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क्या है मकरज्योति और मकरविलक्कु के बीच का अंतर? जानिए भगवान अयप्पा के इस चमत्कार का सच।

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केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर लाखों भक्तों का सैलाब उमड़ता है। इस दिन का सबसे बड़ा आकर्षण होता है – मकरविलक्कु का दर्शन। अक्सर लोग ‘मकरज्योति’ और ‘मकरविलक्कु’ को एक ही मान लेते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं और वास्तविकता के धरातल पर इन दोनों में एक बड़ा अंतर है। आइए, भगवान अयप्पा के इस दिव्य चमत्कार के पीछे के सच और इन दोनों शब्दों के सही अर्थ को विस्तार से समझते हैं।

मकरज्योति (Makarajyothi) – एक खगोलीय घटना

मकरज्योति पूरी तरह से एक खगोलीय (Astronomical) और दिव्य घटना है।

  • क्या है यह – मकर संक्रांति के दिन जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, तब आकाश में एक विशेष तारा चमकता है। इसी तारे को ‘मकरज्योति’ कहा जाता है।
  • धार्मिक महत्व – भक्तों का विश्वास है कि इस समय भगवान अयप्पा स्वयं नक्षत्र के रूप में अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। यह पूर्णतः प्राकृतिक और ईश्वरीय मानी जाती है।

मकरविलक्कु (Makaravilakku) – एक अनुष्ठानिक परंपरा

जिसे भक्त पहाड़ियों के बीच ‘तीन बार चमकती रोशनी’ के रूप में देखते हैं, वह वास्तव में मकरविलक्कु है।

  • कहाँ दिखता है – यह रोशनी सबरीमाला मंदिर से दूर पोन्नम्बलमेडु (Ponnambalamedu) नाम की पहाड़ी पर दिखाई देती है।
  • सच्चाई क्या है – मकरविलक्कु कोई प्राकृतिक चमत्कार नहीं, बल्कि एक सदियों पुरानी परंपरा है। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) ने भी यह स्पष्ट किया है कि यह रोशनी इंसानों द्वारा जलाई जाती है।
  • प्रक्रिया – पुराने समय में मलयरायण जनजाति के लोग इस पहाड़ी पर कपूर जलाकर आरती करते थे। अब यह कार्य मंदिर प्रशासन और पुलिस की निगरानी में किया जाता है। एक बड़े बर्तन में भारी मात्रा में कपूर जलाया जाता है, जिसे तीन बार ढककर और खोलकर दिखाया जाता है, जिससे वह तीन बार चमकती हुई दिखाई देती है।

इस परंपरा का आध्यात्मिक महत्व

भले ही मकरविलक्कु मानवीय रूप से जलाया जाता है, लेकिन भक्तों के लिए इसकी श्रद्धा कम नहीं होती। इसके पीछे की भावना यह है कि जब भगवान अयप्पा के आभूषण (थिरुवभरणम) मंदिर पहुँचते हैं और भगवान का भव्य श्रृंगार होता है, तब प्रकृति (तारे के रूप में) और मनुष्य (दीप के रूप में) दोनों मिलकर भगवान की वंदना करते हैं।

महत्वपूर्ण जानकारी – मकर संक्रांति के दिन जब ‘मकरविलक्कु’ की रोशनी तीन बार चमकती है, तब पूरा सबरीमाला ‘स्वामी ये शरणम अयप्पा’ के जयघोष से गूंज उठता है। भक्तों का मानना है कि इस दिव्य रोशनी के दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।

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