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विषु कानी की पौराणिक कथा

Vishu Kani Katha Hindi

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केरल के प्रमुख पर्व विषु (Vishu) के अवसर पर ‘विषु कानी’ (Vishu Kani) देखने की परंपरा है। ‘कानी’ का अर्थ होता है ‘वह जो सबसे पहले देखा जाए’। यह त्योहार मलयाली नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। यहाँ विषु कानी से जुड़ी पौराणिक कथा और उसका महत्व विस्तार से दिया गया है:

|| विषु कानी की पौराणिक कथा ||

विषु पर्व से मुख्य रूप से दो कथाएँ जुड़ी हुई हैं, जो बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाती हैं:

भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर का वध

सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था। नरकासुर ने अपनी शक्तियों से देवताओं और मनुष्यों को प्रताड़ित कर रखा था। जब श्रीकृष्ण ने उसका संहार किया, तो चारों ओर खुशी की लहर दौड़ गई। इसी जीत और नई शुरुआत की खुशी में विषु मनाया जाता है। ‘कानी’ सजाकर लोग श्रीकृष्ण के प्रति अपना आभार प्रकट करते हैं।

रावण और सूर्य देव की कथा

एक अन्य मान्यता रामायण काल से जुड़ी है। कहा जाता है कि राक्षस राज रावण ने सूर्य देव को इतना डरा दिया था कि वे दक्षिण दिशा से सीधे उदय नहीं हो पाते थे। रावण की मृत्यु के बाद, इसी दिन सूर्य देव ने पुनः पूर्व दिशा से उदय होना शुरू किया था। इसी प्राकृतिक संतुलन और प्रकाश की वापसी के उपलक्ष्य में लोग सूर्य देव और विष्णु जी की पूजा करते हैं।

|| विषु कानी सजाने की विधि ||

विषु के दिन सुबह उठते ही सबसे पहले ‘कानी’ के दर्शन किए जाते हैं। इसे घर की सबसे बुजुर्ग महिला एक रात पहले ही तैयार कर देती है। इसमें निम्नलिखित वस्तुएं रखी जाती हैं:

  • भगवान कृष्ण की मूर्ति – केंद्र में श्रीकृष्ण की प्रतिमा रखी जाती है।
  • कनी कोन्ना (Kanikkonna) – अमलतास के सुनहरे पीले फूल, जो इस मौसम में खिलते हैं।
  • अक्षत और अनाज – चावल और अन्य अनाज खुशहाली के प्रतीक हैं।
  • फल और सब्जियां – ककड़ी (Vellari), आम, कटहल और नारियल।
  • धातु और धन – सोने के सिक्के, रुपए और एक दर्पण (Valkkannadi)।
  • दीपक – ‘निलविलक्कू’ (पारंपरिक दीया) जलाया जाता है।

परंपरा – ‘कानी कानल’

परिवार के सदस्य अपनी आँखें बंद करके ‘कानी’ के सामने आते हैं और सबसे पहले भगवान के दर्शन और इन शुभ वस्तुओं को देखते हैं। माना जाता है कि यदि वर्ष का पहला दिन इन समृद्ध वस्तुओं को देखकर शुरू हो, तो पूरा साल सुख-समृद्धि से बीतता है।

इसके बाद बड़े बुजुर्ग बच्चों को ‘विषु कैनीट्टम’ (Vishu Kaineettam) यानी उपहार या पैसे देते हैं।

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