नील सरस्वती स्तोत्रम् अर्थ सहित

॥ नील सरस्वती स्तोत्र पाठ विधि ॥ प्रतिदिन नील सरस्वती स्तोत्र का पाठ करने से आपको चमत्कारिक अनुभव होंगे। यदि आप देवी सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो अष्टमी, नवमी तथा चतुर्दशी के दिन इस स्तोत्र का पाठ अवश्य करें। सर्वप्रथम स्नान करके स्वच्छ श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें। पीले आसन…

जानिए मंत्र जाप करने की विधि और फायदे

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अगर आप भी मंत्रों का जाप करते है तो आपको पता होना चाहिए मंत्र जाप करने का सही तरीका। जिस तरह हम भगवान के दर्शन करते समय अपना सिर उनके सामने झुकाते हैं ठीक उसी तरह हमें मंत्रों का जाप करते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। अगर मंत्रों का जाप करते समय…

श्री कालभैरवाष्टक स्तोत्रम्

॥ कालभैरवाष्टकम् स्तोत्र ॥ देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं, व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्। नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं, काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥ भानुकोटिभास्करं भवाब्धितारकं परं, नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्। कालकालमम्बुजाक्षमक्षशूलमक्षरं, काशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं, श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्। भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं, काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ भुक्तिमुक्तिप्रदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं, भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्। विनिक्वणन्मनोज्ञ हेमकिङ्किणीलसत्कटिं, काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं, कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्। स्वर्ण वर्ण शेष पाश शोभिताङ्ग-मण्डलं, काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥ रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं, नित्यमद्वितीयमिष्ट दैवतं…

श्री काल भैरव अष्टमी व्रत कथा

|| काल भैरव की पूजा विधि || इस दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठ कर नित्य-क्रिया आदि कर स्वच्छ हो जाएं। एक लकड़ी के पाट पर सबसे पहले शिव और पार्वतीजी के चित्र को स्थापित करें। फिर काल भैरव के चित्र को स्थापित करें। जल का छिड़काव करने के बाद सभी को गुलाब के फूलों का…

साल 2025 में चंद्र ग्रहण कब लगेगा भारत में – जानें तारिक और सूतक काल का समय

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चंद्र ग्रहण क्या होता है: चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है जिससे चंद्रमा कुछ समय के लिए अंधेरा हो जाता है। कई धर्मों में चंद्र ग्रहण को विशेष महत्व दिया जाता है। इसे अशुभ माना जाता…

श्री कुबेर आरती

॥ श्री कुबेर आरती ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे । शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे । ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥ शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े, स्वामी भक्त कुबेर बड़े । दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े ॥ ॥ ऊँ जै यक्ष…

राशियों के मंत्र

|| राशियों के मंत्र || मेष राशि मंत्र ॐ ऎं क्लीं सौः | Om Aing Kleeng Sauh | वृषभ राशि मंत्र ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं | Om Hreeng Kleeng Shreeng | मिथुन राशि मंत्र ॐ श्रीं ऎं सौः | Om Shreeng Aing Sauh | कर्क राशि मंत्र ॐ ऎं क्लीं श्रीं | Om Aing Kleeng…

भगवान नरसिंह का शक्तिशाली मंत्र

।। नरसिंह मंत्र के फायदे ।। नरसिंह मंत्र से तंत्र-मंत्र बाधा, भूत पिशाच भय, अकाल मृत्यु का डर, असाध्य रोग आदि से मुक्ति मिलती है। श्री नरसिंह प्रतिमा की पूजा करके संकटमोचन नृसिंह मंत्र का स्मरण करें। समस्त संकटों से आसानी से छुटकारा मिल जाएगा। अगर आप को क्रोध से मुक्ति, सुखद और सफल जीवन…

श्री शनि अष्टकम

|| श्री शनि अष्टकम || नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च। नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम:। नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च। नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते। नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:। नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते। नमस्ते कोटराक्षाय दुर्नरीक्ष्याय वै नम:। नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने। नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते। सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय…

श्री विष्णुसहस्रनाम स्तोत्रम् – पूर्वपीठिक

|| श्री विष्णुसहस्रनाम स्तोत्रम् – पूर्वपीठिक || शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् । प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥ १ ॥ यस्य द्विरदवक्त्राद्याः पारिषद्याः परः शतम् । विघ्नं निघ्नन्ति सततं विष्वक्सेनं तमाश्रये ॥ २ ॥ व्यासं वसिष्ठनप्तारं शक्तेः पौत्रमकल्मषम् । पराशरात्मजं वन्दे शुकतातं तपोनिधिम् ॥ ३ ॥ व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे । नमो वै ब्रह्मनिधये वासिष्ठाय नमो नमः…

सुवर्णद्वीपीय रामकथा (Suvarnadwipiya Ramkatha)

सुवर्णद्वीपीय रामकथा (Suvarnadwipiya Ramkatha)

सुवर्णद्वीपीय रामकथा राजेंद्र मिश्र द्वारा रचित एक अनूठी कृति है, जिसमें रामकथा के उस संस्करण का वर्णन किया गया है जो भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर, विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रों में प्रचलित है। यह पुस्तक रामकथा के विविध रूपों और उनकी सांस्कृतिक विविधताओं को समझने के लिए एक अद्वितीय दर्पण है। सुवर्णद्वीपीय रामकथा…

स्रष्टा का अस्तित्व सृष्टि के कण – कण से प्रमाणित (Srastha Ka Astitva Srishti Ke Kan Kan Se Pramanit)

स्रष्टा का अस्तित्व सृष्टि के कण - कण से प्रमाणित (Srastha Ka Astitva Srishti Ke Kan Kan Se Pramanit)

स्रष्टा का अस्तित्व सृष्टि के कण-कण से प्रमाणित पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित एक गहन और प्रेरणादायक पुस्तक है, जो ईश्वर के अस्तित्व और सृष्टि के रहस्यों को विज्ञान और अध्यात्म के संगम के माध्यम से प्रस्तुत करती है। इस ग्रंथ में लेखक ने यह समझाने का प्रयास किया है कि ब्रह्मांड का हर…

राशियों के इष्टदेव के मंत्र

|| राशियों के इष्टदेव मंत्र || Mesha (Aries) ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी नारायणाभ्यां नमः ।। Om Hirng Shring Lakshmi Narayanabhyam Namah|| Vrishabha (Taurus) ॐ गोपालाय उत्तरध्वजाय नमः ।। Om Gopalay Utterdhvajay Namah || Mithuna (Gemini) ॐ क्लीं कृष्णाय नमः ।। Om Kling Krishnay Namah|| Karka (Cancer) ॐ हिरण्यगर्भाय अव्यक्तरुपिणे नमः ।। Om HiranyaGarbhay Avyaktrupine Namah…

श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम्

॥ श्री अन्नपूर्णा स्तोत्र पाठ विधि ॥ मां अन्नपूर्णा की तस्वीर या प्रतिमा को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें। उनके समक्ष धूप-दीप प्रज्वलित करें और अन्न का अर्पण करें। अर्पित किए जाने वाले अन्न में चावल, गेहूं, या धान का उपयोग किया जा सकता है। इसके पश्चात श्रद्धा और भक्ति भाव से अन्नपूर्णा स्तोत्र का…

श्री त्रिपुरारि स्तोत्रम्

॥ श्रीत्रिपुरारिस्तोत्रम् ॥ नमामोऽसुरारेस्सुरारेर्गणाग्र्यं नमामोऽन्धकारिं मखारिं निजारेः । शिरो गाङ्गवारिप्रचारक्षमोऽस्य नमामः पुरारिम् मुरारेः प्रियं तम् ॥ मुखैः पञ्चभिः पञ्चभिः पञ्चषष्ठं त्रयीसाङ्ख्ययोगाङ्गमारण्यकानि । जगौ भक्तिकाण्डं हरेस्सौख्यभाण्डं नमामः पुरारिं मुरारेः प्रियं तम् ॥ हरेरङ्घ्रितो गाङ्गवारि प्रसूतं कपर्दे कपर्दे कपर्द्दीचकार । अखर्वं च गर्वं हरन् जह्नुजाया नमामः पुरारिं मुरारेः प्रियं तम् ॥ गुरूणां गुरुर्यो मतो नारदेन उपज्ञोऽपि शिष्यः…

श्री त्रिपुरसुन्दरी स्तोत्रम्

|| श्री त्रिपुरसुन्दरीस्तोत्रम् || श्वेतपद्मासनारूढां शुद्धस्फटिकसन्निभाम् । वन्दे वाग्देवतां ध्यात्वा देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ शैलाधिराजतनयां शङ्करप्रियवल्लभाम् । तरुणेन्दुनिभां वन्दे देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ सर्वभूतमनोरम्यां सर्वभूतेषु संस्थिताम् । सर्वसम्पत्करीं वन्दे देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ पद्मालयां पद्महस्तां पद्मसम्भवसेविताम् । पद्मरागनिभां वन्दे देवी त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ पञ्चबाणधनुर्बाणपाशाङ्कुशधरां शुभाम् । पञ्चब्रह्ममयीं वन्दे देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ षट्पुण्डरीकनिलयां षडाननसुतामिमाम् । षट्कोणान्तःस्थितां वन्दे देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥…

अन्नपूर्णा माता आरती

॥ अन्नपूर्णा माता आरती ॥ बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम । जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम । अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो, लेत होत सब काम ॥ बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम । प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम । सुर सुरों की रचना करती, कहाँ कृष्ण कहाँ राम ॥ बारम्बार प्रणाम,…

गोपनीय गायत्री तंत्र (Gopniya Gayatri Tantra)

गोपनीय गायत्री तंत्र (Gopniya Gayatri Tantra)

गोपनीय गायत्री तंत्र पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित एक अद्वितीय ग्रंथ है, जो गायत्री साधना के गूढ़ रहस्यों और उसके तांत्रिक स्वरूप को उजागर करता है। यह पुस्तक उन साधकों के लिए मार्गदर्शक है, जो गायत्री महामंत्र की शक्ति को गहराई से समझना और अपने जीवन में आध्यात्मिक ऊंचाई प्राप्त करना चाहते हैं। पं….

रामायण आठो काण्ड (Ramayan Aatho Kand)

रामायण आठो काण्ड (Ramayan Aatho Kand)

रामायण आठो काण्ड गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाकाव्य “श्रीरामचरितमानस” का संपूर्ण रूप है। यह ग्रंथ भारतीय संस्कृति और धर्म का अद्वितीय ग्रंथ है, जिसमें भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्श चरित्र और लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। श्रीरामचरितमानस को सात काण्डों में विभाजित किया गया है, लेकिन इसे “आठो काण्ड” के रूप…

प्राचीन भारत में लक्ष्मी – प्रतिमा (Prachin Bharat Mein Laxmi Pratima)

प्राचीन भारत में लक्ष्मी - प्रतिमा (Prachin Bharat Mein Laxmi Pratima)

प्राचीन भारत में लक्ष्मी-प्रतिमा डॉ. राय गोविंदचंद्र द्वारा लिखित एक गहन शोधपरक ग्रंथ है, जो भारतीय सभ्यता और संस्कृति में माता लक्ष्मी की प्रतीकात्मकता, प्रतिमाओं और उनके स्वरूप के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं का विश्लेषण करता है। यह पुस्तक प्राचीन भारत के धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक संदर्भ में लक्ष्मी की महत्ता को उजागर करती है।…

ग्रहलक्ष्मी की प्रतिष्ठा (Gruhlakshmi Ki Pratistha)

ग्रहलक्ष्मी की प्रतिष्ठा (Gruhlakshmi Ki Pratistha)

ग्रहलक्ष्मी की प्रतिष्ठा पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा लिखित एक प्रेरणादायक पुस्तक है। यह ग्रंथ गृहस्थ जीवन में लक्ष्मी (धन, समृद्धि और शांति) की सही भूमिका, उसकी पूजा, और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से उसके महत्व को उजागर करता है। पं. श्रीराम शर्मा आचार्य, जो कि युग निर्माण योजना और अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक हैं,…

काक भुशुण्डि रामायण (Kak Bhushundi Ramayan)

काक भुशुण्डि रामायण (Kak Bhushundi Ramayan)

काक भुशुण्डि रामायण एक पवित्र और लोकप्रिय ग्रंथ है, जो भगवान श्रीराम की कथा को अनूठे दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है। इस ग्रंथ का प्रकाशन रंधीर बुक सेल्स, हरिद्वार द्वारा किया गया है। काकभुशुण्डि जी, जो कि एक अद्वितीय भक्त और ज्ञानी पक्षी हैं, उनके माध्यम से रामायण की कथा को सरल, सुलभ और भावपूर्ण…

श्री हरि स्तुतिः (हरिमीडे स्तोत्रम्)

|| श्री हरि स्तुतिः (हरिमीडे स्तोत्रम्) || स्तोष्ये भक्त्या विष्णुमनादिं जगदादिं यस्मिन्नेतत्संसृतिचक्रं भ्रमतीत्थम् । यस्मिन् दृष्टे नश्यति तत्संसृतिचक्रं तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ १ ॥ यस्यैकांशादित्थमशेषं जगदेत- -त्प्रादुर्भूतं येन पिनद्धं पुनरित्थम् । येन व्याप्तं येन विबुद्धं सुखदुःखै- -स्तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ २ ॥ सर्वज्ञो यो यश्च हि सर्वः सकलो यो यश्चानन्दोऽनन्तगुणो यो गुणधामा । यश्चाव्यक्तो व्यस्तसमस्तः…

श्री दत्तात्रेयाष्टकम्

|| श्री दत्तात्रेयाष्टकम् || श्रीदत्तात्रेयाय नमः । आदौ ब्रह्ममुनीश्वरं हरिहरं सत्त्वं-रजस्तामसं ब्रह्माण्डं च त्रिलोकपावनकरं त्रैमूर्तिरक्षाकरम् । भक्तानामभयार्थरूपसहितं सोऽहं स्वयं भावयन् सोऽहं दत्तदिगम्बरं वसतु मे चित्ते महत्सुन्दरम् ॥ विश्वं विष्णुमयं स्वयं शिवमयं ब्रह्मामुनीन्द्रोमयं ब्रह्मेन्द्रादिसुरागणार्चितमयं सत्यं समुद्रोमयम् । सप्तं लोकमयं स्वयं जनमयं मध्यादिवृक्षोमयं सोऽहं दत्तदिगम्बरं वसतु मे चित्ते महत्सुन्दरम् ॥ आदित्यादिग्रहा स्वधाऋषिगणं वेदोक्तमार्गे स्वयं वेदं शास्त्र-पुराणपुण्यकथितं ज्योतिस्वरूपं…

दत्तात्रेय अजपाजप स्तोत्रम्

|| दत्तात्रेय अजपाजप स्तोत्रम् || ॐ तत्सत् ब्रह्मणे नमः । ॐ मूलाधारे वारिजपत्रे चतरस्रे वंशंषंसं वर्ण विशालं सुविशालम् । रक्तंवर्णे श्रीगणनाथं भगवन्तं दत्तात्रेयं श्रीगुरुमूर्तिं प्रणतोऽस्मि ॥ स्वाधिष्ठाने षट्दल पद्मे तनुलिङ्गं बंलांतं तत् वर्णमयाभं सुविशालम् । पीतंवर्णं वाक्पति रूपं द्रुहिणन्तं दत्तात्रेयं श्रीगुरुमूर्तिं प्रणतोऽस्मि ॥ नाभौ पद्मंयत्रदशाढां डंफं वर्णं लक्ष्मीकान्तं गरुडारुढं नरवीरम् । नीलंवर्णं निर्गुणरूपं निगमान्तं दत्तात्रेयं…

भगवान दत्तात्रेय जन्म कथा

|| भगवान दत्तात्रेय जन्म कथा || भगवान को जब अपने भक्तों का यश बढ़ाना होता है, तो वे नाना प्रकार की लीलाएँ करते हैं। श्री लक्ष्मी जी, माता सती और देवी सरस्वती जी को अपने पतिव्रत का बड़ा अभिमान था। तीनों देवियों के अभिमान को नष्ट करने तथा अपनी परम भक्तिनी पतिव्रता धर्मचारिणी अनसूया के…

श्री दत्तात्रेय स्तोत्रम्

॥ दत्तात्रेय स्तोत्र के लाभ ॥ मंत्र का जाप हमेशा आपके चारों ओर एक सुरक्षा कवच बना सकता है। इसके फायदे कई गुना हैं। पितृषप’ या मृत पूर्वजों के श्राप को हटाना। परिवार में सौहार्द और खुशहाली। मन की शांति और कष्टों से मुक्ति। बच्चों का कल्याण। बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार। कमांडिंग भाषण…

त्रिलता स्तुतिमुक्तावली (Trilata Stutimuktavali)

त्रिलता स्तुतिमुक्तावली (Trilata Stutimuktavali)

त्रिलता स्तुतिमुक्तावली एक उत्कृष्ट आध्यात्मिक कृति है, जिसे पंडित तेजभानु शर्म्मणा ने रचा है। यह पुस्तक देवताओं की स्तुति और प्रार्थनाओं का अनूठा संग्रह है, जिसमें भारतीय संस्कृति और भक्ति परंपरा की गहराई झलकती है। यह ग्रंथ भक्तों के लिए ईश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण प्रकट करने का एक सशक्त माध्यम है। पंडित…

चंपा षष्ठी की पौराणिक कथा

|| चंपा षष्ठी की पौराणिक कथा || चंपा षष्ठी का पर्व भगवान शिव के कार्तिकेय (मुरुगन) स्वरूप को समर्पित है। यह पर्व मुख्य रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक और दक्षिण भारत के कुछ भागों में मनाया जाता है। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह पर्व आता है। इसे भगवान शिव और उनके…

भृगु बंशी राम (Bhrigu Banshi Ram)

भृगु बंशी राम (Bhrigu Banshi Ram)

भृगु बंशी राम एक प्रसिद्ध पुस्तक है, जिसे लेखक श्री त्रिवेणी प्रसाद सिंह ने लिखा है। यह पुस्तक भारतीय साहित्य और संस्कृति के अनमोल खजाने में से एक है। यह कृति भारतीय इतिहास, समाज और पारंपरिक मूल्यों को बड़े ही रोचक और गहन तरीके से प्रस्तुत करती है। भृगु बंशी राम पुस्तक की विशेषताएं भृगु…

लव और कुश (Lav Aur Kush)

लव और कुश (Lav Aur Kush)

लव और कुश पुस्तक लेखक रंधीर द्वारा लिखी गई है, जो रामायण के दो प्रमुख पात्रों, लव और कुश, के जीवन और उनकी कहानियों को केंद्रित करती है। यह पुस्तक न केवल उनके साहस और संघर्षों का वर्णन करती है, बल्कि उनके व्यक्तित्व, उनके विचारों और उनकी भूमिका को भी गहराई से समझाती है। रंधीर…

श्री मयूरेश स्तोत्रम्

॥ श्री मयूरेश स्तोत्रम् ॥ | ब्रह्मोवाच | पुराणपुरुषं देवं नानाक्रीडाकरं मुदा। मायाविनं दुर्विभाव्यं मयूरेशं नमाम्यहम्॥ परात्परं चिदानन्दं निर्विकारं हृदि स्थितम्। गुणातीतं गुणमयं मयूरेशं नमाम्यहम्॥ सृजन्तं पालयन्तं च संहरन्तं निजेच्छया। सर्वविघ्नहरं देवं मयूरेशं नमाम्यहम्॥ नानादैत्यनिहन्तारं नानारूपाणि बिभ्रतम्। नानायुधधरं भक्त्या मयूरेशं नमाम्यहम्॥ इन्द्रादिदेवतावृन्दैरभिष्टुतमहर्निशम्। सदसद्व्यक्तमव्यक्तं मयूरेशं नमाम्यहम्॥ सर्वशक्तिमयं देवं सर्वरूपधरं विभुम्। सर्वविद्याप्रवक्तारं मयूरेशं नमाम्यहम्॥ पार्वतीनन्दनं शम्भोरानन्दपरिवर्धनम्। भक्तानन्दकरं…

श्री विश्वनाथाष्टकम् स्तोत्रम्

॥ श्री विश्वनाथाष्टकम् स्तोत्र ॥ गङ्गातरङ्गरमणीयजटाकलापं गौरीनिरन्तरविभूषितवामभागम्। नारायणप्रियमनंगमदा पहारं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥ वाचामगोचरमनेकगुणस्वरूपं वागीशविष्णु सुरसेवितपादपीठम्। वामेन विग्रहवरेण कलत्रवन्तं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥ भूताधिपं भुजगभूषणभूषिताङ्गं, व्याघ्राजिनाम्बरधरं जटिलं त्रिनेत्रम्। पाशाङ्कुशाभयवर प्रदशूलपाणिं, वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥ शीतांशुशोभितकिरीटविराजमानं, भाक्षणानल-विशोषितपञ्चवाणम्। नागाधिपा रचितभासुरकर्णपूरं, वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥ पञ्चानन्दुरितमत्तमतंगजानां, नागान्तकं दनुजपुंगवपन्नगानाम्। दावानलं मरणशोकजराटवीनां, वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥ तेजोमयं सगुणनिर्गुणमद्वितीय, मानन्दकन्दमपराजितमप्रमेयम्। नागात्मकं सकलनिष्कलमात्मरूपं, वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥ रागादिदोषरहितं…

श्री गणेशाष्टक स्तोत्र

॥ श्री गणेशाष्टक स्तोत्र ॥ यतोऽनन्तशक्तेरनन्ताश्च जीवा यतो निर्गुणादप्रमेया गुणास्ते। यतो भाति सर्वं त्रिधा भेदभिन्नं सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥ यतश्चाविरासीज्जगत्सर्वमेतत्तथाब्जासनो विश्वगो विश्वगोप्ता। तथेन्द्रादयो देवसङ्घा मनुष्याः सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥ यतो वह्निभानूद्भवो भूर्जलं च यतः सागराश्चन्द्रमा व्योम वायुः। यतः स्थावरा जङ्गमा वृक्षसङ्घाः सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥ यतो दानवाः किंनरा यक्षसङ्घा यतश्चारणा वारणाः श्वापदाश्च।…

श्री गजानन स्तोत्र

॥ श्री गजानन स्तोत्र ॥ || देवर्षि उवाचुः ||  विदेहरूपं भवबन्धहारं सदा स्वनिष्ठं स्वसुखप्रद तम्। अमेयसांख्येन च लक्ष्यमीशं गजाननं भक्तियुतं भजामः॥ मुनीन्द्रवन्यं विधिबोधहीनं सुबुद्धिदं बुद्धिधरं प्रशान्तम्। विकारहीनं सकलाङ्गकं वै गजाननं भक्तियुतं भजामः॥ अमेयरूपं हृदि संस्थितं तं ब्रह्माहमेकं भ्रमनाशकारम्। अनादिमध्यान्तमपाररूपं गजाननं भक्तियुतं भजामः॥ जगत्प्रमाणं जगदीशमेवमगम्यमाद्यं जगदादिहीनम्। अनात्मनां मोहप्रदं पुराणं गजाननं भक्तियुतं भजामः॥ न पृथ्विरूपं न जलप्रकाशं…

श्री दत्तात्रेय हृदयम्

|| श्री दत्तात्रेय हृदयम् || प्रह्लाद एकदारण्यं पर्यटन्मृगयामिषात् । भाग्याद्ददर्श सह्याद्रौ कावेर्यां निद्रिता भुवि ॥ कर्माद्यैर्वर्णलिङ्गाद्यैरप्रतक्र्यं रजस्वलम् । नत्वा प्राहावधूतं तं निगूढामलतेजसम् ॥ कथं भोगीव धत्तेऽस्वः पीनां तनुमनुद्यमः । उद्योगात्स्वं ततो भोगो भोगात्पीना तनुर्भवेत् ॥ शयानोऽनुद्यमोऽनीहो भवानिह तथाप्यसौ । पीना तनुं कथं सिद्धो भवान्वदतु चेत्क्षमम् ॥ विद्वान्दक्षोऽपि चतुरश्चित्रप्रियकथो भवान् । दृष्ट्वापीह जनांश्चित्रकर्मणो वर्तते समः ॥…

आदित्य हृदयम्

|| आदित्य हृदयम् || ध्यानम् नमस्सवित्रे जगदेक चक्षुसे जगत्प्रसूति स्थिति नाशहेतवे त्रयीमयाय त्रिगुणात्म धारिणे विरिंचि नारायण शंकरात्मने ततो युद्ध परिश्रांतं समरे चिंतयास्थितम् । रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम् ॥ 1 ॥ दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् । उपागम्याब्रवीद्रामं अगस्त्यो भगवान् ऋषिः ॥ 2 ॥ राम राम महाबाहो शृणु गुह्यं सनातनम् । येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसि…

गायत्री हृदयम्

|| गायत्री हृदयम् || ॐ इत्येकाक्षरं ब्रह्म, अग्निर्देवता, ब्रह्म इत्यार्षम्, गायत्रं छन्दं, परमात्मम् स्वरूपं, सायुज्यं विनियोगम् । आयातु वरदा देवी अक्षर ब्रह्म सम्मितम् । गायत्री छन्दसां माता इदं ब्रह्म जुहस्व मे ॥ यदन्नात्कुरुते पापं तदन्नत्प्रतिमुच्यते । यद्रात्र्यात्कुरुते पापं तद्रात्र्यात्प्रतिमुच्यते ॥ सर्व वर्णे महादेवि सन्ध्या विद्ये सरस्वति । अजरे अमरे देवि सर्व देवि नमोऽस्तुते ॥ ओजोऽसि…

स्यमंतक मणि कथा

|| स्यमंतक मणि कथा || एक बार जरासंध के बार-बार आक्रमण से तंग आकर श्रीकृष्ण ने मथुरा छोड़ समुद्र के मध्य एक नई नगरी बसाई, जिसे द्वारिकापुरी के नाम से जाना जाता है। इसी नगरी में सत्राजित नामक व्यक्ति ने सूर्यनारायण की कठोर तपस्या की। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान सूर्य ने उन्हें स्यमन्तक…

श्री भगवद्‍ गीता आरती

|| श्री भगवद्‍ गीता आरती || जय भगवद् गीते, जय भगवद् गीते । हरि-हिय-कमल-विहारिणि, सुन्दर सुपुनीते ॥ कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि, कामासक्तिहरा । तत्त्वज्ञान-विकाशिनि, विद्या ब्रह्म परा ॥ जय भगवद् गीते…॥ निश्चल-भक्ति-विधायिनि, निर्मल मलहारी । शरण-सहस्य-प्रदायिनि, सब विधि सुखकारी ॥ जय भगवद् गीते…॥ राग-द्वेष-विदारिणि, कारिणि मोद सदा । भव-भय-हारिणि, तारिणि परमानन्दप्रदा ॥ जय भगवद् गीते…॥ आसुर-भाव-विनाशिनि, नाशिनि तम…

अभ्युदय (Abhyudaya)

अभ्युदय (Abhyudaya)

अभ्युदय नरेंद्र कोहली द्वारा लिखित एक कालजयी उपन्यास है, जो महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के आदर्श पात्र श्रीराम के जीवन को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है। यह पुस्तक न केवल श्रीराम के जीवन की घटनाओं का वर्णन करती है, बल्कि उनके व्यक्तित्व, उनके संघर्षों और उनके आदर्शों को आधुनिक समाज के संदर्भ…

वृहत पूजा संग्रह (Vrihat Pooja Sangrah)

वृहत पूजा संग्रह (Vrihat Pooja Sangrah)

वृहत पूजा संग्रह एक बहुमूल्य धार्मिक ग्रंथ है, जो विभिन्न प्रकार की पूजा विधियों, व्रत, अनुष्ठान, और धार्मिक कर्मकांडों का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है। यह पुस्तक भारतीय धर्म और संस्कृति की गहराई से समझ के साथ लिखी गई है, जिसमें हिंदू धर्म के अनुसार पूजापाठ की समस्त विधियाँ सरल और व्यवस्थित रूप से दी…

महावीर कर्ण (Mahaveer Karn)

महावीर कर्ण (Mahaveer Karn)

महावीर कर्ण पुस्तक पंडित रामनारायण द्वारा लिखित एक अद्भुत महाकाव्य है जो महाभारत के महानायक कर्ण के जीवन, संघर्षों और उनके वीरता से भरे व्यक्तित्व को केंद्र में रखकर लिखा गया है। यह पुस्तक कर्ण के जीवन के उन पहलुओं को उजागर करती है, जो सामान्य रूप से महाभारत की मुख्य कथाओं में अनदेखे रह…

सूर्य सहस्रनामावली (भविष्य पुराण)

भविष्य पुराण में वर्णित सूर्य सहस्रनामावली भगवान सूर्य के एक हजार नामों का संग्रह है। यह सहस्रनामावली भगवान सूर्य की महिमा, उनके स्वरूप, और उनके द्वारा विश्व में प्रदान की जाने वाली ऊर्जा और जीवन के विभिन्न पहलुओं का वर्णन करती है। भगवान सूर्य वेदों में आदित्य के रूप में पूजित हैं और उन्हें जीवनदाता,…

रुद्रयामल सूर्य सहस्रनामावली

रुद्रयामल तंत्र एक प्रमुख तांत्रिक ग्रंथ है, जिसमें विविध देवताओं की स्तुतियों और साधनाओं का वर्णन है। इसमें वर्णित सूर्य सहस्रनामावली भगवान सूर्य के एक हजार दिव्य नामों का संग्रह है। यह सहस्रनामावली सूर्य देव के विभिन्न स्वरूपों, गुणों और उनकी अनंत शक्ति का वर्णन करती है। भगवान सूर्य को वेदों में आदित्य, सविता और…

स्कन्द पुराण सूर्य सहस्रनामावली

स्कन्द पुराण भारतीय धर्मग्रंथों में सबसे बड़ा पुराण है, जिसमें सृष्टि, धर्म और अध्यात्म से संबंधित कई महत्वपूर्ण कथाएं और स्तोत्र शामिल हैं। इस पुराण में सूर्य देव की महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है। सूर्य सहस्रनामावली भगवान सूर्य के एक हजार दिव्य नामों का संग्रह है, जो उनके स्वरूप, शक्ति और उपकारकता को प्रकट…

श्री वाल्मीकि कृत सीता सहस्रनामावली

श्री वाल्मीकि कृत सीता सहस्रनामावली में माता सीता के 1000 दिव्य और महिमामय नामों का वर्णन किया गया है। ये नाम देवी सीता के विभिन्न स्वरूपों, गुणों, और उनके जीवन के आदर्श पहलुओं को उजागर करते हैं। माता सीता को त्याग, समर्पण, प्रेम, और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस सहस्रनामावली का पाठ वाल्मीकि…

गरुड़ देव सहस्रनामावली

गरुड़ देव सहस्रनामावली भगवान विष्णु के वाहन और परम भक्त गरुड़ देव को समर्पित 1000 पवित्र नामों का संग्रह है। गरुड़ देव वेदों के ज्ञाता और शत्रु नाशक माने जाते हैं। वे अद्भुत पराक्रमी और दिव्य शक्तियों से युक्त हैं। उनके सहस्रनाम का पाठ करने से साधक को भय, रोग और शत्रुओं से मुक्ति मिलती…

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