यम द्वितीया की कथा (भाई दूज)

यम द्वितीया का पर्व, जिसे हम भाई दूज के नाम से भी जानते हैं, भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। यह दीपावली के दो दिन बाद, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस पर्व के पीछे एक पौराणिक कथा है जो भाई-बहन के इस अटूट रिश्ते की…

गोवर्धन महाराज आरती

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गोवर्धन महाराज को गिरिराज के नाम से भी जाना जाता है। वे भगवान कृष्ण के सबसे प्रिय भक्तों में से एक हैं। गोवर्धन पर्वत को भगवान कृष्ण का ही स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को सात दिनों तक उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र के…

किचन में रखें इन 7 बातों का ध्यान, अन्नपूर्णा जयंती पर बरसेगी माँ की कृपा और आएगी सुख-समृद्धि।

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हर घर की रसोई (Kitchen) सिर्फ भोजन बनाने का स्थान नहीं, बल्कि वह पवित्र कोना है जहाँ माँ अन्नपूर्णा (Maa Annapurna) निवास करती हैं। अन्नपूर्णा जयंती (Annapurna Jayanti) का दिन, जो मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, इस बात का स्मरण कराता है कि भोजन का सम्मान और रसोई की पवित्रता कितनी आवश्यक…

मां अन्नपूर्णा को कैसे करें प्रसन्न? जयंती पर करें ये 5 अचूक काम, कभी खाली नहीं होगा अन्न का भंडार।

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मार्गशीर्ष माह (Margashirsha Month) की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाने वाली ‘अन्नपूर्णा जयंती’ (Annapurna Jayanti) का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह दिन देवी अन्नपूर्णा के धरती पर अवतरण का प्रतीक है, जिन्हें माँ पार्वती (Maa Parvati) का ही एक स्वरूप माना जाता है और जो अन्न, समृद्धि और पोषण की देवी हैं। ऐसा…

अन्नपूर्णा देवी कौन हैं? जानें उनके 108 नाम और जयंती का गहरा रहस्य। (Maa Annapurna, The Goddess of Food and Her Secrets)

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भारतीय संस्कृति में अन्न को ‘ब्रह्म’ (The Ultimate Reality) माना गया है, और इसी अन्न की अधिष्ठात्री देवी हैं – माता अन्नपूर्णा। उनका नाम दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘अन्न’ (अनाज/भोजन) और ‘पूर्णा’ (पूर्ण, भरपूर)। यानी, वह देवी जो हर जीव के लिए भोजन के भंडार को हमेशा भरा रखती हैं। इनकी उपासना केवल…

त्रिपुर भैरवी जयन्ती – लाल फूल और गुड़ का भोग, तिजोरी में रखें ये चीज़ें, होगी धन वर्षा! (Tripura Bhairavi Jayanti)

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हिंदू धर्म (Hindu religion) में शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है, और दस महाविद्याओं में से एक, मां त्रिपुर भैरवी (Maa Tripura Bhairavi) का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन्हें ‘भव-बन्ध-मोचन’ की देवी कहा जाता है, जो भक्तों को सभी बंधनों से मुक्त करती हैं। मार्गशीर्ष माह (Margashirsha Month) की पूर्णिमा तिथि को त्रिपुर भैरवी…

एकादशी व्रत का महात्म्य गीता प्रेस, गोरखपुर (Ekadashi Vrat Ka Mahatmya Gita Press Gorakhpur Book)

एकादशी व्रत का महात्म्य गीता प्रेस, गोरखपुर (Ekadashi Vrat Ka Mahatmya Gita Press Gorakhpur Book)

एकादशी व्रत का महात्म्य गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित एक अत्यंत लोकप्रिय धार्मिक पुस्तक है। यह PDF प्रारूप में भी उपलब्ध है और हिंदू धर्म में एकादशी व्रत की महिमा और विधि का वर्णन करती है। यह पुस्तक मुख्य रूप से पद्मपुराण के आधार पर साल भर की 26 एकादशियों (दोनों पक्षों की) का विस्तृत…

तुला संक्रान्ति पर क्या करें और क्या न करें? जानें शुभ-अशुभ कर्मों का प्रभाव

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हिन्दू पंचांग में संक्रान्ति (Sankranti) का विशेष महत्व है, जो सूर्य देव के एक राशि से दूसरी राशि में गोचर (Transit) को दर्शाती है। वर्षभर में कुल 12 संक्रान्तियाँ होती हैं, और उनमें से एक है तुला संक्रान्ति। इस दिन सूर्य कन्या राशि से निकलकर तुला राशि (Libra) में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष में, तुला…

Bhaum Pradosh Vrat – कर्ज़ और रोग से मुक्ति का महाउपाय! जानिए शिव और हनुमान जी की पूजा का रहस्य

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क्या आप कर्ज़ (Debt) के बोझ तले दबे हैं? क्या रोगों ने आपके जीवन को कष्टमय बना दिया है? हिंदू धर्म में, हर समस्या का समाधान है और उनमें से एक अत्यंत शक्तिशाली उपाय है – भौम प्रदोष व्रत। यह सिर्फ एक उपवास नहीं, बल्कि भगवान शिव और बजरंगबली हनुमान जी की संयुक्त कृपा प्राप्त…

Bhaum Pradosh Vrat Katha – बुढ़िया और हनुमान जी की यह कथा सुनने मात्र से मिलते हैं अनगिनत पुण्य

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सनातन धर्म में व्रतों का विशेष महत्व है, और इन्हीं में से एक है प्रदोष व्रत, जो हर महीने के दोनों पक्षों (शुक्ल और कृष्ण) की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। जब यह पवित्र तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत या मंगल प्रदोष…

शारदा स्तोत्र

|| शारदा स्तोत्र (Sharada Stotram PDF) || नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुरवासिनि। त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्यादानं च दहि मे। या श्रद्धा धारणा मेधा वाग्देवी विधिवल्लभा। भक्तजिह्वाग्रसदना शमादिगुणदायिनी। नमामि यामिनीं नाथलेखालङ्कृतकुन्तलाम्। भवानीं भवसन्तापनिर्वापणसुधानदीम्। भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः। वेदवेदाङ्गवेदान्तविद्यास्थानेभ्य एव च। ब्रह्मस्वरूपा परमा ज्योतिरूपा सनातनी। सर्वविद्याधिदेवी या तस्यै वाण्यै नमो नमः। यया विना जगत् सर्वं शश्वज्जीवन्मृतं…

पुत्रदा एकादशी पर तुलसी का अद्भुत उपाय – धन, संतान और वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति (Exclusive Tips)

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हर महीने आने वाली एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है, लेकिन इन सबमें पुत्रदा एकादशी का महत्व (Importance) कुछ खास है। वर्ष में यह दो बार आती है – एक पौष मास के शुक्ल पक्ष में और दूसरी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में। शास्त्रों में इसे ‘वैकुण्ठ एकादशी’ के नाम से भी…

श्री शारदा माँ की आरती

श्री शारदा माँ की आरती PDF ज्ञान और विद्या की देवी माँ शारदा (सरस्वती) की आराधना का एक लोकप्रिय माध्यम है। “श्री शारदा माँ की आरती PDF” एक डिजिटल दस्तावेज़ है जिसमें यह पवित्र स्तुति हिंदी भाषा की देवनागरी लिपि में उपलब्ध होती है। भक्तगण इसे आसानी से डाउनलोड करके पूजा-अर्चना के दौरान माँ के…

शारदा दशक स्तोत्र

शारदा दशक स्तोत्र एक पवित्र संस्कृत स्तोत्र है जो विद्या और ज्ञान की देवी, माँ शारदा (सरस्वती) को समर्पित है। ‘दशक’ का अर्थ है दस श्लोकों का संग्रह, इसलिए यह स्तोत्र दस छंदों में देवी की महिमा का वर्णन करता है। इस स्तोत्र को पढ़ने से बुद्धि, स्मरण शक्ति और वाक्पटुता में वृद्धि होती है,…

नरक चतुर्दशी कथा

नरक चतुर्दशी कथा PDF आमतौर पर छोटी दिवाली के रूप में मनाए जाने वाले त्योहार, नरक चतुर्दशी से जुड़ी पौराणिक कहानियों का संग्रह है। कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाए जाने वाले इस पर्व की मुख्य कथा यह है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध किया था। नरकासुर ने सोलह…

कमला अष्टक स्तोत्र

कमला अष्टक स्तोत्र एक पवित्र संस्कृत पाठ है जो देवी कमला (माँ लक्ष्मी) को समर्पित है, जो दस महाविद्याओं में से एक हैं। ‘अष्टक’ का अर्थ है आठ छंदों का संग्रह। यह स्तोत्र देवी कमला की स्तुति करता है, उनकी कृपा, धन और समृद्धि के लिए उनका आह्वान करता है। कमला महालक्ष्मी का स्वरूप हैं…

देवी कमला सहस्रनामावली

देवी कमला सहस्रनामावली देवी कमला के 1000 दिव्य नामों का संग्रह है, जो धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। देवी कमला, महालक्ष्मी का एक रूप हैं और उनकी पूजा से साधक को जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है। सहस्रनामावली में उनके विभिन्न नामों का उल्लेख उनकी महिमा,…

शारदा स्तुति

शारदा स्तुति (या सरस्वती वंदना) माँ शारदा अर्थात् देवी सरस्वती को समर्पित एक पवित्र प्रार्थना है। इन्हें ज्ञान, कला, संगीत और वाणी की देवी माना जाता है। “शारदा स्तुति PDF” का तात्पर्य उस दस्तावेज़ से है जो इस स्तुति के मूल संस्कृत श्लोकों या हिंदी अनुवाद को पढ़ने और कंठस्थ करने के लिए देवनागरी लिपि…

अहोई माता आरती

अहोई अष्टमी का पावन पर्व, संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए मनाया जाता है। इस दिन माताएँ अहोई माता आरती गाकर देवी का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। अहोई माता की महिमा अपरंपार है और उनकी कृपा से सूनी गोद भी भर जाती है। यदि आप अहोई माता की संपूर्ण आरती और पूजन विधि…

कार्तिक अमावस्या व्रत कथा

कार्तिक अमावस्या, जिसे दीपावली के रूप में मनाया जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने का विशेष महत्व है। ‘कार्तिक अमावस्या व्रत PDF’ में अक्सर इस व्रत की संपूर्ण कथा, पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और इसके महात्म्य का विवरण होता है। यह PDF पाठकों को यह जानने…

राधाकुण्ड और अहोई अष्टमी से जुड़ी कथा

अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को किया जाता है। यह व्रत माताएँ अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। इस दिन, विशेष रूप से जिन दंपत्तियों को संतान प्राप्ति नहीं हुई है, उनके लिए मथुरा के पास स्थित राधाकुण्ड में अर्धरात्रि को स्नान का विशेष…

रमा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि

रमा एकादशी का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। यह एकादशी दीपावली से कुछ दिन पूर्व आती है और इसे माता लक्ष्मी (रमा) का प्रिय माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि यह व्रत करने से…

रमा एकादशी व्रत 2025 – जानिए व्रत विधि, कथा, पारण का समय और महत्व

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रमा एकादशी हिंदू धर्म के पवित्र व्रतों में से एक है। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष रमा एकादशी का व्रत 17 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा। रमा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस व्रत को रखने से भगवान विष्णु की कृपा…

श्री अहोई अष्टमी व्रत कथा एवं पूजा विधि

अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। यह व्रत माताएँ तारों के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने के बाद खोलती हैं। व्रत के दिन सुबह स्नान के बाद निर्जला उपवास रखा जाता है। शाम को दीवार पर गेरू से…

धनतेरस की पौराणिक कथा

धनतेरस की पौराणिक कथाएँ मुख्य रूप से दो हैं। एक कथा के अनुसार, कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इनके प्रकट होने के उपलक्ष्य में यह पर्व मनाया जाता है। दूसरी कथा…

शरद पूर्णिमा व्रत कथा एवं पूजन विधि

शरद पूर्णिमा का व्रत आश्विन मास की पूर्णिमा को रखा जाता है, जिसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। बहुत से लोग इस व्रत की कथा को PDF प्रारूप में ढूँढ़ते हैं ताकि आसानी से पढ़कर व्रत को विधि-विधान से…

కేదార గౌరీ వ్రత కథా

|| కేదార గౌరీ వ్రత కథా (Kedar Gauri Vrat Katha Telugu PDF) || పౌరాణిక కథా కే అనుసార, ప్రాచీన కాల మేం భృంగీ ఋషి భగవాన శివ కే ఏక మహాన ఔర అనన్య భక్త థే. ఋషి కా విశ్వాస కేవల భగవాన శివ మేం థా ఔర వహ ఉనకీ భక్తి మేం ఇతనే లీన రహతే థే కి ఉన్హోంనే దేవీ శక్తి (దేవీ పార్వతీ) కీ ఉపేక్షా…

केदार गौरी व्रत कथा

|| केदार गौरी व्रत कथा (Kedar Gauri Vrat Katha Hindi PDF) || पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में भृंगी ऋषि भगवान शिव के एक महान और अनन्य भक्त थे। ऋषि का विश्वास केवल भगवान शिव में था और वह उनकी भक्ति में इतने लीन रहते थे कि उन्होंने देवी शक्ति (देवी पार्वती) की उपेक्षा…

अटला तड्डी व्रत की सम्पूर्ण पूजा विधि – करवा चौथ से पहले का खास उपवास, क्या है मान्यता और महत्व? (Atla Taddi Vrat)

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हर साल जब उत्तर भारत में करवा चौथ (Karwa Chauth) की धूम होती है, ठीक उससे पहले आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) और तेलंगाना (Telangana) में एक और महत्वपूर्ण व्रत मनाया जाता है, जिसे ‘अटला तड्डी’ (Atla Taddi) या ‘अटला ताड़े’ कहते हैं। यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए उतना ही खास है जितना उत्तर भारतीयों…

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक पवित्र व्रत है, जो हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। ‘वक्रतुंड’ भगवान गणेश का एक रूप है, जिसका अर्थ है ‘घुमावदार सूंड वाले’। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलते हैं।…

वक्रतुंड स्तुति

वक्रतुंड स्तुति भगवान श्री गणेश को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और लोकप्रिय प्रार्थना है। यह स्तुति संस्कृत भाषा में है, लेकिन इसका पाठ पूरे भारत में, विशेषकर गणेश चतुर्थी के दौरान, बड़े उत्साह के साथ किया जाता है। इस स्तुति का आरंभ “वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ” इन शब्दों से होता है, जिसका अर्थ है: हे…

करवा चौथ आरती

करवा चौथ का पावन पर्व, अखंड सौभाग्य का प्रतीक है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। करवा चौथ आरती इस पवित्र अनुष्ठान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पूजा को पूर्णता प्रदान करती है। आरती के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है।…

वक्रतुंड कवच

|| वक्रतुंड कवच (Vakratunda Kavacham PDF) || मौलिं महेशपुत्रोऽव्याद्भालं पातु विनायकः। त्रिनेत्रः पातु मे नेत्रे शूर्पकर्णोऽवतु श्रुती। हेरम्बो रक्षतु घ्राणं मुखं पातु गजाननः। जिह्वां पातु गणेशो मे कण्ठं श्रीकण्ठवल्लभः। स्कन्धौ महाबलः पातु विघ्नहा पातु मे भुजौ। करौ परशुभृत्पातु हृदयं स्कन्दपूर्वजः। मध्यं लम्बोदरः पातु नाभिं सिन्दूरभूषितः। जघनं पार्वतीपुत्रः सक्थिनी पातु पाशभृत्। जानुनी जगतां नाथो जङ्घे मूषकवाहनः।…

शनिवार प्रदोष व्रत – शिव और शनिदेव दोनों की कृपा पाने का अद्भुत संयोग

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शनिवार के दिन आने वाले प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) को शनि प्रदोष व्रत (Shani Pradosh Vrat) कहा जाता है। यह एक ऐसा दुर्लभ और शक्तिशाली संयोग है जो भगवान शिव और न्याय के देवता शनिदेव, दोनों की कृपा एक साथ दिलाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने वाले…

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि

पापांकुशा एकादशी आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह भगवान विष्णु को समर्पित है, जिनके पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है। इसका नाम ‘पापांकुशा’ इसलिए पड़ा क्योंकि यह पापरूपी हाथी को पुण्य रूपी अंकुश से नियंत्रित कर नष्ट करती है। मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने…

सरस्वती विसर्जन अनुष्ठान – माँ सरस्वती की कृपा पाने के लिए करें ये विशेष उपाय (Saraswati Visarjan Ritual)

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माँ सरस्वती का विसर्जन हमें सिखाता है कि जीवन में हर चीज़ अस्थायी है। जिस प्रकार हम प्रतिमा को पवित्र जल में विसर्जित करते हैं, उसी प्रकार हमें अपने अहंकार और अज्ञानता को भी त्यागना चाहिए। इस वर्ष, सरस्वती विसर्जन को एक साधारण प्रक्रिया न मानकर, माँ की असीम कृपा पाने के लिए एक विशेष…

क्या है बंगाल की विजयादशमी का रहस्य? दुर्गा विसर्जन और सिंदूर खेला की कथा

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पूरे भारत में नवरात्रि और विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। जहाँ उत्तर भारत में रावण दहन (Burning of Ravana Effigy) की परंपरा है, वहीं बंगाल में इस दिन का एक अलग ही, अत्यंत भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व है। बंगाल की विजयादशमी, जिसे बंगाली समाज ‘बिजोया दशमी’…

क्या है दक्ष सावर्णि मन्वन्तर? जानिए भविष्य का बारहवां मन्वन्तर और इसके देवताओं का राज – मनु, देवता और इंद्र (Daksha Savarni Manvantara)

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हिन्दू धर्मग्रंथों (Hindu scriptures) में समय की अवधारणा (concept of time) अत्यंत विशाल और गूढ़ है। यह मात्र वर्षों, महीनों या दिनों तक सीमित नहीं है, बल्कि कल्पों और मन्वन्तरों के विशाल चक्र में बंधी है। वर्तमान में हम सातवें मन्वन्तर, वैवस्वत मन्वन्तर के अधीन जी रहे हैं, जिसके मनु वैवस्वत मनु हैं। लेकिन क्या…

क्यों मानी जाती है बंगाल महा नवमी विशेष? जानें शक्ति उपासना और लोक परंपराएं

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बंगाल की दुर्गा पूजा (Durga Puja) दुनिया भर में प्रसिद्ध है, और इस भव्य उत्सव का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है ‘महा नवमी’ (Maha Navami)। यह सिर्फ एक पूजा नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक महापर्व है जो शक्ति उपासना और लोक परंपराओं का अद्भुत संगम दिखाता है। जहां एक ओर पूरा देश इस दिन माँ सिद्धिदात्री की…

क्या है दुर्गा बलिदान की पौराणिक कथा? जानें शक्ति और बल का गहन संबंध

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भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में ‘शक्ति’ (Power) का महत्व सर्वोपरि रहा है। देवी दुर्गा उसी शक्ति का सर्वोच्च प्रतीक हैं, जिनकी आराधना का पर्व ‘नवरात्रि’ (Navaratri) उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस नौ दिवसीय उत्सव के अंतिम महत्वपूर्ण चरण, महानवमी (Maha Navami) को एक विशेष अनुष्ठान किया जाता है, जिसे ‘दुर्गा बलिदान’…

क्या है सरस्वती बलिदान का रहस्य? जानिए छुपी हुई कथा और आध्यात्मिक महत्व

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नवरात्रि (Navratri) के पावन अवसर पर, जब शक्ति के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है, तब ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती की पूजा का भी एक विशेष महत्व होता है। यह चार दिवसीय उत्सव होता है जिसमें सरस्वती आवाहन, सरस्वती पूजा, सरस्वती बलिदान और अंत में विसर्जन (Visarjan) किया जाता है। अक्सर…

महा नवमी पर क्यों किया जाता है कन्या पूजन? जानें व्रत कथा, नियम और धार्मिक रहस्य (Maha Navami Kanya Pujan)

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चैत्र और शारदीय नवरात्रि (Navratri) का पर्व आदि शक्ति मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का महापर्व है। नौ दिनों तक चलने वाली यह साधना अष्टमी (Ashtami) या नवमी (Navami) तिथि पर कन्या पूजन (Kanya Pujan) के साथ पूर्ण मानी जाती है। विशेष रूप से महा नवमी के दिन, माँ सिद्धिदात्री की पूजा के…

विजयादशमी की कथा (दशहरा व्रत कथा)

विजयादशमी, जिसे दशहरा भी कहते हैं, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इसकी मुख्य कथा भगवान राम से जुड़ी है। रावण ने माता सीता का हरण किया, तब भगवान राम ने वानर सेना के साथ लंका पर चढ़ाई की। नौ दिनों तक चले युद्ध के बाद, विजयादशमी के दिन राम ने रावण का…

अमृत पर्व दशहरा (Amrit Parva Dussehra PDF Book)

अमृत पर्व दशहरा (Amrit Parva Dussehra)

अमृत पर्व: दशहरा स्वामी सनातन श्री द्वारा लिखित एक अद्वितीय पुस्तक है जो भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, और दशहरा उत्सव के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डालती है। इस पुस्तक में दशहरा के ऐतिहासिक, धार्मिक, और सांस्कृतिक पहलुओं को बेहद सरल और प्रभावी भाषा में प्रस्तुत किया गया है। स्वामी सनातन श्री ने इस पुस्तक को लिखने…

नारायण कवच पाठ के नियम और सावधानियाँ – कब, कैसे और क्यों करें यह दिव्य पाठ?

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नारायण कवच का पाठ एक अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य साधना है, जो साधक को सभी प्रकार के भय, बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करता है। इसका पाठ नियमित रूप से सुबह या शाम को स्नान के बाद करना चाहिए। पाठ करते समय, साधक को पवित्र और शांत स्थान पर बैठना चाहिए, और भगवान…

हे हंस वाहिनी ज्ञान दायिनी – नवरात्रि माता के भजन

|| हे हंस वाहिनी ज्ञान दायिनी – भजन || हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी अम्ब विमल मति दे अम्ब विमल मति दे हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी अम्ब विमल मति दे अम्ब विमल मति दे जग सिरमौर बनाएँ भारत वह बल विक्रम दे वह बल विक्रम दे हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी अम्ब विमल मति दे अम्ब विमल मति…

मैया का चोला है रंगला – नवरात्रि माता के भजन

|| मैया का चोला है रंगला – भजन || लाली मेरी मात की, जित देखु तीत लाल, लाली देखन मै गया, मै भी हो गया लाल ॥ मैया का चोला है रंगला, शेरोवाली का चोला है रंगला, मेहरोवाली का चोला है रंगला, जोतावाली का चोला है रंगला, अंबे रानी का चोला है रंगला, माँ वैष्णो का…

ओढ़ के चुनरिया लाल मैया जी मेरे घर आना – नवरात्रि माता के भजन

|| ओढ़ के चुनरिया लाल मैया जी मेरे घर आना – भजन || ओढ़ के चुनरिया लाल, मैया जी मेरे घर आना, मैया जी मेरे घर आना, मैया जी मेरे घर आना, ओढ़ के चुनरियाँ लाल, मैया जी मेरे घर आना ॥ आप भी आना, गणपतिजी को लाना, आप भी आना, गणपतिजी को लाना, रिद्धि सिद्धि…

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