Sita Mata

जानकी जयंती की पौराणिक कथा

Janaki Jayanti Katha Hindi

Sita MataVrat Katha (व्रत कथा संग्रह)हिन्दी
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जानकी जयंती, जिसे सीता अष्टमी के रूप में भी जाना जाता है, माता सीता के प्राकट्य (जन्म) का पावन दिन है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सीता का जन्म किसी गर्भ से नहीं, बल्कि धरती की कोख से हुआ था। यहाँ जानकी जयंती की संपूर्ण पौराणिक कथा दी गई है:

|| जानकी जयंती की पौराणिक कथा ||

त्रेतायुग की बात है, मिथिला देश में कई वर्षों से वर्षा नहीं हुई थी। चारों ओर त्राहि-त्राहि मची थी और भीषण अकाल पड़ा था। राजा जनक, जो एक परम ज्ञानी और धर्मात्मा राजा थे, इस स्थिति से अत्यंत चिंतित थे।

राजा जनक ने ऋषियों और विद्वानों से इसका समाधान पूछा। ऋषियों ने परामर्श दिया कि यदि राजा स्वयं खेत में हल चलाएं, तो इंद्रदेव प्रसन्न होंगे और वर्षा अवश्य होगी। प्रजा के कल्याण के लिए राजा जनक ने स्वयं हल चलाने का निर्णय लिया।

शुभ मुहूर्त देखकर राजा जनक ने स्वर्ण का हल हाथ में लिया और खेत जोतना प्रारंभ किया। हल चलाते समय अचानक हल का फल (जिसे ‘सीत’ कहा जाता है) जमीन के भीतर किसी धातु की वस्तु से टकराया। जब उस स्थान को खोदा गया, तो वहां से एक सुंदर कलश निकला।

जैसे ही उस कलश को खोला गया, उसमें एक अत्यंत सुंदर और तेजस्वी कन्या खेल रही थी। संतानहीन राजा जनक उस बालिका को देखकर प्रेम और वात्सल्य से भर गए। उन्होंने उसे अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार कर लिया।

नामकरण, हल के अग्रभाग ‘सीत’ से टकराने के कारण प्रकट होने वाली इस कन्या का नाम ‘सीता’ रखा गया। चूँकि वे राजा जनक की पुत्री बनीं, इसलिए उन्हें ‘जानकी’ और मिथिला की राजकुमारी होने के कारण ‘मैथिली’ भी कहा जाता है।

जैसे ही माता सीता का प्राकट्य हुआ, मिथिला के आकाश में काले बादल छा गए और मूसलाधार वर्षा होने लगी। धरती की प्यास बुझी और अकाल समाप्त हो गया। पूरी प्रकृति माता सीता के आगमन का उत्सव मनाने लगी।

|| जानकी जयंती का आध्यात्मिक महत्व ||

माता सीता को साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार माना जाता है। वे त्याग, प्रेम, धैर्य और पतिव्रत धर्म की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं। जानकी जयंती के दिन जो भी व्यक्ति विधि-विधान से माता सीता और भगवान राम की पूजा करता है, उसे निम्नलिखित फल प्राप्त होते हैं:

  • सुखी वैवाहिक जीवन – विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
  • धैर्य और शक्ति – साधक में कठिन परिस्थितियों से लड़ने का मानसिक बल आता है।
  • समृद्धि – चूंकि वे लक्ष्मी स्वरूपा हैं, इसलिए घर में सुख-शांति और धन-धान्य की कमी नहीं रहती।

|| पूजा के लिए विशेष मंत्र ||

इस दिन पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है: “श्री जानकी रामाभ्यां नमः”

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