णन किया गया है। इसे नियमित रूप से पढ़ने से साधक को माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक…

शिव चालीसा

शिव चालीसा भगवान शिव को समर्पित चालीस छंदों की एक भक्ति स्तुति है। इसका पाठ भक्तों द्वारा उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है। शिव चालीसा एक अत्यंत पावन और शक्तिशाली स्तुति है, जो भगवान शिव की महिमा का गुणगान करती है। इसमें कुल 40 चौपाइयाँ होती हैं, जिनमें भगवान शिव…

रविवार आरती

|| रविवार आरती PDF || जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन – तिमिर – निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥ ॐ जय अदिति नन्दन… सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी। दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥ ॐ जय अदिति नन्दन… सुर – मुनि – भूसुर – वन्दित, विमल विभवशाली। अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ ॐ जय अदिति नन्दन… सकल – सुकर्म – प्रसविता,…

श्री रंगनाथ अष्टकम अर्थ सहित

|| रंगनाथ अष्टकम (Rangnath Ashtakam PDF With Maening) || आनंदरूपे निजबोधरूपे ब्रह्मस्वरूपे श्रुतिमूर्तिरूपे। शशांकरूपे रमणीयरूपे श्रीरंगरूपे रमतां मनोमे ।। मेरा मन श्री रंगनाथ के दिव्य रूप में प्रसन्न होता है) वह रूप (आदिशेष पर आराम करते हुए) आनंद में लीन (आनंद रूप), और अपने स्वयं में (निज बोध रूप) में डूबा हुआ; वह रूप ब्रह्म…

श्री राधाष्टक

|| श्रीराधाष्टकम् PDF || ॐ दिशिदिशिरचयन्तीं सञ्चयन्नेत्रलक्ष्मीं, विलसितखुरलीभिः खञ्जरीटस्य खेलाम् । हृदयमधुपमल्लीं वल्लवाधीशसूनो-, रखिलगुणगभीरां राधिकामर्चयामि ॥ पितुरिह वृषभानो रत्नवायप्रशस्तिं, जगति किल सयस्ते सुष्ठु विस्तारयन्तीम् । व्रजनृपतिकुमारं खेलयन्तीं सखीभिः, सुरभिनि निजकुण्डे राधिकामर्चयामि ॥ शरदुपचितराकाकौमुदीनाथकीर्त्ति-, प्रकरदमनदीक्षादक्षिणस्मेरवक्त्राम् । नटयदभिदपाङ्गोत्तुङ्गितानं गरङ्गां, वलितरुचिररङ्गां राधिकामर्चयामि ॥ विविधकुसुमवृन्दोत्फुल्लधम्मिल्लधाटी-, विघटितमदघृर्णात्केकिपिच्छुप्रशस्तिम् । मधुरिपुमुखबिम्बोद्गीर्णताम्बूलराग-, स्फुरदमलकपोलां राधिकामर्चयामि ॥ नलिनवदमलान्तःस्नेहसिक्तां तरङ्गा-, मखिलविधिविशाखासख्यविख्यातशीलाम् । स्फुरदघभिदनर्घप्रेममाणिक्यपेटीं, धृतमधुरविनोदां राधिकामर्चयामि ॥…

आदिनाथ स्वामी आरती

|| आदिनाथ स्वामी आरती PDF || आदिनाथ स्वामी जय आदिनाथ स्वामी, बाबा जय । जय आदिनाथ स्वामी, बाबा जय आदिनाथ स्वामी । दुखहारी सुखकारी तुम हो, दुखहारी सुखकारी तुम हो त्रिभुवन के स्वामी, त्रिभुवन के स्वामी || जय आदिनाथ स्वामी, बाबा जय आदिनाथ स्वामी || नाभिराय मरूदेवी के नंदन, नाभिराय मरूदेवी के नंदन संतन आधार,…

माँ वाराही की आरती

|| माँ वाराही की आरती PDF || माँ वाराही जय-जय, मइया वाराही जय-जय | मणिपूरक मणिबंधन, पाँव सजे तेरे || || ऊँ माँ वाराही जय-जय || लाल चुनर माँ ओढ़े, माँग सिंदूर धरती | दुष्ट दलों को हनती, जग पावन करती || || ऊँ माँ वाराही जय-जय || कानन कुंडल शोभत, मुकुट भव्य भाता |…

शनिवार आरती

॥ शनिवार आरती ॥ जय शनि देवा, जय शनि देवा, जय जय जय शनि देवा। अखिल सृष्टि में कोटि-कोटिजन करें तुम्हारी सेवा। जय शनि देवा…॥ जा पर कुपित होउ तुम स्वामी, घोर कष्ट वह पावे। धन वैभव और मान-कीर्ति, सब पलभर में मिट जावे। राजा नल को लगी शनि दशा, राजपाट हर लेवा। जय शनि…

गणेश गीता (Ganesh Geeta PDF Book)

गणेश गीता (Ganesh Geeta PDF Book)

यदि आप “गणेश गीता” PDF डाउनलोड करना चाहते हैं या इसके आध्यात्मिक लाभों को जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी है। गणेश गीता क्या है? गणेश गीता एक अद्भुत और दुर्लभ ग्रंथ है, जिसमें भगवान गणेश ने मानव जीवन, भक्ति, कर्म, ज्ञान और मोक्ष के मार्ग की रहस्यमयी बातों को उजागर…

एशिया के त्यौहार (Asian Festivals PDF Book)

एशिया के त्यौहार (Asian Festivals PDF Book)

एशिया एक विविधताओं से भरपूर महाद्वीप है जहाँ हर संस्कृति, धर्म और क्षेत्र की अपनी-अपनी अनूठी पहचान है। एशिया के देशों में मनाए जाने वाले त्यौहार न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि वे सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक जीवन के प्रतिबिंब भी होते हैं। “एशिया के त्यौहार PDF Book” एक ऐसी पुस्तक है जो पाठकों…

समस्त हिन्दू व्रत कथा (Samast Hindu Vrat Katha PDF)

समस्त हिन्दू व्रत कथा (Samast Hindu Vrat Katha PDF)

क्या आप सभी हिन्दू व्रत कथाओं को एक ही स्थान पर पढ़ना चाहते हैं? तो अभी डाउनलोड करें “समस्त हिन्दू व्रत कथा PDF Book”, जिसमें मिलेंगी प्रमुख व्रतों की प्रामाणिक कथाएँ, पूजन विधि और लाभ — वह भी एकदम मुफ्त में! समस्त हिन्दू व्रत कथा PDF Book क्या है? समस्त हिन्दू व्रत कथा PDF Book…

शुक्र कवचम्

|| शुक्र कवचम् (Shukra Kavacham PDF) || ध्यानम् मृणालकुन्देन्दुपयोजसुप्रभं पीताम्बरं प्रसृतमक्षमालिनम् । समस्तशास्त्रार्थविधिं महान्तं ध्यायेत्कविं वाञ्छितमर्थसिद्धये ॥ ॥ अथ शुक्रकवचम् ॥ शिरो मे भार्गवः पातु भालं पातु ग्रहाधिपः । नेत्रे दैत्यगुरुः पातु श्रोत्रे मे चन्दनद्युतिः ॥ पातु मे नासिकां काव्यो वदनं दैत्यवन्दितः । वचनं चोशनाः पातु कण्ठं श्रीकण्ठभक्तिमान् ॥ भुजौ तेजोनिधिः पातु कुक्षिं पातु मनोव्रजः…

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र

|| दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र || विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय शशिशेखरभूषणाय। कर्पूरकुन्दधवलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय। गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय। गङ्गाधराय गजराजविमर्दनाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय। भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय ह्युग्राय दुर्गभवसागरतारणाय। ज्योतिर्मयाय पुनरुद्भववारणाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय। चर्मम्बराय शवभस्मविलेपनाय भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय। मञ्जीरपादयुगलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय। पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डनाय। आनन्दभूमिवरदाय तमोहराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय। भानुप्रियाय दुरितार्णवतारणाय कालान्तकाय कमलासनपूजिताय।…

Amarnath Yatra 2025 – अमरनाथ यात्रा रजिस्ट्रेशन शुरू जानिए पूरी जानकारी रूट, हेलिकॉप्टर सेवा, पंजीकरण प्रक्रिया और सुविधाएं

amarnath baba

अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और देशभर के श्रद्धालुओं में इसको लेकर गहरी श्रद्धा और उत्साह देखने को मिल रहा है। इस वर्ष भी श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (SASB) द्वारा यात्रा को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने हेतु व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं। यह पवित्र यात्रा जम्मू-कश्मीर के…

अमरनाथ बाबा की गुफा के चौंकाने वाले रहस्य और अद्भुत दर्शन की कहानी

गुफा का पौराणिक इतिहास , कश्मीर घाटी में राजा दश और ऋषि कश्यप और उनके पुत्रों का निवास स्थान था। पौराणिक मान्यता है कि एक बार कश्मीर की घाटी जलमग्न हो गई। उसने एक बड़ी झील का रूप ले लिया। तब ऋषि कश्यप ने इस जल को अनेक नदियों और छोटे-छोटे जलस्रोतों के द्वारा बहा…

कर दो नजरे करम गणपति – भजन

|| कर दो नजरे करम गणपति – भजन || कर दो नजरे करम गणपति, कर दो नजरें करम गणपति, किरपा की नजर, हमपे कर दो अगर, तेरे दरबार में क्या कमी, कर दो नजरें करम गणपति, कर दो नजरें करम गणपति ॥ सारे देवों में पहले तेरा नाम है, पहले पूजा करे सारा संसार है,…

श्री पंचरत्न गणपति स्तोत्र 

॥ श्री पंचरत्न गणपति स्तोत्र ॥ मुदा करात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं, कलाधरावतंसकं विलासिलोकरञ्जकम्। अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं, नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम्॥ नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं, नमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम्। सुरेश्वरं निधीवरं गजेश्वरं गणेश्वरं महेश्वर, तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥ समस्तलोकशंकरं निरस्तदैत्यकुञ्जरं, दरेतरोदर वरं वरेभवक्त्रमक्षरम्। कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करं, नमस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम्॥ अकिंचनार्तिमार्जनं चिरंतनोक्तिभाजनं, पुरारिपूर्वनन्दनं सुरारिगर्वचर्वणम्। प्रपञ्चनाशभीषणं धनंजयादिभूषणं, कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम्॥ नितान्तकान्तदन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मज- मचिन्त्यरूपमन्तहीनमन्तरायकृन्तनम्।…

श्री पंचरत्न गणपति स्तोत्रम् अर्थ सहित

॥ श्री पंचरत्न गणपति स्तोत्र पाठ विधि/लाभ ॥ पंचरत्न स्तोत्र पाठ के लिए साधक को सबसे पहले सुबह स्नान कर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठकर पाठ करना चाहिए। पंचरत्न स्तोत्र का नियमित पाठ करने से मन को शांति मिलती है। इसके जाप से जीवन से सभी बुराई दूर होती है और…

श्री संतानगणपति स्तोत्रम् अर्थ सहित

॥ श्री संतानगणपतिस्तोत्रम् पाठ विधि ॥ इस स्तोत्र को किसी भी मंगलवार से शुरू करना चाहिए। संतान प्राप्ति का संकल्प कर इस स्तोत्र का अनुष्ठान करना चाहिए। स्तोत्र का पाठ स्वयं करने में अगर आप सक्षम नहीं तो किसी विद्वान से इसे करवा सकते हैं। स्तोत्र को स्पष्ट उच्चारण के साथ ही जाप करना चाहिए।…

श्री सायिनाथ अष्टकम्

|| श्री सायिनाथ अष्टकम् || पत्रिग्राम समुद्भूतं द्वारकामायि वासिनं भक्ताभीष्टप्रदं देवं सायिनाथं नमाम्यहम् ॥ महोन्नत कुलेजातं क्षीराम्बुधि समे शुभे द्विजराजं तमोघ्नं तं सायिनाथं नमाम्यहम् ॥ जगदुद्धारणार्थं यो नररूपधरो विभुः योगिनं च महात्मानं सायिनाथं नमाम्यहम् ॥ साक्षात्कारे जये लाभे स्वात्मारामो गुरोर्मुखात् निर्मलं मम गात्रं च सायिनाथं नमाम्यहम् ॥ यस्य दर्शन मात्रेण नश्यन्ति व्याधि कोटयः सर्वे पापाः…

श्री साई बाबा आरती

|| श्री साई बाबा आरती || ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे। भक्तजनों के कारण, उनके कष्ट निवारण॥ शिरडी में अवतरे, ॐ जय साईं हरे॥ ॥ ॐ जय…॥ दुखियन के सब कष्टन काजे, शिरडी में प्रभु आप विराजे। फूलों की गल माला राजे, कफनी, शैला सुन्दर साजे॥ कारज सब के करें, ॐ जय…

साईं बाबा की व्रत कथा

|| साईं बाबा व्रत कथा (Sai Baba Vrat Katha PDF) || किरन बहन और उनके पति किशन भाई एक शहर में रहते थे। वैसे तो दोनों का एक दूसरे के प्रति गहरा प्रेम भाव था। परन्तु किशन भाई का स्वरूप झगड़ालू था। अड़ोसी-पड़ोसी भी उनके स्वभाव से परेशान थे, लेकिन किरन बहन धार्मिक स्वभाव की…

श्री बालाजी की स्तुति

|| श्री बालाजी की स्तुति || संसार के पालन हार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे‚ हम सबके प्राण आधार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे। संसार के पालन हार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे। आराम सुखों के दाता हो तुम‚ सबके भाग्य विधाता हो‚ संसार का सार तुम्हीं तो हो‚…

श्री व्यंकटेश जी आरती

|| श्री व्यंकटेश जी आरती || शेषाचल अवतार तारक तूं देवा । सुरवर मुनिवर भावें करिती जन सेवा ॥ कमलारमणा अससी अगणित गुण ठेवा । कमलाक्षा मज रक्षुनि सत्वर वर द्यावा ॥ जय देव जय देव जय व्यंकटेशा । केवळ करूणासिंधु पुरविसी आशा ॥ हे निजवैकुंठ म्हणुनी ध्यातों मी तू तें । दाखविसी गुण कैसे…

श्री वेंकटेश्वर स्वामी आरती

|| श्री वेंकटेश्वर स्वामी आरती || जय तिरुपति बालाजी, जय तिरुपति बालाजी, जय जय वेंकट स्वामी, तुम हो अंतर्यामी, जय श्री नाथ हरी, जय तिरुपति बालाजी, जय तिरुपति बालाजी, जय तिरुपति बालाजी, जय जय वेंकट स्वामी, तुम हो अंतर्यामी, जय श्री नाथ हरी, जय तिरुपति बालाजी…. अगणित नाम तुम्हारे अगणित रूप धरे, स्वामी अगणित रूप…

मेष संक्रांति व्रत कथा

|| मेष संक्रांति व्रत कथा || एक समय की बात है, एक बहुत ही गरीब ब्राह्मण था। वह बहुत ही धार्मिक और ईश्वर भक्त था। वह हर साल मेष संक्रान्ति के दिन व्रत रखता था और भगवान सूर्य की पूजा करता था। एक बार, मेष संक्रान्ति के दिन, ब्राह्मण ने व्रत रखा और भगवान सूर्य…

श्री सत्यनारायण व्रत कथा एवं पूजा विधि

|| श्री सत्य नारायण पूजन विधि || जो व्यक्ति भगवान् श्री सत्य नारायण की पूजा का संकल्प लेते हैं, उन्हें दिन भर व्रत रखना चाहिए। पूजन स्थल को गाय के गोबर से पवित्र करके वहाँ एक अल्पना बनाएँ और उस पर पूजा की चौकी रखना चाहिये। इस चौकी के चारों पायों के पास केले के…

विनय पत्रिका गीता प्रेस गोरखपुर (Vinay Patrika Gita Press Gorakhpur)

विनय पत्रिका गीता प्रेस गोरखपुर (Vinay Patrika Gita Press Gorakhpur)

विनय-पत्रिका, गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित, भक्ति साहित्य का एक अनुपम रत्न है। यह ग्रंथ, गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, लाखों भक्तों के हृदय में बसा हुआ है। इसमें तुलसीदास जी ने भगवान राम के प्रति अपनी अनन्य भक्ति और दीनता को व्यक्त किया है। यह न केवल एक साहित्यिक कृति है, बल्कि आध्यात्मिक मार्गदर्शन…

विनय पत्रिका (Vinay Patrika)

विनय पत्रिका (Vinay Patrika)

विनय-पत्रिका गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक महान भक्ति ग्रंथ है, जिसमें उन्होंने भगवान श्रीराम के चरणों में अपनी करुणा, भक्ति, और विनम्रता से भरे भावों को प्रस्तुत किया है। यह ग्रंथ रामभक्तों के लिए न केवल एक भक्ति स्रोत है, बल्कि आध्यात्मिक यात्रा का मार्गदर्शक भी है। विनय-पत्रिका क्या है? ‘विनय’ का अर्थ है…

श्री हनुमत्ताण्डव स्तोत्रम्

|| श्रीहनुमत्ताण्डवस्तोत्रम् || वन्दे सिन्दूरवर्णाभं लोहिताम्बरभूषितम् । रक्ताङ्गरागशोभाढ्यं शोणापुच्छं कपीश्वरम्॥ भजे समीरनन्दनं, सुभक्तचित्तरञ्जनं, दिनेशरूपभक्षकं, समस्तभक्तरक्षकम् । सुकण्ठकार्यसाधकं, विपक्षपक्षबाधकं, समुद्रपारगामिनं, नमामि सिद्धकामिनम् ॥ १॥ सुशङ्कितं सुकण्ठभुक्तवान् हि यो हितं वच- स्त्वमाशु धैर्य्यमाश्रयात्र वो भयं कदापि न । इति प्लवङ्गनाथभाषितं निशम्य वान- राऽधिनाथ आप शं तदा, स रामदूत आश्रयः ॥ २॥ सुदीर्घबाहुलोचनेन, पुच्छगुच्छशोभिना, भुजद्वयेन सोदरीं निजांसयुग्ममास्थितौ ।…

सम्पूर्ण सुंदरकांड पाठ

|| सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ PDF डाउनलोड फॉर फ्री || || श्लोक || शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम् । रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूड़ामणिम्।।1।। नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा। भक्तिं प्रयच्छ रघुपुङ्गव निर्भरां मे कामादिदोषरहितं कुरु मानसं च।।2।। अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।3।। ||…

मारुति स्तोत्रम्

|| मारुति स्तोत्र की जप की विधि || मारुति स्तोत्र का पाठ प्रातः के समय या फिर संध्या वंदन के समय करना चाहिए। इसके पाठ के लिए सबसे पहले स्वयं को शुद्ध कर लें। इसके बाद आसान हनुमान जी की प्रतिमा के आसन विछाकर बैठें। हनुमान जी की विधिवत पूजा करें। उसके पश्चात पाठ प्रारंभ…

मेरे दरवाजे पे हनुमान का, पहरा होता है – भजन

|| मेरे दरवाजे पे हनुमान का, पहरा होता है – भजन || जब जब भी संकट का मुझ पर, घेरा होता है, मेरे दरवाजे पे हनुमान का, पहरा होता है, मेरे दरवाजे पे हनुमान का, पहरा होता है ॥ जब से आए घर में मेरे, घर के संकट भाग गए, हम तो सोए थे गहरी…

हनुमान वडवनल स्तोत्र (Hanuman Vadvanal Stotra)

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हनुमान वडवानल स्तोत्र भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन करने वाला एक प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना रावण के भाई विभीषण ने की थी। विभीषण, जो भगवान राम और हनुमान के अनन्य भक्त थे, ने इस स्तोत्र की रचना अपने कष्टों से मुक्ति और सुरक्षा हेतु की। इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से भक्तों…

हनुमान रक्षा स्तोत्र (Hanuman Raksha Stotram)

हनुमान रक्षा स्तोत्र (Hanuman Raksha Stotram)

हनुमान रक्षा स्तोत्र भगवान हनुमान की महिमा और उनकी कृपा से भक्तों की रक्षा का वर्णन करने वाला एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है। इस स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में आने वाली बाधाओं, संकटों और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो अपने जीवन…

हनुमान तांडव स्त्रोत (Hanuman Tandav Stotram)

हनुमान तांडव स्त्रोत (Hanuman Tandav Stotram)

हनुमान तांडव स्तोत्र भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन करने वाला एक प्रभावशाली स्तोत्र है, जो उनके अद्वितीय पराक्रम, भक्ति और गुणों का गुणगान करता है। इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से भक्तों के सभी प्रकार के संकट, रोग और शोक दूर होते हैं, और उन्हें साहस, शक्ति तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है।…

श्री हनुमान स्तवन स्तोत्रम् अर्थ सहित

|| श्री हनुमान स्तवन स्तोत्र एवं अर्थ || प्रनवउं पवनकुमार खल बन पावक ज्ञानघन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥ अर्थ: मैं उन पवन पुत्र को नमन करता हूं, जो दुष्टों को भस्म करने के लिए अग्नि के समान हैं। जो अज्ञान रूपी अंधकार का नाश करने वाले हैं, जिसके हृदय में धनुष-बाण…

श्री हनुमान स्तवन स्तोत्र

|| श्री हनुमान स्तवन स्तोत्र || प्रनवउं पवनकुमार खल बन पावक ज्ञानघन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥ अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं। दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्॥ सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं। रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥ गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसम्। रामायणमहामालारत्नं वन्देऽनिलात्मजम्॥ अञ्जनानन्दनं वीरं जानकीशोकनाशनम्। कपीशमक्षहन्तारं वन्दे लङ्काभयङ्करम्॥ उलंघ्यसिन्धों: सलिलं सलीलं य: शोकवह्नींजनकात्मजाया:। आदाय तेनैव ददाह लङ्कां नमामि तं प्राञ्जलिराञ्जनेयम्॥ मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां…

बजरंगबली हनुमान साठिका (Hanuman Sathika)

बजरंगबली हनुमान साठिका (Hanuman Sathika)

हनुमान साठिका भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन करने वाला एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। इस स्तोत्र में कुल साठ चौपाइयाँ हैं, इसलिए इसे ‘साठिका’ कहा जाता है। इसका नियमित पाठ करने से भक्तों को जीवन में आने वाली बाधाओं, रोगों और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है, साथ…

श्री हनुमान बाहुक पाठ

|| श्री हनुमान बाहुक पाठ || श्रीगणेशाय नमः श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्रीमद्-गोस्वामी-तुलसीदास-कृत ॥ छप्पय ॥ सिंधु-तरन, सिय-सोच हरन, रबि-बालबरन-तनु । भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु ॥ गहन-दहन-निरदहन-लंक निःसंक, बंक-भुव । जातुधान-बलवान-मान-मद-दवन पवनसुव ॥ कह तुलसिदास सेवत सुलभ, सेवक हित सन्तत निकट। गुनगनत, नमत, सुमिरत, जपत, समन सकल-संकट-बिकट ॥१॥ स्वर्न-सैल-संकास कोटि-रबि-तरुन तेज घन। उर बिसाल,…

पवनपुत्र हनुमान (Pavanputra Hanuman)

पवनपुत्र हनुमान (Pavanputra Hanuman)

पवनपुत्र हनुमान ग्रंथ भगवान हनुमान की अद्भुत शक्तियों, उनकी भक्ति, और उनके जीवन की प्रेरक कथाओं को समर्पित है। इस पुस्तक के लेखक स्वतन्त्र जैन ने भगवान हनुमान के चरित्र और उनके अलौकिक गुणों को इस प्रकार प्रस्तुत किया है कि यह हर पाठक के मन में भक्ति और श्रद्धा का संचार करता है। इस…

यंत्रोद्धारक हनुमान स्तोत्र (Yantrodharaka Hanuman Stotra)

यंत्रोद्धारक हनुमान स्तोत्र (Yantrodharaka Hanuman Stotra)

यंत्रोद्धारक हनुमान स्तोत्र भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन करने वाला एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है, जिसकी रचना श्री व्यासराज तीर्थ ने की थी। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन भक्तों के लिए लाभकारी माना जाता है जो अपने जीवन में आने वाली बाधाओं, रोगों और कष्टों से मुक्ति पाना चाहते हैं। इस स्तोत्र का नियमित…

राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते – भजन

|| राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते – भजन || राम जी के साथ जो,हनुमान नहीं होते, राम जी के पूरे कभी, काम नहीं होते | राम जी के साथ जो,हनुमान नहीं होते, राम जी के पूरे कभी, काम नहीं होते || हनुमान पर्वत उठाकर ना लाते, कैसे संजीवन सुषेण वेद पाते, प्राण…

श्री राम जहाँ होंगे हनुमान वहां होंगे – भजन

|| श्री राम जहाँ होंगे हनुमान वहां होंगे – भजन || तर्ज – जब हम जवां होंगे श्री राम जहाँ होंगे, हनुमान वहां होंगे, दोनों जहाँ होंगे,वहां कल्याण करेंगे, हर काम बनेंगे,श्री राम जहाँ होंगे || || श्री राम का जो भी,ध्यान लगाएगा, बालाजी के दर्शन,वो ही पाएगा, प्रभु राम की भक्ति से,तुम्हे हनुमान मिलेंगे,…

श्री हनुमान सहस्रनामावली

श्री हनुमान सहस्रनामावली में भगवान हनुमान के 1000 दिव्य और शक्तिशाली नामों का संग्रह है। यह सहस्रनामावली भगवान हनुमान की महिमा, शक्ति और उनके अद्भुत गुणों का वर्णन करती है। भगवान हनुमान को अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता, संकटमोचक, और भक्ति, शक्ति और ज्ञान के प्रतीक माना जाता है। इस सहस्रनामावली के माध्यम…

श्री पंचमुखी हनुमान कवच स्तोत्रम्

|| श्री पंचमुखी हनुमान कवच स्तोत्रम् || | श्री गणेशाय नमः। ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवच मन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:। गायत्री छंद:। पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता। ह्रीं बीजम्। श्रीं शक्ति:। क्रौं कीलकं। क्रूं कवचं। क्रैं अस्त्राय फट्। इति दिग्बन्ध:। || श्री गरुड़ उवाच || अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि शृणु सर्वांगसुंदर, यत्कृतं देवदेवेन ध्यानं हनुमतः प्रियम्॥ पञ्चवक्त्रं महाभीमं त्रिपञ्चनयनैर्युतम्, बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकामार्थसिद्धिदम्।।…

हनुमान जी आरती

|| हनुमान जी आरती (Hanuman Aarti PDF) || आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥ अंजनि पुत्र महा बलदाई। सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥ आरती कीजै हनुमान लला की। दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥ लंका सो कोट…

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