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दान की महिमा – मकर संक्रान्ति पर तिल और कंबल दान करने का क्या है पौराणिक महत्व?

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सनातन धर्म में मकर संक्रांति का पर्व न केवल ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना और पुण्य संचय का भी महापर्व है। जब सूर्य देव धनु राशि का त्याग कर अपने पुत्र शनि की राशि ‘मकर’ में प्रवेश करते हैं, तो इसे ‘उत्तरायण’ की शुरुआत माना जाता है।

इस दिन स्नान और ध्यान का जितना महत्व है, उससे कहीं अधिक महत्व दान का है। विशेष रूप से मकर संक्रांति पर तिल और कंबल के दान को ‘अक्षय पुण्य’ देने वाला माना गया है। आइए जानते हैं इसके पीछे के पौराणिक और वैज्ञानिक कारणों को।

तिल दान का पौराणिक आधार – शनि और सूर्य का मिलन

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य देव और उनके पुत्र शनि देव के बीच संबंध मधुर नहीं थे। एक बार सूर्य देव ने शनि देव के घर ‘कुंभ’ को जला दिया था। जब सूर्य देव स्वयं शनि के दूसरे घर ‘मकर’ में पहुंचे, तो शनि देव ने उनका स्वागत काले तिल से किया था।

  • पुत्र-पिता का मिलन – शनि देव द्वारा तिल से पूजन करने पर सूर्य देव अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति मकर संक्रांति पर मुझे और शनि देव को तिल अर्पित करेगा या तिल का दान करेगा, उसके जीवन के सभी कष्ट मिट जाएंगे।
  • ग्रह दोषों से मुक्ति- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तिल का संबंध शनि से है और मकर संक्रांति पर सूर्य की पूजा होती है। तिल का दान करने से कुंडली में सूर्य और शनि, दोनों के प्रतिकूल प्रभाव शांत होते हैं।

कंबल दान – सुख समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक

मकर संक्रांति कड़ाके की ठंड के समय आती है। इस दिन कंबल दान करने का न केवल धार्मिक बल्कि मानवीय महत्व भी है।

  • राहु-केतु के प्रभाव में कमी – शास्त्रों के अनुसार, ऊनी वस्त्र या काले कंबल का दान करने से राहु और केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
  • नर सेवा ही नारायण सेवा – किसी जरूरतमंद को ठंड से बचाने के लिए दिया गया कंबल सीधे ईश्वर को अर्पित किया हुआ माना जाता है। इससे व्यक्ति के संचित पापों का नाश होता है और घर में सुख-शांति आती है।

मकर संक्रांति पर दान की अन्य प्रमुख वस्तुएं

तिल और कंबल के अलावा, इस दिन कुछ विशेष वस्तुओं का दान भी अत्यंत फलदायी माना गया है:

दान की वस्तु महत्व

  • गुड़ – सूर्य देव की कृपा और मान-सम्मान में वृद्धि के लिए।
  • खिचड़ी – चावल (चंद्रमा), दाल (शनि/बुध) और हल्दी (गुरु) का मिश्रण सौभाग्य लाता है।
  • घी – शारीरिक शुद्धि और ओज की प्राप्ति के लिए।
  • गाय को चारा – पितृ दोष से मुक्ति और पुण्य प्राप्ति के लिए।

वैज्ञानिक और स्वास्थ्य दृष्टिकोण

मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ के सेवन और दान के पीछे वैज्ञानिक तर्क भी छिपा है।

  • शरीर की ऊष्मा – जनवरी की ठंड में तिल और गुड़ शरीर को प्राकृतिक गर्माहट प्रदान करते हैं।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता – तिल में तेल और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होता है, जो सर्दियों में हड्डियों और त्वचा के लिए लाभकारी है। दान की परंपरा इसलिए बनाई गई ताकि समाज का हर वर्ग, चाहे वह गरीब ही क्यों न हो, इन पौष्टिक चीजों का लाभ उठा सके।

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