श्री भवान्यष्टकम्

॥ श्री भवान्यष्टकम् ॥ न तातो न माता न बन्धुर्न दाता न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता। न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥ भवाब्धावपारे महादुःखभीरुः पपात प्रकामी प्रलोभी प्रमत्तः। कुसंसारपाशप्रबद्धः सदाहं गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥ न जानामि दानं न च ध्यानयोगं न जानामि तन्त्रं न च स्तोत्रमन्त्रम्। न जानामि…

श्री गंगा अष्टकम्

॥ श्री गङ्गाष्टकम् ॥ भगवति तव तीरे नीरमात्राशनोऽहं विगतविषयतृष्णः कृष्णमाराधयामि। सकलकलुषभङ्गे स्वर्गसोपानसङ्गे तरलतरतरङ्गे देवि गङ्गे प्रसीद॥ भगवति भवलीलामौलिमाले तवाम्भः कणमणुपरिमाणं प्राणिनो ये स्पृशन्ति। अमरनगरनारीचामरग्राहिणीनां विगतकलिकलङ्कातङ्कमङ्के लुठन्ति॥ ब्रह्माण्डं खण्डयन्ती हरशिरसि जटावल्लिमुल्लासयन्ती स्वर्लोकादापतन्ती कनकगिरिगुहागण्डशैलात्स्खलन्ती। क्षोणीपृष्ठे लुठन्ती दुरितचयचमूनिर्भरं भर्त्सयन्ती पाथोधिं पुरयन्ती सुरनगरसरित्पावनी नः पुनातु॥ मज्जन्मातङ्गकुम्भच्युतमदमदिरामोदमत्तालिजालं स्नानैः सिद्धाङ्गनानां कुचयुगविगलत्कुङ्कुमासङ्गपिङ्गम्। सायंप्रातर्मुनीनां कुशकुसुमचयैश्छन्नतीरस्थनीरं पायान्नो गाङ्गमम्भः करिकलभकराक्रान्तरंहस्तरङ्गम्॥ आदावादिपितामहस्य नियमव्यापारपात्रे जलं पश्चात्पन्नगशायिनो भगवतः…

श्री हनुमदष्टकम्

|| श्री हनुमदष्टकम् || वैशाखमास कृष्णायां दशमी मन्दवासरे । पूर्वभाद्रासु जाताय मङ्गलं श्री हनूमते ॥ गुरुगौरवपूर्णाय फलापूपप्रियाय च । नानामाणिक्यहस्ताय मङ्गलं श्री हनूमते ॥ सुवर्चलाकलत्राय चतुर्भुजधराय च उष्ट्रारूढाय वीराय मङ्गलं श्री हनूमते ॥ दिव्यमङ्गलदेहाय पीताम्बरधराय च । तप्तकाञ्चनवर्णाय मङ्गलं श्री हनूमते ॥ भक्तरक्षणशीलाय जानकीशोकहारिणे । ज्वलत्पावकनेत्राय मङ्गलं श्री हनूमते ॥ पम्पातीरविहाराय सौमित्रीप्राणदायिने । सृष्टिकारणभूताय मङ्गलं…

श्री रंगनाथ अष्टकम

|| रंगनाथ अष्टकम || आनंदरूपे निजबोधरूपे ब्रह्मस्वरूपे श्रुतिमूर्तिरूपे। शशांकरूपे रमणीयरूपे श्रीरंगरूपे रमतां मनो मे ।। कावेरीतिरे करुणाविलोले मंदरामुले धृतचारुकेले। दैत्यान्तकालेखिलालोकलिले श्रीरंगलिले रमतां मनो मे ।। लक्ष्मीनिवासे जगतं निवासे हृतपद्मावसे रविबिंबवसे। कृपाणिवसे गुणबृंदवसे श्रीरंगवासे रमतां मनो मे ।। ब्रह्मादिवन्द्ये जगदेकवन्दये मुकुन्दवन्दये सुरनाथवन्दये। व्यासादिवंद्ये सनकादिवंद्ये श्रीरंगवंद्ये रमतां मनो मे ।। ब्रह्माधिराजे गरुड़ाधिराजे वैकुंठराजे सुरराजराजे। त्रैलोक्यराजे’खिलालोकराजे श्रीरंगराजे रमतां…

श्री कमलापत्यष्टकम्

॥ श्री कमलापत्यष्टकम् ॥ भुजगतल्पगतं घनसुन्दरं गरुडवाहनमम्बुजलोचनम्। नलिनचक्रगदाकरमव्ययं भजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥ अलिकुलासितकोमलकुन्तलं विमलपीतदुकूलमनोहरम्। जलधिजाङ्कितवामकलेवरं भजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥ किमु जपैश्च तपोभिरुताध्वरैरपि किमुत्तमतीर्थनिषेवणैः। किमुत शास्त्रकदम्बविलोकनैर्भजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥ मनुजदेहमिमं भुवि दुर्लभं समधिगम्य सुरैरपि वाञ्छितम्। विषयलम्पटतामपहाय वै भजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥ न वनिता न सुतो न सहोदरो न हि पिता जननी न च बान्धवः। व्रजति साकमनेन…

श्री नारायणाष्टकम्

॥ श्री नारायणाष्टकम् ॥ वात्सल्यादभयप्रदान-समयादार्तिनिर्वापणा- दौदार्यादघशोषणाद-गणितश्रेयःपदप्रापणात्। सेव्यः श्रीपतिरेक एवजगतामेतेऽभवन्साक्षिणः प्रह्लादश्च विभीषणश्चकरिराट् पाञ्चाल्यहल्या ध्रुवः॥ प्रह्लादास्ति यदीश्वरो वदहरिः सर्वत्र मे दर्शय स्तम्भे चैवमितिब्रुवन्तमसुरं तत्राविरासीद्धरिः। वक्षस्तस्य विदारयन्निजन-खैर्वात्सल्यमापाद- यन्नार्तत्राणपरायणः सभगवान्नारायणो मे गतिः॥ श्रीरामात्र विभीषणोऽयमनघोरक्षोभयादागतः सुग्रीवानय पालयैनमधुनापौलस्त्यमेवागतम्। इत्युक्त्वाभयमस्यसर्वविदितं यो राघवो दत्तवानार्तत्राणपरायणः सभगवान्नारायणो मे गतिः॥ नक्रग्रस्तपदं समुद्धतकरंब्रह्मादयो भो सुराः पाल्यन्तामिति दीनवाक्यकरिणंदेवेष्वशक्तेषु यः। मा भैषीरिति यस्यनक्रहनने चक्रायुधः श्रीधर। आर्तत्राणपरायणः सभगवान्नारायणो मे गतिः॥…

श्री दीनबन्ध्वष्टकम्

॥ श्री दीनबन्ध्वष्टकम् ॥ यस्मादिदं जगदुदेति चतुर्मुखाद्यं यस्मिन्नवस्थितमशेषमशेषमूले। यत्रोपयाति विलयं च समस्तमन्ते दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥ चक्रं सहस्रकरचारु करारविन्दे गुर्वी गदा दरवरश्च विभाति यस्य। पक्षीन्द्रपृष्ठपरिरोपितपादपद्मो। दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥ येनोद्धृता वसुमती सलिले निमग्ना नग्ना च पाण्डववधूः स्थगिता दुकूलैः। संमोचितो जलचरस्य मुखाद्गजेन्द्रो। दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥ यस्यार्द्रदृष्टिवशतस्तु सुराः समृद्धिं कोपेक्षणेन दनुजा विलयं व्रजन्ति।…

भगवान कैलासवासी आरती

॥ भगवान कैलासवासी आरती ॥ शीश गंग अर्धन्ग पार्वती सदा विराजत कैलासी। नन्दी भृन्गी नृत्य करत हैं, धरत ध्यान सुर सुखरासी॥ शीतल मन्द सुगन्ध पवन बह बैठे हैं शिव अविनाशी। करत गान गन्धर्व सप्त स्वर राग रागिनी मधुरासी॥ यक्ष-रक्ष-भैरव जहँ डोलत, बोलत हैं वनके वासी। कोयल शब्द सुनावत सुन्दर, भ्रमर करत हैं गुन्जा-सी॥ कल्पद्रुम अरु…

तूने अजब रचा भगवान खिलौना मिट्टी का

|| तूने अजब रचा भगवान खिलौना मिट्टी का || तूने अजब रचा भगवान खिलौना माटी का, माटी का रे, माटी का, माटी का रे, माटी का, तूने अजब रचा भगवान खिलौना माटी का । कान दिए हरी भजन सुनन को, हो कान दिए हरी भजन सुनन को, तु मुख से कर गुणगान, खिलौना माटी का…

घर घर बधाई बाजे रे देखो

|| घर घर बधाई बाजे रे देखो || घर घर बधाई बाजे रे देखो, घर घर बधाई बाजे रे, ढोलक नगाड़ा वाजे रे देखो, ढोलक नगाड़ा वाजे रे जन में अयोध्या में राम लला की, माता कौशल्या खिलाये रे, ॥ घर घर बधाई बाजे रे देखो..॥ ॥ जय श्री राम, जय श्री राम॥ सोने के…

काली काली अलकों के फंदे क्यों डाले

|| काली काली अलकों के फंदे क्यों डाले || काली काली अलको के फंदे क्यूँ डाले, हमें जिन्दा रहने दे ऐ मुरली वाले ॥ || दोहा || मेरा एक नज़र तुझे देखना, किसी बंदगी से कम नहीं, करो मेरा शुक्रिया मेहरबां, तुझे दिल में हमने बसा लिया, आप इस तरह से होश, उड़ाया ना कीजिये,…

राधे कृष्ण की ज्योति अलौकिक

|| राधे कृष्ण की ज्योति अलौकिक || राधे कृष्ण की ज्योति अलोकिक, तीनों लोक में छाये रही है । भक्ति विवश एक प्रेम पुजारिन, फिर भी दीप जलाये रही है । कृष्ण को गोकुल से राधे को… कृष्ण को गोकुल से राधे को, बरसाने से बुलाय रही है । दोनों करो स्वीकार कृपा कर, जोगन…

जरी की पगड़ी बांधे

|| जरी की पगड़ी बांधे || जरी की पगड़ी बांधे, सुंदर आँखों वाला, कितना सुंदर लागे बिहारी, कितना लागे प्यारा, जरी की पगड़ी बाँधे ॥ कानों में कुण्डल साजे, सिर मोर मुकुट विराजे, सखियाँ पगली होती, जब जब होठों पे बंसी बाजे, हैं चंदा यह सांवरा, तारे हैं ग्वाल बाला, कितना सुंदर लागे बिहारी, कितना…

राम भक्त ले चला रे राम की निशानी

|| राम भक्त ले चला रे राम की निशानी || राम भक्त ले चला रे, राम की निशानी, शीश पर खड़ाऊँ, अखियों में पानी, राम भक्त लें चला रे, राम की निशानी ॥ शीश खड़ाऊ ले चला ऐसे, राम सिया जी संग हो जैसे, अब इनकी छाव में, रहेगी राजधानी, राम भक्त लें चला रे,…

जरा इतना बता दे कान्हा

|| जरा इतना बता दे कान्हा || जरा इतना बता दे कान्हा, कि तेरा रंग काला क्यों । श्लोक श्याम का काला बदन, और श्याम घटा से काला, शाम होते ही, गजब कर गया मुरली वाला ॥ जरा इतना बता दे कान्हा, कि तेरा रंग काला क्यों, तु काला होकर भी जग से, इतना निराला…

मेरा आप की कृपा से

|| मेरा आप की कृपा से || मेरा आपकी दया से सब काम हो रहा है। करते हो तुम कन्हिया मेरा नाम हो रहा है॥ ॥ मेरा आपकी दया से…॥ पतवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है। हैरान है ज़माना मंजिल भी मिल रही है। करता नहीं मैं कुछ भी, सब काम हो…

तुम्हीं मेरी नैया किनारा तुम्हीं हो

|| तुम्हीं मेरी नैया किनारा तुम्हीं हो || तुम्ही मेरी नइया, किनारा तुम्ही हो, मेरी जिंदगी का, सहारा तुम्ही हो, तुम्ही मेरी नईया, किनारा तुम्ही हो ॥ ये नर तन का चोला, बनाया है तुमने, सभी अंग ढ़ंग से, सजाया है तुमने, तुम्ही मेरी नजरें प्रभुजी, नजारा तुम्ही हो, मेरी जिंदगी का, सहारा तुम्ही हो,…

ओ लाल मेरी पत रखियो

|| ओ लाल मेरी पत रखियो || हो लाल मेरी पत रखियो बला झूले लालण ओ लाल मेरी पत रखियो बला झूले लालण सिंदड़ी दा सेवण दा सखी शाह बाज़ कलन्दर दमादम मस्त कलन्दर अली दम दम दे अन्दर दमादम मस्त कलन्दर अली दा पैला नम्बर ॥ हो लाल मेरी पत रखियो बला…॥ चार चराग़…

भगवान बुद्ध वंदन

|| भगवान बुद्ध वंदन || बुद्ध वन्दना नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स । नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स । नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स । त्रिशरण बुद्धं शरणं गच्छामि । धर्मं शरणं गच्छामि । संघं शरणं गच्छामि । दुतियम्पि बुद्धं सरणं गच्छामि । दुतियम्पि धम्म सरणं गच्छामि । दुतियम्पि संघ सरणं गच्छामि…

हाथी घोड़ा पाल की

|| हाथी घोड़ा पाल की || हाथी घोड़ा पालकी,जय कन्हैया लाल की ॥ आनंद उमंग भयो जय कन्हैया लाल की, नंद के आनंद भयो जय यशोदा लाल की, आनंद उमंग भयो जय कन्हैया लाल की, नंद के आनंद भयो जय यशोदा लाल की, हे ब्रज में आनंद भयो जय यशोदा लाल की, ए आनंद उमंग…

श्री सिद्धचक्र आरती

|| आरती || जय सिद्धचक्र देवा, जय सिद्धचक्र देवा| करत तुम्हारी निश-दिन, मन से सुर-नर-मुनि सेवा| जय सिद्धचक्र देवा| ज्ञानावरणी दर्शनावरणी मोह अंतराया, नाम गोत्र वेदनीय आयु को नाशि मोक्ष पाया| जय सिद्धचक्र देवा || ज्ञान-अनंत अनंत-दर्श-सुख बल-अनंतधारी, अव्याबाध अमूर्ति अगुरुलघु अवगाहनधारी| जय सिद्धचक्र देवा || तुम अशरीर शुद्ध चिन्मूरति स्वात्मरस-भोगी, तुम्हें जपें आचार्योपाध्याय सर्व-साधु…

श्री स्कन्दवेदपाद स्तोत्रम्

|| श्री स्कन्दवेदपाद स्तोत्रम् || श्रीमहागणाधिपतये नमः । पुरा स्कन्दो महाबाहुः प्राप्य कौमारजाङ्गलम् । कुमाराद्रि समासाध्य जित्वा तारकमोजसा ॥ वासुकिं भुजगेन्द्रं च कृत्वा पूर्णमनोरथम् । स्वांशं तस्मिन् प्रतिष्ठाप्य धारातीरे मनोरमे ॥ देवभूदेव सङ्घैश्च देवानीकयुतो वशी । सुरेन्द्रयाज्ञया तस्य कन्यां स्वीकृत्य तत्रहि ॥ स्वामिकार्तिकमासाद्य तां विवाह महोत्सवेः । तत्रस्थितं मोदमानमानसं मणिमन्दिरे ॥ देवसेना पतिस्वाङ्गहर्षं चापि सुधाकरम्…

श्री स्वामिनाथषट्कम्

|| श्रीस्वामिनाथषट्कम् || हे स्वामिनाथार्तबन्धो । भस्मलिप्ताङ्ग गाङ्गेय कारुण्यसिन्धो ॥ रुद्राक्षधारिन्नमस्ते रौद्ररोगं हर त्वं पुरारेर्गुरोर्मे । राकेन्दुवक्त्रं भवन्तं माररूपं कुमारं भजे कामपूरम् ॥ मां पाहि रोगादघोरात् मङ्गलापाङ्गपातेन भङ्गात्स्वराणाम् । कालाच्च दुष्पाककूलात् कालकालस्य सूनुं भजे क्रान्तसानुम् ॥ ब्रह्मादयो यस्य शिष्याः ब्रह्मपुत्रा गिरौ यस्य सोपानभूताः । सैन्यं सुराश्चापि सर्वे सामवेदादिगेयं भजे कार्तिकेयम् ॥ काषाय संवीतगात्रं कामरोगादि संहारिभिक्षान्न…

जानकी नाथ सहाय करें – भजन

॥ जानकी नाथ सहाय करें – भजन ॥ जानकी नाथ सहाय करें जानकी नाथ सहाय करें, जब कौन बिगाड़ करे नर तेरो सुरज मंगल सोम भृगु सुत बुध और गुरु वरदायक तेरो राहु केतु की नाहिं गम्यता, संग शनीचर होत हुचेरो जानकी नाथ सहाय करें.. दुष्ट दु:शासन विमल द्रौपदी, चीर उतार कुमंतर प्रेरो ताकी सहाय…

श्री जानकीनाथ आरती

॥ श्री जानकीनाथ आरती ॥ जय जानकीनाथा, जय श्रीरघुनाथा। दोउ कर जोरें बिनवौं, प्रभु! सुनिये बाता॥ जय जानकीनाथा, जय श्रीरघुनाथा॥ तुम रघुनाथ हमारे प्रान, पिता माता। तुम ही सज्जन-सङ्गी भक्ति मुक्ति दाता॥ जय जानकीनाथा, जय श्रीरघुनाथा॥ लख चौरासी काटो मेटो यम त्रासा। निसिदिन प्रभु मोहि रखिये अपने ही पासा॥ जय जानकीनाथा, जय श्रीरघुनाथा॥ राम भरत…

जानकी माता आरती

॥ जानकी माता आरती ॥ आरती कीजै श्रीजनक लली की। राममधुपमन कमल कली की॥ आरती कीजै श्रीजनक लली की…॥ रामचन्द्र, मुखचन्द्र चकोरी। अन्तर साँवर बाहर गोरी। सकल सुमन्गल सुफल फली की॥ आरती कीजै श्रीजनक लली की…॥ पिय दृगमृग जुग-वन्धन डोरी, पीय प्रेम रस-राशि किशोरी। पिय मन गति विश्राम थली की॥ आरती कीजै श्रीजनक लली की…॥…

श्री यशोदालाल आरती

॥ श्री यशोदालाल आरती ॥ आरति करत यसोदा प्रमुदित, फूली अङ्ग न मात। बल-बल कहि दुलरावत आनन्द मगन भई पुलकात॥ आरति करत यसोदा प्रमुदित… सुबरन-थार रत्न-दीपावलि चित्रित घृत-भीनी बात। कल सिन्दूर दूब दधि अच्छत तिलक करत बहु भाँत॥ आरति करत यसोदा प्रमुदित… अन्न चतुर्विध बिबिध भोग दुन्दुभि बाजत बहु जात। नाचत गोप कुम्कुमा छिरकत देत…

तेरो लाल यशोदा छल गयो री – भजन

|| तेरो लाल यशोदा छल गयो री || तेरो लाल यशोदा छल गयो री, मेरो माखन चुराकर बदल गयो री || मैंने चोरी से इसे मटकी उठाते देखा, आप खाते हुए औरो को खिलाते देखा, नाचकर घूमकर कुछ नीचे गिराते देखा, माल चोरी का इसे खूब लुटाते देखा, माल चोरी का इसे खूब लुटाते देखा,…

Divya Prerna Prakash (दिव्य प्रेरणा प्रकाश)

Divya Prerna Prakash (दिव्य प्रेरणा प्रकाश)

दिव्य प्रेरणा प्रकाश पुस्तक परम पूज्य संत श्री आशाराम बापूजी द्वारा रचित एक अद्वितीय आध्यात्मिक और प्रेरणादायक ग्रंथ है। यह पुस्तक जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने, आत्मिक उन्नति प्राप्त करने और ईश्वर के प्रति भक्ति को बढ़ाने के लिए एक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करती है। आशाराम बापूजी की शिक्षाओं और उनके गहन आध्यात्मिक…

तुमसे लागी लगन

|| तुमसे लगी लगन || तुम से लागी लगन, ले लो अपनी शरण, पारस प्यारा, मेटो मेटो जी संकट हमारा । निशदिन तुमको जपूँ, पर से नेह तजूँ, जीवन सारा, तेरे चरणों में बीत हमारा ॥टेक॥ अश्वसेन के राजदुलारे, वामा देवी के सुत प्राण प्यारे। सबसे नेह तोड़ा, जग से मुँह को मोड़ा, संयम धारा…

तेरे डमरू की धुन

|| तेरे डमरू की धुन || तेरे डमरू की धुन सुनके, मैं काशी नगरी आई हूँ, मेरे भोले ओ बम भोले, मैं काशी नगरी आई हूँ ॥ सुना है हमने ओ भोले, तेरी काशी में मुक्ति है, उसी मुक्ति को पाने को, मैं काशी नगरी आई हूँ, मेरे भोले ओ बम भोले, मैं काशी नगरी…

क्या लेकर आया

|| क्या लेकर आया || क्या लेके आया बन्दे, क्या लेके जायेगा, दो दिन की जिन्दगी है, दो दिन का मेला ॥ दोहा – आया है सो जाएगा, राजा रंक फकीर, कोई सिंहासन चढ़ चले, कोई बंधे जंजीर। क्या लेके आया बन्दे, क्या लेके जायेगा, दो दिन की जिन्दगी है, दो दिन का मेला ॥…

जो प्रेम गली में आए नहीं

|| जो प्रेम गली में आए नहीं || जो प्रेम गली में आए नहीं, प्रियतम का ठिकाना क्या जाने, जिसने कभी प्रेम किया ही नहीं, वो प्रेम निभाना क्या जानें, जो प्रेम गली में आए नही ॥ जो वेद पढ़े और भेद करे, मन में नहीं निर्मलता आए, कोई कितना भी चाहे ज्ञान कहे, भगवान…

गणपति आज पधारो

|| गणपति आज पधारो || गणपति आज पधारो, श्री रामजी की धुन में । गणपति आज पधारो, श्री रामजी की धुन में । रामजी की धुन में, श्री रामजी की धुन में । मोदक भोग लगाओ, श्री रामजी की धुन में ॥ गणपति आज पधारो, श्री रामजी की धुन में । गणपति आज पधारो, और…

करती हूं तुम्हारा व्रत मैं

|| करती हूं तुम्हारा व्रत मैं || करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं, स्वीकार करो माँ, मझधार में, मैं अटकी, बेडा पार करो माँ, बेडा पार करो माँ, हे माँ संतोषी, माँ संतोषी ॥ बैठी हूँ बड़ी आशा से, तुम्हारे दरबार में, क्यूँ रोये तुम्हारी बेटी, इस निर्दयी संसार में, पलटा दो मेरी भी किस्मत, पलटा…

हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा

|| हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा || जपता फिरूं मैं नाम तुम्हारा, हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा, तेरी सोणी सूरत पे दिल हूँ मैं हारा, हारें का सहारा बाबा श्याम हमारा ॥ तेरी ही कृपा से बाबा, चलता है जीवन मेरा, दीन दुनिया छोड़ के बैठा, मैं हूँ तेरा तू है मेरा, खुद…

हरि सुंदर नंद मुकुंद

|| हरि सुंदर नंद मुकुंद || हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण हरि ॐ हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण हरि ॐ हरि केशव हरि गोविंद हरि नारायण हरि ॐ हरि केशव हरि गोविंद हरि नारायण हरि ॐ हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण हरि ॐ हरि केशव हरि गोविंद हरि नारायण हरि ॐ हरि…

पार्वती वल्लभा अष्टकम्

।। पार्वती वल्लभा अष्टकम् ।। नमो भूथ नाधम नमो देव देवं, नाम कला कालं नमो दिव्य थेजं, नाम काम असमं, नाम संथ शीलं, भजे पर्वथि वल्लभं नीलकन्दं । सदा थीर्थ सिधं, साध भक्था पक्षं, सदा शिव पूज्यं, सदा शूर बस्मं, सदा ध्यान युक्थं, सदा ज्ञान दल्पं, भजे पर्वथि वल्लभं नीलकन्दं । स्मसानं भयनं महा स्थान…

गौरी के नंदा

|| गौरी के नंदा || गजानंद आनंद करो, दो सुख सम्पति में शीश, दुश्मन को सज्जन करो, निवत जिमावा खीर । सदा भवानी दाहिनी, सनमुख रहत गणेश, पाँच देव रक्षा करे, ब्रम्हा विष्णु महेश। विघ्न हरण मंगल करण, गणनायक गणराज, रिद्धि सिद्धि सहित पधारजो, म्हारा पूरण कर जो काज ॥ ॥ भजन ॥ गौरी के…

मोहन से दिल क्यों लगाया है

|| मोहन से दिल क्यों लगाया है || मोहन से दिल क्यूँ लगाया है, ये मैं जानू या वो जाने, छलिया से दिल क्यूँ लगाया है, ये मैं जानू या वो जाने ॥ हर बात निराली है उसकी, हर बात में है इक टेढापन, टेढ़े पर दिल क्यूँ आया है, ये मैं जानू या वो…

हनुमान तुम्हारा क्या कहना

|| हनुमान तुम्हारा क्या कहना || कलियुग में सिद्ध हो देव तुम्हीं, हनुमान तुम्हारा क्या कहना । तेरी शक्ति का क्या कहना, तेरी भक्ति का क्या कहना ॥ सीता की खोज करी तुमने, तुम सात समुन्दर पार गये । लंका को किया शमशान प्रभु, बलवान तुम्हारा क्या कहना ॥ तेरी शक्ति का क्या कहना, तेरी…

तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत

|| तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत || तेरे द्वार खड़ा भगवान, भक्त भर दे रे झोली । तेरा होगा बड़ा एहसान, के युग युग तेरी रहेगी शान ॥ डोल उठी है सारी धरती देख रे, डोला गगन है सारा । भीख मांगने आया तेरे घर, जगत का पालनहारा । मैं आज तेरा मेहमान, कर के…

घनश्याम तेरी बंसी

|| घनश्याम तेरी बंसी || घनश्याम तेरी बंसी, पागल कर जाती है, मुस्कान तेरी मोहन, घायल कर जाती है ॥ घनश्याम तेरी बंसी, पागल कर जाती है, मुस्कान तेरी मोहन, घायल कर जाती है ॥ सोने की होती तो, क्या करते तुम मोहन, ये बांस की होकर भी, दुनिया को नचाती है ॥ घनश्याम तेरी…

श्री काशी विश्वनाथ अष्टकम

॥ श्रीकाशीविश्वनाथाष्टकम् ॥ गङ्गातरंगरमणीयजटाकलापं गौरीनिरन्तरविभूषितवामभागम् । नारायणप्रियमनंगमदापहारं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥ वाचामगोचरमनेकगुणस्वरूपं वागीशविष्णुसुरसेवितपादपीठम् । वामेनविग्रहवरेणकलत्रवन्तं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥ भूताधिपं भुजगभूषणभूषितांगं व्याघ्राजिनांबरधरं जटिलं त्रिनेत्रम् । पाशांकुशाभयवरप्रदशूलपाणिं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥ शीतांशुशोभितकिरीटविराजमानं भालेक्षणानलविशोषितपंचबाणम् । नागाधिपारचितभासुरकर्णपूरं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥ पंचाननं दुरितमत्तमतङ्गजानां नागान्तकं दनुजपुंगवपन्नगानाम् । दावानलं मरणशोकजराटवीनां वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥ तेजोमयं सगुणनिर्गुणमद्वितीयं आनन्दकन्दमपराजितमप्रमेयम् । नागात्मकं सकलनिष्कलमात्मरूपं…

एक नजर कृपा की कर दो

|| एक नजर कृपा की कर दो || एक नजर कृपा की कर दो, लाडली श्री राधे । एक नजर कृपा की कर दो, लाडली श्री राधे । श्री राधे, श्री राधे श्री राधे, श्री राधे श्री राधे, श्री राधे दासी की झोली भरदो, लाडली श्री राधे । एक नजर कृपा की कर दो, लाडली…

गोकुल की हर गली में

|| गोकुल की हर गली में || गोकुल की हर गली मे, मथुरा की हर गली मे ॥ गोकुल की हर गली मे, मथुरा की हर गली मे, कान्हा को ढूँढ़ता हूँ, दुनिया की हर गली मे ॥ गोकुल गया तो सोचा, माखन चुराता होगा, या फ़िर कदम्ब के नीचे, बंसी बजाता होगा, गोकुल की…

मंगल मूर्ति राम दुलारे

|| मंगल मूर्ति राम दुलारे || मंगल मूरति राम दुलारे, आन पड़ा अब तेरे द्वारे, हे बजरंगबली हनुमान, हे महावीर करो कल्याण, हे महावीर करो कल्याण ॥ तीनों लोक तेरा उजियारा, दुखियों का तूने काज सवारा, हे जगवंदन केसरी नंदन, कष्ट हरो हे कृपा निधान ॥ मंगल मुरति राम दुलारे, आन पड़ा अब तेरे द्वारे,…

जब ते राम भाए घर आए

|| जब ते राम भाए घर आए || जब तें रामु ब्याहि घर आए । नित नव मंगल मोद बधाए ॥ भुवन चारिदस भूधर भारी । सुकृत मेघ बरषहिं सुख बारी ॥1॥ रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई । उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई ॥ मनिगन पुर नर नारि सुजाती । सुचि अमोल सुंदर सब भाँती…

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