श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत का महत्व सनातन धर्म में अत्यधिक है। इस व्रत में भक्त माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं। कथा के अनुसार, महिषासुर नामक राक्षस ने देवताओं को पराजित कर त्रिलोक में आतंक मचा दिया। तब देवी-देवताओं की संयुक्त शक्तियों से माँ दुर्गा का प्राकट्य हुआ। माँ ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध कर धर्म की पुनः स्थापना की। नवरात्रि व्रत में भक्त उपवास, पूजन और कथा श्रवण कर माँ दुर्गा से शक्ति, साहस, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। यह व्रत साधकों को सिद्धि और मोक्ष प्रदान करता है।
|| श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा (Durga Navratri Vrat Katha PDF) ||
प्राचीन काल में मनोहर नगर में पीठत नामक एक ब्राह्मण रहता था, जो भगवती दुर्गा का परम भक्त था। उसकी पुत्री सुमति अत्यंत सुंदर, गुणवान और भक्तिपूर्ण थी। वह प्रतिदिन अपने पिता के साथ दुर्गा माता की पूजा में सम्मिलित होती थी।
एक दिन, खेल में मग्न होने के कारण वह पूजन में सम्मिलित नहीं हो पाई। उसके पिता को यह देखकर क्रोध आया और उन्होंने कहा, “हे पुत्री! आज तुमने देवी का पूजन नहीं किया, इसलिए मैं तुम्हारा विवाह किसी कुष्ठ रोगी या दरिद्र व्यक्ति से कर दूँगा।”
पिता की कठोर वाणी सुनकर सुमति ने उत्तर दिया, “हे पिता! मैं आपकी कन्या हूँ, आप जो उचित समझें वही करें। किंतु मेरा विश्वास है कि जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है।”
क्रोधित होकर पिता ने उसका विवाह एक कुष्ठ रोगी से कर दिया। सुमति अपने पति के साथ वन में चली गई। वह दुखी थी और देवी भगवती की आराधना करने लगी। भगवती दुर्गा उसकी भक्ति से प्रसन्न हुईं और प्रकट होकर वरदान देने को कहा।
सुमति ने विनम्रता से निवेदन किया, “हे माता! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो मेरे पति का कुष्ठ रोग दूर करें।”
देवी ने उत्तर दिया, “पिछले जन्म में तुमने अनजाने में नवरात्रि व्रत किया था, जिसके फलस्वरूप मैं प्रसन्न हुई। यदि तुम इस व्रत के एक दिन का पुण्य अपने पति के लिए अर्पित कर दो, तो उसका रोग समाप्त हो जाएगा।”
सुमति ने सहर्ष स्वीकृति दी और उसके पति का कुष्ठ रोग समाप्त हो गया। सुमति ने देवी दुर्गा की स्तुति की और देवी ने आशीर्वाद दिया कि उसके घर में धन-धान्य, संतान और सुख-समृद्धि सदैव बनी रहेगी।
“बोलो जय माता दी!”
|| नवरात्रि व्रत की विधि ||
- चैत्र या आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें।
- माता दुर्गा की मूर्ति या चित्र, अखंड ज्योति, रोली, चावल, धूप, दीप, फूल, फल, नैवेद्य (भोग), चुनरी, आदि तैयार करें।
- सुबह स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र पहनकर, हाथ में जल लेकर, अपनी मनोकामना कहते हुए व्रत का संकल्प लें।
- प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और मां के नौ रूपों की क्रमशः पूजा करें।
- नौ दिनों तक संभव हो तो अखंड ज्योति प्रज्वलित रखें।
- अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन करें और उन्हें भोजन कराकर दक्षिणा दें।
- नवमी के अगले दिन दशमी तिथि को व्रत का पारण करें।
|| नवरात्रि व्रत के लाभ ||
नवरात्रि का व्रत और पूजन करने से भक्तों को आदिशक्ति मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में कई लाभ मिलते हैं:
- मां दुर्गा की कृपा से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
- यह व्रत सभी प्रकार के रोगों और कष्टों से मुक्ति दिलाता है।
- सच्चे मन से की गई पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- मां दुर्गा की शक्ति से भय और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
- यह व्रत जाने-अनजाने में किए गए समस्त पापों का नाश करता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
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