मकर संक्रांति का पर्व भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे ‘उत्तरायण’ की शुरुआत माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान और सूर्य अर्घ्य का विशेष महत्व है, लेकिन अक्सर अनजाने में हम कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिससे इस पावन पर्व का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता। यहाँ विस्तार से बताया गया है कि मकर संक्रांति पर आपको किन 5 बड़ी गलतियों से बचना चाहिए।
मकर संक्रांति – स्नान और दान का महासंगम
मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से न केवल शरीर की शुद्धि होती है, बल्कि पिछले जन्मों के पापों का भी शमन होता है। इस दिन किया गया दान सौ गुना फलदायी माना जाता है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, इस दिन की मर्यादा और नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां
बिना स्नान किए भोजन ग्रहण करना
मकर संक्रांति के दिन बिना स्नान किए भोजन करना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। इस दिन का पुण्य काल सूर्योदय के साथ ही शुरू हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बिना पवित्र स्नान (यदि नदी संभव न हो तो घर में ही गंगाजल डालकर स्नान करें) के अन्न ग्रहण करने से दरिद्रता का वास होता है।
तामसिक भोजन का सेवन
इस पावन अवसर पर घर में लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। मकर संक्रांति सात्विकता का प्रतीक है। इस दिन खिचड़ी और तिल-गुड़ का सेवन करना चाहिए। तामसिक भोजन आपके आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रवाह को रोकता है।
सूर्य अर्घ्य में देरी और गलत पात्र का प्रयोग
सूर्य देव को अर्घ्य देना इस दिन की मुख्य रस्म है। अक्सर लोग दोपहर में अर्घ्य देते हैं, जो कि गलत है।
- सही समय – सूर्योदय के पहले घंटे के भीतर।
- पात्र – हमेशा तांबे के लोटे का प्रयोग करें। स्टील या प्लास्टिक के बर्तनों का प्रयोग वर्जित है।
- सावधानी – अर्घ्य देते समय जल की धारा में सूर्य की किरणों को देखें और ध्यान रहे कि पैर के नीचे जल न आए (किसी गमले या पात्र में जल गिराएं)।
घर आए याचक का अपमान
मकर संक्रांति दान का पर्व है। यदि इस दिन कोई भिक्षु, गरीब या जरूरतमंद आपके द्वार पर आए, तो उसे खाली हाथ न लौटाएं। अपनी क्षमता अनुसार तिल, गुड़, अनाज या ऊनी वस्त्रों का दान करें। किसी का तिरस्कार करने से इस दिन के शुभ योग का प्रभाव नकारात्मक हो सकता है।
कटु वचन और विवाद
शास्त्रों में कहा गया है कि संक्रांति के दिन वाणी पर संयम रखना चाहिए। किसी को अपशब्द बोलना, घर में क्लेश करना या बड़ों का अनादर करना आपके पुण्य कर्मों को नष्ट कर देता है। इस दिन “तिल-गुड़ घ्या और गोड़-गोड़ बोला” (तिल-गुड़ लें और मीठा बोलें) की परंपरा का पालन करें।
वैज्ञानिक महत्व
मकर संक्रांति से दिन बड़े होने लगते हैं और कड़ाके की ठंड में कमी आती है। तिल और गुड़ का सेवन शरीर को भीतर से गर्माहट देता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है। वहीं, सूर्य को जल चढ़ाना विटामिन-D और आंखों की रोशनी के लिए भी लाभकारी माना जाता है।
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