सूर्य देव जी की आरती PDF हिन्दी
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Surya Dev ✦ Aarti (आरती संग्रह) ✦ हिन्दी
सूर्य देव जी की आरती हिन्दी Lyrics
भगवान सूर्य देव की आरती हिंदू धर्म में अत्यंत फलदायी मानी जाती है। सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता हैं जो हमें प्रकाश, ऊर्जा और आरोग्य प्रदान करते हैं। नियमित रूप से सूर्य देव की आरती करने से जीवन के अंधकार और बीमारियां दूर होती हैं और व्यक्ति को तेज व सफलता प्राप्त होती है। भक्तों की सुविधा के लिए हमने आरती का शुद्ध पाठ तैयार किया है। यदि आप प्रतिदिन सूर्य उपासना करना चाहते हैं, तो Surya Dev Aarti PDF हमारी वेबसाइट से डाउनलोड करें। इस पीडीएफ में आपको स्पष्ट शब्दों में पूरी आरती मिलेगी, जिसे आप अपने फोन में सुरक्षित रख सकते हैं।
सूर्य देव की आरती का पाठ न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि यह हमें जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह से भर देता है। यदि आप भी इस पावन आरती का नित्य पाठ करना चाहते हैं, तो “सूर्य देव जी की आरती PDF” आसानी से उपलब्ध है, जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं और अपनी पूजा का हिस्सा बना सकते हैं। यह पीडीएफ आपको आरती के बोल शुद्ध रूप में प्रदान करेगा, जिससे आप बिना किसी त्रुटि के इसका पाठ कर सकें।
|| सूर्य देव आरती (Surya Dev Aarti PDF) ||
ऊँ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान ।
जगत् के नेत्र स्वरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ।
धरत सब ही तव ध्यान,
ऊँ जय सूर्य भगवान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
सारथी अरूण हैं प्रभु तुम,
श्वेत कमलधारी ।
तुम चार भुजाधारी ॥
अश्व हैं सात तुम्हारे,
कोटी किरण पसारे ।
तुम हो देव महान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
ऊषाकाल में जब तुम,
उदयाचल आते ।
सब तब दर्शन पाते ॥
फैलाते उजियारा,
जागता तब जग सारा ।
करे सब तब गुणगान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
संध्या में भुवनेश्वर,
अस्ताचल जाते ।
गोधन तब घर आते॥
गोधुली बेला में,
हर घर हर आंगन में ।
हो तव महिमा गान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
देव दनुज नर नारी,
ऋषि मुनिवर भजते ।
आदित्य हृदय जपते ॥
स्त्रोत ये मंगलकारी,
इसकी है रचना न्यारी ।
दे नव जीवनदान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
तुम हो त्रिकाल रचियता,
तुम जग के आधार ।
महिमा तब अपरम्पार ॥
प्राणों का सिंचन करके,
भक्तों को अपने देते ।
बल बृद्धि और ज्ञान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
भूचर जल चर खेचर,
सब के हो प्राण तुम्हीं ।
सब जीवों के प्राण तुम्हीं ॥
वेद पुराण बखाने,
धर्म सभी तुम्हें माने ।
तुम ही सर्व शक्तिमान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
पूजन करती दिशाएं,
पूजे दश दिक्पाल ।
तुम भुवनों के प्रतिपाल ॥
ऋतुएं तुम्हारी दासी,
तुम शाश्वत अविनाशी ।
शुभकारी अंशुमान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
ऊँ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान ।
जगत के नेत्र रूवरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ॥
धरत सब ही तव ध्यान,
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
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