Misc

गोवर्धन पूजा 2026 – घर पर कैसे करें पूजन? जानें विधि, मंत्र और आरती

MiscHindu Gyan (हिन्दू ज्ञान)हिन्दी
Share This

Join HinduNidhi WhatsApp Channel

Stay updated with the latest Hindu Text, updates, and exclusive content. Join our WhatsApp channel now!

Join Now

गोवर्धन पूजा, जिसे ‘अन्नकूट’ भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। वर्ष 2026 में यह पर्व 10 नवंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को आता है और दीपावली के ठीक अगले दिन मनाया जाता है।

सनातन धर्म (Sanatan Dharma) में त्योहारों की एक लंबी श्रृंखला है, जिसमें दिवाली के ठीक अगले दिन मनाया जाने वाला गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) एक विशेष स्थान रखता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के उस अद्भुत चमत्कार को समर्पित है, जब उन्होंने इंद्र के अहंकार को तोड़ते हुए ब्रजवासियों और उनके पशुधन की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था।

इस दिन प्रकृति, गाय माता (Cow Mother) और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विधान है। आइए, जानते हैं गोवर्धन पूजा की सरल और संपूर्ण विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती, ताकि आप भी घर पर यह पूजन विधिवत संपन्न कर सकें।

गोवर्धन पूजा 2026 – शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

गोवर्धन पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है।

  • गोवर्धन पूजा – मंगलवार, नवम्बर 10, 2026 को
  • गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त – 06:40 AM से 08:50 AM (अवधि – 02 घण्टे 10 मिनट्स)
  • द्यूत क्रीड़ा – मंगलवार, नवम्बर 10, 2026 को
  • प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 09, 2026 को 12:31 PM बजे
  • प्रतिपदा तिथि समाप्त – नवम्बर 10, 2026 को 02:00 PM बजे

गोवर्धन पूजा 2026 के लिए आवश्यक सामग्री (Pujan Samagri)

पूजा शुरू करने से पहले इन सामग्रियों को एकत्र कर लें:

  • गाय का गोबर (Cow Dung)
  • रोली या कुमकुम, चावल (अक्षत), हल्दी
  • फूल, दूर्वा, दीपक, धूप
  • मिठाई, फल, खीर, बताशे, दूध, दही, शहद, गंगाजल
  • ओंगा (अपामार्ग) की टहनी (यदि उपलब्ध हो)
  • जल से भरा लोटा और जौ (अन्नकूट परिक्रमा के लिए)
  • छप्पन भोग (56 Bhog) या अपनी सामर्थ्य अनुसार कई प्रकार के व्यंजन।

गोवर्धन पूजा 2026 की सरल और संपूर्ण विधि

गोवर्धन पूजा मुख्य रूप से घर के आंगन (Courtyard) या मुख्य द्वार के पास की जाती है।

गोवर्धन पर्वत का निर्माण

  • सबसे पहले पूजा स्थल को साफ कर लें और गाय के गोबर से लीप लें।
  • अब इस स्थान पर गाय के गोबर से लेटे हुए पुरुष के आकार में गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। (यह गोवर्धन पर्वत का प्रतीकात्मक रूप है)
  • गोवर्धन जी की नाभि के स्थान पर एक छोटा गड्ढा या कटोरी/मिट्टी का दीपक स्थापित करें।
  • आकृति के चारों ओर फूल, पत्तियां, टहनियों और दीयों से सजावट करें। आप गोबर से गाय, बछड़े और ग्वालों की छोटी-छोटी आकृतियाँ भी बना सकते हैं।
  • गोवर्धन पर्वत के मध्य में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा (Idol) या चित्र रखें।

पूजन आरंभ

  • शुभ मुहूर्त में, स्नान आदि के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करके पूजा स्थल पर बैठें।
  • सबसे पहले श्री गणेश, कुल देवी-देवता और श्रीकृष्ण का ध्यान करें।
  • अब गोवर्धन पर्वत पर रोली, चावल, फूल और धूप-दीप अर्पित करें।
  • नाभि स्थान पर रखे गए गड्ढे या दीपक में दूध, दही, गंगाजल, शहद और बताशे आदि डालकर पूजा करें।
  • इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करते रहें।

अन्नकूट और भोग

  • इस दिन अन्नकूट (कई प्रकार के अनाज और सब्जियों से बना भोग) विशेष रूप से बनाया जाता है। आप अपनी सामर्थ्य अनुसार 56 भोग या कई तरह के व्यंजन (Dishes) बनाकर गोवर्धन जी को अर्पित करें।
  • गोवर्धन पूजा में कढ़ी-चावल का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है।

गौ माता का पूजन

  • गोवर्धन पूजा में गायों की पूजा का विशेष महत्व है। उन्हें स्नान कराएं, सजाएँ (माला, रोली लगाएं) और उन्हें घास या भोजन कराकर आशीर्वाद लें। गौ माता को देवी लक्ष्मी (Devi Lakshmi) का स्वरूप माना गया है।

परिक्रमा और आरती

  • पूजा के बाद गोवर्धन जी की सात परिक्रमाएं (Parikrama) लगाएं।
  • परिक्रमा करते समय एक व्यक्ति हाथ में जल का लोटा लेकर जल की धारा गिराता हुआ चले, और दूसरा व्यक्ति जौ या अन्न बोते हुए परिक्रमा पूरी करे।
  • परिक्रमा के दौरान गोवर्धन महाराज के जयकारे लगाए जाते हैं।
  • अंत में, भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज की आरती करें।
  • पूजा के बाद नाभि में अर्पित किया गया दूध-दही वाला प्रसाद और अन्य भोग सभी लोगों में वितरित (Distribute) करें।

गोवर्धन पूजा का महा-मंत्र (Govardhan Puja Mantra)

पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है:

मंत्र – गोवर्धनधराधारगोकुलत्राणकारक।विष्णुबाहुकृतोच्छ्रायगवांकोटिप्रदोभव।।

अर्थ – हे गोवर्धन! आप पृथ्वी को धारण करने वाले हैं, गोकुल की रक्षा करने वाले हैं। भगवान विष्णु के हाथों से उठाए गए, आप हमें करोड़ों गायों का आशीर्वाद (Blessing) प्रदान करें।

गोवर्धन पूजा 2026 का महत्व (Importance of Govardhan Puja)

यह पर्व हमें तीन महत्वपूर्ण शिक्षाएं देता है:

  • प्रकृति का सम्मान – यह त्योहार हमें सिखाता है कि हमें प्रकृति (Nature), जल, जंगल और पर्वतों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि वे ही जीवन का आधार हैं।
  • गौ-सेवा – गाय को माता का दर्जा दिया गया है। इस दिन गौ-सेवा (Cow Service) करने से धन-धान्य, वंश और शौर्य की वृद्धि होती है, और आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।
  • अहंकार से मुक्ति – यह पर्व बताता है कि अहंकार (Ego) चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका पतन निश्चित है। इंद्र के अभिमान को भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन लीला से तोड़ा था।

Found a Mistake or Error? Report it Now

Join WhatsApp Channel Download App