एक तरफ ‘टेक्नोलॉजी’ (Technology) की दुनिया के ‘दिग्गज’ (Giants) स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग, और दूसरी तरफ, उत्तराखंड की शांत पहाड़ियों में बैठा एक कंबलधारी फकीर। नीम करौरी बाबा! उन्हें अक्सर ‘मॉडर्न साधक’ (Modern Sage) कहा जाता है, लेकिन उनके भक्तों के लिए वह इससे कहीं ज़्यादा हैं।
सबसे बड़ा सवाल जो आज भी लाखों लोगों के मन में गूंजता है, वह यह है: क्या नीम करौरी बाबा (Neem Karoli Baba) वास्तव में पवनपुत्र हनुमान जी (Lord Hanuman) के अवतार थे?
आइए, कैंची धाम (Kainchi Dham) के इस ‘रहस्य’ (Mystery) की गहराई में उतरते हैं और प्रमाणों, कहानियों और बाबा के ‘आध्यात्मिक प्रभाव’ (Spiritual Influence) के आधार पर इस सच को जानने की कोशिश करते हैं।
हनुमान जी और नीम करौरी बाबा – ‘भक्ति’ (Devotion) का अटूट बंधन
बाबा नीम करौरी का जीवन ‘अलौकिक’ (Supernatural) घटनाओं और ‘चमत्कारों’ (Miracles) से भरा रहा है। लेकिन, उनके हर कदम में, हर उपदेश में, और यहाँ तक कि उनके आश्रमों की नींव में भी, केवल एक ही देवता का वास है – हनुमान जी।
हनुमान जी को समर्पित आश्रम
- बाबा ने जीवन भर में लगभग 108 मंदिर बनवाए या पुनर्जीवित किए। इन सभी मंदिरों में सबसे प्रमुख रूप से हनुमान जी की ही स्थापना की गई।
- नैनीताल का प्रसिद्ध कैंची धाम (Kainchi Dham) हो या वृंदावन का आश्रम, हर जगह का मुख्य केंद्र हनुमान जी का मंदिर ही है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बाबा का जीवन हनुमान जी की भक्ति के इर्द-गिर्द केंद्रित था।
‘नाम’ (Name) की कहानी
बाबा का असली नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था। उन्हें नीम करौरी नाम एक छोटे से गाँव में मिला, जहाँ उन्हें बिना टिकट यात्रा करने के आरोप में ट्रेन से उतार दिया गया था। उन्होंने स्टेशन के पास ही ‘आसन’ (Meditation Posture) लगा लिया, जिससे ट्रेन आगे नहीं बढ़ सकी!
परंतु, उनके भक्तों ने उन्हें अक्सर ‘महाराज जी’ या ‘हनुमान जी के स्वरूप’ के रूप में ही संबोधित किया। यह आम धारणा केवल कहानियों से नहीं बनी, बल्कि बाबा के ‘दिव्य’ (Divine) कार्यों से बनी।
‘चमत्कार’ (Miracles) जो प्रमाण बने – कहानियों का सच
बाबा के जीवन से जुड़ी कई ऐसी घटनाएँ हैं, जिन्हें उनके भक्त, उनके हनुमान अवतार होने का ‘ठोस प्रमाण’ (Solid Proof) मानते हैं।
कथा 1: बाढ़ को रोकना (Stopping the Flood)
एक बार, वृंदावन में यमुना नदी में भयंकर बाढ़ आ गई। भक्तों ने देखा कि बाबा अचानक नदी के किनारे गए और उन्होंने एक लाल कपड़ा पानी में फेंक दिया। आश्चर्यजनक रूप से, कुछ ही देर में पानी का बहाव धीमा पड़ गया और बाढ़ का खतरा टल गया। हनुमान जी को अक्सर ‘संकट मोचक’ (Reliever of Trouble) कहा जाता है, और बाबा ने यह भूमिका कई बार निभाई।
कथा 2: ‘तेज’ (Aura) का प्रदर्शन
कहा जाता है कि कई भक्तों ने उन्हें हनुमान जी के ‘विशाल’ (Giant) स्वरूप में देखा। एक भक्त ने वर्णन किया था कि एक बार जब वह बाबा के पास गए, तो उन्हें कुछ क्षणों के लिए बाबा के स्थान पर हनुमान जी की विशाल, तेजस्वी मूर्ति दिखाई दी।
कथा 3: ‘अदृश्य’ (Invisible) रूप से मदद
कई विदेशी भक्तों, जो कैंची धाम से मीलों दूर थे, उन्होंने ‘गंभीर’ (Serious) संकट के समय बाबा को ठीक उसी ‘पहनावे’ (Attire) और रूप में देखा, जैसा कि बाबा का था। यह भक्तों के प्रति उनका ‘असीम प्रेम’ (Boundless Love) और ‘तात्कालिक’ (Immediate) मदद करने की क्षमता दिखाता है, जो हनुमान जी के ‘परोपकारी’ (Benevolent) स्वभाव से मेल खाती है।
बाबा की शिक्षा और हनुमान जी का ‘दर्शन’
बाबा नीम करौरी ने कभी खुलकर यह दावा नहीं किया कि वह हनुमान जी के अवतार हैं। वह हमेशा यही कहते थे, “मैं तो एक साधारण व्यक्ति हूँ।”
लेकिन, उनकी शिक्षाओं में हनुमान जी के गुणों का ही ‘सार’ (Essence) छिपा था:
- हनुमान जी ने निस्वार्थ भाव से श्री राम की सेवा की। बाबा ने भी ‘सेवा’ (Service) को सबसे बड़ा धर्म बताया।
- हनुमान जी की करुणा अतुलनीय थी। बाबा भी सभी से प्रेम करने और किसी में कोई भेद न करने का संदेश देते थे।
- बाबा हमेशा सरल और ‘संयमित’ (Restrained) जीवन जीते थे, जो ब्रह्मचारी हनुमान जी के जीवन को दर्शाता है।
बाबा का मानना था कि हनुमान जी ‘प्रेम’ (Love), ‘भक्ति’ (Devotion), और ‘निस्वार्थता’ (Selflessness) के प्रतीक हैं। अगर कोई इन गुणों को अपने जीवन में उतार ले, तो वह स्वयं हनुमान जी का ‘स्वरूप’ (Form) बन सकता है।
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