हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। भगवान विष्णु को समर्पित यह तिथि अत्यंत पवित्र होती है। एकादशी के दिन विधि-विधान से पूजा करने के बाद एकादशी माता की आरती गाना अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। आरती के स्वर न केवल मन को शांति प्रदान करते हैं, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और पुण्य का संचार भी करते हैं। जो भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ माता की आरती गाते हैं, उनकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यदि आप शुद्ध और स्पष्ट पाठ के लिए आरती की प्रति ढूंढ रहे हैं, तो आप Ekadashi Mata Aarti PDF हमारी वेबसाइट से डाउनलोड करें और अपनी पूजा को भक्तिमय बनाएं।
एकादशी माता आरती PDF एक डिजिटल दस्तावेज़ है जिसमें एकादशी माता की पारंपरिक आरती शामिल है। यह आरती ‘ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता’ से शुरू होती है और भगवान विष्णु को समर्पित इस पवित्र तिथि के माहात्म्य का वर्णन करती है। इस आरती में वर्ष भर आने वाली विभिन्न एकादशियों – जैसे उत्पन्ना, मोक्षदा, सफला, निर्जला आदि – के नामों का उल्लेख है। PDF प्रारूप भक्तों के लिए आरती को आसानी से डाउनलोड करने, प्रिंट करने और पूजा के दौरान पढ़ने की सुविधा प्रदान करता है। इसे भक्ति और मुक्ति प्रदान करने वाला माना जाता है, जो एकादशी व्रत के पालन के साथ गाया जाता है।
|| एकादशी माता आरती (Ekadashi Mata Aarti PDF) ||
ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥
ॐ जय एकादशी…॥
तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥
ॐ जय एकादशी…॥
पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥
ॐ जय एकादशी…॥
नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥
ॐ जय एकादशी…॥
विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥
ॐ जय एकादशी…॥
चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥
ॐ जय एकादशी…॥
शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥
ॐ जय एकादशी…॥
योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥
कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥
ॐ जय एकादशी…॥
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥
ॐ जय एकादशी…॥
पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥
ॐ जय एकादशी…॥
देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥
ॐ जय एकादशी…॥
परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥
जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥
ॐ जय एकादशी…॥
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