Shri Vishnu

पापों के नाश और आरोग्य प्राप्ति के लिए आमलकी एकादशी पर जरूर करें ये 5 काम।

Shri VishnuHindu Gyan (हिन्दू ज्ञान)हिन्दी
Share This

Join HinduNidhi WhatsApp Channel

Stay updated with the latest Hindu Text, updates, and exclusive content. Join our WhatsApp channel now!

Join Now

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली आमलकी एकादशी (जिसे रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है) का स्थान सबसे ऊपर माना जाता है। यह दिन न केवल भगवान विष्णु की कृपा पाने का है, बल्कि उत्तम स्वास्थ्य और पुराने पापों से मुक्ति का भी एक महापर्व है।

माना जाता है कि इस दिन आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति हुई थी, जिसमें स्वयं भगवान विष्णु का वास होता है। यदि आप भी जीवन में बीमारियों से परेशान हैं या मानसिक शांति की तलाश में हैं, तो इस आमलकी एकादशी पर ये 5 विशेष कार्य आपकी पूरी किस्मत बदल सकते हैं।

आंवले के वृक्ष का पूजन और परिक्रमा

शास्त्रों के अनुसार, आमलकी एकादशी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भगवान विष्णु का पूजन करना अश्वमेध यज्ञ के समान फल देता है।

  • कैसे करें – पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें, रोली-अक्षत लगाएँ और धूप-दीप दिखाएँ।
  • फल – ऐसा करने से कुंडली के दोष शांत होते हैं और पूर्व जन्म के संचित पापों का नाश होता है।

भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करना

इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु को ताजे आंवले का भोग जरूर लगाना चाहिए। यदि ताजा फल न मिले, तो सूखे आंवले का उपयोग भी किया जा सकता है।

  • महत्व – विष्णु पुराण के अनुसार, आंवला भगवान को अत्यंत प्रिय है। इसे अर्पित करने से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

आरोग्य प्राप्ति के लिए आंवले के जल से स्नान

यदि आप लंबे समय से किसी शारीरिक व्याधि या बीमारी से जूझ रहे हैं, तो आमलकी एकादशी का यह उपाय आपके लिए रामबाण सिद्ध हो सकता है।

  • विधि – स्नान के पानी में आंवले का रस या थोड़े से सूखे आंवले डालकर स्नान करें।
  • लाभ – इसे “आरोग्य स्नान” कहा जाता है। यह न केवल शरीर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है, बल्कि त्वचा और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

आंवले का दान (महादान)

हिंदू धर्म में दान का महत्व सर्वोपरि है, और एकादशी पर किया गया दान अक्षय फल देता है।

  • किसे दें – किसी ब्राह्मण, जरूरतमंद या मंदिर में आंवले के फल का दान करें।
  • फल – यह कार्य आपके वर्तमान जीवन के कष्टों को कम करता है और पितरों को भी शांति प्रदान करता है।

रात्रि जागरण और विष्णु सहस्रनाम का पाठ

एकादशी की रात सोना वर्जित माना गया है। इस रात को ‘जागरण की रात’ कहा जाता है।

  • क्या करें – रात्रि के समय भगवान विष्णु के भजनों का गायन करें या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • विशेष – यदि आप आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं, तो इस रात कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत शुभ होता है।

Found a Mistake or Error? Report it Now

Join WhatsApp Channel Download App