गुरु प्रदोष व्रत कथा एवं पूजा विधि PDF हिन्दी
Download PDF of Guru Pradosh Vrat Katha and Pooja Vidhi Hindi
Shiva ✦ Vrat Katha (व्रत कथा संग्रह) ✦ हिन्दी
गुरु प्रदोष व्रत कथा एवं पूजा विधि हिन्दी Lyrics
हिंदू धर्म में गुरु प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है, जो भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। जब त्रयोदशी तिथि गुरुवार को पड़ती है, तो इसे गुरु प्रदोष कहा जाता है। इस दिन साधक को सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। सायंकाल (प्रदोष काल) में भगवान शिव का पूजन मुख्य होता है। पूजन में महादेव का गंगाजल और दूध से अभिषेक करें, फिर उन्हें बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और चंदन अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर आरती करें।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार इंद्र और वृत्रासुर के बीच भीषण युद्ध हुआ। देवगुरु बृहस्पति की सलाह पर इंद्र ने प्रदोष व्रत किया। इस व्रत के पुण्य प्रताप से इंद्र ने असुर पर विजय प्राप्त की। यह व्रत शत्रुओं पर विजय, सुख-समृद्धि और ज्ञान की प्राप्ति के लिए उत्तम माना जाता है। श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और साधक को मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है।
|| गुरु प्रदोष व्रत पूजा विधि ||
- सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
- अब भगवान शिव की धूप व आरती करें।
- भगवान शंकर को भोग लगाएं।
- फिर शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की आरती करें।
|| गुरु प्रदोष व्रत के लाभ ||
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु प्रदोष व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। कष्टों से मुक्ति मिलती है। वैवाहिक जीवन में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं। भगवान शिव व श्रीहरि के आशीर्वाद से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
|| गुरु प्रदोष व्रत कथा (Guru Pradosh Vrat Katha PDF) ||
पौराणिक कथा के अनुसार एक नगर में एक ब्राह्मणी का घर था। उसके पति का स्वर्गवास हो गया था। उसका अब कोई सहारा नहीं था इसलिए वह सुबह होते ही वह अपने पुत्र के साथ भीख मांगने निकल पड़ती थी। वह खुद का और अपने पुत्र का पेट पालती थी।
एक दिन ब्राह्मणी घर लौट रही थी तो उसे एक लड़का घायल अवस्था में कराहता हुआ मिला। ब्राह्मणी दयावश उसे अपने घर ले आई। वह लड़का विदर्भ का राजकुमार था। शत्रु सैनिकों ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बंदी बना लिया था और राज्य पर नियंत्रण कर लिया था इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था। राजकुमार ब्राह्मण-पुत्र के साथ ब्राह्मणी के घर रहने लगा।
एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा तो वह उस पर मोहित हो गई। अगले दिन अंशुमति अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाने लाई। उन्हें भी राजकुमार पसंद आ गया। कुछ दिनों बाद अंशुमति के माता-पिता को शंकर भगवान ने स्वप्न में आदेश दिया कि राजकुमार और अंशुमति का विवाह कर दिया जाए।
वैसा ही किया गया। ब्राह्मणी प्रदोष व्रत करने के साथ ही भगवान शंकर की पूजा-पाठ किया करती थी। प्रदोष व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज की सेना की सहायता से राजकुमार ने विदर्भ से शत्रुओं को खदेड़ दिया और पिता के साथ फिर से सुखपूर्वक रहने लगा। राजकुमार ने ब्राह्मण-पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बनाया। मान्यता है कि जैसे ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के प्रभाव से दिन बदले, वैसे ही भगवान शंकर अपने भक्तों के दिन फेरते हैं।
Join HinduNidhi WhatsApp Channel
Stay updated with the latest Hindu Text, updates, and exclusive content. Join our WhatsApp channel now!
Join Nowगुरु प्रदोष व्रत कथा एवं पूजा विधि

READ
गुरु प्रदोष व्रत कथा एवं पूजा विधि
on HinduNidhi Android App
DOWNLOAD ONCE, READ ANYTIME
Your PDF download will start in 15 seconds
CLOSE THIS
