थाई अमावसाई 2026 – क्या आप जीवन में अकारण बाधाओं का सामना कर रहे हैं? क्या कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता हाथ से फिसल जाती है? अगर हाँ, तो 18 जनवरी 2026 (रविवार) की तारीख अपनी डायरी में नोट कर लीजिए। यह दिन सामान्य नहीं है, यह पवित्र ‘थाई अमावसाई’ (Thai Amavasai) का दिन है। दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु की संस्कृति में इसे “पितृ मोक्ष” का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है, लेकिन इसका आध्यात्मिक महत्व पूरे भारत के लिए एक समान है।
यह साल की वह पहली अमावस्या है जो उत्तरायण (सूर्य के उत्तर दिशा में गमन) के बाद आती है। मान्यता है कि इस दिन हमारे पूर्वज पृथ्वी के सबसे करीब होते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देने के लिए तत्पर रहते हैं। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व और वे 5 जादुई उपाय जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं।
क्यों इतनी खास है थाई अमावसाई 2026?
तमिल कैलेंडर के अनुसार ‘थाई’ महीना नई शुरुआत और शुभता का प्रतीक है। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है (मकर संक्रांति के बाद), तो देवताओं का दिन शुरू होता है। इस पवित्र काल में पड़ने वाली अमावस्या को ‘थाई अमावसाई’ कहा जाता है।
कहा जाता है कि इस दिन किया गया तर्पण और दान सीधे पूर्वजों (पितरों) तक पहुँचता है। यदि किसी की कुंडली में पितृ दोष है, विवाह में देरी हो रही है, या घर में क्लेश रहता है, तो इस दिन किए गए उपाय “रामबाण” की तरह काम करते हैं।
थाई अमावसाई 2026 – तिथि और मुहूर्त
- तारीख – 18 जनवरी 2026, रविवार
- अमावस्या तिथि आरंभ – 18 जनवरी, प्रातः 12:03 बजे से
- अमावस्या तिथि समाप्त – 19 जनवरी, प्रातः 01:21 बजे तक
- विशेष योग – रविवार का दिन होने के कारण सूर्य देव (जो आत्मा और पिता के कारक हैं) की पूजा का फल दोगुना हो जाएगा।
थाई अमावसाई पर करें ये 5 विशेष उपाय (चमत्कारी टोटके)
अगर आप पितृ दोष से मुक्ति और जीवन में सुख-शांति चाहते हैं, तो 18 जनवरी 2026 को ये 5 उपाय जरूर करें:
1. “तिल तर्पण” – पूर्वजों की तृप्ति के लिए
यह सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। थाई अमावस्या पर पवित्र नदी (जैसे रामेश्वरम, कावेरी या गंगा) में स्नान का महत्व है। यदि आप नदी पर नहीं जा सकते, तो घर पर ही यह करें:
- नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और काले तिल मिलाएं।
- दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पूर्वजों का आवाहन करें।
- हाथ में जल और काले तिल लेकर “ॐ पितृ देवाय नमः” कहते हुए अंगूठे के माध्यम से जल अर्पण करें।
- लाभ – इससे पितृ तृप्त होते हैं और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
2. कौवों और गाय को विशेष भोग
शास्त्रों में अमावस्या के दिन जीवों की सेवा को ईश्वर सेवा माना गया है।
- इस दिन घर में बना ताज़ा भोजन सबसे पहले कौवों (Crows) को खिलाएं। मान्यता है कि कौवों के रूप में पितृ भोजन ग्रहण करते हैं।
- इसके बाद, गौमाता को हरा चारा या गुड़-रोटी खिलाएं।
- लाभ – यह उपाय आर्थिक संकट को दूर करता है और घर से नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को बाहर निकालता है।
3. पीपल के नीचे दीपक जलाएं (शनि और पितृ शांति)
रविवार और अमावस्या का संयोग बहुत शक्तिशाली होता है।
- शाम के समय (सूर्यास्त के बाद) पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- दीपक में थोड़ी सी खड़ी काली उड़द डाल दें।
- पीपल की 7 परिक्रमा करें और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
- लाभ – इससे शनि दोष शांत होता है और रुकी हुई तरक्की (Career Growth) फिर से शुरू हो जाती है।
4. “अन्नदान” – महादान
थाई अमावसाई पर भूखे को भोजन कराने से बड़ा कोई पुण्य नहीं है।
- किसी अनाथालय, वृद्धाश्रम या मंदिर के बाहर बैठे गरीबों को भोजन का पैकेट बांटें।
- कोशिश करें कि भोजन में चावल और दाल जरूर हो।
- लाभ – अन्नदान से आपके घर के भंडार हमेशा भरे रहते हैं और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
5. सूर्य देव को अर्घ्य (किस्मत चमकाने वाला उपाय)
चूंकि 2026 की यह अमावस्या रविवार को है, इसलिए सूर्य देव की उपासना अनिवार्य है।
- तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, थोड़ा सा गुड़ और काले तिल डालें।
- सूर्य देव को अर्घ्य देते हुए “ॐ घृणि सूर्याय नमः” का जाप करें।
- लाभ – यह उपाय आपके मान-सम्मान में वृद्धि करता है और सरकारी कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करता है।
पितृ दोष के लक्षण – क्या आपको भी ये उपाय करने चाहिए?
कैसे पहचानें कि आप पितृ दोष से पीड़ित हैं? अगर आपके साथ नीचे दी गई घटनाएं बार-बार हो रही हैं, तो थाई अमावसाई आपके लिए सुनहरा मौका है:
- घर में बिना बात के झगड़े होना।
- कमाई अच्छी होने के बाद भी पैसे का न टिकना।
- संतान सुख में बाधा या बच्चों का बार-बार बीमार पड़ना।
- मांगलिक कार्यों (जैसे शादी) में बार-बार रुकावट आना।
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