|| आरती ||
ॐ जय वामन देवा, हरि जय वामन देवा
बलि राजा के द्वारे, बलि राजा के द्वारे
सन्त करे सेवा,
|| ॐ जय वामन देवा…||
वामन रूप अनुपम छत्र दंड शोभा,
हरि छत्र दंड शोभा
तिलक भाल की मनोहर भक्तन मन मोहा
|| ॐ जय वामन देवा…||
आगम निगम पुराण बतावे, मुख मंडल शोभा,
हरि मुख मंडल शोभा
करनन कुंडल भूषण,
करनन कुंडल भूषण, पार पड़े सेवा
|| ॐ जय वामन देवा…||
परम कृपाला जाके भूमी तीन पड़ा,
हरि भूमी तीन पड़ा
तीन पाव है, कोई तीन पाव है कोई बलि अभिमान खड़ा
|| ॐ जय वामन देवा…||
प्रथम पाद रखे ब्रह्मा लोक में दुजो धार धरा,
हरि दुजो धार धरा
तृतीय पाद मस्तक पे,
तृतीय पाद मस्तक पे, बलि अभिमान खड़ा
|| ॐ जय वामन देवा…||
रूप त्रिविक्रम हरे, जो सुख में गावे,
हरि जो चित्त से गावे
सुख सम्पत्ति नाना विध,
सुख सम्पत्ति नाना विध, हरि जी से पावे
ॐ जय वामन देवा, ॐ जय वामन देवा
|| हरि, जय वामन देवा…||
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