श्री इन्द्र बाईसा (Indra Baisa Aarti PDF) की आरती उनके भक्तों के लिए अपार श्रद्धा और अटूट विश्वास का प्रतीक है। खुडियाला धाम की ममतामयी माँ, श्री इन्द्र बाईसा का जीवन त्याग, तपस्या और जन-कल्याण के लिए समर्पित रहा है। उनकी आरती का नियमित गान करने से मन को असीम शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। श्रद्धालु अक्सर इस पावन आरती को सहेज कर रखना चाहते हैं ताकि वे अपनी नित्य पूजा में इसे सम्मिलित कर सकें।
यदि आप भी माँ की भक्ति में लीन होना चाहते हैं, तो “Indra Baisa Aarti PDF” हमारी वेबसाइट से डाउनलोड करें। यह पीडीएफ फाइल आपको आरती के शुद्ध पाठ और गायन में सहायता करेगी, जिससे आप कहीं भी माँ की आराधना कर सकते हैं।
|| श्री इन्द्र बाईसा की आरती (Indra Baisa Aarti PDF) ||
ॐ जय जय इन्द्राणी, माँ जय जय इन्द्राणी।
मरूधर में माँ प्रगटिया, जग सारे जाणी॥
ॐ जय जय इन्द्राणी….
सागर सुता सुलोचनी, मोचिनी दुःख माता।
धापू कोख जनमिया, धनि-धनि धनदाता ॥
ॐ जय जय इन्द्राणी….
महा शक्ति जग मानो, पुरुष प्रकृति रूपा ।
सावंल वदन सुकोमल, सेवत भव भूपा॥
ॐ जय जय इन्द्राणी….
रतनूं वंश में रोशन, आवड़ अवतारी ।
कृपा करो करूणा मयि, मो पर महतारी ॥
ॐ जय जय इन्द्राणी….
अगनित रवि शशि आभा, लखि तब मुख लाजे ।
सिर पर सोहत साफा, छवि अतुलित छाजे ॥
ॐ जय जय इन्द्राणी….
धोती कोट दुशाला, मुक्तन गल माला।
सिंहासन पर सोहत, हस्त लिए माला ॥
ॐ जय जय इन्द्राणी….
शरणागत सुख दायिनी, दया मग्री देवी।
चरण शरण तब चण्डी, सेवक पर सेवी॥
ॐ जय जय इन्द्राणी….
क्षमा करो माँ शक्ति, गुण अवगुण मेरे।
दुःखी बड़ा हूँ देवी, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जय इन्द्राणी….
गंग तिहारी गरिमा, गोरी अब गाई।
मुक्ति देहूँ मोहि माता, सुत को शरणाई॥
ॐ जय जय इन्द्राणी….
बाई इन्द्र मो विनती, सुनता निज शक्ति।
चरण कमल में चित हो, पाऊँ दूढ़ भक्ति॥
ॐ जय जय इन्द्राणी….
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