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ब्रह्मा जी आरती

|| आरती ||

पि तु मा तु सहा यक स्वा मी सखा ,
तुम ही एक ना थ हमा रे हो ।

जि नके कुछ और आधा र नहीं ,
ति नके तुम ही रखवा रे हो ।

सब भॉ ति सदा सुखदा यक हो ,
दुख नि र्गुण ना शन हरे हो ।

प्रति पा ल करे सा रे जग को ,
अति शय करुणा उर धा रे हो ।

भूल गये हैं हम तो तुमको ,
तुम तो हमरी सुधि नहिं बि सा रे हो ।

उपका रन को कछु अंत नहीं ,
छि न्न ही छि न्न जो वि स्ता रे हो ।

महा रा ज महा महि मा तुम्हा री ,
मुझसे वि रले बुधवा रे हो ।

शुभ शां ति नि केतन प्रेम नि धि ,
मन मंदि र के उजि या रे हो ।

इस जी वन के तुम ही जी वन हो ,
इन प्रा णण के तुम प्या रे हो में ।

तुम सों प्रभु पये “कमल” हरि ,
केहि के अब और सहा रे हो ।

॥ इति श्री ब्रह्मा आरती ॥

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