स्कन्द षष्ठी 2026, जिसे सुब्रह्मण्य षष्ठी भी कहा जाता है, भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) की आराधना का प्रमुख पर्व है। इस दिन भक्तगण उपवास रखते हैं और भगवान स्कन्द की पूजा-अर्चना करते हैं। दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में, यह उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान कार्तिकेय को युद्ध और विजय का देवता माना जाता है, और उनकी आराधना से साहस, शक्ति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिसमें श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग लेते हैं।
स्कन्द षष्ठी भगवान स्कन्द, जिन्हें कार्तिकेय और मुरुगन के नाम से भी जाना जाता है, की पूजा का विशेष पर्व है। यह षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, जो कि भगवान स्कन्द के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। स्कन्द षष्ठी का पर्व विशेष रूप से तमिलनाडु और दक्षिण भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान स्कन्द, जिन्हें भगवान मुरुगन, कार्तिकेय, या सुब्रमण्य भी कहा जाता है, युद्ध और विजय के देवता हैं। इस दिन उनके भक्त व्रत रखते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। स्कन्द षष्ठी एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) को समर्पित है।
स्कन्द षष्ठी 2026 तिथियों की सूची
2026 में स्कन्द षष्ठी के पर्व की तिथियाँ निम्नलिखित हैं:
| दिनांक | षष्ठी |
|---|---|
| जनवरी 24, 2026, शनिवार | स्कन्द षष्ठी (माघ, शुक्ल षष्ठी) |
| फरवरी 22, 2026, रविवार | स्कन्द षष्ठी (फाल्गुन, शुक्ल षष्ठी) |
| मार्च 24, 2026, मंगलवार | स्कन्द षष्ठी (चैत्र, शुक्ल षष्ठी) |
| अप्रैल 22, 2026, बुधवार | स्कन्द षष्ठी (वैशाख, शुक्ल षष्ठी) |
| मई 21, 2026, बृहस्पतिवार | स्कन्द षष्ठी (ज्येष्ठ, शुक्ल षष्ठी) |
| जून 19, 2026, शुक्रवार | स्कन्द षष्ठी (ज्येष्ठ, शुक्ल षष्ठी) |
| जुलाई 19, 2026, रविवार | स्कन्द षष्ठी (आषाढ़, शुक्ल षष्ठी) |
| अगस्त 17, 2026, सोमवार | स्कन्द षष्ठी (श्रावण, शुक्ल षष्ठी) |
| सितम्बर 16, 2026, बुधवार | स्कन्द षष्ठी (भाद्रपद, शुक्ल षष्ठी) |
| अक्टूबर 16, 2026, शुक्रवार | स्कन्द षष्ठी (आश्विन, शुक्ल षष्ठी) |
| नवम्बर 15, 2026, रविवार | स्कन्द षष्ठी (कार्तिक, शुक्ल षष्ठी) |
| दिसम्बर 15, 2026, मंगलवार | स्कन्द षष्ठी (मार्गशीर्ष, शुक्ल षष्ठी) |
स्कन्द षष्ठी 2026 का आध्यात्मिक महत्व
स्कन्द षष्ठी का पर्व भगवान स्कन्द के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। इस दिन किए गए व्रत, पूजा, और भजन से व्यक्ति के जीवन में शांति, सुख, और समृद्धि का आगमन होता है। भगवान स्कन्द की कृपा से जीवन के सभी संकटों का नाश होता है और व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक शक्ति प्राप्त होती है।
इस प्रकार, स्कन्द षष्ठी का पर्व भगवान कार्तिकेय की पूजा और आराधना का विशेष अवसर है, जो भक्तों को उनकी कृपा और आशीर्वाद से परिपूर्ण करता है। स्कन्द षष्ठी का व्रत भगवान स्कन्द की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भगवान स्कन्द को शक्ति, बुद्धि और वीरता का देवता माना जाता है।
स्कन्द षष्ठी 2026 व्रत पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करें और भगवान कार्तिकेय की बालस्वरूप प्रतिमा स्थापित करें।
- दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें।
- भगवान कार्तिकेय को चंदन, धूप, दीप, पुष्प, वस्त्र आदि अर्पित करें।
- उन्हें एक मिष्ठान का भोग लगाएं।
- आज के दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व है।
- पूजा के बाद अंत में भगवान कार्तिकेय की आरती करें।
स्कन्द षष्ठी 2026 पूजा सामग्री
- दीपक, धूपबत्ती, कपूर
- पुष्प (गुलाब, कमल, चमेली)
- नैवेद्य (फल, मिठाई, नारियल)
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- चंदन, रोली, अक्षत (चावल)
- पान, सुपारी, लौंग, इलायची
स्कन्द षष्ठी 2026 की तैयारियां
स्कन्द षष्ठी के व्रत की तैयारी एक दिन पहले से शुरू कर देनी चाहिए। घर की सफाई करनी चाहिए और पूजा स्थान को सजाना चाहिए। व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और पूजा की तैयारी करनी चाहिए।
स्कन्द षष्ठी एक महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहार है जो भगवान स्कन्द की भक्ति और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है।
स्कन्द षष्ठी के लिए निम्नलिखित तैयारियां करें:
- पहले से पूजा सामग्री खरीद लें ताकि पूजा के समय किसी वस्तु की कमी न हो।
- विशेष वस्त्र तैयार रखें जो पूजा के समय पहने जा सकें।
- भगवान स्कन्द के भजन और कीर्तन की तैयारी करें और अपने परिवार के साथ भजन संध्या का आयोजन करें।
- पूजा के लिए विशेष प्रसाद और भोग तैयार करें। सामान्यतः मिठाई और फल का प्रसाद अर्पित किया जाता है।
- पूजा स्थल को सुंदर फूलों और रंगोली से सजाएं।
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