हर व्यक्ति अपने जीवन में सुख-समृद्धि और वैभव चाहता है। धन की देवी लक्ष्मी की कृपा के बिना यह संभव नहीं है, लेकिन धन के संरक्षक और कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर की कृपा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कुबेर देव को प्रसन्न किए बिना लक्ष्मीजी की कृपा स्थायी नहीं होती। यही कारण है कि कुबेर देव की पूजा, मंत्र और व्रत का विशेष महत्व है। इस ब्लॉग में हम आपको कुबेर देव को प्रसन्न करने के सबसे प्रभावशाली तरीके – कुबेर मंत्र और व्रत के बारे में विस्तार से बताएंगे।
कौन हैं भगवान कुबेर?
भगवान कुबेर, जिन्हें ‘धनाध्यक्ष’ भी कहा जाता है, देवताओं के कोषाध्यक्ष और धन के अधिपति हैं। वे उत्तर दिशा के दिक्पाल भी हैं। कुबेर देव का संबंध यक्ष जाति से है और वे भगवान शिव के परम भक्त हैं। उनकी पूजा करने से धन-धान्य की कमी दूर होती है और व्यक्ति के जीवन में स्थिरता और समृद्धि आती है।
कुबेर मंत्र – धन प्राप्ति का सबसे शक्तिशाली उपाय
कुबेर मंत्रों का जाप धन-समृद्धि और व्यापार में सफलता पाने का एक अत्यंत प्रभावी तरीका माना जाता है। मंत्र जाप से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और धन प्राप्ति के नए रास्ते खुलते हैं।
कुबेर का मूल मंत्र (सबसे शक्तिशाली)
यह कुबेर जी का सबसे प्रभावी और प्रचलित मंत्र है। ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये, धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
मंत्र का अर्थ: हम कुबेर देव को प्रणाम करते हैं, जो यक्षों के राजा हैं और वैश्रवण के पुत्र हैं। आप धन और धान्य के स्वामी हैं। कृपा करके हमें धन और धान्य की समृद्धि प्रदान करें।
जाप की विधि
- इस मंत्र का जाप किसी भी दिन शुरू किया जा सकता है, लेकिन धनतेरस, दीपावली या शुक्रवार से शुरू करना विशेष फलदायी होता है।
- सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर, उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- अपने सामने कुबेर यंत्र या भगवान कुबेर की तस्वीर रखें।
- रुद्राक्ष या कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
- जाप के बाद कुबेर देव से अपनी आर्थिक परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करें।
अष्ट लक्ष्मी कुबेर मंत्र
यह मंत्र लक्ष्मी जी और कुबेर जी दोनों की कृपा प्राप्त करने के लिए होता है। ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय नमः॥
जाप की विधि
- यह मंत्र विशेष रूप से शुक्रवार को जपना चाहिए।
- लाल वस्त्र पहनकर, उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- यह मंत्र जाप करने से व्यापार में उन्नति और धन के आगमन में वृद्धि होती है।
कुबेर व्रत – धन-समृद्धि और वैभव की प्राप्ति
कुबेर व्रत, विशेष रूप से दीपावली के बाद आने वाली कुबेर त्रयोदशी या शुक्रवार को किया जाता है। इस व्रत को करने से व्यक्ति के आर्थिक कष्ट दूर होते हैं और धन संचय में वृद्धि होती है।
व्रत की विधि
- यह व्रत शुक्रवार के दिन या किसी भी शुभ मुहूर्त में शुरू किया जा सकता है।
- व्रत के दिन निराहार या फलाहार रहकर उपवास करें।
- सुबह स्नान के बाद, पूजा स्थान पर उत्तर दिशा में भगवान कुबेर की तस्वीर या यंत्र स्थापित करें।
- पूजन सामग्री – कुबेर जी को पीले फूल, अक्षत, धूप, दीप, और पीले रंग की मिठाई अर्पित करें।
- पूजा के दौरान कुबेर मंत्र का 108 बार जाप करें। कुबेर देव की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
- शाम को आरती के बाद, कुबेर जी को चढ़ाए गए भोग को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
कुबेर मंत्र और व्रत के अद्भुत लाभ
- आर्थिक स्थिरता – इन मंत्रों और व्रत से धन की बचत होती है और व्यर्थ के खर्चे रुक जाते हैं।
- व्यापार में सफलता – कुबेर जी की कृपा से व्यापार में तरक्की होती है और नए अवसर मिलते हैं।
- ऋण मुक्ति – अगर आप कर्ज से परेशान हैं, तो कुबेर मंत्र का जाप आपको उससे मुक्ति दिलाने में मदद करता है।
- सकारात्मक ऊर्जा – मंत्र जाप से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मकता दूर होती है।
- संपत्ति में वृद्धि – कुबेर जी की पूजा करने से व्यक्ति की संपत्ति और धन-धान्य में वृद्धि होती है।
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