Shri Sita Kavacham

|| Shri Sita Kavacham || || Agastiruvacha || Samyak prushtam tvaya vatsa Savadhanamanah shrunu. Adau vakshyamyaham ramyam Sitayaha kavacham shubham. Ya sitavani sambhavatmithilapalena Samvardhitapadmakshanripateh Suta nalgata ya. Matulingotbhava, ya ratne layamagata Jalanidhou ya vedavaramgatalankam. Sa mrigalochana shashimukhi Maanpatu ramapriya. || Atha Nyasah || Asya shri sitakavacha mantrasya Agasti rishihi. Shri Sita devata, Anushtup chandaha, Ramebhi … Read more

श्री सीता कवचम्

॥ श्री सीताकवचम् ॥ ॥ अगस्तिरुवाच ॥ सम्यक् पृष्टं त्वया वत्स सावधानमनाः श्रुणु । आदौ वक्ष्याम्यहं रम्यं सीतायाः कवचं शुभम् ॥ या सीतावनि संभवाथमिथिलापालेन संवर्धितापद्माक्षनृपतेः सुता नलगता या मातुलिङ्गोत्भवा। या रत्ने लयमागता जलनिधौ या वेद वारं गतालङ्कां सा मृगलोचना शशिमुखी मांपातु रामप्रिया ॥ ॥ अथ न्यासः ॥ अस्य श्री सीताकवच मन्त्रस्य अगस्ति ऋषिः । श्री … Read more

श्री जानकी स्तुति

॥जानकी स्तुति॥ भई प्रगट कुमारी भूमि-विदारी जन हितकारी भयहारी । अतुलित छबि भारी मुनि-मनहारी जनकदुलारी सुकुमारी ॥ सुन्दर सिंहासन तेहिं पर आसन कोटि हुताशन द्युतिकारी । सिर छत्र बिराजै सखि संग भ्राजै निज -निज कारज करधारी ॥ सुर सिद्ध सुजाना हनै निशाना चढ़े बिमाना समुदाई । बरषहिं बहुफूला मंगल मूला अनुकूला सिय गुन गाई ॥ … Read more

श्री सीता जी की आरती

|| आरती || आरती श्री जनक दुलारी की । सीता जी रघुवर प्यारी की ॥ जगत जननी जग की विस्तारिणी, नित्य सत्य साकेत विहारिणी, परम दयामयी दिनोधारिणी, सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥ आरती श्री जनक दुलारी की । सीता जी रघुवर प्यारी की ॥ सती श्रोमणि पति हित कारिणी, पति सेवा वित्त वन वन … Read more

श्री सीता माता चालीसा

॥ दोहा ॥ बन्दौ चरण सरोज निज जनक लली सुख धाम । राम प्रिय किरपा करें सुमिरौं आठों धाम ॥ कीरति गाथा जो पढ़ें सुधरैं सगरे काम । मन मन्दिर बासा करें दुःख भंजन सिया राम ॥ ॥ चौपाई ॥ राम प्रिया रघुपति रघुराई । बैदेही की कीरत गाई ॥ चरण कमल बन्दों सिर नाई … Read more