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श्री नर्मदा व्रत कथा एवं पूजन विधि

Shri Narmada Vrat Katha and Pujan Vidhi Hindi

MiscVrat Katha (व्रत कथा संग्रह)हिन्दी
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माँ नर्मदा को मोक्षदायिनी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, श्री नर्मदा व्रत कथा का श्रवण और पठन करने से भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। यह व्रत विशेष रूप से नर्मदा जयंती के दिन रखा जाता है। माँ नर्मदा की कृपा से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

इस कथा में माँ नर्मदा के अवतरण और उनकी दिव्य महिमा का सुंदर वर्णन किया गया है। यदि आप इस पावन कथा को पढ़ना चाहते हैं, तो Narmada Vrat Katha PDF हमारी वेबसाइट से डाउनलोड करें और माँ नर्मदा की भक्ति का लाभ उठाएं।

|| श्री नर्मदा व्रत कथा (Narmada Vrat Katha PDF) ||

बहुत समय पहले, नर्मदापुरम नगर में एक निर्धन शर्मा परिवार रहता था। शर्मा जी गलत संगत में पड़कर गलत रास्ते पर चल रहे थे, जबकि उनकी पत्नी ईश्वर में आस्था रखने वाली और नियमित रूप से नर्मदा स्नान करने वाली थीं।

एक दिन, श्रीमती शर्मा ने पड़ोस की श्रीमती अग्रवाल से नर्मदा व्रत के बारे में सुना। श्रीमती अग्रवाल ने उन्हें बताया कि यह व्रत किसी भी माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी से शुरू किया जाता है और सात सप्तमी तक चलता है। हर महीने की दोनों सप्तमी में नर्मदा जी की पूजा की जाती है, और सात सप्तमी के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की सप्तमी को इसका उद्यापन किया जाता है। उद्यापन के समय नर्मदा भक्तों या सात कन्याओं को भोजन कराया जाता है और नर्मदा व्रत कथा की एक-एक प्रति भेंट में दी जाती है।

श्रीमती शर्मा ने शुक्ल पक्ष की सप्तमी से सात सप्तमी तक व्रत किया और नर्मदा मैया से अपने पति को सही रास्ते पर लाने की प्रार्थना की। कुछ दिनों में शर्मा जी को एक कंपनी में काम मिल गया, और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा।

एक दिन, श्रीमती शर्मा की मुलाकात उनकी बचपन की सहेली रमा चौहान से हुई। रमा ने बताया कि शादी के पांच साल बाद भी वह संतान सुख से वंचित है। श्रीमती शर्मा ने उन्हें नर्मदा मैया का सात सप्तमी वाला व्रत करने की सलाह दी। रमा ने व्रत किया और उसे संतान की प्राप्ति हुई।

एक बार, रमा की मौसी की लड़की पद्मा अपने पति के साथ उनसे मिलने आई। पद्मा ने व्रत के बारे में जानने की जिज्ञासा प्रकट की। रमा ने उन्हें बताया कि नर्मदा मैया सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली देवी हैं, और उनका व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। पद्मा ने भी नर्मदा का व्रत किया, और उसकी पुत्री का अच्छे परिवार में विवाह हुआ।

इसी तरह, जो भी नर्मदा भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ श्री नर्मदा स्नान एवं व्रत करेंगे, उन्हें नर्मदा मैया की असीम कृपा प्राप्त होगी।

|| नर्मदा जयंती की पूजा विधि ||

  • नर्मदा जयंती के दिन सूर्योदय से पहले उठकर नर्मदा नदी में स्नान करना चाहिए।
  • इसके बाद, नर्मदा नदी के तट पर फूल, धूप, अक्षत, कुमकुम आदि से नर्मदा मां की पूजा करनी चाहिए।
  • इस दिन नर्मदा नदी में दीप जलाकर दीपदान करना भी शुभ माना जाता है।

|| नर्मदा नदी का महत्व ||

हिंदू धर्म में नदियों को पवित्र माना जाता है, और नर्मदा नदी का विशेष महत्व है। नर्मदा जयंती के दिन नर्मदा नदी में स्नान करना और पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नर्मदा नदी में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव के द्वारा मां नर्मदा का अवतरण हुआ था। नर्मदा नदी की महिमा का वर्णन चारों वेदों, रामायण और महाभारत में भी मिलता है। इस नदी के तट पर नर्मदेश्वर शिवलिंग विराजमान हैं, जो हिंदू आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी नदी के तट पर साधना करते हुए देवताओं और ऋषि-मुनियों ने सिद्धियां प्राप्त की थी।

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