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तमिल हनुमान जयंती 2025 – मार्गशीर्ष अमावस्या पर बजरंगबली की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व।

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सनातन धर्म में हनुमान जी की भक्ति का अपना ही एक विशेष स्थान है। वैसे तो देश के अधिकांश हिस्सों में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है, लेकिन दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में, इसे ‘हनुमत जयंती’ के रूप में मार्गशीर्ष माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2025 में तमिल हनुमान जयंती का यह पावन पर्व 19 दिसंबर को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं इस दिन का धार्मिक महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि।

तमिल हनुमान जयंती का विशेष महत्व

तमिल कैलेंडर के अनुसार, हनुमान जी का जन्म मार्गशीर्ष (Marghazhi) माह की मूल नक्षत्र और अमावस्या तिथि के संयोग में हुआ था। मान्यता है कि इस दिन बजरंगबली की आराधना करने से भक्तों को शनि दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं।

चूंकि हनुमान जी को ‘संकटमोचन’ कहा जाता है, इसलिए दक्षिण भारत में इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत और साहस के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

तमिल हनुमान जयंती वर्ष 2025 – तिथि और शुभ मुहूर्त

साल 2025 में अमावस्या तिथि और मूल नक्षत्र का संयोग दिसंबर के मध्य में बन रहा है।

  • दिनांक – 19 दिसंबर 2025, शुक्रवार
  • अमावस्या तिथि प्रारंभ – 18 दिसंबर 2025, रात 09:30 बजे से
  • अमावस्या तिथि समाप्त – 19 दिसंबर 2025, रात 11:15 बजे तक
  • मूल नक्षत्र – 19 दिसंबर को पूरे दिन प्रभावी
  • नोट – उदया तिथि के अनुसार, 19 दिसंबर को ही व्रत और पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा।

तमिल हनुमान जयंती पूजा की विशेष विधि

तमिल हनुमान जयंती पर पूजा की पद्धति थोड़ी विशिष्ट होती है। यहाँ मुख्य चरण दिए गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो पीले या लाल) धारण करें।
  • भगवान हनुमान के सामने हाथ जोड़कर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
  • हनुमान जी की प्रतिमा को गंगाजल या पंचामृत से स्नान कराएं।
  • दक्षिण भारत में हनुमान जी को ‘वड़ा माला’ (उड़द की दाल के बड़ों की माला) चढ़ाने की विशेष परंपरा है। माना जाता है कि इससे राहु-केतु के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं।
  • हनुमान जी को चमेली के तेल के साथ सिंदूर अर्पित करें।
  • उन्हें मक्खन, फल और विशेष रूप से ‘पंजमिरथम’ (पंचामृत का एक रूप) का भोग लगाएं।
  • हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या ‘सुंदरकांड’ का पाठ अवश्य करें।

शनि दोष से मुक्ति का अचूक उपाय

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए तमिल हनुमान जयंती का दिन वरदान के समान है। इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और कष्टों को कम करते हैं।

  • विशेष उपाय – इस दिन हनुमान जी को तुलसी की माला अर्पित करें और तिल के तेल का दीपक जलाएं।

इस दिन क्या न करें?

  • तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस) का सेवन बिल्कुल न करें।
  • घर में क्लेश या वाद-विवाद से बचें।
  • किसी भी गरीब या असहाय व्यक्ति का अपमान न करें।

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