श्री रामायण जी आरती

|| श्री रामायण जी आरती || आरती श्री रामायण जी की । कीरति कलित ललित सिय पी की ॥ गावत ब्रहमादिक मुनि नारद । बाल्मीकि बिग्यान बिसारद ॥ शुक सनकादिक शेष अरु शारद । बरनि पवनसुत कीरति नीकी ॥ ॥ आरती श्री रामायण जी की..॥ गावत बेद पुरान अष्टदस । छओं शास्त्र सब ग्रंथन को…

श्री भागवत भगवान की है आरती

|| श्री भागवत भगवान की है आरती || श्री भगवत भगवान की है आरती, पापियों को पाप से है तारती। ये अमर ग्रन्थ ये मुक्ति पन्थ, ये पंचम वेद निराला, नव ज्योति जलाने वाला। हरि नाम यही हरि धाम यही, यही जग मंगल की आरती पापियों को पाप से है तारती॥ ॥ श्री भगवत भगवान…

संकटा माता आरती

|| संकटा माता आरती || जय जय संकटा भवानी, करहूं आरती तेरी । शरण पड़ी हूँ तेरी माता, अरज सुनहूं अब मेरी ॥ जय जय संकटा भवानी..॥ नहिं कोउ तुम समान जग दाता, सुर-नर-मुनि सब टेरी । कष्ट निवारण करहु हमारा, लावहु तनिक न देरी ॥ जय जय संकटा भवानी..॥ काम-क्रोध अरु लोभन के वश…

आरती: श्री राणी सती दादी जी

|| आरती: श्री राणी सती दादी जी || ॐ जय श्री राणी सती माता, मैया जय राणी सती माता । अपने भक्त जनन की, दूर करन विपत्ती ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता, मैया जय राणी सती माता ॥ अवनि अननंतर ज्योति अखंडीत, मंडितचहुँक कुंभा । दुर्जन दलन खडग की, विद्युतसम प्रतिभा ॥ ॐ…

आरती: माँ महाकाली

|| आरती: माँ महाकाली || जय काली माता, माँ जय महा काली माँ। रतबीजा वध कारिणी माता। सुरनर मुनि ध्याता, माँ जय महा काली माँ॥ दक्ष यज्ञ विदवंस करनी माँ शुभ निशूंभ हरलि। मधु और कैितभा नासिनी माता। महेशासुर मारदिनी, ओ माता जय महा काली माँ॥ हे हीमा गिरिकी नंदिनी प्रकृति रचा इत्ठि। काल विनासिनी…

अन्नपूर्णा आरती

|| अन्नपूर्णा आरती || बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम । जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम । अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो, लेत होत सब काम ॥ बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम । प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम । सुर सुरों की रचना करती, कहाँ कृष्ण कहाँ राम ॥ बारम्बार प्रणाम, मैया…

आरती: ॐ जय महावीर प्रभु

|| आरती: ॐ जय महावीर प्रभु || ॐ जय महावीर प्रभु, स्वामी जय महावीर प्रभु । कुण्डलपुर अवतारी, चांदनपुर अवतारी, त्रिशलानंद विभु ॥ सिध्धारथ घर जन्मे, वैभव था भारी । बाल ब्रह्मचारी व्रत, पाल्यो तप धारी ॥ ॥ॐ जय महावीर प्रभु…॥ आतम ज्ञान विरागी, सम दृष्टि धारी । माया मोह विनाशक, ज्ञान ज्योति जारी ॥…

भैरव आरती

|| भैरव आरती || ॥ श्री भैरव देव जी आरती ॥ जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा । जय काली और गौर देवी कृत सेवा ॥ ॥ जय भैरव देवा…॥ तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक । भक्तो के सुख कारक भीषण वपु धारक ॥ ॥ जय भैरव देवा…॥ वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल…

ओम जय कैला रानी – कैला माता आरती

|| ओम जय कैला रानी – कैला माता आरती || ॐ जय कैला रानी, मैया जय कैला रानी । ज्योति अखंड दिये माँ तुम सब जगजानी ॥ तुम हो शक्ति भवानी मन वांछित फल दाता ॥ मैया मन वांछित फल दाता ॥ अद्भुत रूप अलौकिक सदानन्द माता ॥ ॐ जय कैला रानी। गिरि त्रिकूट पर…

आरती: श्री रामचंद्र जी

|| आरती: श्री रामचंद्र जी || श्री राम नवमी, विजय दशमी, सुंदरकांड, रामचरितमानस कथा और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से की जाने वाली आरती। आरती कीजै रामचन्द्र जी की। हरि-हरि दुष्टदलन सीतापति जी की॥ पहली आरती पुष्पन की माला। काली नाग नाथ लाये गोपाला॥ दूसरी आरती देवकी नन्दन। भक्त उबारन कंस निकन्दन॥ तीसरी…

श्री सूर्य देव आरती: जय जय रविदेव

|| श्री सूर्य देव आरती: जय जय रविदेव || जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव । रजनीपति मदहारी, शतलद जीवन दाता ॥ पटपद मन मदुकारी, हे दिनमण दाता । जग के हे रविदेव, जय जय जय स्वदेव ॥ नभ मंडल के वाणी, ज्योति प्रकाशक देवा । निजजन हित सुखराशी, तेरी हम सब सेवा…

भगवद्‍ गीता आरती

|| भगवद्‍ गीता आरती || जय भगवद् गीते, जय भगवद् गीते । हरि-हिय-कमल-विहारिणि, सुन्दर सुपुनीते ॥ कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि, कामासक्तिहरा । तत्त्वज्ञान-विकाशिनि, विद्या ब्रह्म परा ॥ जय भगवद् गीते…॥ निश्चल-भक्ति-विधायिनि, निर्मल मलहारी । शरण-सहस्य-प्रदायिनि, सब विधि सुखकारी ॥ जय भगवद् गीते…॥ राग-द्वेष-विदारिणि, कारिणि मोद सदा । भव-भय-हारिणि, तारिणि परमानन्दप्रदा ॥ जय भगवद् गीते…॥ आसुर-भाव-विनाशिनि, नाशिनि तम रजनी…

बाबा गोरखनाथ आरती

|| बाबा गोरखनाथ आरती || जय गोरख देवा, जय गोरख देवा । कर कृपा मम ऊपर, नित्य करूँ सेवा ॥ शीश जटा अति सुंदर, भाल चन्द्र सोहे । कानन कुंडल झलकत, निरखत मन मोहे ॥ गल सेली विच नाग सुशोभित, तन भस्मी धारी । आदि पुरुष योगीश्वर, संतन हितकारी ॥ नाथ नरंजन आप ही, घट…

नर्मदा आरती

|| नर्मदा आरती || ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी । ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा शिव हर‍ि शंकर, रुद्रौ पालन्ती ॥ ॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥ देवी नारद सारद तुम वरदायक, अभिनव पदण्डी । सुर नर मुनि जन सेवत, सुर नर मुनि… शारद पदवाचन्ती । ॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥ देवी धूमक वाहन राजत, वीणा वाद्यन्ती।…

तुकाराम आरती

|| तुकाराम आरती || आरती तुकाराम । स्वामी सद्गुरु धाम ॥ सच्चिदानंद मूर्ती । पाय दाखवी आम्हा ॥ आरती तुकाराम । स्वामी सद्गुरु धाम ॥ सच्चिदानंद मूर्ती । पाय दाखवी आम्हा ॥ राघवे सागरात । पाषाण तारीले ॥ तैसे हें तुकोबाचे । अभंग उदकी रक्षिले ॥ आरती तुकाराम ॥ आरती तुकाराम । स्वामी सद्गुरु धाम…

श्री सीता आरती

|| श्री सीता आरती || आरती श्री जनक दुलारी की । सीता जी रघुवर प्यारी की ॥ जगत जननी जग की विस्तारिणी, नित्य सत्य साकेत विहारिणी, परम दयामयी दिनोधारिणी, सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥ आरती श्री जनक दुलारी की । सीता जी रघुवर प्यारी की ॥ सती श्रोमणि पति हित कारिणी, पति सेवा वित्त…

श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती

|| श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती || चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी, जग को तारो भोली माँ जन को तारो भोली माँ, काली दा पुत्र पवन दा घोड़ा ॥ ॥ भोली माँ ॥ सिन्हा पर भाई असवार, भोली माँ, चिंतपूर्णी चिंता दूर ॥ ॥ भोली माँ ॥ एक हाथ खड़ग दूजे में खांडा, तीजे त्रिशूल सम्भालो…

रघुवर श्री रामचन्द्र जी आरती

|| रघुवर श्री रामचन्द्र जी आरती || आरती कीजै श्री रघुवर जी की, सत चित आनन्द शिव सुन्दर की॥ दशरथ तनय कौशल्या नन्दन, सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन॥ अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन, मर्यादा पुरुषोत्तम वर की॥ निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि, सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि॥ हरण शोक-भय दायक नव निधि, माया रहित दिव्य…

भारत माता की आरती

|| भारत माता की आरती || आरती भारत माता की, जगत के भाग्य विधाता की । आरती भारत माता की, ज़गत के भाग्य विधाता की । सिर पर हिम गिरिवर सोहै, चरण को रत्नाकर धोए, देवता गोदी में सोए, रहे आनंद, हुए न द्वन्द, समर्पित छंद, बोलो जय बुद्धिप्रदाता की, जगत के भाग्य विधाता की…

अर्धनारीश्वर स्तुति

|| अर्धनारीश्वर स्तुति || ॥ श्रीः ॥ वन्देमह्यमलमयूखमौलिरत्नं देवस्य प्रकटितसर्वमङ्गलाख्यम् । अन्योन्यं सदृशमहीनकङ्कणाङ्कं देहार्धद्वितयमुमार्धरुद्धमूर्तेः ॥ तद्वन्द्वे गिरिपतिपुत्रिकार्धमिश्रं श्रैकण्ठं वपुरपुनर्भवाय यत्र । वक्त्रेन्दोर्घटयति खण्डितस्य देव्या साधर्म्यं मुकुटगतो मृगाङ्कखण्डः ॥ एकत्र स्फटिकशिलामलं यदर्धे प्रत्यग्रद्रुतकनकोज्ज्वलं परत्र । बालार्कद्युतिभरपिञ्जरैकभाग- प्रालेयक्षितिधरश‍ृङ्गभङ्गिमेति ॥ यत्रैकं चकितकुरङ्गभङ्गि चक्षुः प्रोन्मीलत्कुचकलशोपशोभि वक्षः । मध्यं च ऋशिमसमेतमुत्तमाङ्गं भृङ्गालीरुचिकचसञ्चयाञ्चितं च ॥ स्राभोगं घननिबिडं नितम्बबिम्बं पादोऽपि स्फुटमणिनूपुराभिरामः ।…

हनुमान् माला मंत्रम्

|| हनुमान् माला मंत्रम् || ॐ ह्रौं क्ष्रौं ग्लौं हुं ह्सौं ॐ नमो भगवते पंचवक्त्र हनूमते प्रकट पराक्रमाक्रांत सकलदिङ्मंडलाय, निजकीर्ति स्फूर्तिधावल्य वितानायमान जगत्त्रितयाय, अतुलबलैश्वर्य रुद्रावताराय, मैरावण मदवारण गर्व निर्वापणोत्कंठ कंठीरवाय, ब्रह्मास्त्रगर्व सर्वंकषाय, वज्रशरीराय, लंकालंकारहारिणे, तृणीकृतार्णवलंघनाय, अक्षशिक्षण विचक्षणाय, दशग्रीव गर्वपर्वतोत्पाटनाय, लक्ष्मण प्राणदायिने, सीतामनोल्लासकराय, राममानस चकोरामृतकराय, मणिकुंडलमंडित गंडस्थलाय, मंदहासोज्ज्वलन्मुखारविंदाय, मौंजी कौपीन विराजत्कटितटाय, कनकयज्ञोपवीताय, दुर्वार वारकीलित लंबशिखाय, तटित्कोटि…

कार्य सिद्धि हनुमान् मंत्र

|| कार्य सिद्धि हनुमान् मंत्र || त्वमस्मिन् कार्यनिर्योगे प्रमाणं हरिसत्तम । हनुमान् यत्नमास्थाय दुःख क्षयकरो भव ॥

ॐ श्री विष्णु मंत्र: मङ्गलम् भगवान विष्णुः

|| ॐ श्री विष्णु मंत्र: मङ्गलम् भगवान विष्णुः || 1. श्री विष्णु मूल मंत्र ॐ नमोः नारायणाय॥ 2. श्री विष्णु भगवते वासुदेवाय मंत्र ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥ 3. श्री विष्णु गायत्री मंत्र ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ 4. विष्णु शान्ताकारम मंत्र 5. मंगल श्री विष्णु मंत्र मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम्…

शांति मंत्र

|| शांति मंत्र || शांति पाठ, शांति के लिए की जाने वाली हिंदू प्रार्थना है, आमतौर पर धार्मिक पूजाओं, अनुष्ठानों और प्रवचनों के अंत में यजुर्वेद के इस शांति मंत्र का प्रयोग किया जाता है। ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:, पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: । वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:, सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा…

मंत्र पुष्पांजलि – ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त

|| मंत्र पुष्पांजलि – ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त || प्रथम: ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तनि धर्माणि प्रथमान्यासन् । ते ह नाकं महिमान: सचंत यत्र पूर्वे साध्या: संति देवा: ॥ द्वितीय: ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने। नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे। स मस कामान् काम कामाय मह्यं। कामेश्र्वरो वैश्रवणो ददातु कुबेराय वैश्रवणाय। महाराजाय नम: । तृतीय: ॐ स्वस्ति, साम्राज्यं भौज्यं…

श्री नृसिंह मंत्र

|| श्री नृसिंह मंत्र || ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् । नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥

श्री पंच-तत्व प्रणाम मंत्र

|| श्री पंच-तत्व प्रणाम मंत्र || (जय) श्रीकृष्णचैतन्य प्रभु नित्यानंद । श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्तवृंद ॥

पवमान मंत्र: ॐ असतो मा सद्गमय

|| पवमान मंत्र: ॐ असतो मा सद्गमय || ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय ॥ ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः ॥

आत्मा रामा आनंद रमना: मंत्र

|| आत्मा रामा आनंद रमना: मंत्र || आत्मा रामा आनंद रमना आत्मा रामा आनंद रमना अच्युत केशव हरि नारायण अच्युत केशव हरि नारायण भवभय हरणा वंदित चरणा भवभय हरणा वंदित चरणा रघुकुलभूषण राजीवलोचन रघुकुलभूषण राजीवलोचन आत्मा रामा आनंद रमना आत्मा रामा आनंद रमना अच्युत केशव हरि नारायण अच्युत केशव हरि नारायण आदिनारायण अनन्तशयना आदिनारायण अनन्तशयना…

बेलपत्र बिल्वपत्र चढ़ाने का मंत्र

|| बेलपत्र बिल्वपत्र चढ़ाने का मंत्र || नमो बिल्ल्मिने च कवचिने च नमो वर्म्मिणे च वरूथिने च नमः श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो दुन्दुब्भ्याय चा हनन्न्याय च नमो घृश्णवे॥ दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनम्‌ पापनाशनम्‌ । अघोर पाप संहारं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌ ॥ त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्‌ । त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्‌ ॥ अखण्डै बिल्वपत्रैश्च पूजये शिव…

मंत्र: णमोकार महामंत्र

|| मंत्र: णमोकार महामंत्र || णमोकार मंत्र है न्यारा, इसने लाखों को तारा। इस महा मंत्र का जाप करो, भव जल से मिले किनारा। णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आयरियाणं, णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्व साहूणं । एसोपंचणमोक्कारो, सव्वपावप्पणासणो । मंगला णं च सव्वेसिं, पडमम हवई मंगलं ।

श्री कृष्णाष्टकम् -भजे व्रजैक मण्डनम्

|| श्री कृष्णाष्टकम् -भजे व्रजैक मण्डनम् || भजे व्रजैक मण्डनम्, समस्त पाप खण्डनम्, स्वभक्त चित्त रञ्जनम्, सदैव नन्द नन्दनम्, सुपिन्छ गुच्छ मस्तकम् , सुनाद वेणु हस्तकम् , अनङ्ग रङ्ग सागरम्, नमामि कृष्ण नागरम् ॥ १ ॥ मनोज गर्व मोचनम् विशाल लोल लोचनम्, विधूत गोप शोचनम् नमामि पद्म लोचनम्, करारविन्द भूधरम् स्मितावलोक सुन्दरम्, महेन्द्र मान दारणम्,…

मंत्र: प्रातः स्मरण – दैनिक उपासना

|| मंत्र: प्रातः स्मरण – दैनिक उपासना || प्रात: कर-दर्शनम् कराग्रे वसते लक्ष्मी:, करमध्ये सरस्वती । कर मूले तु गोविन्द:, प्रभाते करदर्शनम ॥१॥ पृथ्वी क्षमा प्रार्थना समुद्रवसने देवि ! पर्वतस्तनमंड्ले । विष्णुपत्नि! नमस्तुभ्यं पाद्स्पर्श्म क्षमस्वे ॥२॥ त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण- ब्रह्मा मुरारीस्त्रिपुरांतकारी भानु: शाशी भूमिसुतो बुधश्च । गुरुश्च शुक्र: शनि-राहु-केतवः कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम…

गजाननं भूत गणादि सेवितं – गणेश मंत्र

|| गजाननं भूत गणादि सेवितं – गणेश मंत्र || गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् । उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ॥

स्वस्ति स्वस्तिक मंत्र

|| स्वस्ति स्वस्तिक मंत्र || स्वस्ति मन्त्र शुभ और शांति के लिए प्रयुक्त होता है। स्वस्ति = सु + अस्ति = कल्याण हो। ऐसा माना जाता है कि इससे हृदय और मन मिल जाते हैं। स्वस्ति मन्त्र का पाठ करने की क्रिया स्वस्तिवाचन कहलाती है। ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः। स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति…

पत्नीं मनोरमां देहि – सुंदर पत्नी प्राप्ति मंत्र

|| पत्नीं मनोरमां देहि – सुंदर पत्नी प्राप्ति मंत्र || दुर्गा सप्तशती के इस मंत्र के जाप से सुन्दर, सुलोचना, सभी गुणों से युक्त, मनचाही और घर को बसाने वाली पत्नी मिलती है। इस मंत्र का जाप कुंवारे व्यक्ति को ही करना चाहिए। पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानु सारिणीम् । तारिणींदुर्गसं सारसागरस्य कुलोद्भवाम् ॥ दुर्गा सप्तशती

सप्त चिरंजीवी – मंत्र

|| सप्त चिरंजीवी – मंत्र || अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः । कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः ॥1 सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम् । जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित ॥2 अर्थात: अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम ये सात महामानव चिरंजीवी हैं। [1] यदि इन सात महामानवों और आठवे ऋषि मार्कण्डेय का नित्य स्मरण किया जाए तो शरीर…

भाग्यदा लक्ष्मी बारम्मा: मंत्र

|| भाग्यदा लक्ष्मी बारम्मा: मंत्र || भाग्यद लक्ष्मी बारम्मा । नम्मम्म नी सौभाग्यद लक्ष्मी बारम्मा ॥ हेज्जेय मेले हेज्जेयनिक्कुत गेज्जे काल्गळ ध्वनिय तोरुत । सज्जन साधु पूजेय वेळेगे मज्जिगेयोळगिन बेण्णेयन्ते ॥ 1 ॥ भाग्यद लक्ष्मी बारम्मा ॥ कनक वृष्टिय करेयुत बारे मनकामनेय सिद्धिय तोरे । दिनकर कोटि तेजदि होळेयुव जनकरायन कुमारि बेग ॥ 2 ॥…

श्रील प्रभुपाद प्रणति

|| श्रील प्रभुपाद प्रणति || नम ॐ विष्णु-पादाय कृष्ण-प्रेष्ठाय भूतले श्रीमते भक्तिवेदांत-स्वामिन् इति नामिने । नमस्ते सारस्वते देवे गौर-वाणी-प्रचारिणे निर्विशेष-शून्यवादि-पाश्चात्य-देश-तारिणे ॥

करचरण कृतं वा – क्षमा मंत्र

|| करचरण कृतं वा – क्षमा मंत्र || करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा । श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं । विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व । जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥ यह कराचरण क्रतम वा मंत्र शिव क्षमा मंत्र तथा शिव ध्यान मंत्र के रूप में जाना जाता है।

ॐ सर्वेशां स्वस्तिर्भवतु मंत्र

|| ॐ सर्वेशां स्वस्तिर्भवतु मंत्र || ॐ सर्वेशां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेशां शान्तिर्भवतु । सर्वेशां पुर्णंभवतु । सर्वेशां मङ्गलंभवतु । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

श्री सूर्य नमस्कार मंत्र

|| श्री सूर्य नमस्कार मंत्र || ॐ ध्यायेस्सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणस्सरसिजासन सन्निविष्टः | केयूरवान् मकरकुण्डलवान् किरीटी हारी हिरण्मयवपुः धृतशङ्खचक्रः ‖ ॐ मित्राय नमः | 1 ॐ रवये नमः | 2 ॐ सूर्याय नमः | 3 ॐ भानवे नमः | 4 ॐ खगाय नमः | 5 ॐ पूष्णे नमः | 6 ॐ हिरण्यगर्भाय नमः | 7 ॐ…

धन्वंतरी मंत्र

|| धन्वंतरी मंत्र || ध्यानं अच्युतानंत गोविंद विष्णो नारायणाऽमृत रोगान्मे नाशयाऽशेषानाशु धन्वंतरे हरे । आरोग्यं दीर्घमायुष्यं बलं तेजो धियं श्रियं स्वभक्तेभ्योऽनुगृह्णंतं वंदे धन्वंतरिं हरिम् ॥ शंखं चक्रं जलौकां दधदमृतघटं चारुदोर्भिश्चतुर्भिः । सूक्ष्मस्वच्छातिहृद्यांशुक परिविलसन्मौलिमंभोजनेत्रम् । कालांभोदोज्ज्वलांगं कटितटविलसच्चारुपीतांबराढ्यम् । वंदे धन्वंतरिं तं निखिलगदवनप्रौढदावाग्निलीलम् ॥ धन्वंतरेरिमं श्लोकं भक्त्या नित्यं पठंति ये । अनारोग्यं न तेषां स्यात् सुखं जीवंति…

राहु कवचम्

|| राहु कवचम् || ध्यानम् राहुं चतुर्भुजं चर्मशूलखड्गवराङ्गिनम् कृष्णाम्बरधरं नीलं कृष्णगन्धानुलेपनम् । गोमेधिकविभूषं च विचित्रमकुटं फणिम् कृष्णसिंहरथारूढं मेरुं चैवाप्रदक्षिणम् ॥ प्रणमामि सदा राहुं सर्पाकारं किरीटिनम् । सैंहिकेयं करालास्यं भक्तानामभयप्रदम् ॥ १ ॥ कवचम् नीलाम्बरः शिरः पातु ललाटं लोकवन्दितः । चक्षुषी पातु मे राहुः श्रोत्रे मेऽर्धशरीरवान् ॥ २ ॥ नासिकां मे करालास्यः शूलपाणिर्मुखं मम । जिह्वां…

श्री हनुमान कवच

|| श्री हनुमान कवच || अस्य श्री हनुमत् कवचस्तोत्रमहामंत्रस्य वसिष्ठ ऋषिः अनुष्टुप् छंदः श्री हनुमान् देवता मारुतात्मज इति बीजं अंजनासूनुरिति शक्तिः वायुपुत्र इति कीलकं हनुमत्प्रसाद सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥ उल्लंघ्य सिंधोस्सलिलं सलीलं यश्शोकवह्निं जनकात्मजायाः । आदाय तेनैव ददाह लंकां नमामि तं प्रांजलिरांजनेयम् ॥ 1 मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेंद्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरसा नमामि…

नवग्रह कवचम्

|| नवग्रह कवचम् || शिरो मे पातु मार्तांडो कपालं रोहिणीपतिः । मुखमंगारकः पातु कंठश्च शशिनंदनः ॥ 1 ॥ बुद्धिं जीवः सदा पातु हृदयं भृगुनंदनः । जठरं च शनिः पातु जिह्वां मे दितिनंदनः ॥ 2 ॥ पादौ केतुः सदा पातु वाराः सर्वांगमेव च । तिथयोऽष्टौ दिशः पांतु नक्षत्राणि वपुः सदा ॥ 3 ॥ अंसौ राशिः सदा…

श्री कृष्ण कवचम

|| श्री कृष्ण कवचम || प्रणम्य देवं विप्रेशं प्रणम्य च सरस्वतीम् । प्रणम्य च मुनीन् सर्वान् सर्वशास्त्रविशारदान् ॥ १॥ श्रीकृष्णकवचं वक्ष्ये श्रीकीर्तिविजयप्रदम् । कान्तारे पथि दुर्गे च सदा रक्षाकरं नृणाम् ॥ २॥ स्मृत्वा नीलाम्बुदश्यामं नीलकुञ्चितकुन्तलम् । बर्हिपिञ्छलसन्मौलिं शरच्चन्द्रनिभाननम् ॥ ३॥ राजीवलोचनं राजद्वेणुना भूषिताधरम् । दीर्घपीनमहाबाहुं श्रीवत्साङ्कितवक्षसम् ॥ ४॥ भूभारहरणोद्युक्तं कृष्णं गीर्वाणवन्दितम् । निष्कलं देवदेवेशं नारदादिभिरर्चितम्…

Join WhatsApp Channel Download App