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कर्ज मुक्ति और शत्रुओं पर विजय के लिए मासिक कार्तिगाई पर करें ये अचूक उपाय

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हिंदू धर्म और दक्षिण भारतीय परंपराओं में मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai) का अत्यधिक महत्व है। यह दिन भगवान शिव के पुत्र और देवताओं के सेनापति, भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) को समर्पित है। यदि आप लंबे समय से आर्थिक तंगी, पुराने कर्ज या गुप्त शत्रुओं से परेशान हैं, तो मासिक कार्तिगाई का दिन आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक स्वर्णिम अवसर होता है। इस लेख में हम उन गुप्त और अचूक उपायों के बारे में जानेंगे, जिन्हें अपनाकर आप न केवल वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि अपने विरोधियों पर भी विजय पा सकते हैं।

मासिक कार्तिगाई का आध्यात्मिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार, भगवान मुरुगन शक्ति, साहस और विजय के प्रतीक हैं। जिस प्रकार उन्होंने तारकासुर जैसे शक्तिशाली असुर का वध कर देवताओं को भयमुक्त किया था, उसी प्रकार उनकी कृपा से भक्त अपने जीवन के ‘असुरों’ (कर्ज और शत्रु) का अंत कर सकते हैं।

मासिक कार्तिगाई हर महीने आती है जब कृत्तिका नक्षत्र का संयोग होता है। इस नक्षत्र के स्वामी ‘अग्नि’ हैं, जो अशुद्धियों को जलाकर भस्म करने और नई ऊर्जा प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं।

कर्ज मुक्ति के लिए विशेष उपाय (ऋण मोचन उपाय)

यदि आपकी आमदनी से ज्यादा खर्च है और कर्ज का बोझ उतरने का नाम नहीं ले रहा, तो इस दिन निम्नलिखित प्रयोग करें:

  • षटकोणीय दीपक का दान – मासिक कार्तिगाई की शाम को मिट्टी के छह दीपक लें। उनमें शुद्ध घी भरें और लाल रंग की कलावे की बत्ती लगाएं। इन दीपकों को भगवान कार्तिकेय के चित्र के सामने ‘षटकोण’ (Hexagon) की आकृति में रखें। यह आकृति मुरुगन शक्ति का प्रतीक है जो अटके हुए धन को वापस लाने में मदद करती है।
  • लाल मसूर का दान – इस दिन किसी जरूरतमंद को या मंदिर में लाल मसूर की दाल दान करें। ज्योतिष में मंगल ग्रह कर्ज का कारक होता है और कार्तिकेय जी मंगल के अधिष्ठाता देव हैं। इस दान से मंगल दोष शांत होता है और कर्ज चुकाने के मार्ग खुलते हैं।
  • ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ – संध्याकाल में दीप प्रज्वलित कर ‘ऋणमोचन मंगल स्तोत्र’ का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

शत्रुओं पर विजय और सुरक्षा के लिए उपाय

यदि कार्यस्थल पर राजनीति हो रही है या कोई गुप्त शत्रु आपकी प्रगति में बाधा डाल रहा है, तो ये उपाय करें:

  • शस्त्र पूजन और चमेली का तेल – भगवान मुरुगन के प्रतीकात्मक अस्त्र ‘वेल’ (भाला) की पूजा करें। यदि चित्र है, तो उस पर चमेली का तेल और सिंदूर अर्पित करें। इससे आपके भीतर साहस का संचार होता है और शत्रुओं का प्रभाव क्षीण होने लगता है।
  • कवच का पाठ – ‘स्कंद षष्ठी कवच’ या ‘कार्तिकेय प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र’ का पाठ करें। यह एक सुरक्षा घेरा तैयार करता है जिसे भेद पाना शत्रुओं के लिए असंभव होता है।
  • नींबू और लौंग का टोटका – शाम के समय एक नींबू में चार लौंग गाड़कर उसे कार्तिकेय जी के चरणों से छुआकर अपने सिर से सात बार वार लें और किसी सुनसान चौराहे पर फेंक दें। यह नजर दोष और ईर्ष्या करने वाले शत्रुओं को शांत करता है।

मासिक कार्तिगाई पूजन विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठें – स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • संकल्प लें – हाथ में जल लेकर अपनी समस्या (कर्ज या शत्रु बाधा) को दूर करने का संकल्प लें।
  • लाल वस्त्र धारण करें – भगवान कार्तिकेय को लाल रंग अत्यंत प्रिय है।
  • अभिषेक – यदि संभव हो, तो भगवान मुरुगन या शिव लिंग पर पंचामृत से अभिषेक करें।
  • दीपोत्सव – घर के मुख्य द्वार और पूजा घर को मिट्टी के दीपों से सजाएं। कार्तिगाई पर दीप जलाना सबसे महत्वपूर्ण कृत्य है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • इस दिन पूर्णतः सात्विक भोजन ग्रहण करें। तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस) से पूरी तरह परहेज करें।
  • किसी की बुराई न करें और न ही किसी से विवाद करें, अन्यथा पूजा का फल निष्फल हो सकता है।
  • मन्त्र जप के लिए रुद्राक्ष की माला या मूंगा की माला का प्रयोग श्रेष्ठ रहता है।

विशेष मंत्र – “ॐ शारवाना भावाया नमः” – इस छह अक्षरों वाले मंत्र का 108 बार जाप करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं टल जाती हैं।

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