कूष्माण्डा माता व्रत कथा पूजा विधि

कूष्माण्डा माता नवदुर्गा का चौथा स्वरूप मानी जाती हैं। इन्हें ब्रह्माण्ड की सृष्टि करने वाली आदिशक्ति कहा जाता है। मान्यता है कि अपनी मंद मुस्कान से इन्होंने ब्रह्माण्ड की रचना की, इसलिए इन्हें कूष्माण्डा कहा गया। इनके आठ हाथ होने के कारण इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। भक्त नौ दिन के नवरात्र व्रत…

सिद्धिदात्री माता व्रत कथा पूजा विधि

सिद्धिदात्री माता नवदुर्गा का नवम और अंतिम स्वरूप हैं, जो भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करती हैं। माता के दाएं हाथ में चक्र और गदा, बाएं हाथ में शंख और कमल सुशोभित होते हैं। वे कमल पुष्प पर विराजमान रहती हैं और चार भुजाओं से सभी साधकों को आशीर्वाद देती हैं। सिद्धिदात्री माता…

स्कंदमाता व्रत कथा और पूजा विधि

स्कंदमाता, नवदुर्गा का पाँचवां स्वरूप हैं जिन्हें भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता कहा जाता है। कथा के अनुसार, देवासुर संग्राम में जब असुर अत्यधिक बलवान हो गए, तब सभी देवताओं ने माँ पार्वती से प्रार्थना की। माता ने स्कंद कुमार को जन्म दिया जो देवताओं के सेनापति बने और असुरों का वध कर धर्म की…

ब्रह्मचारिणी माता व्रत कथा पूजा विधि

ब्रह्मचारिणी माता नवदुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं, जो तप, संयम और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। कथा के अनुसार जब महादेव को पति रूप में प्राप्त करने की इच्छा पार्वती जी ने की, तब उन्होंने ब्रह्माचारिणी का रूप धारण कर कठोर तप किया। उन्होंने वर्षों तक केवल फल-फूल और अंत में केवल हवा…

महागौरी माता व्रत कथा पूजा विधि

महागौरी माता नवदुर्गा का आठवां स्वरूप हैं, जिनकी उपासना से भक्त के जीवन से अज्ञान और पाप नष्ट हो जाते हैं। कथा के अनुसार, भगवान शिव को पाने के लिए पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। वर्षों तक तप कर उनका शरीर काला पड़ गया, लेकिन शिव कृपा से गंगा जल से स्नान करने पर…

शैलपुत्री माता व्रत कथा और पूजा विधि

शैलपुत्री माता नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण “शैलपुत्री” कहा जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिन इनकी पूजा का विशेष महत्व है। माता शैलपुत्री का वाहन वृषभ है और उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल रहता है। यह देवी शक्ति, भक्ति और दृढ़ संकल्प…

नवरात्र व्रताची दुर्गा कथा

श्री दुर्गा नवरात्री व्रत कथा ही देवी भगवतीच्या महिमा आणि सामर्थ्याची गाथा आहे. या कथेनुसार, महिषासुरासारख्या शक्तिशाली राक्षसाने जेव्हा तिन्ही लोकांमध्ये हाहाकार माजवला, तेव्हा त्याला हरवण्यासाठी देवतांनी एकत्रितपणे शक्तीची निर्मिती केली. हेच दुर्गा देवीचे रूप. देवीने नऊ दिवस महिषासुराशी भीषण युद्ध केले आणि दहाव्या दिवशी त्याचा वध केला, ज्यामुळे वाईटावर चांगल्याचा विजय झाला. हेच उपवास,…

श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा

श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत का महत्व सनातन धर्म में अत्यधिक है। इस व्रत में भक्त माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं। कथा के अनुसार, महिषासुर नामक राक्षस ने देवताओं को पराजित कर त्रिलोक में आतंक मचा दिया। तब देवी-देवताओं की संयुक्त शक्तियों से माँ दुर्गा का प्राकट्य हुआ। माँ ने नौ दिनों…

कात्यायनी माता व्रत कथा पूजा विधि

कात्यायनी माता नवदुर्गा का छठा स्वरूप मानी जाती हैं और विवाह, सौभाग्य एवं संतान सुख की प्राप्ति हेतु विशेष रूप से पूजी जाती हैं। कात्यायनी माता व्रत की पूजा विधि में प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और माता की मूर्ति या चित्र को गंगाजल से शुद्ध कर पुष्प, रोली, अक्षत व धूप-दीप अर्पित…

अटला तड्डी व्रत कथा

अटला तड्डी व्रत, जिसे अहोई अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, एक पारंपरिक हिंदू व्रत है जो मुख्य रूप से उत्तरी भारत में मनाया जाता है। यह व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पड़ता है। इस दिन माताएं अपनी संतानों की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा…

इंदिरा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि

इंदिरा एकादशी हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। इस व्रत को करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत…

भगवान श्री विश्वकर्मा की कथा

प्राचीन काल में देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने अपनी अद्भुत कला और वास्तुकला से देवताओं के लिए अनेक भवनों, महलों और अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है स्वर्ग लोक। उन्होंने लंका के सोने के किले का भी निर्माण किया, जिसे बाद में रावण ने छीन लिया था। इसके अलावा,…

जीवित्पुत्रिका व्रत कथा एवं पूजा विधि

जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जितिया व्रत भी कहते हैं, संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए माताओं द्वारा रखा जाने वाला एक प्रमुख हिंदू पर्व है। यह व्रत अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत में माताएं 24 घंटे से अधिक समय तक निर्जला (बिना पानी और…

ಪಿತೃ ತರ್ಪಣ ವಿಧಾನ

|| ಪಿತೃ ತರ್ಪಣಮ್ (Pitru Tarpan Vidhi Kannada PDF) || ಶುಚಿಃ – ಅಪವಿತ್ರಃ ಪವಿತ್ರೋವಾ ಸರ್ವಾವಸ್ಥಾಂ ಗತೋಽಪಿ ವಾ । ಯಃ ಸ್ಮರೇತ್ ಪುಣ್ಡರೀಕಾಕ್ಷಂ ಸ ಬಾಹ್ಯಾಭ್ಯನ್ತರಃ ಶುಚಿಃ ॥ ಪುಣ್ಡರೀಕಾಕ್ಷ ಪುಣ್ಡರೀಕಾಕ್ಷ ಪುಣ್ಡರೀಕಾಕ್ಷ ॥ ಪ್ರಾರ್ಥನಾ – ಶುಕ್ಲಾಮ್ಬರಧರಂ ವಿಷ್ಣುಂ ಶಶಿವರ್ಣಂ ಚತುರ್ಭುಜಮ್ । ಪ್ರಸನ್ನವದನಂ ಧ್ಯಾಯೇತ್ ಸರ್ವ ವಿಘ್ನೋಪಶಾನ್ತಯೇ ॥ ವಕ್ರತುಣ್ಡ ಮಹಾಕಾಯ ಕೋಟಿಸೂರ್ಯಸಮಪ್ರಭ । ನಿರ್ವಿಘ್ನಂ ಕುರು ಮೇ ದೇವ ಸರ್ವಕಾರ್ಯೇಷು ಸರ್ವದಾ ॥ ಓಂ ಶ್ರೀ ಮಹಾಗಣಾಧಿಪತಯೇ ನಮಃ…

(विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी) आश्विन संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा

आश्विन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को ‘विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी’ के नाम से जाना जाता है। यह पावन दिन भगवान गणेश को समर्पित है, जो विघ्नहर्ता और बुद्धि के दाता माने जाते हैं। 2025 में यह व्रत भक्तों के लिए विशेष फलदायी होगा। इस दिन भक्त सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखते हैं और भगवान…

सर्वपितृ अमावस्या पौराणिक कथा

|| सर्वपितृ अमावस्या पौराणिक कथा (Sarvapitri Amavasya Katha PDF) || श्राद्ध पक्ष में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व है। इसे पितरों को विदा करने की अंतिम तिथि माना जाता है। यदि किसी कारणवश व्यक्ति श्राद्ध की निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाया हो या उसे तिथि ज्ञात न हो, तो सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध…

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा और पूजा विधि

|| अनंत चतुर्दशी पूजा विधि || इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें। इसके बाद कलश पर भगवान विष्णु की तस्वीर भी लगाएं। एक धागे को कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर अनंत सूत्र बनाएं, इसमें 14 गांठें लगी होनी चाहिए। इस सूत्रो भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने रखें।…

परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि

|| परिवर्तिनी एकादशी पूजा विधि || सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें। भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। भगवान की आरती करें। अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें। भगवान को भोग लगाएं। इस…

वामन अवतार कथा तथा पूजा विधि

|| वामन जयंती पूजा विधि || इस दिन भगवान विष्णु को उनके वामन रूप में पूजा जाता है। इस दिन उपासक को सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। नित्यक्रिया के बाद स्नान और भगावन विष्णु का ध्यान कर दिन की शुरुआत करनी चाहिए। इसके बाद दिन की शुरुआत में आप वामन देव की सोने या फिर…

दूर्वा अष्टमी व्रत कथा

दूर्वा अष्टमी का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान सुख, सौभाग्य और परिवार की वृद्धि के लिए किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश और दूर्वा घास का विशेष पूजन होता है। || दूर्वा अष्टमी व्रत कथा (Durva Ashtami Vrat Katha PDF)…

ललिता सप्तमी व्रत कथा

ललिता सप्तमी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन राधा रानी की प्रिय सखी देवी ललिता की पूजा की जाती है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र व अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। इसे संतान सप्तमी के नाम…

श्री ऋषिपंचमीची कहाणी

|| श्री ऋषिपंचमीची कहाणी (Rishi Panchami Vrat Katha Marathi PDF) || ऐका ऋषीश्वरांनो तुमची कहाणी. एका आटपाट नगरात एक ब्राह्मण राहत होता. तो शेतीभाती करून सुखाने आपलं जीवन जगत होता. एके दिवशी त्याची बायको विटाळशी असतानाच घरात वावरली, विटाळाचे नियम पाळले नाहीत. या दोषाने काय झालं? तिचा नवरा पुढच्या जन्मी बैल झाला आणि त्या बाईला…

विनायक चतुर्थी व्रत कथा

|| विनायक चतुर्थी व्रत कथा (Vinayak Chaturthi Vrat Katha PDF) || विनायक चतुर्थी की व्रत कथा का वर्णन अनेक पुराणों में मिलता है, विशेषतः यह कथा भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी से जुड़ी हुई है। शिव-पार्वती का चौपड़ खेल और बालक का निर्णय एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नर्मदा नदी के…

अजा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि

अजा एकादशी व्रत कथा के अनुसार, प्राचीन काल में हरिश्चंद्र नाम के एक सत्यवादी राजा थे। कठिन परिस्थितियों के कारण उन्हें अपनी पत्नी, पुत्र और स्वयं को बेचना पड़ा। एक चांडाल के यहाँ काम करते हुए, उन्होंने अपनी दुर्दशा से मुक्ति पाने के लिए महर्षि गौतम से उपाय पूछा। महर्षि ने उन्हें अजा एकादशी व्रत…

कृष्णाच्या जन्माची कहाणी

॥ जन्माष्टमीचे व्रत कसे करावे ॥ जन्माष्टमीचे व्रत हे अष्टमीच्या दिवशी एकभुक्त राहून करावे. मध्यरात्री शुचिर्भूत होऊन संकल्प करावा. यानंतर बाळकृष्णाची मूर्ती किंवा प्रतिमा स्थापन करावी. यानंतर सपरिवार श्रीकृष्णाची षोडशोपचार पूजा करावी. धूप, दीप, नैवेद्य दाखवावा. श्रीकृष्णाची आरती करावी. पूजा करून पुरुषसूक्त, विष्णूसूक्ताचे स्तवन करावे. वाद्यांचा घोष, गीतांचे मंगल स्वर, पुराण, इतिहासातील निरनिराळ्या सत्कथा ऐकत…

श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा

श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा 2025 भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की दिव्य लीलाओं और उनके अवतरण की महिमा को दर्शाती है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाते हैं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा PDF में व्रत की सम्पूर्ण कथा, पूजन विधि और…

बहुला चतुर्थी व्रत कथा

बहुला चतुर्थी का व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए किया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण, गणेश जी और गौ माता की पूजा का विधान है। बहुला चतुर्थी व्रत कथा (Bahula Chaturthi Vrat…

कजरी तीज व्रत कथा एवं पूजन विधि

कजरी तीज व्रत कथा का पठन सुहागिन स्त्रियों के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं निराहार रहकर पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। कजरी तीज व्रत कथा PDF डाउनलोड…

हेरम्बा संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

|| हेरम्बा संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा PDF || हेरम्बा संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित है, विशेष रूप से उनके हेरम्ब स्वरूप को। हेरम्ब गणेश के 32 स्वरूपों में से एक हैं, जिनके पांच मुख और दस हाथ होते हैं। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के सभी…

रक्षाबंधन की कथा

रक्षाबंधन की कथा 2025 भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है, जिसकी जड़ें पौराणिक कथाओं में गहराई से जुड़ी हैं। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बाँधकर उनकी लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना करती हैं, वहीं भाई जीवनभर रक्षा का वचन देते हैं। रक्षाबंधन की कहानी pdf में आपको रानी कर्णावती और…

राखीची कथा – रक्षाबंधनाची गोष्ट

२०२५ साली साजऱ्या होणाऱ्या रक्षाबंधनानिमित्त, ‘राखीची कथा – रक्षाबंधनाची गोष्ट’ पुन्हा एकदा आपल्या भेटीला येत आहे. भाऊ-बहिणीच्या अतूट नात्याचा, त्यागाचा आणि प्रेमाचा हा सण. ‘राखीची कथा – रक्षाबंधनाची गोष्ट pdf’ स्वरूपात उपलब्ध असल्याने, ही हृदयस्पर्शी कथा घराघरात पोहोचणार आहे. यावर्षीच्या रक्षाबंधनाला, बहीण भावाच्या मनगटावर राखी बांधते आणि भाऊ तिच्या संरक्षणाचे वचन देतो. ही केवळ एक…

श्रावण पूर्णिमा व्रत कथा

श्रावण पूर्णिमा का व्रत भगवान सत्यनारायण को समर्पित होता है। इस दिन सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा का पाठ करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व है। श्रावण पूर्णिमा व्रत कथा (Shravan Purnima Vrat Katha PDF)…

वरलक्ष्मी व्रत कथा व पूजा विधि

वरलक्ष्मी व्रत, देवी लक्ष्मी को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जो 2025 में भी भक्तों द्वारा पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। यह व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा अपने परिवार की समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। इस दिन, भक्त देवी वरलक्ष्मी की पूजा करते हैं, जो धन,…

ವರಮಹಾಲಕ್ಷ್ಮಿ ವ್ರತ ಕಥೆ

|| ವರಮಹಾಲಕ್ಷ್ಮಿ ವ್ರತ ಕಥೆ (Varlakshmi Vrat Katha PDF Kannada) || ವರಲಕ್ಷ್ಮಿ ವ್ರತದ ದಂತಕಥೆಯನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ವಿವರಿಸಲಾಗಿದೆ. ಶ್ರಾವಣ ಮಾಸದಲ್ಲಿ ಶ್ರಾವಣ ಪೂರ್ಣಿಮೆಯ ಮೊದಲು ಬರುವ ಶುಕ್ರವಾರದಂದು ವರಲಕ್ಷ್ಮಿ ವ್ರತವನ್ನು ಆಚರಿಸಲಾಗುತ್ತದೆ. ಕುಂಡಿನ ಪಟ್ಟಣದಲ್ಲಿ ಚಾರುಮತಿ ಎಂಬ ಬ್ರಾಹ್ಮಣ ಮಹಿಳೆ ವಾಸಿಸುತ್ತಿದ್ದಳು. ಅವಳು ಅತ್ಯಂತ ವಿನಮ್ರ ಮತ್ತು ಕರುಣಾಮಯಿ ಸ್ವಭಾವದವಳಾಗಿದ್ದಳು. ಚಾರುಮತಿ ತನ್ನ ಪತಿ ಮತ್ತು ಕುಟುಂಬದವರಿಗೆ ಅತ್ಯಂತ ಭಕ್ತಿಯಿಂದ ಹತ್ತಿರವಾಗಿದ್ದಳು. ಒಂದು ರಾತ್ರಿ, ಲಕ್ಷ್ಮಿ ದೇವಿಯು ಚಾರುಮತಿಯ ಕನಸಿನಲ್ಲಿ ಕಾಣಿಸಿಕೊಂಡು, ವರಲಕ್ಷ್ಮಿಯನ್ನು ಆರಾಧಿಸಲು ಮತ್ತು…

दामोदर द्वादशी की कथा

|| दामोदर द्वादशी की कथा PDF || दामोदर द्वादशी की कथा भगवान श्री कृष्ण की बचपन की एक अत्यंत प्रिय और मार्मिक लीला से जुड़ी है। यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण में विस्तार से वर्णित है। एक समय की बात है, जब भगवान श्री कृष्ण गोकुल में बाल रूप में निवास कर रहे थे। वे अपनी…

श्री नागपंचमीची कथा

|| श्री नागपंचमीची कथा (Nagpanchami Katha Marathi PDF) || श्रावण महिन्यातील नागपंचमीच्या दिवशी, एका गावात एक शेतकरी राहायचा. त्याच्या शेतात नागाचे वारूळ होते. एके दिवशी शेतात नांगरताना, नांगराच्या फाळाने वारुळातील नागाची पिल्ले चिरडून गेली आणि ती मरण पावली. थोवेळाने नागीण वारुळाजवळ आली. आपले वारूळ आणि पिल्ले तिथे नसल्याचे पाहून तिला धक्का बसला. आजूबाजूला पाहिल्यावर तिला…

हरियाली तीज व्रत कथा

हरियाली तीज का पावन पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। हरियाली तीज व्रत कथा के अनुसार, माता पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान…

కర్క సంక్రాంతి కథా

|| కర్క సంక్రాంతి కథా (Kark Sankranti Katha Telugu PDF) || సూర్య దేవ జబ మిథున రాశి సే నికలకర కర్క రాశి మేం ప్రవేశ కరతే హైం, తో ఇస విశేష ఖగోలీయ ఘటనా కో కర్క సంక్రాంతి కహా జాతా హై. హిందూ ధర్మ మేం ఇసకా విశేష మహత్వ హై. అన్య సంక్రాంతియోం కీ తరహ, కర్క సంక్రాంతి పర భీ స్నాన, దాన ఔర పూజా-పాఠ కా విధాన…

मंगला गौरी व्रत कथा एवं पूजा विधि

मंगला गौरी व्रत कथा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की लंबी आयु और संतान प्राप्ति के लिए रखती हैं। यह व्रत विशेष रूप से मां पार्वती को समर्पित है, जिन्हें मंगला गौरी के रूप में पूजा जाता है। इस व्रत को करने…

कर्क संक्रान्ति कथा

कर्क संक्रांति का पर्व सूर्य देव के कर्क राशि में प्रवेश का प्रतीक है। यह वह समय है जब सूर्य दक्षिणायन में प्रवेश करते हैं, यानी दक्षिणी गोलार्ध की ओर अपनी यात्रा शुरू करते हैं। प्राचीन कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागृत होकर सृष्टि के संचालन का कार्यभार संभालते हैं। यह…

कृष्णापिंगला संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

जुलाई 2025 में आने वाली कृष्णापिंगला संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। यह व्रत आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भक्त चंद्रमा के उदय होने तक उपवास रखते हैं और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत के…

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व 15 मार्च 2025, शनिवार को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित है, जब भक्त उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत रखते हैं। इस व्रत कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने भी इस चतुर्थी का महत्व बताया था। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और चंद्रमा…

गजानन संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

|| गजानन संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा PDF || पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में राजा हरिश्चंद्र के राज्य में एक कुम्हार रहता था। एक बार उसने बर्तन बनाकर आंवा लगाया, लेकिन बर्तन पके नहीं। बार-बार ऐसा होने से वह बहुत दुखी हो गया। इस समस्या का समाधान जानने के लिए वह एक पुजारी के पास…

चैत्र अमावस्या व्रत कथा

|| चैत्र अमावस्या व्रत कथा PDF || चैत्र अमावस्या का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन पितरों की शांति और दान-पुण्य के लिए समर्पित है। इस दिन व्रत रखने और कथा सुनने का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं चैत्र अमावस्या व्रत कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में…

आषाढ़ अमावस्या व्रत कथा

|| आषाढ़ अमावस्या व्रत कथा PDF || प्राचीन काल में एक ब्राह्मण दंपत्ति थे, जो भगवान विष्णु के परम भक्त थे। वे अपना अधिकांश समय पूजा-पाठ और ध्यान में व्यतीत करते थे। उनके घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान न होने के कारण वे बहुत दुखी रहते थे। एक दिन ब्राह्मण…

आश्विन अमावस्या व्रत कथा

आश्विन अमावस्या, जिसे सर्वपितृ अमावस्या या महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है, पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है। यह दिन पितरों को विदा करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन व्रत कथा का पाठ करने और सुनने से पितरों को शांति मिलती है…

भाद्रपद अमावस्या व्रत कथा

|| भाद्रपद अमावस्या व्रत कथा PDF || भाद्रपद अमावस्या को पिठोरी अमावस्या या पोलाला अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखा जाता है। इस व्रत से जुड़ी एक पौराणिक कथा इस प्रकार है: बहुत समय पहले की बात है, एक नगर में…

आषाढ़ चौमासी चौदस कथा

आषाढ़ मास की चौमासी चौदस, जिसे गुप्त नवरात्रि की चौदस भी कहते हैं, एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस दिन भक्त व्रत रखकर मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि…

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