Shri Krishna

श्री दामोदर स्तोत्रम्

Sri Damodara Stotram Sanskrit Lyrics

Shri KrishnaStotram (स्तोत्र संग्रह)संस्कृत
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श्री दामोदर स्तोत्रम् भगवान श्रीकृष्ण के दामोदर स्वरूप की भक्ति और स्तुति का एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। यह स्तोत्र यशोदा माता द्वारा भगवान को ऊखल से बांधने की लीला का स्मरण कराता है, जो प्रेम और भक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक है। इस स्तोत्र का नित्य पाठ भक्तों को पापों से मुक्ति दिलाता है और श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। जो साधक “श्री दामोदर स्तोत्रम् PDF” के माध्यम से इसका नियमित पाठ करते हैं, उन्हें मानसिक शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव होता है। यह स्तोत्र कार्तिक मास में विशेष रूप से पूजनीय है।

|| श्री दामोदर स्तोत्रम् (Damodara Stotram PDF) ||

सिन्धुदेशोद्भवो विप्रो नाम्ना सत्यव्रतस्सुधीः ।
विरक्त इन्द्रियार्थेभ्यस्त्यक्त्वा पुत्रगृहादिकम् ॥ १ ॥

बृन्दावने स्थितः कृष्णमारराध दिवानिशम् ।
निस्स्वस्सत्यव्रतो विप्रो निर्जनेऽव्यग्रमानसः ॥ २ ॥

कार्तिके पूजयामास प्रीत्या दामोदरं नृप ।
तृतीयेऽह्नि सकृद्भुङ्क्ते पत्रं मूलं फलं तथा ॥ ३ ॥

पूजयित्वा हरिं स्तौति प्रीत्या दामोदराभिधम् ॥ ४ ॥

सत्यव्रत उवाच –

नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपं
लसत्कुण्डलं गोकुले भ्राजमानम् ।
यशोदाभियोलूखले धावमानं
परामृष्टमत्यन्ततो दूतगोप्या ॥ ५ ॥

रुदन्तं मुहुर्नेत्रयुग्मं मृजन्तं
कराम्भोजयुग्मेन सातङ्कनेत्रम् ।
मुहुश्श्वासकं पत्रिरेखाङ्क कण्ठं
स्थितं नौमि दामोदरं भक्तवन्द्यम् ॥ ६ ॥

वरं देव देहीश मोक्षावधिं वा
न चान्यं वृणेऽहं वरेशादपीह ।
इदं ते वपुर्नाथ गोपालबालं
सदा मे मनस्याविरास्तां किमन्यैः ॥ ७ ॥

इदं ते मुखाम्भोजमत्यन्तनीलै-
र्वृतं कुन्तलैस्स्निग्धवक्त्रैश्च गोप्या ।
मुहुश्चुम्बितं बिम्बरक्ताधरं मे
मनस्याविरास्तामलं लक्षलाभैः ॥ ८ ॥

नमो देव दामोदरानन्त विष्णो
प्रसीद प्रभो दुःखजालाब्धिमग्नम् ।
कृपादृष्टिवृष्ट्याऽतिदीनं च रक्ष
गृहाणेश मामज्ञमेवाक्षिदृश्यम् ॥ ९ ॥

कुबेरात्मजौ वृक्षमूर्ती च यद्य-
त्त्वया मोचितौ भक्तिभाजौ कृतौ च ।
तथा प्रेमभक्तिं स्वकां मे प्रयच्छ
न मोक्षेऽऽग्रहो मेऽस्ति दामोदरेह ॥ १० ॥

नमस्ते सुधाम्ने स्फुरद्दीप्तधाम्ने
तथान्तःस्थविश्वस्यधाम्ने नमस्ते ।
नमो राधिकायै त्वदीयप्रियायै
नमोऽनन्तलीलाय देवाय तुभ्यम् ॥ ११ ॥

नारद उवाच –

सत्यव्रतद्विजस्तोत्रम् श्रुत्वा दामोदरो हरिः ।
विद्युल्लीलाचमत्कारो हृदये शनकैरभूत् ॥ १२ ॥

इति श्रीमहापुराणे सत्यव्रतकृत दामोदरस्तोत्रम् ।

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