संपदा शुक्रवार व्रत, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी को समर्पित एक विशेष व्रत है। यह व्रत शुक्रवार के दिन रखा जाता है और मान्यता है कि जो व्यक्ति इसे श्रद्धापूर्वक करता है, उसके घर में देवी लक्ष्मी का वास होता है और दरिद्रता दूर होती है। इस व्रत से जुड़ी एक पौराणिक कथा है जो इसकी महत्ता को और बढ़ा देती है।
हम सभी चाहते हैं कि हमारे घर में सुख-शांति बनी रहे, धन-धान्य की कभी कमी न हो और दरिद्रता हमारे आस-पास भी न फटके। इन इच्छाओं को पूरा करने के लिए धर्म-ग्रंथों में कई उपाय बताए गए हैं, जिनमें से एक है ‘संपदा शुक्रवार व्रत‘। यह व्रत विशेष रूप से माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए रखा जाता है और मान्यता है कि इसे विधि-विधान से करने पर घर में अपार धन-संपदा आती है और गरीबी दूर होती है।
संपदा शुक्रवार व्रत की चमत्कारी कथा
एक समय की बात है, एक नगर में एक बहुत ही गरीब ब्राह्मण दंपत्ति रहते थे। उनके पास न तो रहने के लिए ठीक से घर था और न ही खाने के लिए पर्याप्त अन्न। उनकी दरिद्रता इतनी अधिक थी कि वे जीवन से पूरी तरह निराश हो चुके थे।
एक दिन, देवी लक्ष्मी ने एक बूढ़ी औरत का रूप धारण कर ब्राह्मण के घर आईं। उन्होंने ब्राह्मण से कहा, “पुत्र, तुम इतने उदास क्यों हो? तुम्हें अपनी गरीबी से मुक्ति मिल सकती है।” ब्राह्मण ने हाथ जोड़कर कहा, “मां, हमारी गरीबी इतनी गहरी है कि इससे मुक्ति असंभव लगती है।”
तब देवी लक्ष्मी ने उन्हें संपदा शुक्रवार व्रत के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “हे पुत्र, तुम और तुम्हारी पत्नी हर शुक्रवार को यह व्रत रखो। शुक्रवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करो, स्वच्छ वस्त्र धारण करो और मन में देवी लक्ष्मी का ध्यान करो। व्रत के दिन केवल फलाहार करो या एक समय भोजन करो। शाम को देवी लक्ष्मी की पूजा करो और यह व्रत कथा सुनो। जब तुम यह व्रत पूरी श्रद्धा से करोगे, तो तुम्हारी दरिद्रता दूर हो जाएगी और तुम्हारे घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहेगी।”
ब्राह्मण और उनकी पत्नी ने देवी लक्ष्मी की बात मान ली और पूरी श्रद्धा के साथ संपदा शुक्रवार व्रत रखना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उनके जीवन में परिवर्तन आने लगा। पहले उन्हें काम मिलने लगा, फिर उनके पास धन आने लगा और देखते ही देखते उनकी गरीबी दूर हो गई। उनका घर धन-धान्य से भर गया और वे सुख-समृद्धि से जीवन व्यतीत करने लगे। उन्होंने यह भी देखा कि जब वे इस व्रत को नियमपूर्वक नहीं करते थे, तो उन्हें कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इससे उन्हें इस व्रत की शक्ति पर और अधिक विश्वास हो गया।
संपदा शुक्रवार व्रत का महत्व
यह कथा इस बात पर जोर देती है कि संपदा शुक्रवार व्रत न केवल आर्थिक समृद्धि लाता है, बल्कि मानसिक शांति और संतोष भी प्रदान करता है। यह व्रत हमें सिखाता है कि ईमानदारी, कड़ी मेहनत और ईश्वर पर विश्वास के साथ किए गए प्रयासों से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।
संपदा शुक्रवार व्रत क्या है?
संपदा शुक्रवार व्रत जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, शुक्रवार के दिन रखा जाने वाला व्रत है। यह व्रत खासकर उन लोगों के लिए बहुत फलदायी माना जाता है जो आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं या अपने जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाना चाहते हैं। इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
कब से शुरू करें यह व्रत?
संपदा शुक्रवार व्रत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले शुक्रवार से शुरू किया जा सकता है। अगर आप इसे श्रावण मास (सावन) या कार्तिक मास में शुरू करते हैं तो इसे और भी शुभ माना जाता है। आप इसे 11, 21 या 51 शुक्रवार तक कर सकते हैं, अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार।
संपदा शुक्रवार व्रत की पूजन विधि
- शुक्रवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें।
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें कि आप अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए यह व्रत कर रहे हैं।
- माता लक्ष्मी का ध्यान करें और उनसे अपने घर में वास करने की प्रार्थना करें।
- पूजा में चावल, रोली, कुमकुम, धूप, दीप, फूल (कमल का फूल अत्यंत प्रिय है), फल, मिठाई (खीर या बताशे) और माता लक्ष्मी को प्रिय सफेद वस्तुएं (जैसे सफेद चंदन, सफेद मिठाई) का प्रयोग करें।
- पूजा के दौरान संपदा शुक्रवार व्रत की कथा का पाठ अवश्य करें। कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है। कथा के बाद माता लक्ष्मी की आरती करें।
- दिनभर फलाहार करें या केवल जल ग्रहण करें। शाम को पूजा के बाद भोजन कर सकते हैं। नमक रहित भोजन करना उत्तम माना जाता है।
संपदा शुक्रवार व्रत के लाभ
- इस व्रत का सबसे मुख्य लाभ है आर्थिक समृद्धि और धन-संपदा में वृद्धि।
- यह व्रत घर से गरीबी और अभावों को दूर करता है।
- माता लक्ष्मी की कृपा से घर में सुख-शांति और खुशहाली आती है।
- सच्चे मन से की गई प्रार्थना और व्रत से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- यह व्रत करने से मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है।
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