देवी भुवनेश्वरी सहस्रनामावली

देवी भुवनेश्वरी सहस्रनामावली, देवी भुवनेश्वरी के हजारों नामों का एक संग्रह है, जो उनकी महिमा और विविध रूपों का गुणगान करता है। यह नामावली भक्तों को देवी के दिव्य गुणों और शक्तियों को समझने में सहायता करती है। इसके पाठ से आध्यात्मिक शांति, समृद्धि और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। जो भक्त देवी भुवनेश्वरी…

Vishnu Puran (विष्णु पुराण)

Vishnu Puran (विष्णु पुराण)

विष्णु पुराण (Vishnu Puran) हिंदू धर्म के प्रमुख अट्ठारह महापुराणों में से एक है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। यह पुराण भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों, ब्रह्मांड की उत्पत्ति और प्रलय, देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों और प्राचीन राजवंशों का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है। इसमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – इन चारों पुरुषार्थों का सारगर्भित…

अमोघ शिव कवच

अमोघ शिव कवच भगवान शिव का एक अत्यंत शक्तिशाली और गोपनीय स्तोत्र है, जिसे ‘अमोघ’ कहा गया है क्योंकि इसका पाठ कभी निष्फल नहीं होता। यह कवच भक्तों को हर प्रकार के भय, रोग, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा प्रदान करता है। माना जाता है कि इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति के…

श्री शिव सहस्रनामावली

श्री शिव सहस्रनामावली भगवान शिव के हजार पवित्र नामों का संग्रह है, जो उनकी अनंत शक्तियों, दिव्य स्वरूपों और महिमा का वर्णन करता है। भगवान शिव, जिन्हें महादेव, भोलेनाथ और आदियोगी के नाम से भी जाना जाता है, सृष्टि के संहारक और पुनर्निर्माण के देवता हैं। इस सहस्रनामावली का पाठ करने से भगवान शिव की…

रुद्रयामल भगवान शिव सहस्रनामावली

रुद्रयामल तंत्र भगवान शिव की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन करने वाला एक अद्वितीय ग्रंथ है। इस ग्रंथ में शिव सहस्रनामावली भगवान शिव के एक हजार दिव्य नामों का संग्रह है, जो उनके विभिन्न स्वरूपों, शक्तियों और गुणों को प्रकट करते हैं। यह सहस्रनामावली शिव की अनंत कृपा, उनकी भौतिक और आध्यात्मिक महिमा को व्यक्त करती…

श्री शिव अष्टोत्तरशतनामावली

श्री शिव अष्टोत्तरशतनामावली PDF आपको भगवान शिव के 108 पवित्र नामों का एक दिव्य संग्रह प्रदान करती है। यह नामावली महादेव की महिमा और उनके विभिन्न रूपों का सुंदर वर्णन करती है। प्रत्येक नाम शिव के एक विशेष गुण, शक्ति या पहलू को दर्शाता है, जैसे “ॐ शिवाय नमः”, “ॐ महेश्वराय नमः”, और “ॐ शम्भवे…

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम्

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् भगवान शिव को समर्पित एक चमत्कारी स्तोत्र है, जिसका पाठ आर्थिक संकट, कर्ज और दरिद्रता को दूर करने में अत्यंत प्रभावी माना गया है। यह स्तोत्र भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सरल और शक्तिशाली माध्यम है। जो भक्त नियमित रूप से दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् PDF का पाठ करते…

श्री दामोदर स्तोत्रम्

श्री दामोदर स्तोत्रम् भगवान श्रीकृष्ण के दामोदर स्वरूप की भक्ति और स्तुति का एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। यह स्तोत्र यशोदा माता द्वारा भगवान को ऊखल से बांधने की लीला का स्मरण कराता है, जो प्रेम और भक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक है। इस स्तोत्र का नित्य पाठ भक्तों को पापों से मुक्ति दिलाता है…

श्री दामोदर अष्टोत्तरशतनामावलि

श्री दामोदर अष्टोत्तरशतनामावलिः भगवान श्रीकृष्ण के “दामोदर” स्वरूप के 108 दिव्य नामों का संकलन है, जिनका जाप भक्तजन श्रावण मास, कार्तिक मास और विशेष रूप से दामोदर द्वादशी के दिन करते हैं। ये नाम भगवान के अनंत गुणों, लीलाओं और करुणा का गुणगान करते हैं। “श्री दामोदर अष्टोत्तरशतनामावलिः PDF” में इन सभी नामों को शुद्ध…

श्री गणेश हृदयम्

गणेश हृदयम् भगवान गणेश के हृदय स्वरूप का गुणगान करने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली और गूढ़ स्तोत्र है। यह स्तोत्र साधकों को आध्यात्मिक शक्ति, बुद्धि, समृद्धि और विघ्न-विनाशक कृपा प्रदान करता है। गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, और इस स्तोत्र का पाठ सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है। जो…

भगवान गणेश गकार सहस्रनामावली

भगवान गणेश गकार सहस्रनामावली उन भक्तों के लिए एक अद्वितीय संग्रह है जो ‘ग’ अक्षर से प्रारंभ होने वाले भगवान गणेश के एक हजार पवित्र नामों का जाप करना चाहते हैं। यह नामावली गणेश जी के उन विशिष्ट गुणों और रूपों को उजागर करती है जो ‘ग’ वर्ण से जुड़े हैं, जैसे कि गणपति, गजानन,…

भगवान गणेश सहस्रनामावली

भगवान गणेश सहस्रनामावली PDF एक अत्यंत पूजनीय स्तोत्र है जिसमें भगवान गणेश के हजार नामों का वर्णन मिलता है। प्रत्येक नाम उनकी दिव्यता, बुद्धि, समृद्धि और विघ्नहर्ता स्वरूप को दर्शाता है। यह सहस्रनामावली पाठ करने से व्यक्ति को हर कार्य में सफलता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। जो भक्त भगवान गणेश सहस्रनामावली…

वासुदेवाष्टकम्

|| वासुदेवाष्टकम् (Vaasudev Ashtakam PDF) || ॥ अथ श्री वासुदेवाष्टकं ॥ श्रीवासुदेव सरसीरुहपाञ्चजन्यकौमोदकीभयनिवारणचक्रपाणे । श्रीवत्सवत्स सकलामयमूलनाशिन् श्रीभूपते हर हरे सकलामयं मे ॥ १॥ गोविन्द गोपसुत गोगणपाललोल गोपीजनाङ्गकमनीयनिजाङ्गसङ्ग । गोदेविवल्लभ महेश्वरमुख्यवन्द्य श्रीभूपते हर हरे सकलामयं मे ॥ २॥ नीलाळिकेश परिभूषितबर्हिबर्ह काळांबुदद्युतिकळायकळेबराभ । वीर स्वभक्तजनवत्सल नीरजाक्ष श्रीभूपते हर हरे सकलामयं मे ॥ ३॥ आनन्दरूप जनकानकपूर्वदुन्दुभ्यानन्दसागर सुधाकरसौकुमार्य ।…

श्री वराहाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्

श्री वराहाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसमें उनके 108 दिव्य नामों का वर्णन किया गया है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति, भूमि संबंधी कष्टों से राहत और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। “श्री वराहाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् pdf” डाउनलोड कर इसका…

श्री वराह कवचम्

श्री वराह कवचम् भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है। इस कवच के पाठ से नकारात्मक शक्तियों, भय, शत्रु बाधाओं और रोगों से मुक्ति मिलती है। यह साधक को सुरक्षा, समृद्धि और आत्मबल प्रदान करता है। माना जाता है कि इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति सभी प्रकार के कष्टों…

श्री वेदव्यास स्तुतिः

|| श्री वेदव्यास स्तुति PDF || व्यासं वसिष्ठनप्तारं शक्तेः पौत्रमकल्मषम् । पराशरात्मजं वन्दे शुकतातं तपोनिधिम् ॥ १ व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे । नमो वै ब्रह्मनिधये वासिष्ठाय नमो नमः ॥ २ कृष्णद्वैपायनं व्यासं सर्वलोकहिते रतम् । वेदाब्जभास्करं वन्दे शमादिनिलयं मुनिम् ॥ ३ वेदव्यासं स्वात्मरूपं सत्यसन्धं परायणम् । शान्तं जितेन्द्रियक्रोधं सशिष्यं प्रणमाम्यहम् ॥ ४ अचतुर्वदनो ब्रह्मा द्विबाहुरपरो…

श्री रघुनाथाष्टकम्

|| श्री रघुनाथाष्टकम् PDF || श्री गणेशाय नमः । शुनासीराधीशैरवनितलज्ञप्तीडितगुणं प्रकृत्याऽजं जातं तपनकुलचण्डांशुमपरम् । सिते वृद्धिं ताराधिपतिमिव यन्तं निजगृहे ससीतं सानन्दं प्रणत रघुनाथं सुरनुतम् ॥ १॥ निहन्तारं शैवं धनुरिव इवेक्षुं नृपगणे पथि ज्याकृष्टेन प्रबलभृगुवर्यस्य शमनम् । विहारं गार्हस्थ्यं तदनु भजमानं सुविमलं ससीतं सानन्दं प्रणत रघुनाथं सुरनुतम् ॥ २॥ गुरोराज्ञां नीत्वा वनमनुगतं दारसहितं ससौमित्रिं त्यक्त्वेप्सितमपि सुराणां…

एकदन्त शरणागति स्तोत्रम्

|| एकदन्त शरणागति स्तोत्रम् PDF || देवर्षय ऊचुः । सदात्मरूपं सकलादिभूतममायिनं सोऽहमचिन्त्यबोधम् । अनादिमध्यान्तविहीनमेकं तमेकदन्तं शरणं व्रजामः ॥ १॥ अनन्तचिद्रूपमयं गणेशमभेदभेदादिविहीनमाद्यम् । हृदि प्रकाशस्य धरं स्वधीस्थं तमेकदन्तं शरणं व्रजामः ॥ २॥ समाधिसंस्थं हृदि योगिनां यं प्रकाशरूपेण विभातमेतम् । सदा निरालम्बसमाधिगम्यं तमेकदन्तं शरणं व्रजामः ॥ ३॥ स्वबिम्बभावेन विलासयुक्तां प्रत्यक्षमायां विविधस्वरूपाम् । स्ववीर्यकं तत्र ददाति यो वै…

सुमङ्गल स्तोत्रम्

|| सुमङ्गल स्तोत्रम् (Sumangal Stotram Sanskrit PDF) || सुमङ्गलं मङ्गलमीश्वराय ते सुमङ्गलं मङ्गलमच्युताय ते । सुमङ्गलं मङ्गलमन्तरात्मने सुमङ्गलं मङ्गलमब्जनाभ ते ॥ सुमङ्गलं श्रीनिलयोरुवक्षसे सुमङ्गलं पद्मभवादिसेविते । सुमङ्गलं पद्मजगन्निवासिने सुमङ्गलं चाश्रितमुक्तिदायिने ॥ चाणूरदर्पघ्नसुबाहुदण्डयोः सुमङ्गलं मङ्गलमादिपूरुष । बालार्ककोटिप्रतिमाय ते विभो चक्राय दैत्येन्द्रविनाशहेतवे ॥ शङ्खाय कोटिन्दुसमानतेजसे शार्ङ्गाय रत्नोज्ज्वलदिव्यरूपिणे । खड्गाय विद्यामयविग्रहाय ते सुमङ्गलं मङ्गलमस्तु ते विभो ॥ तदावयोस्तत्त्व…

श्री भूतनाथ मानसाष्टकम्

|| श्री भूतनाथ मानसाष्टकम् (Bhoothanath Manasashtakam PDF) || श्रीविष्णुपुत्रं शिवदिव्यबालं मोक्षप्रदं दिव्यजनाभिवन्द्यम् । कैलासनाथप्रणवस्वरूपं श्रीभूतनाथं मनसा स्मरामि ॥ १ ॥ अज्ञानघोरान्धधर्मप्रदीपं प्रज्ञानदानप्रणवं कुमारम् । लक्ष्मीविलासैकनिवासरङ्गं श्रीभूतनाथं मनसा स्मरामि ॥ २ ॥ लोकैकवीरं करुणातरङ्गं सद्भक्तदृश्यं स्मरविस्मयाङ्गम् । भक्तैकलक्ष्यं स्मरसङ्गभङ्गं श्रीभूतनाथं मनसा स्मरामि ॥ ३ ॥ लक्ष्मी तव प्रौढमनोहरश्री- -सौन्दर्यसर्वस्वविलासरङ्गम् । आनन्दसम्पूर्णकटाक्षलोलं श्रीभूतनाथं मनसा स्मरामि ॥ ४…

श्री आदित्य द्वादशनामावली

|| श्री आदित्य द्वादशनामावली PDF || ओं आदित्याय नमः । ओं दिवाकराय नमः । ओं भास्कराय नमः । ओं प्रभाकराय नमः । ओं सहस्रांशवे नमः । ओं त्रिलोचनाय नमः ॥ ६ ॥ ओं हरिदश्वाय नमः । ओं विभावसवे नमः । ओं दिनकृते नमः । ओं द्वादशात्मकाय नमः । ओं त्रिमूर्तये नमः । ओं सूर्याय नमः…

आदित्य हर्षण स्तोत्रं सार्थम्

|| आदित्यहर्षणस्तोत्रं सार्थम् PDF || वैष्णवानां हरिस्त्वं शिवस्त्वं स्वयं शक्तिरूपस्त्वमेवानयस्त्वं नतेः । त्वं गणाधिकृतस्त्वं सुरेशाधिप- स्त्वं मरुत्वान्रविस्त्वं सदा स्तोचताम् ॥ १॥ त्वं सदा लोककल्याणकृन्मण्डलः तप्यमानो जगद्भूतिसिद्ध्यै नभे । राति रात्र्यै निविष्टाभमग्निं तथा द्वादशात्मन् सदाऽऽनन्दमग्नो भव ॥ २॥ जान्ममात्रेण चासक्तिग्रस्तो वयं शाम्बरीबन्धने विस्मृताश्चार्थिनः । भक्तिभावेन हीनाय जोषालयोऽ- र्कादितेयोष्णरश्मे प्रसन्नो मयि ॥ ३॥ अकृतार्थाय ब्रह्माण्डसाद्धस्तथा तायको विष्णुरूपेण…

श्री हनुमत् प्रार्थना श्लोक

|| श्री हनुमत् प्रार्थना श्लोक PDF || मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्दिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरसा नमामि।। अञ्जनानन्दनं वीरं जानकीशोकनाशनम्। कपीशमक्षहन्तारं वन्दे लङ्काभयङ्करम्।। गोष्पदीकृतवाराशिं मशकीकृतराक्षसम्। रामायणमहामालारत्नं वन्देऽनिलात्मजम्।। यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकाञ्जलिम्। बाष्पवारिपरिपूर्णलोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम्।। वन्दे वानर-नारसिंह-खगराट्-क्रोडाश्ववक्त्राञ्चितं नानालङ्करणं त्रिपञ्चनयनं देदीप्यमानं रुचाम्। हस्ताभैरसिखेटपुस्तकसुधाभाण्डं कुशाद्रीन् हलं खट्वाङ्गं फणिवृक्षधृद्दशभुजं सर्वारिगर्वापहम्।। सर्वारिष्टनिवारकं शुभकरं पिङ्गाक्षमक्षापहं सीतान्वेषणतत्परं कपिवरं कोटीन्दुसूर्यप्रभम्।…

यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं – श्लोक अर्थ सहित

॥ यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं – श्लोक ॥ यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकांजलिम् वाष्पवारिपरिपूर्णालोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम् ॥ हिंदी अर्थ: जहाँ-जहाँ भगवान श्रीराम की महिमा का गान होता है, वहाँ-वहाँ भगवान हनुमान जी हाथ जोड़े खड़े रहते हैं। उनकी आँखें प्रेमाश्रुओं से भरी होती हैं। मैं उन हनुमान जी को प्रणाम करता हूँ, जो राक्षसों का…

करारविन्देन पदारविन्दं – श्लोक अर्थ सहित

॥ करारविन्देन पदारविन्दं – श्लोक ॥ करारविन्देन पदारविन्दं मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम् । वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि ॥ हिंदी अर्थ: मैं अपने मन से उस बाल मुकुंद (भगवान कृष्ण) का स्मरण करता हूँ, जो वट वृक्ष के पत्ते पर शयन कर रहे हैं। जिनके कोमल हाथ कमल के समान हैं, जो अपने कमल समान…

उपमन्युकृत शिवस्तोत्रम्

|| उपमन्युकृत शिवस्तोत्रम् PDF || जय शङ्कर पार्वतीपते मृड शम्भो शशिखण्डमण्डन । मदनान्तक भक्तवत्सल प्रियकैलास दयासुधाम्बुधे ॥ १ ॥ सदुपायकथास्वपण्डितो हृदये दुःखशरेण खण्डितः । शशिखण्डशिखण्डमण्डनं शरणं यामि शरण्यमीश्वरम् ॥ २ ॥ महतः परितः प्रसर्पतस्तमसो दर्शनभेदिनो भिदे । दिननाथ इव स्वतेजसा हृदयव्योम्नि मनागुदेहि नः ॥ ३ ॥ न वयं तव चर्मचक्षुषा पदवीमप्युपवीक्षितुं क्षमाः । कृपयाऽभयदेन चक्षुषा…

श्री गुरु सहस्रनामावली

गुरु को आध्यात्मिक मार्गदर्शक और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। वे व्यक्ति को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। श्री गुरु सहस्रनामावली में गुरु के एक हजार नामों का वर्णन किया गया है, जो उनकी करुणा, ज्ञान, और मार्गदर्शन को दर्शाते हैं। यह सहस्रनामावली भक्त को गुरु तत्व…

श्री गुरु कवचम्

|| श्री गुरु कवचम् PDF || ॥ श्रीईश्वर उवाच ॥ श्रृणु देवि! प्रवक्ष्यामि गुह्याद्गुह्यतरं महत् । लोकोपकारकं प्रश्नं न केनापि कृतं पुरा ॥ १॥ अद्य प्रभृति कस्यापि न ख्यातं कवचं मया । देशिकाः बहवः सन्ति मन्त्रसाधनतत्पराः ॥ २॥ न तेषां जायते सिद्धिः मन्त्रैर्वा चक्रपूजनैः । गुरोर्विधानं कवचमज्ञात्वा क्रियते जपः । वृथाश्रमो भवेत् तस्य न सिद्धिर्मन्त्रपूजनैः…

गुरू ग्रह के मंत्र

|| गुरू ग्रह के मंत्र PDF || गुरू वैदिक मंत्र “ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु । यद्दीदयच्दवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्”।। गुरू तांत्रिक मंत्र || गुरु ग्रह के तांत्रिक मंत्र “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः”। गुरू एकाक्षरी बीज मंत्र || गुरु ग्रह का बीज मंत्र “ॐ बृं बृहस्पतये नम:” ।।…

श्री शीतला कवचम्

|| श्री शीतला कवचम् PDF || पार्वत्युवाच – भगवन् सर्वधर्मज्ञ सर्वशास्त्रविशारद । शीतलाकवचं ब्रूहि सर्वभूतोपकारकम् ॥ वद शीघ्रं महादेव ! कृपां कुरु ममोपरि । इति देव्याः वचो श्रुत्वा क्षणं ध्यात्वा महेश्वरः ॥ उवाच वचनं प्रीत्या तत्श‍ृणुष्व मम प्रिये । शीतलाकवचं दिव्यं श‍ृणु मत्प्राणवल्लभे ॥ ईश्वर उवाच – शीतलासारसर्वस्वं कवचं मन्त्रगर्भितम् । कवचं विना जपेत् यो…

श्री वाराही कवचम्

|| वाराही कवचम् PDF || अस्य श्रीवाराहीकवचस्य त्रिलोचन ऋषीः । अनुष्टुप्छन्दः । श्रीवाराही देवता । ॐ बीजम् । ग्लौं शक्तिः । स्वाहेति कीलकम् । मम सर्वशत्रुनाशनार्थे जपे विनियोगः ॥ ध्यानम् – ध्यात्वेन्द्र नीलवर्णाभां चन्द्रसूर्याग्नि लोचनाम् । विधिविष्णुहरेन्द्रादि मातृभैरवसेविताम् ॥ ज्वलन्मणिगणप्रोक्त मकुटामाविलम्बिताम् । अस्त्रशस्त्राणि सर्वाणि तत्तत्कार्योचितानि च ॥ एतैस्समस्तैर्विविधं बिभ्रतीं मुसलं हलम् । पात्वा हिंस्रान् हि…

शक्ति मंत्र

|| शक्ति मंत्र PDF || सर्वबाधा मुक्ति मंत्र सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो, धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः।। आदि शक्ति मंत्र आदि शक्ति, आदि शक्ति, आदि शक्ति, नमो नमो सरब शक्ति, सरब शक्ति, सरब शक्ति, नमो नमो प्रीतम भगवती, प्रीतम भगवती, प्रीतम भगवती, नमो नमो कुण्डलिनी माता शक्ति, माता शक्ति, नमो नमो || शक्ति प्राप्ति का मंत्र सृष्टिस्थितिविनाशानां…

रुद्र मंत्र

|| रुद्र मंत्र || ॐ नमो भगवते रुद्राय || रुद्र मंत्र, भगवान शिव के रौद्र रूप को समर्पित एक शक्तिशाली वैदिक मंत्र है। यह केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक उपकरण है जो भक्तों को आंतरिक शक्ति, शांति और सुरक्षा प्रदान करता है। “ॐ नमो भगवते रुद्राय” इस मंत्र का एक प्रचलित…

वैदिक मंत्र (पूर्णाहुति मंत्र, पवमान मंत्र, शिव षडाक्षरी मंत्र, स्वस्तिक मंत्र)

|| वैदिक मंत्र PDF || वैदिक मंत्र हिन्दू धर्म की आध्यात्मिक विरासत के मूल स्तंभ हैं, जो ऊर्जा, शुद्धि और दिव्यता का संचार करते हैं। पूर्णाहुति मंत्र यज्ञ की पूर्णता का प्रतीक होता है, जो देवताओं को अंतिम आहुति समर्पित करते समय बोला जाता है। यह मंत्र ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ने का माध्यम है। पवमान…

राधा मंत्र

|| राधा मंत्र PDF || राधा रानी, भक्ति और प्रेम की प्रतीक मानी जाती हैं। श्रीकृष्ण की आध्यात्मिक शक्ति और उनकी अर्धांगिनी के रूप में राधा का विशेष स्थान है। राधा जी के मंत्रों का जाप करने से मन को शांति, प्रेम में स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह मंत्र न केवल भक्त…

श्री अय्यप्प माला धारण मन्त्रम्

|| श्री अय्यप्प माला धारण मन्त्रम् PDF || ज्ञानमुद्रां शास्त्रमुद्रां गुरुमुद्रां नमाम्यहम् । वनमुद्रां शुद्धमुद्रां रुद्रमुद्रां नमाम्यहम् ॥ शान्तमुद्रां सत्यमुद्रां व्रतमुद्रां नमाम्यहम् । शबर्याश्रमसत्येन मुद्रां पातु सदापि मे ॥ गुरुदक्षिणया पूर्वं तस्यानुग्रहकारिणे । शरणागतमुद्राख्यं त्वन्मुद्रां धारयाम्यहम् ॥ चिन्मुद्रां खेचरीमुद्रां भद्रमुद्रां नमाम्यहम् । शबर्याचलमुद्रायै नमस्तुभ्यं नमो नमः ॥ व्रतमाला उद्यापन मन्त्रम् अपूर्वमचलारोह दिव्यदर्शनकारणात् । शास्त्रमुद्रात्मक देव…

देवी अपराध क्षमापन स्तोत्र हिन्दी अर्थ सहित

|| देवी अपराध क्षमापन स्तोत्र PDF || न मत्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः। न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम् ॥१॥ माँ! मैं न तो कोई मंत्र जानता हूँ, न यंत्र और न ही मुझे स्तुति का ज्ञान है….

धर्मो रक्षति रक्षित – श्लोक अर्थ सहित

|| धर्मो रक्षति रक्षित – श्लोक || धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः। तस्माद् धर्मं न त्यजामि मा नो धर्मो हतोऽवधीत्।⁠। हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: जो धर्म का नाश करता है, धर्म उसी का नाश कर देता है और जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उसकी…

काक चेष्टा, बको ध्यानं – श्लोक अर्थ सहित

|| काक चेष्टा, बको ध्यानं – श्लोक || काक चेष्टा, बको ध्यानं, स्वान निद्रा तथैव च। अल्पहारी, गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं।। हिंदी अर्थ: आइये जानें यह संस्कृत श्लोक अर्थ सहित: विद्या के लिए प्रतिबद्ध विद्यार्थी (छात्र) मे यह पांच लक्षण होने चाहिए – कौवे की तरह जानने की चेष्टा, बगुले की तरह ध्यान, कुत्ते की…

संसारकटुवृक्षस्य – श्लोक अर्थ सहित

|| संसारकटुवृक्षस्य – श्लोक || संसारकटुवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे । सुभाषितरसास्वादः सङ्गतिः सुजने जने ॥ हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: संसार के कड़वे पेड़ के दो फल होते हैं जो अमृत के समान होते हैं। एक है मधुर शब्दों का स्वाद और दूसरा सज्जन व्यक्तियों की संगति। Sansaara-katu-vrksasya dve…

श्लोकार्धेन प्रवक्ष्यामि – श्लोक अर्थ सहित

|| श्लोकार्धेन प्रवक्ष्यामि – श्लोक || श्लोकार्धेन प्रवक्ष्यामि यदुक्तं ग्रन्थकोटिभिः । परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम् ॥ हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: जो करोडो ग्रंथों में कहा है, वह मैं आधे श्लोक में कहता हूँ; दूसरों की हित करना पुण्यकारी है, दूसरों को पीड़ित करना पापकारी है। Shlokardhena pravakshyami yaduktam…

परित्राणाय साधूनां – श्लोक अर्थ सहित

|| परित्राणाय साधूनां – श्लोक || परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।। हिंदी अर्थ: श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं: साधुओं की रक्षा के लिए और दुष्कर्मियों (पाप करने वालों) का नाश करने के लिए, और धर्म की स्थापना के लिए मैं युगों-युगों में प्रकट होता हूँ। Paritranaya sadhunam…

विद्या मित्रं प्रवासेषु – श्लोक अर्थ सहित

|| विद्या मित्रं प्रवासेषु – श्लोक || विद्या मित्रं प्रवासेषु, भार्या मित्रं गृहेषु च । व्याधितस्यौषधं मित्रं, धर्मो मित्रं मृतस्य च ॥ हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: ज्ञान यात्राओं में मित्र होता है, पत्नी घर में मित्र होती है। बीमार के समय औषधि मित्र होती है, और मरते समय…

सत्यं ब्रूयात प्रियं ब्रूयात् – श्लोक अर्थ सहित

|| सत्यं ब्रूयात प्रियं ब्रूयात् – श्लोक || सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम् प्रियं च नानृतम् ब्रूयात् एष धर्मः सनातन: हिंदी अर्थ: आइये जानें यह संस्कृत श्लोक अर्थ सहित: सत्य बोलें, प्रिय बातें बोलें, पर अप्रिय सत्य नहीं बोलें। प्रिय असत्य भी न बोलें, यही सनातन धर्म है। यह श्लोक मानवीय संवाद…

आलस्यं हि मनुष्याणां – श्लोक अर्थ सहित

|| आलस्यं हि मनुष्याणां – श्लोक || आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।। हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: मनुष्यों के लिए आलस्य उनके शरीर में बसा महान शत्रु है। उद्यमी व्यक्ति के लिए परिश्रम जैसा कोई मित्र नहीं होता, क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी…

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय – श्लोक अर्थ सहित

|| वासांसि जीर्णानि यथा विहाय – श्लोक || वासांसि जीर्णानि यथा विहाय, नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णा – न्यन्यानि संयाति नवानि देही।। हिंदी अर्थ: यह श्लोक संसारिक अनुभवों को व्यक्त करने के लिए है और इसका मतलब है कि: जैसे कोई व्यक्ति पुराने और प्रयुक्त वस्त्रों को छोड़कर नए वस्त्र पहनता है, उसी…

येषां न विद्या – श्लोक अर्थ सहित

|| येषां न विद्या – श्लोक || येषां न विद्या न तपो न दानं ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः | ते मर्त्यलोके भुवि भारभूता मनुष्यरूपेण मृगश्चरन्ति || हिंदी अर्थ: आइये जानें यह संस्कृत श्लोक अर्थ सहित: जिनके पास न विद्या है, न तप, न दान, न ज्ञान, न शील, न गुण, और न…

मूर्खशिष्योपदेशेन – श्लोक अर्थ सहित

|| मूर्ख शिष्योपदेशेन – श्लोक || मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च। दुःखितैः सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति॥ हिंदी अर्थ: आइये जानें इस संस्कृत श्लोक का अर्थ हिंदी में: मूर्ख शिष्य के उपदेश देने से और दुष्ट स्त्री के साथ रहने से, संकटपूर्ण परिस्थितियों के कारण पंडित भी दुःखित हो जाता है। Murkha-sishyopadesena dushtastribharanena cha, duhkhitah samprayogena pandito pyavasidati. English Meaning:…

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