बैसाखी की मुख्य पौराणिक कथा

बैसाखी का त्यौहार सिख धर्म और उत्तर भारत के कृषि समाज के लिए अत्यधिक महत्व रखता है। यह त्यौहार मुख्य रूप से दो कारणों से मनाया जाता है – धार्मिक (खालसा पंथ की स्थापना) और कृषि (रबी की फसल की कटाई)। यहाँ बैसाखी की मुख्य पौराणिक और ऐतिहासिक कथा दी गई है: || बैसाखी की…

विषु कानी की पौराणिक कथा

केरल के प्रमुख पर्व विषु (Vishu) के अवसर पर ‘विषु कानी’ (Vishu Kani) देखने की परंपरा है। ‘कानी’ का अर्थ होता है ‘वह जो सबसे पहले देखा जाए’। यह त्योहार मलयाली नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। यहाँ विषु कानी से जुड़ी पौराणिक कथा और उसका महत्व विस्तार से दिया गया है: ||…

माँ कुब्जिका जयन्ती कथा

कुब्जिका जयन्ती (Kubjika Jayanti) मुख्य रूप से शाक्त परंपरा और कौलमार्ग के अनुयायियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। माँ कुब्जिका को ‘वक्रेश्वरी’ या ‘कुलकुण्डलिनी’ का स्वरूप माना जाता है। यहाँ माँ कुब्जिका के प्राकट्य की पौराणिक कथा विस्तार से दी गई है: || माँ कुब्जिका जयन्ती कथा || पौराणिक मान्यताओं और आगम शास्त्रों के…

पुथन्डू की पौराणिक कथा

पुथन्डू (Puthandu), जिसे तमिल नव वर्ष भी कहा जाता है, तमिल कैलेंडर के पहले महीने ‘चित्तिरै’ (Chithirai) के पहले दिन मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन का संबंध सृष्टि की रचना और समय के चक्र से है। यहाँ पुथन्डू की पौराणिक कथा और इसका महत्व विस्तार से दिया गया है: || पुथन्डू की…

सौर नववर्ष की पौराणिक कथा

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में सोलर नववर्ष (सौर नववर्ष) का बहुत महत्व है। यह वह दिन होता है जब सूर्य देव अपनी राशि बदलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ‘मेष संक्रांति’ भी कहा जाता है। उत्तर भारत में इसे वैशाखी, बंगाल में पोइला बैशाख और दक्षिण में विशु या पुथांडु के नाम…

मेष संक्रान्ति की पौराणिक कथा

मेष संक्रान्ति, जिसे भारत के कई हिस्सों में सत्तू संक्रान्ति या जुड़ शीतल के रूप में भी मनाया जाता है, सौर नववर्ष का आरंभ माना जाता है। इस दिन सूर्य मीन राशि को त्यागकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। यहाँ मेष संक्रान्ति की पौराणिक कथा और महत्व का विवरण दिया गया है: || मेष…

श्री वल्लभाचार्य प्राकट्य कथा (वल्लभाचार्य जयंती कथा)

वल्लभाचार्य जयंती (जिसे वरुथिनी एकादशी के दिन मनाया जाता है) पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक और शुद्धद्वैत दर्शन के प्रणेता महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के प्राकट्य का उत्सव है। यहाँ महाप्रभु के जन्म और उनके जीवन की पावन कथा दी गई है: || श्री वल्लभाचार्य प्राकट्य कथा || महाप्रभु वल्लभाचार्य का जन्म विक्रम संवत 1535 (सन 1479) में…

स्वारोचिष मन्वंतर की कथा

स्वारोचिष मन्वंतर की कथा मार्कण्डेय पुराण में विस्तार से वर्णित है। यह कथा द्वितीय मनु, स्वारोचिष के जन्म और उनके शासन की है। यहाँ इस कथा का सार दिया गया है: || स्वारोचिष मनु की उत्पत्ति की कथा || कथा की शुरुआत प्रवर नामक एक परम तेजस्वी ब्राह्मण से होती है। वे अपनी तपस्या और…

चैत्र पूर्णिमा व्रत कथा

हिन्दू धर्म में चैत्र पूर्णिमा का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी दिन भक्त शिरोमणि हनुमान जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। चैत्र पूर्णिमा व्रत की कथा मुख्य रूप से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए सुनी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और…

फुलेरा दूज व्रत कथा

फुलेरा दूज का त्योहार विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्री कृष्ण ने राधा जी के साथ फूलों की होली खेली थी, जिससे प्रकृति में नई उमंग और खुशहाली का संचार हुआ था। फुलेरा दूज व्रत कथा के अनुसार,…

श्री रामकृष्ण अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्

|| श्री रामकृष्ण अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् || श्रीरामचन्द्रश्रीकृष्ण सूर्यचन्द्रकुलोद्भवौ । कौसल्यादेवकीपुत्रौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ १ ॥ दिव्यरूपौ दशरथवसुदेवात्मसम्भवौ । जानकीरुक्मिणीकान्तौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ २ ॥ आयोध्याद्वारकाधीशौ श्रीमद्राघवयादवौ । श्रीकाकुत्स्थेन्द्रराजेन्द्रौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ ३ ॥ शान्तासुभद्रासोदर्यौ सौमित्रीगदपूर्वजौ । त्रेताद्वापरसम्भूतौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ ४ ॥ विलम्बिविश्वावसुजौ सौम्यदक्षायणोद्भवौ । वसन्तवर्षऋतुजौ रामकृष्णौ गतिर्मम ॥ ५ ॥ चैत्रश्रावणसम्भूतौ मेषसिंहाख्यमासजौ । सितासितदलोद्भूतौ…

फाल्गुन अमावस्या की पौराणिक कथा

हिंदू धर्म में फाल्गुन अमावस्या का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवताओं का वास पवित्र नदियों में होता है। कथा के अनुसार, जब समुद्र मंथन से अमृत कलश निकला था, तब देवताओं और असुरों के बीच हुए युद्ध के दौरान अमृत की कुछ बूंदें प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में…

श्री रामकृष्ण सङ्घस्तोत्रम्

|| श्री रामकृष्ण सङ्घस्तोत्रम् || सर्वधर्मस्थापकस्त्वं सर्वधर्मस्वरूपकः । आचार्याणां महाचार्यो रामकृष्णाय ते नमः ॥ १॥ यथाग्नेर्दाहिका शक्ती रामकृष्णे स्थिता हि या । सर्वविद्या स्वरूपां तां शारदां प्रणमाम्यहम् ॥ २॥ परतत्त्वे सदा लीनो रामकृष्ण समाज्ञया । यो धर्मस्थापनपरो वीरेशं तं नमाम्यहम् ॥ ३॥ कालिन्दीफुल्लकमले माधवेन क्रीड़ारतः । ब्रह्मानन्द ! नमस्तुभ्यं सद्गुरो लोकनायक ॥ ४॥ योगानन्दः प्रेमानन्दश्चान्ये…

कृष्ण भीष्म द्वादशी व्रत कथा

माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को ‘भीष्म द्वादशी’ (Bhishma Dwadashi) के रूप में मनाया जाता है। इसे कई स्थानों पर ‘गोविन्द द्वादशी’ भी कहते हैं। यह दिन महाभारत के महानायक पितामह भीष्म के निर्वाण और भगवान श्री कृष्ण की भक्ति के संगम का प्रतीक है। यहाँ भीष्म द्वादशी की पौराणिक कथा विस्तार से…

श्री रामकृष्ण वन्दना स्तोत्रम्

|| श्री रामकृष्ण वन्दना स्तोत्रम् || जगज्जातं त्यक्तं हिमगिरिसुता पादकमले शरीराद्याः प्राणा वलय इव येनार्पणमिताः । त्रिवर्गोयच्छ्रद्धाविमल गुरुभक्त्याहि सुलभो नुमो रामकृष्णं सुरनुतपदं भेदरहितम् ॥ १॥ स्वयं त्यक्तं प्रोक्तं हृदयकरशाखोल्लिखनतः पुरा रामात् कृष्णः समभवदनन्यो न हि परः । इदानीमायान्तं नयनविषयत्वं जनिभृतां प्रविष्टो देहेऽस्मिन्निति कनककामातिगतया ॥ २॥ यदद्वैतं शान्तं सततमघमायाविरहितं चिदानन्दं शुद्धं प्रकृतिसहितं प्रेमवशगम् । त्वमेवाविर्भूतः करणविषये…

कारदाइयन नोम्बू व्रत कथा (Karadaiyan Nombu Katha)

कारदाइयन नोम्बू मुख्य रूप से तमिलनाडु और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों में विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है। यह व्रत मासी महीने के अंत और पंगुनी महीने की शुरुआत के संगम पर मनाया जाता है। इस व्रत का मूल आधार देवी सावित्री की अपने पति सत्यवान के…

युगादि की पौराणिक कथा

युगादि (Ugadi), जिसे संवत्सर पाडवो भी कहा जाता है, हिंदू नववर्ष का प्रतीक है। यह पर्व मुख्य रूप से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मनाया जाता है। “युगादि” शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है: युग (काल/समय) और आदि (शुरुआत)। यहाँ युगादि की पौराणिक कथा और इसका आध्यात्मिक महत्व विस्तार से दिया गया…

मीन संक्रान्ति (खरमास) की पौराणिक कथा

हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों के अनुसार, मीन संक्रान्ति वह पावन समय है जब सूर्य देव कुंभ राशि का त्याग कर अपने गुरु बृहस्पति की राशि ‘मीन’ में प्रवेश करते हैं। इसे ‘मलमास’ या ‘खरमास’ के प्रारंभ का प्रतीक भी माना जाता है। मीन संक्रान्ति की कथा मुख्य रूप से सूर्य देव के घोड़ों और उनकी…

गुड़ी पड़वा की पौराणिक कथा

गुड़ी पड़वा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि विजय, सृजन और नई शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाने वाला यह पर्व कई गहरी कथाओं और मान्यताओं को अपने भीतर समेटे हुए है। || गुड़ी पड़वा की पौराणिक कथा || ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना सबसे…

भगवान झूलेलाल अवतार कथा

भगवान झूलेलाल को वरुण देव (जल के देवता) का अवतार माना जाता है। सिंधी समाज उन्हें अपने इष्ट देव के रूप में पूजता है और उनकी जयंती को ‘चेटी चंड’ के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाता है। यहाँ भगवान झूलेलाल के अवतरण की विस्तृत कथा दी गई है: || भगवान झूलेलाल अवतार कथा…

वासुदेव चतुर्थी व्रत कथा

हिंदू धर्म में वासुदेव चतुर्थी का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान श्री कृष्ण (वासुदेव) को समर्पित है और मुख्य रूप से भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। कई स्थानों पर इसे ‘बहुला चतुर्थी’ या ‘संकष्टी चतुर्थी’ के रूप में भी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। || वासुदेव चतुर्थी व्रत कथा…

महातारा (तारा देवी) प्राकट्य कथा

महातारा जयन्ती (तारा देवी जयंती) चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। माँ तारा दस महाविद्याओं में दूसरी महाविद्या मानी जाती हैं। उनकी कथा मुख्य रूप से समुद्र मंथन और उनके ममतामयी स्वरूप से जुड़ी है। यहाँ माँ तारा की प्राकट्य कथा विस्तार से दी गई है: || महातारा (तारा…

यमुना छठ (यमुना जयंती) व्रत कथा

यमुना छठ, जिसे यमुना जयंती के रूप में भी जाना जाता है, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन देवी यमुना के पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक है। यहाँ यमुना छठ की पौराणिक कथा विस्तार से दी गई है: || यमुना छठ (यमुना जयंती) व्रत कथा || पौराणिक…

अशोक अष्टमी व्रत कथा

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को अशोक अष्टमी मनाई जाती है। यह पर्व विशेष रूप से पुनर्वसु नक्षत्र के संयोग में बहुत फलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और अशोक वृक्ष की पूजा का विधान है। यहाँ अशोक अष्टमी व्रत की पौराणिक कथा और महत्व दिया गया है: ||…

स्वामीनारायण जयंती प्राकट्य कथा

भगवान स्वामीनारायण का प्राकट्य चैत्र शुक्ल नवमी (राम नवमी) के दिन हुआ था। यह पावन अवसर स्वामीनारायण जयंती के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यहाँ स्वामीनारायण भगवान के प्राकट्य की पावन कथा दी गई है: || स्वामीनारायण जयंती प्राकट्य कथा || अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, जब समाज में अधर्म, अंधविश्वास…

वसन्त पूर्णिमा कथा

वसन्त पूर्णिमा (जिसे हम मुख्य रूप से होली या होलिका दहन के रूप में जानते हैं) हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक त्योहार है। इसकी सबसे प्रचलित कथा भक्त प्रह्लाद और भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार से जुड़ी है। यहाँ वसन्त पूर्णिमा की मुख्य कथा विस्तार से दी गई है: || वसन्त पूर्णिमा कथा…

भीष्म द्वादशी व्रत कथा

माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को भीष्म द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। इसे ‘तिल द्वादशी’ भी कहते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत के पितामह भीष्म ने इसी समय के आसपास अपने प्राण त्यागे थे, जिसके बाद भगवान कृष्ण ने उन्हें विशेष वरदान दिया था। यहाँ भीष्म द्वादशी की पौराणिक कथा विस्तार…

इष्टि पौराणिक कथा

इष्टि (Ishti) का शाब्दिक अर्थ है “इच्छा” या “यज्ञ”। हिंदू धर्म और कर्मकांड में ‘इष्टि’ उस छोटे यज्ञ को कहा जाता है जो किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए किया जाता है। पौराणिक संदर्भों में इष्टि कथा का संबंध मुख्य रूप से राजा मनु और उनके द्वारा किए गए पुत्रकामेष्टि यज्ञ से जुड़ा है,…

फुलेरा दूज की पौराणिक कथा

फुलेरा दूज का त्योहार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम का प्रतीक है और इसे अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है। यहाँ फुलेरा दूज की पौराणिक कथा दी गई है: || फुलेरा दूज की पौराणिक कथा || कहा जाता है कि…

कुंभ संक्रांति कथा एवं पूजा विधि

हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस अवसर को कुंभ संक्रांति कहा जाता है। यह सौर मास के फाल्गुन माह की शुरुआत का प्रतीक है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी दिन से पवित्र संगम और नदियों में…

यशोदा जयंती व्रत कथा

यहाँ यशोदा जयंती की पूर्ण व्रत कथा दी गई है। यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। माता यशोदा भगवान कृष्ण की वात्सल्यमयी मां के रूप में पूजनीय हैं। || यशोदा जयंती व्रत कथा (Yashoda Jayanti Vrat Katha PDF) || पौराणिक मान्यताओं और श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, यशोदा…

भगवान नृसिंह द्वादशी व्रत कथा

भगवान नृसिंह, श्री हरि विष्णु के चौथे और सबसे उग्र अवतार माने जाते हैं। नृसिंह द्वादशी का व्रत भक्तों की रक्षा और संकटों के नाश के लिए किया जाता है। यहाँ प्रस्तुत है इस व्रत की पूर्ण और पारंपरिक कथा। || भगवान नृसिंह द्वादशी व्रत कथा (Narsimha Dwadashi Vrat Katha PDF) || प्राचीन काल में…

क्या आप जानते हैं नृसिंह द्वादशी का असली मतलब? 99% लोग हैं इससे अनजान!

narsingh-dwadashi-secret

यह सच है कि हम अक्सर त्योहारों की ऊपरी चमक-दमक में उनके पीछे छिपे गहरे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक अर्थों को भूल जाते हैं। नृसिंह द्वादशी (जिसे कई क्षेत्रों में नृसिंह जयंती के रूप में भी मनाया जाता है) सिर्फ एक पौराणिक कथा मात्र नहीं है, बल्कि यह मानव चेतना और बुराई के अंत का एक…

नृसिंह द्वादशी विशेष – क्यों हिरण्यकश्यप को मारने के लिए भगवान को लेना पड़ा इतना भयानक रूप?

narsimha-dwadashi-hiranyakashyap-vadh

हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान विष्णु के दशावतारों की कथाएं केवल पौराणिक कहानियां नहीं हैं, बल्कि वे अधर्म पर धर्म की विजय और ब्रह्मांडीय संतुलन के गहरे दर्शन को समेटे हुए हैं। इन्हीं में से एक सबसे शक्तिशाली और रोंगटे खड़े कर देने वाला अवतार है – भगवान नृसिंह। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी…

Somwar Aarti

Finding a Somwar Aarti PDF is a priority for many devotees who wish to perform their Monday rituals with precision and devotion. Dedicated to Lord Shiva, the Monday prayers (Somwar Vrat) are believed to bring peace, prosperity, and the removal of obstacles. Having a digital copy on your phone or tablet ensures you have the…

श्री सूर्य अष्टकम

भगवान सूर्य की महिमा का गुणगान करने वाला श्री सूर्य अष्टकम एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। इसकी रचना आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा की गई थी। मान्यता है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन श्रद्धाभाव से इसका पाठ करता है, उसके जीवन से अंधकार, रोग और दरिद्रता का नाश होता है। इस अष्टकम के आठ श्लोकों में…

सूर्य सूक्तम्

ऋग्वेद का सूर्य सूक्तम् भगवान सूर्य की स्तुति में समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली और तेजस्वी सूक्त है। इसमें सूर्य देव को चराचर जगत की आत्मा और समस्त ऊर्जा का स्रोत माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस सूक्त का नियमित पाठ करने से शारीरिक रोगों का नाश होता है, नेत्र ज्योति बढ़ती है और…

श्री सूर्य सहस्रनाम स्तोत्रम्

श्री सूर्य सहस्रनाम स्तोत्रम् भगवान सूर्य देव को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र पाठ है। इसमें सूर्य देव के 1000 दिव्य नामों का वर्णन किया गया है। मान्यता है कि इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति को शारीरिक आरोग्य, मानसिक शांति और तेज प्राप्त होता है। यह स्तोत्र न केवल आध्यात्मिक उन्नति में सहायक…

Shri Brihaspati Dev Aarti

The Brihaspati Dev Aarti is a sacred devotional hymn dedicated to Lord Brihaspati, the deity representing the planet Jupiter and the guru of the gods. Devotees traditionally chant this Aarti on Thursdays (Guruvar) to seek wisdom, prosperity, and spiritual growth. Reciting these verses is believed to mitigate the ill effects of a weak Jupiter in…

Shri Brihaspati Dev Chalisa

The Shri Brihaspati Dev Chalisa is a powerful 40-verse hymn dedicated to Lord Brihaspati, the preceptor of the Gods and the ruler of the planet Jupiter. Reciting this Chalisa, especially on Thursdays, is believed to invoke divine wisdom, prosperity, and mental clarity. It helps mitigate the malefic effects of a weak Jupiter in one’s horoscope,…

त्रिस्पृशा एकादशी महायोग कथा (पूजा विधि)

त्रिस्पृशा एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी मानी जाती है। जब एक ही तिथि में एकादशी, द्वादशी और सूर्योदय के समय त्रयोदशी का संगम होता है, तो उसे ‘त्रिस्पृशा’ कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस महायोग में व्रत करने से एक हजार अश्वमेध यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है। इस पावन…

श्री बुध कवचम्

श्री बुध कवचम् भगवान बुद्ध (बुध ग्रह) को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और कल्याणकारी स्तोत्र है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध देव को बुद्धि, संचार, व्यापार और तर्कशक्ति का कारक माना जाता है। यदि आपकी कुंडली में बुध कमजोर है या आप पढ़ाई और कार्यक्षेत्र में एकाग्रता की कमी महसूस करते हैं, तो इस कवच…

बुध कवच स्तोत्र

बुध कवच स्तोत्र (Budh Kavach PDF) भगवान बुध (Mercury) की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत शक्तिशाली और सिद्ध माध्यम है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि आपकी कुंडली में बुध कमजोर है या अशुभ फल दे रहा है, तो इस कवच का नियमित पाठ करना लाभकारी माना जाता है। यह स्तोत्र न केवल बौद्धिक क्षमता…

श्री बुध स्तोत्रम्

बुध ग्रह की शांति और बुद्धि की तीक्ष्णता के लिए श्री बुध स्तोत्रम् का पाठ (Budh Stotram PDF) अत्यंत फलदायी माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि कुंडली में बुध कमजोर स्थिति में हो, तो व्यक्ति को निर्णय लेने में कठिनाई, वाणी दोष या त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस…

सिर्फ 1 बुध प्रदोष व्रत से बदलेगी किस्मत! रोग, शोक, और दरिद्रता दूर करने का महासंयोग।

buddh-pradosh-vrat

सनातन धर्म में व्रतों का विशेष महत्व है, और इन्हीं में से एक है ‘प्रदोष व्रत’ (Pradosh Vrat)। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है और हर माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जब यह त्रयोदशी तिथि बुधवार के दिन पड़ती है, तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहते हैं। यह मात्र एक व्रत…

नौकरी नहीं मिल रही? बुधवार व्रत और बुध देव के इन गुप्त उपायों से खुलेगा सफलता का द्वार।

budhwar-vrat-budh

क्या आप अपनी नौकरी या व्यापार में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं? क्या आप एक नई नौकरी की तलाश में हैं? यदि हां, तो बुधवार का व्रत आपके लिए एक शक्तिशाली समाधान हो सकता है। यह व्रत न केवल आपको भगवान गणेश और बुध ग्रह का आशीर्वाद दिलाता है, बल्कि यह आपके करियर में…

माघ पूर्णिमा – कल्पवास की पूर्णाहुति और पुण्य प्राप्ति का महासंयोग, जानें क्यों उमड़ती है संगम पर भीड़।

magh-purnima-spiritual-benefits

कल्पना कीजिए… कड़ाके की ठंड, भोर का धुंधलका, और गंगा-यमुना-सरस्वती के पवित्र संगम तट पर गूँजते ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष। यह केवल एक धार्मिक दृश्य नहीं है, बल्कि करोड़ों भारतीयों की अटूट आस्था का जीवंत महाकुंभ है। माघ पूर्णिमा – जिसे माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है हिन्दू कैलेंडर के सबसे पवित्र दिनों में से…

माघ पूर्णिमा 2026 – क्या करें और क्या न करें? जानें व्रत के वे नियम जो आपको दिलाएंगे भगवान विष्णु का आशीर्वाद।

magh-purnima-vrat-rules

हिन्दू धर्म में माघ का महीना अत्यंत पवित्र माना जाता है और इस महीने की अंतिम तिथि यानी माघ पूर्णिमा का महत्व सबसे अधिक है। इसे ‘माघी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवतागण स्वयं पृथ्वी पर आते हैं और प्रयागराज में संगम तट पर स्नान करते हैं। यह दिन केवल…

Join WhatsApp Channel Download App